दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता केप टाउन में 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में हुए शामिल

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के सांसद और जनप्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। विजेंद्र गुप्ता ने सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया के अलग-अलग देशों से आए सांसदों और प्रतिनिधियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संसदों के कामकाज को बेहतर बनाना और सभी वर्गों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। वैश्विक सांसदों के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए विजेंद्र गुप्तादिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने केप टाउन में आयोजित वैश्विक सांसदों के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के तहत आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है। इसमें संसदों को मजबूत बनाने, लोकतांत्रिक व्यवस्था को बेहतर करने और समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। विजेंद्र गुप्ता का इस सम्मेलन में शामिल होना दिल्ली विधानसभा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे दिल्ली विधानसभा के अनुभवों और कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा करने का अवसर मिल रहा है। संसाधन-सीमित संसदों पर होगी महत्वपूर्ण चर्चासम्मेलन के दौरान विजेंद्र गुप्ता एक महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित संयुक्त नेटवर्क कार्यशाला में प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। कार्यशाला का विषय है — “संसाधन-सीमित संसदों में समावेशिता के उपायों को लागू करना।” इस विषय का संबंध उन संसदों और विधानसभाओं से है जहां संसाधन सीमित होते हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी लोगों को बराबर अवसर और भागीदारी देने की जरूरत होती है। विजेंद्र गुप्ता अपने संबोधन में बताएंगे कि सीमित संसाधनों के बीच भी संसद और विधानसभाओं को किस तरह अधिक समावेशी बनाया जा सकता है। उनका संबोधन कई देशों के प्रतिनिधियों के लिए उपयोगी हो सकता है। महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक संवेदनशीलता पर जोरविजेंद्र गुप्ता अपने संबोधन में संसदों और विधानसभाओं में लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के विषय पर भी अपने विचार साझा करेंगे। आज के समय में महिलाओं की राजनीतिक और संसदीय भागीदारी को मजबूत करना बहुत जरूरी माना जाता है। महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर अवसर मिलना लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। विजेंद्र गुप्ता संसाधनों की कमी के बावजूद लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। वे अपने अनुभव और विचार दूसरे देशों के प्रतिनिधियों के सामने रखेंगे। दिव्यांगजनों की भागीदारी पर भी होगी चर्चाविजेंद्र गुप्ता के संबोधन में दिव्यांगजनों की भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब समाज के हर वर्ग को अपनी बात रखने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिले। दिव्यांगजनों के लिए संसद और विधानसभा की व्यवस्था को आसान और सुविधाजनक बनाना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विजेंद्र गुप्ता इस बात पर जोर देंगे कि संसदों और विधानसभाओं में दिव्यांगजनों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। संसदों को सभी के लिए सुलभ बनाने पर जोरदिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता संसदों और विधानसभाओं को सभी लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने के विषय पर भी अपने विचार रखेंगे। संसद या विधानसभा की इमारत, सुविधाएं और कामकाज ऐसी व्यवस्था के अनुसार होने चाहिए, जिनका इस्तेमाल हर व्यक्ति आसानी से कर सके। इसमें दिव्यांगजन, महिलाएं और समाज के अन्य वर्ग भी शामिल हैं। विजेंद्र गुप्ता बताएंगे कि सीमित संसाधनों के बीच भी ऐसी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लोकतांत्रिक संस्थाओं में भाग लेने का अवसर मिले। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल्ली विधानसभा का प्रतिनिधित्वविजेंद्र गुप्ता के 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में शामिल होने से दिल्ली विधानसभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला है। दिल्ली विधानसभा देश की राजधानी की विधानसभा है। ऐसे में विजेंद्र गुप्ता का अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन में हिस्सा लेना महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा रहा है। इस तरह के सम्मेलन से अलग-अलग देशों की संसदों और विधानसभाओं को एक-दूसरे की अच्छी व्यवस्थाओं को समझने और उनसे सीखने का अवसर मिलता है। लोकतंत्र में समावेशिता का महत्वविजेंद्र गुप्ता के संबोधन का मुख्य केंद्र समावेशिता रहेगा। समावेशिता का अर्थ है कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना और सभी को बराबर अवसर देना। संसद और विधानसभा लोकतंत्र के महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इसलिए इन संस्थानों में महिलाओं, दिव्यांगजनों और समाज के अन्य वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। विजेंद्र गुप्ता संसाधन सीमित होने की स्थिति में भी समावेशी व्यवस्था बनाने के उपायों पर अपने विचार साझा करेंगे। उनका उद्देश्य यह बताना होगा कि कम संसाधनों के बावजूद सही योजना और इच्छाशक्ति के माध्यम से बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकती है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से विचारों का आदान-प्रदानकेप टाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के सांसद और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे के अनुभव जानने का अवसर मिल रहा है। विजेंद्र गुप्ता भी सम्मेलन में दिल्ली विधानसभा से जुड़े अनुभव और विचार साझा करेंगे। इससे अन्य देशों के प्रतिनिधियों को दिल्ली की संसदीय व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा। वहीं, विजेंद्र गुप्ता को भी दूसरे देशों की संसदों और विधानसभाओं में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। समावेशी संसद की दिशा में महत्वपूर्ण कदमविजेंद्र गुप्ता का सम्मेलन में संबोधन समावेशी संसद की जरूरत को सामने रखेगा। एक ऐसी संसद या विधानसभा, जहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अवसर मिले, लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है। महिलाओं की भागीदारी, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं और सभी के लिए आसान पहुंच जैसे विषय आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हैं। विजेंद्र गुप्ता इन सभी विषयों पर अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे और बताएंगे कि सीमित संसाधनों में भी समावेशी व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकता है। दिल्ली के अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसरदिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के लिए यह सम्मेलन दिल्ली विधानसभा के अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। विजेंद्र गुप्ता अपने संबोधन के माध्यम से यह संदेश देंगे कि संसाधनों की सीमा समावेशिता