
लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई है। एक सूत्र ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सूत्र के मुताबिक, इस नोटिस को कल किसी एक सदन में जमा किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि किस सदन में सौंपा जाएगा। इस बीच, विपक्ष के एक नेता ने कहा कि सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर करने में काफी उत्साह दिखाया है। आवश्यक संख्य पहले ही पूरी हो जाने के बावजूद गुरुवार को कई सांसद इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे आए। नियम के मुताबिक, सीईसी को पद से हटाने के लिए लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। वहीं, राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
इसका मकसद भाजपा की मदद करना
सूत्र ने बताया कि नोटिस पर इंडिया ब्लॉक के राजनीतिक दलों के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। एक अन्य सूत्र ने कहा, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसदों ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि आप अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। यह पहली बार है, जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया जा रहा है। एक उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सात आरोप लगाए गए हैं। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपाती और भेदभावपूर्ण आचरण से लेकर चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालने और बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने जैसे आरोप शामिल हैं। विपक्ष दल कई बार मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा चुके हैं कि वह सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करते हैं, खासकर जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में। इसके बारे में उनका आरोप है कि इसका मकसद भाजपा की मदद करना है।