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गैस सिलेंडर की कमी से दिल्ली में गरीबों पर संकट – देवेंद्र यादव

सरिता साहनीनई दिल्ली, 15 मार्च 2026 दिल्ली में रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कमी को लेकर राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण गरीबों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अटल कैंटीन और रैन बसेरों में रहने वाले लाखों गरीब लोग इस समय बहुत मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर गरीब लोगों को खाना तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार यह कह रही है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। अटल कैंटीन और रैन बसेरों में भोजन की समस्यादेवेंद्र यादव ने कहा कि गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा है। दिल्ली में चल रही अटल कैंटीन योजना के तहत गरीब लोगों को सिर्फ 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन अब गैस सिलेंडर की कमी के कारण इन कैंटीनों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 71 अटल कैंटीन चल रही हैं। इन कैंटीनों में हर दिन सुबह और शाम लगभग 1000 लोगों को भोजन दिया जाता है। लेकिन गैस की कमी के कारण अब इन कैंटीनों के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों को भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। देवेंद्र यादव ने कहा कि इसी तरह रैन बसेरों की स्थिति भी खराब हो गई है। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को भी गैस सिलेंडर की कमी के कारण समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा है। कई जगहों पर लोग भूखे सोने को मजबूरदेवेंद्र यादव के अनुसार, दिल्ली के अधिकतर रैन बसेरों में पिछले करीब दो हफ्तों से केवल 40 प्रतिशत लोगों को ही भोजन मिल पा रहा है। बाकी लोगों को कई बार बिना खाना खाए ही रात गुजारनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बहुत चिंताजनक है क्योंकि रैन बसेरों में रहने वाले लोग पहले से ही गरीब और बेघर होते हैं। ऐसे लोगों के लिए भोजन ही सबसे बड़ी जरूरत होती है। लेकिन अब उन्हें भी पर्याप्त खाना नहीं मिल पा रहा है। देवेंद्र यादव ने कहा कि नरेला, मंगोलपुरी, हैदरपुर, बुध विहार, इंद्रपुरी, गीता कॉलोनी, झिलमिल और आर.के. पुरम जैसे कई इलाकों में अटल कैंटीन लोगों को सही तरीके से भोजन उपलब्ध कराने में असफल हो रही हैं। अटल कैंटीन के बाहर लंबी लाइनेंदेवेंद्र यादव ने कहा कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण अटल कैंटीनों के बाहर लोगों की भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि पहले जितने लोग भोजन लेने आते थे, अब उससे चार गुना ज्यादा लोग कैंटीनों के बाहर लाइन में खड़े हो रहे हैं। कई लोग तो खाना पाने के लिए 3 से 4 घंटे पहले ही टोकन लेने के लिए लाइन में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि दिल्ली में गरीब लोगों के सामने भोजन का संकट कितना गंभीर हो गया है। देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि अटल कैंटीन चलाने वाले लोग भी गैस सिलेंडर न मिलने के कारण खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। उनके पास खाना बनाने के लिए पर्याप्त गैस नहीं है। छोटे कारोबारियों पर भी असरदेवेंद्र यादव ने कहा कि गैस सिलेंडर की कमी का असर सिर्फ गरीबों पर ही नहीं बल्कि छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में कई स्ट्रीट फूड विक्रेता, छोटे ढाबे और रेस्टोरेंट भी गैस की कमी के कारण बंद होने लगे हैं। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। जो लोग इन छोटे व्यवसायों के जरिए अपना परिवार चलाते थे, अब उनके सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोपदेवेंद्र यादव ने भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा के शासन में लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ही देश में बेरोजगारी और महंगाई की समस्या है, और अब गैस सिलेंडर की कमी के कारण लोगों को खाना तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। उनके अनुसार भाजपा की सरकार पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता देती है, जबकि गरीब और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। गैस संकट के पीछे सरकार की नाकामीदेवेंद्र यादव ने कहा कि देश में गैस सिलेंडर की कमी सरकार की गलत नीतियों और दूरदर्शिता की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे संघर्षों का असर भारत पर पड़ सकता है, इसका अनुमान सरकार को पहले से लगाना चाहिए था। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अगर युद्ध के तीसरे दिन ही देश में गैस की कमी दिखाई देने लगे तो इसका मतलब है कि सरकार ने पहले से कोई तैयारी नहीं की थी। देवेंद्र यादव के अनुसार, 140 करोड़ की आबादी वाले देश में सरकार के पास कम से कम छह महीने का पेट्रोलियम भंडार होना चाहिए था या फिर किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी होनी चाहिए थी। गरीबों के लिए संकट की स्थितिदेवेंद्र यादव ने कहा कि वर्तमान स्थिति गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बहुत कठिन बनती जा रही है। अटल कैंटीन और रैन बसेरों जैसी योजनाएं गरीबों के लिए सहारा होती हैं। लेकिन अगर इन योजनाओं में भी भोजन की कमी होने लगे तो गरीब लोगों के लिए जीवन और भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांग की कि गैस सिलेंडर की सप्लाई को जल्द से जल्द सामान्य किया जाए, ताकि गरीब लोगों को भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े।देवेंद्र यादव ने कहा कि सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि अटल कैंटीन और रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को नियमित रूप से भोजन

