"National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |    

हाई कोर्ट के फैसले से बिजली कंपनियों को बड़ा झटका, आशीष सूद बोले- अब होगा सीएजी ऑडिट और सामने आएगी सच्चाई

नई दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बिजली कंपनियों के सीएजी (कैग) ऑडिट से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस निर्णय से दिल्ली की जनता के हितों को मजबूती मिली है और अब बिजली कंपनियों के ऑडिट का रास्ता साफ हो गया है। आशीष सूद ने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार शुरू से ही इस मामले में जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। सरकार ने अदालत में पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसी प्रकार का पर्दा न रहे। बिजली कंपनियों की याचिका खारिज होने पर सरकार ने जताई संतुष्टिऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बिजली कंपनियों ने सीएजी ऑडिट का विरोध करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि ऑडिट जैसी प्रक्रिया को रोकना उचित नहीं है। आशीष सूद ने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि बिजली क्षेत्र में कामकाज किस तरह से हो रहा है और उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी और बिजली कंपनियों के कथित संबंधों पर उठाए सवालऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों द्वारा ऑडिट का विरोध करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और बिजली कंपनियों के बीच कथित संबंधों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आशीष सूद ने कहा कि जब कोई संस्था ऑडिट से बचने की कोशिश करती है तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी तथ्य जनता के सामने आएं ताकि किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। दिल्ली सरकार ने अदालत में रखा जनता का पक्षआशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस मामले में पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि जनता के हितों की रक्षा करना है।ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार ने अदालत को बताया कि सीएजी ऑडिट एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। इसी कारण सरकार ने ऑडिट की प्रक्रिया का समर्थन किया। सीएजी ऑडिट से बढ़ेगी पारदर्शिताआशीष सूद ने कहा कि सीएजी ऑडिट होने से बिजली कंपनियों के कामकाज की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर क्या स्थिति है।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब सभी तथ्य सार्वजनिक होते हैं तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है और जवाबदेही भी तय होती है। अब उपराज्यपाल के स्तर पर आगे बढ़ेगी प्रक्रियाऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सीएजी ऑडिट से जुड़े मामले की सुनवाई माननीय उपराज्यपाल के स्तर पर आगे बढ़ सकेगी। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय ने आगे की प्रक्रिया का रास्ता खोल दिया है। आशीष सूद ने कहा कि सरकार चाहती है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें। जनता पर बिजली दरों का बोझ नहीं बढ़ने देंगेऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार की प्राथमिकता दिल्ली की जनता है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है कि लोगों पर बिजली के बढ़े हुए बिलों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। आशीष सूद ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर जनता के हितों से समझौता नहीं करेगी। यदि किसी स्तर पर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की कोशिश की जाती है तो सरकार उसका विरोध करेगी। जनहित के लिए अंतिम समय तक संघर्ष जारी रहेगाऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि दिल्ली के लोगों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के बेहतर और निर्बाध बिजली उपलब्ध होती रहे। आशीष सूद ने कहा कि सरकार अंतिम समय तक इस बात के लिए संघर्ष करती रहेगी कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के रूप में दिल्ली की जनता पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई कोर्ट का यह फैसला जनता के हितों की रक्षा और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।