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‘रामायण’ के ट्रेलर को लेकर उठे सवाल, डॉ. भारत नागर बोले- ‘यह रामायण है या महाभारत?’

रामायण रिसर्च काउंसिल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के चित्रण से लेकर मां सीता के चरित्र तक हुई चर्चा 19 अगस्त को BHU में होगा ‘रामायणी सम्मान 2026’, देश की 28 प्रमुख हस्तियों को किया जाएगा सम्मानित नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026। रामायण और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर काम कर रही रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से शुक्रवार को नई दिल्ली के नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया (NSCI), प्रगति मैदान में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘रामायणी सम्मान 2026’ की तैयारियों के साथ-साथ रामायण पर बन रही फिल्मों में भगवान श्रीराम और माता सीता के चरित्र को प्रस्तुत करने के तरीके पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में सांसद एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, सेवानिवृत्त आईएएस देव दत्त शर्मा, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. भारत नागर, कुमार सुशांत, पितांबर मिश्रा और साध्वी प्रज्ञा भारती सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए रामायण पर फिल्म या किसी अन्य माध्यम में प्रस्तुति तैयार करते समय तथ्यों और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ट्रेलर देखकर डॉ. भारत नागर ने पूछा- ‘यह रामायण है या महाभारत?’प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे प्रमुख विषय हाल ही में जारी हुई ‘रामायण’ फिल्म के ट्रेलर को लेकर रहा। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. भारत नागर ने ट्रेलर पर अपनी प्रतिक्रिया दी। डॉ. भारत नागर ने कहा कि ट्रेलर देखने के बाद उनके मन में यह सवाल आया कि आखिर यह प्रस्तुति रामायण की है या महाभारत की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का स्वरूप भारतीय परंपरा में मर्यादा, शांति, संयम और सौम्यता से जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि रामायण पर फिल्म बनाते समय भगवान श्रीराम के चरित्र और उनके व्यक्तित्व को उसी गरिमा और मर्यादा के साथ दिखाया जाना चाहिए, जिसके लिए भगवान श्रीराम को जाना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी फिल्म के ट्रेलर में दिखाई गई चीजें दर्शकों पर काफी प्रभाव डालती हैं। इसलिए फिल्म निर्माताओं को शुरुआत से ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रामायण से जुड़े पात्रों और घटनाओं का चित्रण सही और सम्मानजनक तरीके से हो। सेंसर बोर्ड से की विशेषज्ञों को फिल्म दिखाने की अपीलडॉ. भारत नागर ने कहा कि फिल्म को प्रमाणित करने से पहले रामायण रिसर्च काउंसिल के विद्वानों और विशेषज्ञों को फिल्म दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि फिल्म में रामायण से जुड़ी कोई जानकारी या दृश्य गलत तरीके से प्रस्तुत हुआ है तो रिलीज से पहले उसे सुधारा जा सकता है। इससे बाद में किसी तरह के विवाद की स्थिति बनने की संभावना भी कम होगी। डॉ. भारत नागर ने कहा कि रामायण करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए इस विषय पर फिल्म बनाने वाले लोगों की जिम्मेदारी सामान्य फिल्मों की तुलना में अधिक होती है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की कि वे रामायण से जुड़ी किसी भी फिल्म को तैयार करने से पहले धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों के जानकारों से सलाह जरूर लें। ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण देकर डॉ. भारत नागर ने जताई चिंताडॉ. भारत नागर ने इस दौरान ‘आदिपुरुष’ फिल्म का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले भी रामायण से जुड़े पात्रों और घटनाओं के फिल्मी चित्रण को लेकर विवाद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों से जुड़े विवाद केवल फिल्म तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका प्रभाव समाज और विशेष रूप से नई पीढ़ी पर भी पड़ सकता है। डॉ. भारत नागर के अनुसार, आज के समय में बच्चे और युवा फिल्मों, इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए इतिहास और धार्मिक विषयों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। ऐसे में यदि किसी प्रस्तुति में गलत जानकारी पहुंचती है तो दर्शकों के बीच भी उसी को सही मानने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि इसलिए रामायण जैसे विषयों पर काम करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अजय भट्ट बोले- पूरी रिसर्च के बाद ही बने रामायण पर फिल्मप्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अजय भट्ट, सांसद नैनीताल एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री, ने भी रामायण पर बनने वाली फिल्मों को लेकर अपनी बात रखी। अजय भट्ट ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल की स्थापना का उद्देश्य ही रामायण से जुड़ी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि रामायण भारत की संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए जब भी रामायण पर फिल्म, धारावाहिक या कोई अन्य प्रस्तुति बनाई जाए तो उसके लिए पूरी तरह से रिसर्च की जानी चाहिए। अजय भट्ट ने कहा कि फिल्म बनाने वालों को केवल मनोरंजन को ध्यान में नहीं रखना चाहिए, बल्कि रामायण के मूल भाव और उसके पात्रों की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी विषय पर पर्याप्त जानकारी नहीं है तो विशेषज्ञों और विद्वानों की मदद ली जानी चाहिए, जिससे दर्शकों तक गलत जानकारी न पहुंचे। अजय भट्ट ने बताए ‘रामायणी सम्मान 2026’ के प्रमुख नामअजय भट्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘रामायणी सम्मान 2026’ के लिए चुने गए 28 विशिष्ट लोगों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सम्मानित होने वाले प्रमुख नामों में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिंह और स्वर्गीय किशोर कुणाल शामिल हैं। काउंसिल के अनुसार, इन लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भारतीय संस्कृति तथा रामायण की परंपरा को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है। 19 अगस्त को BHU में होगा भव्य सम्मान समारोहरामायण रिसर्च काउंसिल ने बताया कि ‘रामायणी सम्मान 2026’ का मुख्य कार्यक्रम 19 अगस्त 2026 को वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित 28 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। काउंसिल का कहना है कि इस सम्मान के जरिए भारतीय संस्कृति, रामायण की परंपरा और समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले लोगों का सम्मान किया जाएगा। साध्वी प्रज्ञा भारती ने माता सीता के चरित्र पर रखी बातप्रेस कॉन्फ्रेंस में साध्वी प्रज्ञा भारती ने भी रामायण में माता सीता