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देवेन्द्र यादव ने दिल्ली के अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी पर सरकार को घेरा

अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी दवाइयों की कमी का आरोपदिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी के कई सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों की भारी कमी हो गई है। खास तौर पर कुत्तों और अन्य जानवरों के काटने पर लगाए जाने वाले एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि रेबीज एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। यदि समय पर इसका टीका न लगाया जाए तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अस्पतालों में इन दवाइयों का उपलब्ध न होना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। अम्बेडकर अस्पताल में सबसे खराब हालातदेवेन्द्र यादव ने विशेष रूप से अम्बेडकर अस्पताल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की स्थिति बेहद खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग अस्पताल पहुंचे हैं जिन्हें कुत्तों ने काट लिया था। लेकिन अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और बाउंसर कई मरीजों को अंदर आने से रोक रहे हैं और उन्हें वापस भेज दिया जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। देवेन्द्र यादव के अनुसार, यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। रेबीज को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करने के बावजूद दवा नहींदेवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जनवरी 2026 में रेबीज को नोटिफिएबल बीमारी घोषित किया था। इसका मतलब है कि इस बीमारी के मामलों पर विशेष निगरानी और तुरंत इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद इस बीमारी को गंभीर मानकर इसे नोटिफिएबल घोषित कर चुकी है, तब अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन का उपलब्ध न होना सरकार की चिंता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह स्थिति दिखाती है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितनी गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट और स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश का भी नहीं हो रहा पालनदेवेन्द्र यादव ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में हर समय एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि हर अस्पताल में डॉग बाइट के मामलों के प्रबंधन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि अस्पताल में इन दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक बना रहे और मरीजों को समय पर इलाज मिले। देवेन्द्र यादव के अनुसार, इन आदेशों के बावजूद दिल्ली के अस्पतालों में दवाइयों की कमी होना बहुत गंभीर मामला है और यह सीधे तौर पर सरकारी लापरवाही को दर्शाता है। सरकार पर गैर जिम्मेदारी और असंवेदनशीलता का आरोपदेवेन्द्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों का उपलब्ध न होना सरकार की गैर जिम्मेदारी और असंवेदनशीलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को कुत्ता काट ले और उसे समय पर एंटी रेबीज टीका न मिले, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में सरकार का यह दायित्व है कि अस्पतालों में जरूरी दवाइयों का पर्याप्त इंतजाम हो। देवेन्द्र यादव ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि यह आपराधिक लापरवाही का मामला है और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। दिल्ली में कुत्ता काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरीदेवेन्द्र यादव ने बताया कि दिल्ली में कुत्ता काटने के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रतिदिन लगभग 2000 कुत्ता काटने के मामले सामने आए। उन्होंने बताया कि यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। अगस्त 2025 तक दिल्ली में करीब 35 हजार कुत्ता काटने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी थीं। अनुमान है कि दिसंबर 2025 तक यह संख्या 45 हजार से भी अधिक हो गई होगी। देवेन्द्र यादव ने कहा कि वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई मामले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते। रेबीज संक्रमण से मौतों के आंकड़े भी चिंताजनकदेवेन्द्र यादव ने कहा कि रेबीज संक्रमण के कारण होने वाली मौतों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में रेबीज संक्रमण के कारण 50 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 54 हो गई, जबकि वर्ष 2025 में अगस्त तक ही 49 लोगों की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसके बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों की कमी होना बेहद चिंताजनक है। अन्य अस्पतालों में भी दवाइयों की भारी कमीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि केवल अम्बेडकर अस्पताल ही नहीं, बल्कि दिल्ली के कई अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी जरूरी दवाइयों की कमी है। उन्होंने बताया कि लोकनायक अस्पताल, जीटीबी अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल, अम्बेडकर अस्पताल, राजन बाबू टीबी अस्पताल और जीबी पंत अस्पताल सहित कई अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों का अभाव है। इनमें एंटीबायोटिक्स, मधुमेह की दवाइयां, हृदय रोग से जुड़ी दवाइयां और रेबीज से बचाव के टीके शामिल हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि इन दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बजट बढ़ने के बावजूद अस्पतालों में दवाइयों की कमीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 66 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके तहत लगभग 12,893 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना बड़ा बजट होने के बावजूद अस्पतालों में जरूरी दवाइयों की कमी क्यों है। उनके अनुसार,

अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर लगाया शहीदों के अपमान और दिल्ली की समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप

