गणतंत्र दिवस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप, खरगे बोले विपक्ष और संविधान का हुआ अपमान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में विपक्ष के नेताओं का अपमान किया गया है। खरगे के अनुसार, सरकार ने जानबूझकर प्रोटोकॉल के नियमों की अनदेखी की और विपक्षी नेताओं को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार हैं। अपनी बात रखते हुए खरगे ने कहा कि वह देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनके और राहुल गांधी के पास कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। प्रोटोकॉल के हिसाब से कैबिनेट रैंक वाले नेताओं को पहली कतार में जगह मिलनी चाहिए। इसके बावजूद, उन्हें समारोह में तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस लाइन में उन्हें जगह दी गई, वहां राज्य मंत्री और बच्चे बैठे थे। अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्ट जवाब देकांग्रेस अध्यक्ष ने पास मिलने में हुई परेशानियों का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने सचिवों को भेजकर बैठने की जगह की जानकारी जुटानी पड़ी। उन्हीं सचिवों ने काफी कोशिशों के बाद पास का इंतजाम किया। खरगे ने सरकार के इस व्यवहार को सिर्फ कांग्रेस का नहीं, बल्कि देश के संविधान और पूरे विपक्ष का अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्ट जवाब दे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट रैंक होने के बाद भी उन्हें और राहुल गांधी को तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने इसे विपक्ष और संविधान का अपमान बताते हुए सरकार से इस पर जवाब मांगा है।
केंद्रीय लेबर कोड पर केरल सरकार सख्त, मंत्री शिवनकुट्टी बोले मजदूर विरोधी नीतियां नहीं होंगी स्वीकार

केरल के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने मंगलवार को केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताया। विधानसभा में उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार नए लेबर कोड को रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार पर हर संभव दबाव बनाएगी। यह मामला सीपीआई(एम) विधायक पी. नंदकुमार ने सदन में उठाया था। उन्होंने कहा कि नए नियम नौकरी की सुरक्षा को खत्म करते हैं और वेतन की शर्तों का उल्लंघन करते हैं। मंत्री शिवनकुट्टी ने विधायक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि केरल सरकार मजदूरों के खिलाफ किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगी। श्रमिक अधिकारों से समझौता नहींपिछले महीने, मंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार केंद्रीय श्रम कोड का अध्ययन करने, श्रमिकों पर उनके प्रभाव का आकलन करने और सुधारात्मक उपायों का सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन करेगी। शिवनकुट्टी ने कहा था कि 29 प्रमुख श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार श्रम कोड श्रमिकों के बजाय कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों के विपरीत हैं। उन्होंने दावा किया था कि जहां अधिकांश राज्यों ने श्रम कोड के अनुरूप अपने कानूनों में संशोधन किया है, वहीं केरल ने यह दृढ़ रुख अपनाया है कि वह कोई भी मजदूर विरोधी संशोधन पेश नहीं करेगा। केंद्रीय श्रम कानूनों को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच टकराव गहराता जा रहा है। केरल सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह श्रमिक अधिकारों से समझौता नहीं करेगी और मजदूरों के हितों के खिलाफ किसी भी नीति का खुलकर विरोध करेगी।
ममता बनर्जी से मिले अखिलेश यादव, बोले“भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला सिर्फ दीदी ही कर सकती

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात कोलकाता में राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हुई। अखिलेश यादव अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव के साथ एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने कोलकाता आए थे। दोपहर करीब 1:40 बजे उन्होंने मुख्यमंत्री से उनके दफ्तर में बातचीत की। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी ईडी (ईडी) को हरा दिया है और वह आने वाले समय में भाजपा को भी हराएंगी। अखिलेश कहा, BJP अभी तक पेन ड्राइव खोने का दर्द नहीं भूल पाई है, यह कथित तौर पर उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संदर्भ में था जिन्हें सीएम छापे के दौरान एजेंसी के तलाशी अभियान परिसर से बाहर लाई थीं। चुनाव में धांधली का आरोप लगायाअखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समाज में फूट डालने की राजनीति करती है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा इसके जरिए अपने वोट बढ़ाने के बजाय विरोधियों के वोट कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने कहा कि बंगाल, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में यह अभ्यास सिर्फ विपक्ष को कमजोर करने का एक जरिया बन गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा का मुकाबला कर सकती हैं। अखिलेश ने भाजपा पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल और चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।
ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज केन रिचर्डसन ने क्रिकेट से लिया संन्यास, 2021 टी20 वर्ल्ड कप विजेता टीम का रहे हिस्सा

ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज केन रिचर्डसन ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया है। 34 साल के इस तेज गेंदबाज ने मंगलवार को इसका एलान किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम का 25 वनडे और 36 टी20 में प्रतिनिधित्व किया। साथ ही वह 2021 में टी20 विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का भी हिस्सा रहे थे। घरेलू क्रिकेट में नॉर्दर्न टेरिटरी और साउथ ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले रिचर्डसन ने लिस्ट-ए डेब्यू 2008-09 सीजन में किया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 2013 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच से हुई। रिचर्डसन बिग बैश लीग (BBL) के लगातार सभी सीजन खेलने वाले कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे। मैंने एक क्रिकेटर बनने का सपना देखाउन्होंने एडिलेड स्ट्राइकर्स के लिए छह सीजन खेले, उसके बाद 2017-18 में मेलबर्न रेनेगेड्स से जुड़े और आठ सीजन तक टीम का हिस्सा रहे। इसके बाद 2025-26 सीजन से पहले उन्होंने सिडनी सिक्सर्स के साथ एक साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। वे अपने BBL करियर को 142 विकेट के साथ प्रतियोगिता के पांचवें सबसे सफल गेंदबाज के रूप में समाप्त करते हैं। रिचर्डसन ने कई देशों में फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट भी खेला, जिसमें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) भी शामिल है। संन्यास की घोषणा करते हुए रिचर्डसन ने कहा, ‘2009 में डेब्यू करने से लेकर अब तक, मुझे लगता है कि मैंने खुद से जितना निकाल सकता था, निकाल लिया है और यह एक बेहद खूबसूरत सफर को खत्म करने का सही समय है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे अपने देश और दुनिया भर में कई फ्रेंचाइज़ी टीमों के लिए खेलने का मौका मिला। मैंने कभी इन मौकों को हल्के में नहीं लिया और मैं उम्मीद करता हूं कि लोग समझ पाए हों कि बचपन से डार्विन में मैंने एक क्रिकेटर बनने का सपना देखा था।’
अमेरिका से दूरी, चीन से नज़दीकी? ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर का सात साल बाद चीन दौरा

वैश्विक हालात इन दिनों तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका का दबदबा सिमट रहा है और एक समय अमेरिका के करीबी सहयोगी ही अब उसे आंखें दिखा रहे हैं। हाल ही में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने चीन का दौरा किया था और चीन के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की बात कही। इसे लेकर ट्रंप ने कड़ी नाराजगी जताई थी, लेकिन अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी चीन दौरे पर पहुंच रहे हैं। इसे भी यूरोप के अमेरिका के पाल से दूर जाने के तौर पर देखा जा रहा है। कीर स्टार्मर और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात बुधवार को होगी। इस दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बार साल 2018 में किसी ब्रिटिश पीएम ने चीन का दौरा किया था और अब करीब सात साल बाद अब कीर स्टार्मर चीन पहुंच रहे हैं। स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सकेइस दौरे से ब्रिटेन और चीन अपने व्यापारिक संबंधों को बेहतर करने की कोशिश करेंगे। हालांकि चीन दौरे के चलते कीर स्टार्मर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है। कीर स्टार्मर से पहले कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी चीन का दौरा किया था। जिस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर कनाडा ने चीन से व्यापार समझौता किया तो वे कनाडा से होने वाले आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। अमेरिकी धमकी के बाद कनाडा के पीएम ने साफ किया कि वे, चीन के साथ व्यापार समझौता नहीं करने जा रहे। कीर स्टार्मर के साथ ही उनके व्यापार मंत्री और कई कंपनियों के प्रमुख भी चीन दौरे पर जा रहे हैं। ब्रिटेन की मंशा है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार चीन में एंट्री मिले, जिससे उसकी कारों और स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सके। चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआवहीं यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर कर चीन अपने वैश्विक दबदबे में इजाफा करने की इच्छा रखता है। हालांकि ब्रिटेन और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं, जिनमें रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चीन का रूस को समर्थन देना, चीन का ब्रिटेन की जासूसी करना, हॉन्गकॉन्ग में चीन द्वारा किया जा रहा अत्याचार आदि कई वजह हैं, जिन्हें लेकर ब्रिटेन द्वारा चीन के साथ अपने संबंधों को शक की निगाह से देखा जाता है। ब्रिटेन ने भी अपने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से चीनी कंपनियों को निकालकर और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआ है। ऐसे में अब दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाना आसान नहीं है, लेकिन कीर स्टार्मर के इस दौरे से शुरुआत हो सकती है।