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यह नीति किसान को आत्मनिर्भर बनाने की नहीं, बल्कि उसे विदेशी कंपनियों पर निर्भर बनाने की साजिश है

लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने भारत सरकार और अमेरिका के बीच हो रही कथित कृषि डील पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह समझौता किसानों के हित में नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व पर सीधा प्रहार है।
सरकार दावा कर रही है कि इस डील से 1.40 लाख करोड़ की नौकरियाँ मिलेंगी, लेकिन आज तक जॉब लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई, इसके बावजूद बधाइयाँ बाँटी जा रही हैं। यह देश और किसानों के साथ खुला धोखा है।
सरकार कह रही है कि किसानों के हित 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं, लेकिन कैसे सुरक्षित हैं—इसका कोई जवाब नहीं। आज तक किसानों को MSP की कानूनी गारंटी नहीं मिली, और अब सरकार विदेशी ताकतों के दबाव में आकर खेती को दांव पर लगा रही है।
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने सबसे बड़ा सवाल उठाया कि भारत और अमेरिका के बयानों में साफ अंतर है।
जहाँ भारत सरकार इस डील को किसानों के हित में बता रही है, वहीं अमेरिका के बयान साफ संकेत देते हैं कि उसे अपने कृषि उत्पादों और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोलना है।
यह बयानबाज़ी का अंतर बताता है कि सच कौन छुपा रहा है और फायदा किसे मिलने वाला है।
अन्नदाताओं के ऊपर सरकार ने हथौड़ा चलाया जा रहा है।
यह नीति किसान को आत्मनिर्भर बनाने की नहीं, बल्कि उसे विदेशी कंपनियों पर निर्भर बनाने की साजिश है।
लोकदल का स्पष्ट कहना है कि भारत और अमेरिका की खेती का मॉडल पूरी तरह अलग है।
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती आजीविका है, जबकि अमेरिका में खेती कॉरपोरेट और मुनाफा आधारित उद्योग है। ऐसे में अमेरिकी मॉडल को भारत पर थोपना, छोटे और मध्यम किसानों को खत्म करने की योजना है।
यह डील किसानों के लिए खतरनाक है। इससे
MSP पर सीधा खतरा,
स्थानीय बीज और उत्पादन व्यवस्था का विनाश,
और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा
तय माना जा सकता है।
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि जब सरकार आज तक किसानों को उनका न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं दिला पाई, तो भविष्य की सुरक्षा की गारंटी देना केवल झूठा प्रचार है।
लोकदल इस डील का कड़ा विरोध करता है और मांग करता है कि
किसानों से जुड़े सभी समझौतों को सार्वजनिक किया जाए,
MSP को कानूनी दर्जा दिया जाए,
और अमेरिका के साथ की जा रही इस किसान-विरोधी डील को तुरंत रद्द किया जाए।
यह डील विकास की नहीं, किसानों को खत्म करने की डील है—और लोकदल इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।

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