फांसी घर के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर हमलाआम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में मौजूद कथित फांसी घर के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने के बाद उन्होंने कहा कि भाजपा को दिल्ली की जनता की समस्याओं की कोई चिंता नहीं है। उनका आरोप है कि भाजपा दिल्ली की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए फांसी घर को टिफिन रूम साबित करने की कोशिश कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऐसा करके भाजपा न केवल राजनीतिक विवाद पैदा कर रही है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों का अपमान भी कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शहीदों के सम्मान से जुड़े इस मुद्दे को लेकर हमेशा गंभीर रही है और आगे भी रहेगी। दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक इमारत और फांसी घर का इतिहासअरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली विधानसभा का परिसर एक ऐतिहासिक इमारत है। यह इमारत अंग्रेजों के समय बनाई गई थी। जब ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया, तब 1912 में इस भवन का निर्माण हुआ था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उस समय के विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल के प्रयासों से यह जानकारी सामने आई थी कि इस इमारत के एक हिस्से में एक फांसी घर मौजूद था। कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। अरविंद केजरीवाल के अनुसार, जब यह तथ्य सामने आया तो तत्कालीन स्पीकर ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में बुलाया और सुझाव दिया कि इस स्थान को लोगों के लिए खोला जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को समझ सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें। इसके बाद उस फांसी घर को सार्वजनिक रूप से खोला गया और उसका उद्घाटन भी किया गया। भाजपा पर फांसी घर को टिफिन रूम साबित करने का आरोपअरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार आई है, तब से वह इस स्थान को फांसी घर मानने से इनकार कर रही है। भाजपा इसे टिफिन रूम साबित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान होता है। केजरीवाल के अनुसार, उन्हें विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने बुलाकर यह साबित करने के लिए कहा गया कि वह स्थान वास्तव में फांसी घर था। उन्होंने समिति के सामने स्पष्ट कहा कि उस समय के स्पीकर ने पूरी जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही इसे फांसी घर घोषित किया था। इसके बाद केजरीवाल ने समिति से सवाल किया कि अगर भाजपा यह कह रही है कि वह स्थान टिफिन रूम था, तो उसके पास इसके क्या सबूत हैं। केजरीवाल का कहना है कि समिति के पास इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं था। उनके अनुसार, इसका मतलब यह है कि भाजपा जानबूझकर इस मुद्दे को उठाकर स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। दिल्ली की समस्याओं पर भी अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवालअरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले एक साल में दिल्ली की हालत खराब हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से शहर में कई समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कें टूटी हुई हैं, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और प्रदूषण की स्थिति भी बहुत खराब हो गई है। इसके अलावा मोहल्ला क्लीनिक बंद किए जा रहे हैं और अस्पतालों में दवाइयों की कमी हो रही है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि लोगों को पानी और बिजली के बहुत ज्यादा बिल मिल रहे हैं और कई जगह बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, इन सभी समस्याओं से दिल्ली के लोग परेशान हैं और उन्हें पहले की सरकार की याद आ रही है। केजरीवाल ने अपने अनुभव साझा करने की बात कहीअरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह लगभग दस साल तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं और उन्हें प्रशासन चलाने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा की कोई समिति उनसे यह पूछती कि दिल्ली में सीवर व्यवस्था कैसे सुधारी जाए, सड़कों की मरम्मत कैसे की जाए या बिजली-पानी की व्यवस्था को कैसे बेहतर बनाया जाए, तो उन्हें खुशी होती। उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभव को साझा करने के लिए हमेशा तैयार हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल दिल्ली का विकास देखना है। उनके अनुसार, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार किस पार्टी की है, महत्वपूर्ण यह है कि दिल्ली की जनता को बेहतर सुविधाएं मिलें। भाजपा पर केवल राजनीति करने का आरोपअरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य काम करना नहीं, बल्कि केवल राजनीति करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिल्ली की समस्याओं को हल करने के बजाय विवादित मुद्दों को उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद है कि जिस स्थान को स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी से जोड़ा जाता है, उसे टिफिन रूम साबित करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, इससे देश के शहीदों का सम्मान कम होता है। सोशल मीडिया पर भी अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रियाअरविंद केजरीवाल ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अंग्रेजों के समय बनी दिल्ली विधानसभा के एक हिस्से में स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी और वर्ष 2022 में इस तथ्य को सामने लाया गया था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को इतिहास से परिचित कराना और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाना था। लेकिन अब भाजपा सरकार इसे फांसी घर मानने से इनकार कर रही है और इसे टिफिन रूम साबित करने में लगी हुई है। केजरीवाल के अनुसार, यह स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ है और इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। विधानसभा में पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवालविधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेशी के दौरान अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनकी सुरक्षा के साथ लापरवाही की गई। पार्टी के अनुसार, जब अरविंद केजरीवाल