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राज्यसभा में दशकों से अटके विधेयक, 1992 का जनसंख्या नियंत्रण बिल अब भी लंबित

भारतीय संसदीय व्यवस्था में राज्यसभा एक ‘स्थायी सदन’ की भूमिका निभाती है। वर्तमान में यहां 19 सरकारी विधेयक लंबित हैं। इनमें से कुछ तो दशकों पुराने हैं। इसमें सबसे पुराना विधेयक जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसे साल 1992 में पेश किया गया था। चूंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसलिए यहां पेश किए गए विधेयक स्वतः समाप्त नहीं होते। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि लोकसभा के भंग होने पर वहां लंबित सभी विधेयक खत्म नहीं होता। सबसे पुराना ‘संविधानसदन के एक बुलेटिन के मुताबिक, सबसे पुराना ‘संविधान (79वां संशोधन) विधेयक 1992’ है। इस बिल में छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा देने और इसे मौलिक कर्तव्य बनाने की बात कही गई थी। इसमें यह भी प्रस्ताव था कि अगर किसी सांसद या विधायक के दो से ज्यादा बच्चे हों, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाए। लंबित विधेयकों में ‘दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक 1997’ भी है। इसे किराया कानूनों को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन मकान मालिकों और किराएदारों ने इसका काफी विरोध किया। इसके अलावा ‘बीज विधेयक 2004’ भी अटका है, जिसका मकसद बीजों की गुणवत्ता सुधारना था। सरकार अब इसकी जगह बीज विधेयक 2025 लाने की तैयारी कर रही है। उपयोग से संबंधितमौजूदा एनडीए सरकार के समय पेश किए गए लंबित विधेयकों में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) विधेयक 2019 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त परिषदों की वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाना तथा पूर्वोत्तर में आदिवासी स्वायत्तता को मजबूत करना है। इसी श्रेणी में अनिवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण से जुड़ा विधेयक 2019 भी शामिल है। राज्यसभा में सबसे नया लंबित विधेयक कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 है, जो देश में कीटनाशकों के नियमन और सुरक्षित उपयोग से संबंधित है।

विवादित बयान पर घिरे कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया, सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी से की सख्त कार्रवाई की मांग

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के हालिया बयान ने देश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विशेष वर्ग की महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों को धार्मिक ग्रंथों से जोड़कर अभद्र टिप्पणी कर दी। साथ ही उन्होंने अपने बयान में आपराधिक कार्यों को तीर्थ यात्रा से भी जोड़ते हुए पुण्य का बता दिया। राहुल गांधी के मध्यप्रदेश आगमन से पहले कांग्रेस की चुप्पी को बरैया के बयान का समर्थन माना जा रहा है, जिससे सियासी घमासान और तेज हो गया है। कांग्रेस विधायक के इस विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी से विधायक बरैया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बयान महिला-विरोधीमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का बयान महिला-विरोधी है। ऐसे नेता समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर आ रहे हैं। उनसे वे मांग करते हैं कि ऐसे कांग्रेस नेता को निलंबित किया जाना चाहिए। कांग्रेस के विधायक फूल सिंह बरैया ने समाज में विद्वेष फैलाने का काम किया है। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी से उम्मीद करता हूं कि वे विधायक को निलंबत करें, ताकि लगे कि उनके मन में सभी के प्रति समान भावना है। अपराधी मानसिकता पर चुपभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने एक्स पर बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इंदौर में राहुल गांधी के साथ मंच पर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया दिखे हैं। यह सहमति है या स्वीकारोक्ति है। अब स्पष्ट है कि महिलाओं के प्रति दूषित, विकृत और कुंठित मानसिकता सिर्फ़ बरैया की नहीं, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पूरी कांग्रेस की सोच है। अगर आपत्ति होती, तो मंच साझा नहीं किया जाता। सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी महिला सम्मान की बातें तो करती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की अपराधी मानसिकता पर चुप हैं।