दिल्ली में बिहार के युवक पर गोलीकांड इंसानियत को झकझोरने वाली घटना

सरिता साहनीनई दिल्लीदिल्ली में हाल ही में हुई एक बेहद दुखद घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खबरों के अनुसार,उत्तम नगर में रहने वाले बिहार के एक युवक पांडव कुमार को केवल उसकी पहचान “बिहारी” पूछकर गोली मार दी गई। बताया जा रहा है कि यह गोली एक हेड कांस्टेबल नीरज बल्लारप द्वारा चलाई गई। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आज भी समाज में क्षेत्रीय भेदभाव की सोच कहीं न कहीं मौजूद है। किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर नुकसान पहुंचाना पूरी तरह से गलत है और इससे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बनता है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का आक्रोश और प्रतिक्रियाइस घटना को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने कड़ी नाराजगी जताई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के निर्देश पर और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शंकर मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले पर अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रतिनिधिमंडल में रतन कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे, पार्टी का मानना है कि यह केवल एक युवक पर हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहारी समाज का अपमान है। ऐसे व्यवहार से समाज में नफरत फैलती है और लोगों के बीच दूरी बढ़ती है, जो देश की एकता के लिए ठीक नहीं है। सरकार से न्याय की मांगलोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इस मामले में दिल्ली सरकार से सख्त और तुरंत कार्रवाई की मांग की है। पार्टी चाहती है कि दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा कदम उठाने से पहले डरे। इसके साथ ही पार्टी ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात कही है। उनका कहना है कि परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि वे इस मुश्किल समय में खुद को संभाल सकें। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। क्षेत्रीय भेदभाव पर गंभीर सवालयह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या आज भी लोगों को उनकी पहचान के आधार पर देखा जाता है? भारत एक ऐसा देश है जहां हर राज्य और हर व्यक्ति को बराबर का सम्मान मिलना चाहिए।बिहार से आने वाले लोग देश के हर हिस्से में मेहनत करते हैं और अपना योगदान देते हैं। ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार न केवल गलत है, बल्कि यह समाज की सोच को भी कमजोर करता है। आंदोलन की चेतावनी और आगे की राहलोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने साफ कहा है कि अगर इस मामले में जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। पार्टी का कहना है कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाती रहेगी। यह समय है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाएं। ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान के कारण डर या असुरक्षा महसूस न करे। समानता और इंसाफ की जरूरतयह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें एक बेहतर और सुरक्षित समाज बनाने के लिए क्या करना चाहिए। हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए, यही हमारे देश की असली ताकत है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए, तो ही हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं जहां सभी लोग बिना डर के और सम्मान के साथ जी सकें।
एक्साइज पॉलिसी केस में आप नेताओं का बड़ा कदम, केजरीवाल-सिसोदिया के बाद दुर्गेश पाठक ने भी कोर्ट में पेशी से इनकार किया

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बाद एक और आप नेता ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी है। एक्साइज पॉलिसी मामले को लेकर पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने चिट्ठी में लिखा कि मैं अरविंद केजरीवाल के साथ खड़ा हूं। इस केस में मैं पेश होने में असमर्थ हूं। मेरी तरफ से कोई वकील भी पेश नहीं होगा। इससे पहले आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर एक्साइज पॉलिसी मामले में उनकी अदालत में मुकदमा आगे नहीं चलाने का फैसला बताया था। वहीं, सोमवार को आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी इसी जज की अदालत में व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से पेश नहीं होने का एलान किया था। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह निर्णय ले रहावहीं, सीबीआई की अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताने के बाद केजरीवाल ने फैसला किया कि वह आगे इस मामले में न तो खुद पेश होंगे और न ही उनके कोई वकील जिरह करेंगे। केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखकर यह जानकारी दी। पत्र में उन्होंने कहा कि मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह निर्णय ले रहा हूं। मैं इसके नतीजों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। हो सकता है कि इससे मेरे कानूनी हितों को नुकसान पहुंचे, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वे न्यायमूर्ति शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने लिखा अपने पत्र में अदालत में बहस के दौरान दी गई दलील दोहराते हुए कहा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।