आईडीबीआई बैंक की बिक्री तुरंत रोके सरकार, जेपीसी से हो पूरे मामले की जांच – शक्ति सिंह गोहिल

शक्ति सिंह गोहिल ने मोदी सरकार पर लगाया बड़ा घोटाला करने का आरोप, बोले- विदेशी कंपनी फेयरफैक्स को फायदा पहुंचाने के लिए बेचा जा रहा देश का महत्वपूर्ण बैंक नई दिल्ली, 02 नवंबर। कांग्रेस ने आईडीबीआई बैंक की बिक्री को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार देश के एक महत्वपूर्ण बैंक को विदेशी कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के हाथों बेचने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि बैंक की बिक्री तुरंत रोकी जाए और पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि आईडीबीआई बैंक को खरीदने के लिए फेयरफैक्स कंपनी उसी बैंक के पैसे का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले फेयरफैक्स के चेयरमैन प्रेम वत्स को फायदा पहुंचाने के लिए देश के महत्वपूर्ण बैंक को बेचा जा रहा है। आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर कांग्रेस ने उठाए सवाल शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि आईडीबीआई बैंक देश का एक महत्वपूर्ण बैंक है। यह बैंक लंबे समय से देश के विकास और आम लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार बैंक को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर आईडीबीआई बैंक को बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जब बैंक लगातार मुनाफा कमा रहा है और उसकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी है, तो उसे विदेशी कंपनी के हाथों सौंपने का फैसला क्यों लिया जा रहा है? गोहिल ने आरोप लगाया कि इस पूरे सौदे में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब सरकार ने अभी तक देश की जनता को नहीं दिया है। इसलिए बिक्री प्रक्रिया को तुरंत रोककर पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए। फेयरफैक्स बैंक खरीदने के लिए उसी बैंक के पैसे का इस्तेमाल कर रही शक्ति सिंह गोहिल ने फेयरफैक्स कंपनी की ओर से बैंक खरीदने के लिए की जा रही भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कंपनी की ओर से बताया गया है कि शुरुआत में कुछ रकम कंपनी खुद देगी, जबकि बाकी रकम आईडीबीआई बैंक के पास मौजूद पूंजी से जुटाई जाएगी। गोहिल ने सवाल किया कि आखिर कोई कंपनी उसी बैंक के पैसे से उस बैंक को कैसे खरीद सकती है? उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि बैंक खरीदने के लिए पैसा कहां से आएगा और भुगतान किस तरह किया जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतने बड़े सौदे में पारदर्शिता होना जरूरी है। देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस सौदे में किसका पैसा लगाया जा रहा है और इससे किसे फायदा मिलने वाला है। 52,878 करोड़ रुपये में बेची जा रही 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी शक्ति सिंह गोहिल ने बताया कि केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी मिलकर आईडीबीआई बैंक में अपनी कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस हिस्सेदारी को करीब 52,878 करोड़ रुपये में फेयरफैक्स कंपनी को बेचने की योजना है। इस सौदे के बाद बैंक का नियंत्रण विदेशी कंपनी के हाथों में चला जाएगा और बैंक का सार्वजनिक उपक्रम का दर्जा समाप्त हो जाएगा। गोहिल ने कहा कि सरकार को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतने महत्वपूर्ण बैंक का नियंत्रण विदेशी कंपनी को सौंपने का फैसला किस आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों को बेचने से पहले उनके भविष्य और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। आईडीबीआई बैंक घाटे में नहीं, लगातार कमा रहा मुनाफा कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि आईडीबीआई बैंक घाटे में चलने वाला बैंक नहीं है, बल्कि यह लगातार मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच बैंक ने कुल 30,105 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। उन्होंने कहा कि प्रति कर्मचारी मुनाफा कमाने के मामले में भी आईडीबीआई बैंक देश के प्रमुख बैंकों में शामिल है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि जब बैंक अच्छा मुनाफा कमा रहा है, तो उसे बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है? गोहिल ने कहा कि किसी भी बैंक की सफलता केवल उसकी कमाई से नहीं देखी जाती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि वह आम जनता, छोटे व्यापारियों और उद्योगों की कितनी मदद कर रहा है। आईडीबीआई बैंक इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के बड़े शहरों में बैंक की 29 कीमती संपत्तियां शक्ति सिंह गोहिल ने आईडीबीआई बैंक की संपत्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बैंक के पास देश के प्रमुख शहरों में 29 कीमती संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि बैंक की बिक्री के बाद इन संपत्तियों का नियंत्रण भी विदेशी कंपनी के हाथों में चला जाएगा। इसलिए सरकार को बैंक की संपत्तियों का सही मूल्य और उनकी पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए। गोहिल ने सवाल उठाया कि जब बैंक के पास इतनी कीमती संपत्तियां हैं और वह लगातार मुनाफा भी कमा रहा है, तो आखिर सरकार इसे बेचने पर क्यों तुली हुई है? शेयर की कीमत 94.42 रुपये से घटाकर 75 रुपये करने पर सवाल कांग्रेस नेता ने आईडीबीआई बैंक के शेयरों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बैंक के एक शेयर की कीमत 94.42 रुपये तय की गई थी, लेकिन बोली खुलने के बाद पुराने मूल्यांकन को खारिज कर दोबारा मूल्यांकन कराया गया। इसके बाद शेयर की कीमत घटाकर 75 रुपये कर दी गई। शक्ति सिंह गोहिल ने सवाल किया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पहले तय की गई कीमत को बदलना पड़ा? जब टेंडर खुल चुका था, तब दोबारा मूल्यांकन कराने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने पूछा कि किसके कहने पर शेयरों की कीमत घटाई गई और इससे किसे फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई? कांग्रेस ने मांग की कि सरकार दोनों मूल्यांकन रिपोर्टों को