आम आदमी पार्टी की राजनीति की नींव ईमानदारी पर टिकी है – सोमनाथ भारती

सरिता साहनीनई दिल्ली – 02 फ़रवरी 2026 आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने पार्टी कार्यालय में एक अहम प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय राजनीति, भ्रष्टाचार और भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। सोमनाथ भारती ने साफ शब्दों में कहा कि आम आदमी पार्टी का जन्म ही राजनीति में ईमानदारी लाने के उद्देश्य से हुआ था और पार्टी आज भी उसी रास्ते पर मजबूती से चल रही है। दिल्ली और पंजाब में ईमानदार सरकार का उदाहरणसोमनाथ भारती ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जब दिल्ली में सरकार बनाई, तब उसने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी से भी सरकार चलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बिना किसी घोटाले के काम किया। इसी तरह आज पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की सरकार ईमानदारी के साथ जनता के लिए काम कर रही है।उन्होंने कहा कि यह बात भाजपा को शुरू से खटकती रही है, इसलिए वह आम आदमी पार्टी और खासतौर पर अरविंद केजरीवाल की ईमानदार छवि को खराब करने की कोशिश करती रही है। अरविंद केजरीवाल पर झूठे आरोप, लेकिन सबूत नहींसोमनाथ भारती ने कहा कि भाजपा ने बार-बार अरविंद केजरीवाल जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, लेकिन आज तक एक भी आरोप साबित नहीं कर पाई। उन्होंने साफ कहा कि झूठे आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि जब किसी पर आरोप लगाया जाता है तो सबूत भी होने चाहिए, लेकिन भाजपा के पास आज तक कोई ठोस सबूत नहीं है। जीतन राम मांझी के बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किएप्रेस वार्ता के दौरान सोमनाथ भारती ने एक वीडियो का ज़िक्र किया और कहा कि यह वीडियो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का है। उन्होंने बताया कि जीतन राम मांझी 1980 से राजनीति में हैं और हाल ही में 21 दिसंबर 2025 को गया (बिहार) में अपने नेताओं को संबोधित कर रहे थे। इस वीडियो में जीतन राम मांझी यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि हर सांसद और विधायक विकास कार्यों में कमीशन खाता है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बेटे से भी यह कहने की बात कही कि वह पार्टी अध्यक्ष है और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सांसद और विधायक कमीशन लें। भ्रष्टाचार को खुलकर स्वीकार करना बेहद गंभीरसोमनाथ भारती ने कहा कि आज तक राजनीति में भ्रष्टाचार की बातें तो होती रही हैं, लेकिन इस तरह खुले मंच से कोई मंत्री यह स्वीकार करे कि सांसद और विधायक कमीशन लेते हैं, यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चिंता जता चुका है, लेकिन इस तरह का खुला बयान पहले कभी सामने नहीं आया। कानूनी नोटिस और माफ़ी की मांगसोमनाथ भारती ने बताया कि उन्होंने इस बयान का संज्ञान लिया और जीतन राम मांझी को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में उन्होंने साफ कहा कि आम आदमी पार्टी ईमानदारी के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे बयान से सभी जनप्रतिनिधियों की छवि खराब होती है। उन्होंने जीतन राम मांझी से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग की। मोदी और नीतीश कुमार को भी लिखी चिट्ठीसोमनाथ भारती ने बताया कि चूंकि जीतन राम मांझी मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी चिट्ठी भेजी। उन्होंने मांग की कि जीतन राम मांझी के बेटे को बिना चुनाव जीते मंत्री बनाए जाने के मामले पर ध्यान दिया जाए और पूरे मामले का ऑडिट कराया जाए। सरकार की चुप्पी पर सवालसोमनाथ भारती ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से अब तक कोई बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री खुलेआम भ्रष्टाचार की बात स्वीकार कर रहा है, तब सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। वीडियो मौजूद, फिर भी बयान से इनकारसोमनाथ भारती ने बताया कि जीतन राम मांझी की ओर से उन्हें जवाब मिला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। इस पर सोमनाथ भारती ने कहा कि जब वीडियो साफ मौजूद है, तब इस तरह से बयान से इनकार करना सच्चाई से भागने जैसा है। उन्होंने कहा कि वीडियो खुद सबूत है। भ्रष्टाचार को ‘नॉर्मल’ बनाने की कोशिशसोमनाथ भारती ने कहा कि सबसे खतरनाक बात यह है कि भ्रष्टाचार को सामान्य यानी “नॉर्मल” बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब कोई मंत्री यह कहता है कि 5 या 10 प्रतिशत कमीशन खुले में लो, तो यह पूरे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। केजरीवाल पर आरोप, लेकिन मंत्रियों पर कोई कार्रवाई नहींउन्होंने सवाल उठाया कि अरविंद केजरीवाल जी पर झूठे आरोपों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन जब एक मंत्री खुद भ्रष्टाचार स्वीकार कर रहा है, तब उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। मोदी राज में भ्रष्टाचार को सामान्य बना दिया गयाप्रेस वार्ता के अंत में सोमनाथ भारती ने कहा कि आज के दौर में मोदी सरकार के राज में भ्रष्टाचार को सामान्य बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस सोच के खिलाफ लड़ती रहेगी और ईमानदार राजनीति के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेगी।
