नक्सलवाद पर रिजिजू का ‘एटमी’ वार! कांग्रेस और माओवादियों के बीच ‘गुपचुप’ रिश्तों का दावा

देश में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के वामपंथी उग्रवादियों और माओवादियों से संबंध रहे हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी वामपंथी उग्रवादियों को जानते हैं और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ऐसे समूहों से संपर्क भी बनाए रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ कांग्रेस सार्वजनिक रूप से उग्रवाद के खिलाफ बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके कुछ नेताओं पर ऐसे आरोप लग रहे हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के समय कुछ लोग वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन लोगों को जानते हैं। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिरकेंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों से मुलाकात भी की थी और उनसे संपर्क बनाए रखा था। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, यह स्थिति चिंताजनक है और इसकी जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे इलाके, जो पहले नक्सलवाद के गढ़ माने जाते थे, अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य भी रखा है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नक्सलियों द्वारा हत्या की गई, तब पार्टी नेतृत्व की क्या भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिर है।
ट्रंप का पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार ‘ब्रिटेन और फ्रांस खुद लड़ना सीखें, अमेरिका नहीं आएगा साथ’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार किया था, उनके लिए उनके पास दो सुझाव हैं। ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य की वजह से जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया, उनके लिए मेरा सुझाव है: पहला- अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। दूसरा- हिम्मत जुटाओ, जलडमरूमध्य पर जाओ और उसे अपने कब्जे में ले लो। अब तुम्हें खुद अपने लिए लड़ना सीखना होगा, अमेरिका अब तुम्हारी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे तुम हमारे लिए नहीं आए। ईरान लगभग तबाह हो चुका है। मुश्किल काम खत्म हो गया है। जाओ, अपना तेल खुद हासिल करो। 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डालाउन्होंने आगे लिखा, फ्रांस ने इस्राइल जा रहे सैन्य सामान से भरे विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया। फ्रांस ने ‘ईरान के कसाई’ के मामले में बहुत ही खराब सहयोग किया, जिसे सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया है। अमेरिका इसे याद रखेगा। इससे पहले, सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका देश ईरान में अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए एक और अधिक समझदार शासन के साथ गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अगर किसी भी वजह जल्द ही कोई समझौता नहीं हो पाता है (जिसकी बहुत अधिक संभावना है)और अगर होर्मुजलडमरूमध्य व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देंगे, जिन्हें हमने जानबूझकर अभी तक छुआ नहीं है। उन्होंने लिखा, यह उन असंख्य सैनिकों और अन्य लोगों का बदला होगा, जिन्हें ईरान ने पिछले शासन के 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डाला था।