मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश, पत्रकारिता का मूल भाव राष्ट्र और समाज सेवा होना चाहिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारिता के विभिन्न माध्यमों में समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक ही तथ्य को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत करने पर जनमानस में भ्रम फैलता है। यह स्थिति मीडिया के प्रति जनविश्वास को प्रभावित करती है। इसलिए सभी अंगों को समान मानक, मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने पत्रकारिता को कभी बेलगाम न होने देने का आह्वान किया। उन्होंने मूल्यों और आदर्शों के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया। भारत में पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ रहा है। मुख्यमंत्री ने समाज को गुमराह करने वाली पत्रकारिता से बचने की सलाह दी। इन बाधाओं से विचलित नहीं होनासामाजिक और मुद्रित माध्यम में खबर की भिन्नता जनमानस को विचलित करती है। सरकार मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है। लोकतंत्र संवाद से चलता है, जिसमें आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। पत्रकारिता समाज का आईना है और जनविश्वास का प्रतीक है। सही-गलत के प्रति एक भाव में रहना आवश्यक है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं ने भी पत्रकारिता को देश सेवा का माध्यम बनाया। तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा प्रसारित किया था। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। 200 वर्ष पहले 30 मई 1826 को कोलकाता से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी। जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया। यह शानदार यात्रा 200 वर्ष से बिना रुके आगे बढ़ रही है। भारतीय पत्रकारिता का आधार उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्रेरित है। विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा रही है, पर हमें इन बाधाओं से विचलित नहीं होना है।
पश्चिम एशिया में तनाव जारी ईरान ने अमेरिका और इजरायल की धमकियों को ठुकराया, पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव पर विचार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनियां मिल रही हैं, तो दूसरी ओर ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है। इस बीच, ईरान ने सोमवार को कहा कि उसने मध्यस्थों की ओर पेश किए गए प्रस्तावों अपना जवाब तैयार कर लिया है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका व इस्राइल हमले तेज करते रहेंगे, वह सीधी वार्ता में शामिल नहीं होगा। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव अत्यधिक मांगों वाला है। हमने अपनी मांगों का एक अलग सेट तैयार कर लिया है और उसे औपचारिक रूप दे दिया है। इस संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि इस्फहान में पायलट बचाव अभियान केवल एक छल-कपट था, जिसका मकसद ईरान के संवर्धित यूरेनियम को जब्त करना था। यह युद्धविराम विरोधी पक्ष को फिर से संगठित होने और अपनी कार्रवाई जारी रखने का मौका दे सकता है। मंत्रालय ने कहा, ओमान के साथ बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए एक प्रोटोकॉल बनाने पर है। पाकिस्तान की ओर से तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव मिलातेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि जरूरत पड़ने पर तेहरान ‘अपनी पूरी ताक़त’ से अपने देश की रक्षा करेगा। उन्होंने अमेरिका और इस्राइल पर आरोप लगाया कि उनकी ‘कोई रेड लाइन नहीं है’ और वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हैं। बगाई ने मध्यस्थों के जरिए भेजे गए अमेरिका के कथित 15-सूत्रीय सीजफायर प्रस्ताव को तर्कहीन करार दिया। उन्होंने कहा धमकियों के साथ बातचीत नहीं हो सकती है। साथ ही किसी भी समझौते को स्वीकार तभी किया जाएगा जब वे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में होंगे. ईरान ने कहा है कि वह अस्थायी युद्ध के बदले होर्मुज स्ट्रेट खोलने को मना कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव की समीक्षा चल रही है, लेकिन दबाव में फैसला नहीं लिया जाएगा।अधिकारी के मुताबिक, तेहरान अस्थायी युद्धविराम के बदले कोई रियायत नहीं देगा और होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान को लगता है कि अमेरिका स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है, इसलिए अस्थायी डील का कोई मतलब नहीं है। अधिकारी ने पुष्टि की कि पाकिस्तान की ओर से तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिस पर विचार किया जा रहा है।