1973 तक वडनगर में प्लेटफॉर्म ही नहीं था, पीएम के चाय बेचने के दावे पर अय्यर का बड़ा सवाल

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित जातिवादी टिप्पणी करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां प्रधानमंत्री की जाति के लिए नहीं, बल्कि उनके चरित्र के लिए थीं। अय्यर ने अपने पुराने विवादित बयान पर सफाई देते हुए कहा, उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। अय्यर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बयान को जाति से इसलिए जोड़ा क्योंकि अय्यर खुद एक ब्राह्मण हैं। उन्होंने ‘चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता’ वाले बयान पर भी अपनी बात रखी। अय्यर ने कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने बताया कि उनकी आलोचना मोदी के ‘इतिहास के कम ज्ञान’ को लेकर थी। अय्यर के अनुसार, उन्होंने यह सवाल उठाया था कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे उनकी नजर में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी नहीं है, वह उस भूमिका (प्रधानमंत्री की) में कैसे हो सकता है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू थे। देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दियाअय्यर ने बताया कि उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर मोदी चुनाव हार जाते हैं, तो उनके लिए चाय बांटने का इंतजाम किया जा सकता है। उन्होंने मोदी के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने के दावे पर भी सवाल उठाए। अय्यर ने दावा किया कि 1973 तक वडनगर में कोई रेलवे प्लेटफॉर्म ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे भ्रामक दावों ने मोदी को प्रधानमंत्री बनने में मदद की। अंग्रेजी बोलने पर खुद को ‘मैकाले की संतान’ कहे जाने पर भी अय्यर ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को तमिल भाषा आती है? इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिमों के बारे में की गई टिप्पणियों ने देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दिया है।

संसद के दरवाजे पर पकौड़े खाना लोकतंत्र का अपमान, राहुल गांधी पर अमित शाह का सीधा प्रहार

असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गर्माहट बढ़ गई है। आरोप-प्रत्यारोप की तेज होती सियासत के बीच राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी रण में अपनी-अपनी तैयारी भी तेज कर दी है। इसी बीच दो दिवसीय असम दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुवाहाटी में नवनिर्मित प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की शुरुआत भी की। इस दौरान अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था है और वहां इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। अमित शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कभी-कभी संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय और पकौड़े खाते हैं और विरोध प्रदर्शन करते हैं। उनके अनुसार संसद परिसर ऐसा स्थान नहीं है जहां इस तरह का प्रदर्शन किया जाए। शाह ने कहा कि इससे देश की छवि दुनिया में खराब होती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार का विरोध करने और प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन संसद के अंदर चर्चा करने के बजाय इस तरह का तरीका अपनाना सही नहीं है। शाह ने यह भी कहा कि संसद में बहस से बचना और बाहर इस तरह की गतिविधियां करना लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है। गृह मंत्री ने कहा कि जब दुनिया भर के लोग भारत की ताकत और युवाओं की क्षमता देखने आते हैं, तब इस तरह के कदम देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी। महाराष्ट्र और कर्नाटक के स्तर तक पहुंचने लगीउद्घाटन के दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने पिछली कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय अपने नेताओं के परिवारों की आर्थिक सेहत सुधारने पर ज्यादा ध्यान दिया। उनके अनुसार उस समय असम का स्वास्थ्य तंत्र काफी खराब हालत में था और लोगों को बेहतर इलाज के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इसके साथ ही गृह मंत्री ने गोलाघाट और तिनसुकिया में बने कैंसर केंद्रों का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने वर्चुअल माध्यम से दिफू, जोरहाट और बरपेटा मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बनने वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की आधारशिला रखी। इतना ही नहीं अमित शाह ने गुवाहाटी के सिक्समाइल इलाके में बनने वाले स्वास्थ्य भवन और अभयापुरी जिला अस्पताल की भी आधारशिला रखी। केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने सीएम सरमा की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में असम के स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से सुधार हुआ है। शाह के मुताबिक अब असम की स्वास्थ्य व्यवस्था देश के विकसित राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के स्तर तक पहुंचने लगी है।