आय दोगुनी नहीं, अब ‘बहु-गुणित’ होगी मुख्यमंत्री योगी का नया कृषि मॉडल, गन्ने के साथ दलहन-तिलहन की खेती से मालामाल होंगे किसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका ‘गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तः फसली खेती’ को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि ‘बहु-गुणित’ करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाएमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि ‘गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए।
दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, उन्हें दोष देती हूँ जो शीर्ष पर बैठे, बंगा भवन के बाहर सुरक्षाकर्मियों पर भड़कीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली के बंगा भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों का सामना किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में किसी आंदोलन के लिए नहीं आई हैं। उनका मकसद चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना है। ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद वो बंगा भवन गईं, जो दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का गेस्ट हाउस है। वहां वे परिवार ठहरे हुए हैं जो बंगाल में चुनावी सूची की जांच प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। इमारत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात देखकर मुख्यमंत्री नाराज हो गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वे बंगाल के लोगों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगा भवन में बंगाल के लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा, “हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हमारी चुनाव आयोग के साथ बैठक तय है। लोग परेशान हैं, क्या उनके परिवार मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?” मुख्यमंत्री ने कहा, जहां भी एसआईआर से प्रभावित परिवार ठहरे हैं, वहां दिल्ली पुलिस तैनात है। जब दिल्ली में धमाका होता है तो दिल्ली पुलिस कहां होती है? मुख्यमंत्री ने कहा मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं उन लोगों को दोष देती हूं जो शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग देश की रक्षा करने में नाकाम हैं और आम लोगों पर एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की तुलना एक जमींदारी से की, जहां गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।
किसी एक मुद्रा पर भरोसा नहीं! जानिए क्यों सोने की तरफ भाग रहे हैं निवेशक? निर्मला सीतारमण का बड़ा खुलासा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की बजट रणनीति में निवेश को प्राथमिक औजार बनाया गया है, ताकि आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट का फोकस ऐसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता मौजूद है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि यह वैश्विक अनिश्चितता की वजह से हो रहा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को फिलहाल किसी एक मुद्रा पर पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए वे सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं। सीतारमण ने कहा है कि 7-8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि इससे सभी नागरिकों को फायदा होगा और ज्यादा रोजगार पैदा होंगे। नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रहीवित्त मंत्री ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी रहती है, तो उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजr से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने के लिए 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, ज्यादा लोग कार्यबल से जुड़ते हैं और उत्पादकता में सुधार होता है। महिलाओं की भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ता अब महिलाओं की दक्षता और सटीक कामकाज को अधिक महत्व देने लगे हैं। इसका असर यह है कि सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बोर्डरूम और नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी अभी भी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि ज्यादा महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए, ताकि वे फैसलों को प्रभावित कर सकें और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें।