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भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बोले – यह यात्रा भारत की सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है

नई दिल्ली, 16 जुलाई। राजधानी दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा का आयोजन पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस धार्मिक आयोजन में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज ने विशेष रूप से भाग लिया। दोनों नेताओं ने भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि, शांति और विकास की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। भगवान श्री जगन्नाथ की पूजा कर देश की खुशहाली की कामना कीरथयात्रा में शामिल होने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने देश में शांति, समृद्धि, विकास और सभी नागरिकों के सुखी जीवन की प्रार्थना की। राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद पूरे देश पर बना रहे और भारत लगातार प्रगति के नए रास्ते पर आगे बढ़ता रहे। उन्होंने देशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की भी कामना की। राजनाथ सिंह बोले – रथयात्रा हमारी सनातन संस्कृति की पहचान हैरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक समरसता और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है और समाज में भाईचारा, प्रेम और सद्भाव का संदेश देती है। ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। धार्मिक आयोजन समाज में एकता और सद्भाव को मजबूत करते हैं – राजनाथ सिंहराजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता, सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना बहुत जरूरी है। रथयात्रा जैसे आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को समझने का अवसर देते हैं। देशवासियों को दी रथयात्रा की शुभकामनाएंरक्षा मंत्री ने सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और भारत लगातार विकास, समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान का आशीर्वाद देश को नई ऊर्जा और नई प्रेरणा देता रहेगा। बांसुरी स्वराज ने बताया रथयात्रा का महत्वनई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि श्री जगन्नाथ रथयात्रा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का एक महत्वपूर्ण महापर्व है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। साथ ही लोगों में सेवा, सद्भाव, सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति पूरे विश्व को प्रेम, शांति और मानवता का संदेश देती है। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा पूरा माहौलरथयात्रा के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान श्री जगन्नाथ के जयकारे लगाते हुए पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में शामिल हुए। लोगों ने भगवान के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का विशेष माहौल बना रहा। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में रथयात्रा में भाग लिया। भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी रहे मौजूदइस अवसर पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष रविन्द्र चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता यासिर जिलानी, विधायक नीरज बसोया और निगम पार्षद अनीता बसोया सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने मिलकर भगवान श्री जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की और रथयात्रा में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक एकता का संदेशरथयात्रा के माध्यम से एक बार फिर यह संदेश दिया गया कि भारत की धार्मिक परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने, लोगों में प्रेम और भाईचारा बढ़ाने तथा सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी माध्यम हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि ऐसे आयोजन भारत की पहचान हैं और आने वाली पीढ़ियों तक हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।