
नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने ही राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर बड़ा बयान दिया है। पार्टी ने उन्हें उपनेता पद से हटाने के फैसले को सामान्य कार्रवाई बताते हुए उनके रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राघव चड्ढा लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ जा रहे थे और जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए थे, जो किसी भी जिम्मेदार नेता के लिए ठीक नहीं है।
पार्टी लाइन के खिलाफ जाने पर कार्रवाई जरूरी – भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ कहा कि किसी भी पार्टी में अनुशासन सबसे जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि संसद में कई बार सभी विपक्षी दलों को एक साथ मिलकर फैसले लेने होते हैं, जैसे वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना। अगर कोई नेता इन फैसलों का पालन नहीं करता और पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि नेता और उपनेता बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
केजरीवाल ने सिखाया निडर होकर लड़ना – संजय सिंह
“आप” के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने अरविंद केजरीवाल से निडरता और साहस के साथ लड़ना सीखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर पार्टी का साथ नहीं दिया। जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया, तब उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। जब एलपीजी गैस संकट का मुद्दा उठा, तब भी उन्होंने संसद में कुछ नहीं कहा। संजय सिंह के मुताबिक, एक जनप्रतिनिधि का काम जनता के मुद्दों को उठाना होता है, लेकिन अगर वह चुप रहे, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता के मुद्दों पर चुप रहना सही नहीं – सौरभ भारद्वाज
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजनीति में डर के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेता जनता की आवाज उठाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने लंबे समय से संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार से सीधे सवाल किया गया हो। सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि जब विपक्ष वॉकआउट करता है, तब भी राघव चड्ढा उसमें शामिल नहीं होते। इससे यह संदेश जाता है कि वह पार्टी के सामूहिक फैसलों से अलग चल रहे हैं।
भाजपा से सवाल करने से क्यों डरते हैं? – आतिशी
दिल्ली की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने लोकतंत्र और संविधान को लेकर बड़े मुद्दे हैं, लेकिन इन पर बोलने से बचा जा रहा है। आतिशी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इन मुद्दों पर भी राघव चड्ढा ने कोई ठोस बयान नहीं दिया। उन्होंने एलपीजी गैस की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि आम आदमी को रोजमर्रा की जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इस पर भी संसद में आवाज नहीं उठाई गई।
केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय भी खामोशी पर सवाल
आतिशी ने यह भी कहा कि जब अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। उस समय भी राघव चड्ढा देश में मौजूद नहीं थे और उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी ने उनका बचाव किया, लेकिन अब उनके व्यवहार को देखकर शंका होना स्वाभाविक है।
निडरता ही पहचान, डर कर राजनीति नहीं चलती – अनुराग ढांडा
“आप” के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि पार्टी की पहचान निडरता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता डर जाएगा, तो वह देश के लिए कैसे लड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में मिलने वाले सीमित समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए और बड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि छोटे विषयों पर।
पार्टी में अनुशासन और जवाबदेही पर जोर
पूरे मामले में आम आदमी पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अनुशासन और विचारधारा से समझौता नहीं किया जाएगा। नेताओं का मानना है कि जनता के मुद्दों पर आवाज उठाना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। अब सबकी नजर राघव चड्ढा के जवाब पर है कि वह इन आरोपों पर क्या सफाई देते हैं और आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होती है।