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मानसून से पहले अंकुश नारंग ने एमसीडी से मांगा जवाब, कहा- दिल्लीवासियों को जलभराव और करंट हादसों से बचाने की पूरी तैयारी बताएं

अंकुश नारंग ने एमसीडी कमिश्नर को लिखा पत्र, मानसून की तैयारियों पर मांगी पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली, 24 जून 2026। दिल्ली में मानसून की शुरुआत से पहले आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने नगर निगम प्रशासन से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। उन्होंने एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार को पत्र लिखकर राजधानी में बारिश के मौसम को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अंकुश नारंग ने कहा कि हर साल बारिश आते ही दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव, गंदगी, टूटी सड़कों और करंट लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि इस बार नगर निगम ने लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए क्या इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता हर साल मानसून के दौरान कई परेशानियों का सामना करती है। कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब जाती हैं, यातायात ठप हो जाता है और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। इसके अलावा कई इलाकों में करंट लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं, जो लोगों की जान के लिए खतरा बन जाती हैं। इसलिए निगम प्रशासन को अपनी तैयारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। क्या सभी नालों और नालियों की सफाई पूरी हो चुकी है?अंकुश नारंग ने अपने पत्र में सबसे पहले नालों और नालियों की सफाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या एमसीडी के सभी जोनों में आने वाले बड़े नाले, छोटे नाले, नालियां और जालियां पूरी तरह साफ कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि हर साल निगम की ओर से सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई इलाकों में पानी भर जाता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सफाई का काम पूरा हो चुका है तो उसकी पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि सफाई के दौरान निकाली गई गाद, मिट्टी और कचरे को कहां ले जाकर डंप किया गया है। अंकुश नारंग ने कहा कि केवल कागजों में सफाई दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। जलभराव वाले इलाकों के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?अंकुश नारंग ने उन क्षेत्रों को लेकर भी सवाल उठाए जहां हर साल बारिश के दौरान भारी जलभराव होता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां थोड़ी सी बारिश के बाद भी सड़कें पानी से भर जाती हैं। इससे आम लोगों, दुकानदारों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पूछा कि ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान कर एमसीडी ने क्या विशेष कदम उठाए हैं। क्या उन स्थानों पर अतिरिक्त पंप लगाए गए हैं? क्या पानी निकासी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है? क्या संबंधित अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है? इन सभी सवालों का जवाब निगम प्रशासन को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर साल एक ही जगह जलभराव होता है तो इसका मतलब है कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान नहीं किया गया। इसलिए यह जानना जरूरी है कि समस्या के कारणों की जांच की गई है या नहीं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। करंट लगने की घटनाओं को रोकने के लिए क्या तैयारी है?अंकुश नारंग ने बारिश के दौरान होने वाली करंट लगने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में कई बार खुले बिजली के तार, खराब स्ट्रीट लाइटें और जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली का रिसाव लोगों की जान के लिए खतरा बन जाता है। उन्होंने पूछा कि ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम और संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए हैं। क्या बिजली के खंभों और स्ट्रीट लाइटों की जांच की गई है? क्या संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है? क्या अधिकारियों को संभावित खतरे वाले स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं? अंकुश नारंग ने कहा कि लोगों की जान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। राजेंद्र नगर की दुखद घटना का भी किया जिक्रअपने पत्र में अंकुश नारंग ने पिछले वर्ष मानसून के दौरान राजेंद्र नगर में हुई करंट लगने की दुखद घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने पूछा कि उस घटना के बाद निगम प्रशासन ने क्या समीक्षा की थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि केवल हादसों के बाद जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। निगम बैठक से पहले मांगे सभी सवालों के जवाबअंकुश नारंग ने अपने पत्र में कहा कि गुरुवार दोपहर 2 बजे होने वाली निगम की बैठक से पहले उनके सभी सवालों के जवाब उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि जब तक पूरी जानकारी सामने नहीं आएगी, तब तक मानसून की तैयारियों की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल सकेगा। उन्होंने कहा कि निगम सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने वाली है और ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे सभी तथ्यों और आंकड़ों के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इससे जनता को भी यह पता चलेगा कि उनके लिए क्या तैयारियां की गई हैं। दिल्लीवासियों की सुरक्षा से जुड़ा है मामलाअंकुश नारंग ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि दिल्ली के लाखों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हुआ मामला है। मानसून के दौरान होने वाली समस्याओं का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए नगर निगम को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग यह जानना चाहते हैं कि इस बार बारिश के मौसम में उन्हें जलभराव, गंदगी और करंट जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी या नहीं। नगर निगम को पारदर्शिता के साथ अपनी तैयारियों का पूरा ब्यौरा देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए