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गोवा क्लब अग्निकांड, सौरभ और गौरव लूथरा ने अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली कोर्ट में याचिका दायर की

गोवा क्लब अग्निकांड मामले में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई, जहां आरोपी गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा ने भारत लौटने औरइस मामले में अग्रिम जमानत पाने के लिए अर्जी दी है। दोनों आरोपियों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा, सीनियर एडवोकेटतनवीर अहमद मीर पेश हुए और अंतरिम सुरक्षा की मांग की। सुनवाई के दौरान, आरोपी सौरभ लूथरा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थलूथरा ने मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए आरोपी सौरभ लूथरा की सेहत की स्थिति बताई, जिसे मिर्गी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारी है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरोपी क्लब के मालिक नहीं हैं, बल्कि सिर्फ लाइसेंसधारी हैं, जो वैध परमिशन के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंनेसाफ किया कि मालिकाना हक किसी और के पास है। गिरफ्तारी से सुरक्षा मांग रहेदिल्ली की रोहिणी कोर्ट में गोवा नाइट क्लब आग मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान रोहिणी कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता शारीरिक तौर परउसके अधिकार क्षेत्र में मौजूद नहीं है, कोर्ट ने सवाल किया कि ऐसी परिस्थितियों में अग्रिम जमानत की याचिका को कैसे स्वीकार किया जा सकताहै? जवाब में लूथरा भाईयों के वकील तनवीर अहमद मीर ने कोर्ट के सवाल का जवाब देने के लिए कानूनी मिसालों का हवाला दिया। उन्होंने कहा किवह यह एप्लीकेशन इसलिए दे रहे हैं क्योंकि याचिकाकर्ता कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का स्थायी निवासी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह सिर्फ गिरफ्तारीसे सुरक्षा मांग रहे हैं। रेस्तरां मालिक का अवॉर्ड भी मिलाहालांकि राज्य के वकील ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि आरोपी देश छोड़कर भाग गया है, गोवा कोर्ट नेपहले ही गैर-जमानती वारंट जारी कर चुका है और अन्य जरूरी तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने की जरूरत है। कोर्ट ने राज्य को सभी जरूरी सूचनाओ के साथअपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले पर अगले दिन विचार करने के लिए तारीख तय की। आरोपियों के वकील ने तनवीर अहमदमीर ने कोर्ट से अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को अंतरिम सुरक्षा देने का आग्रह किया। राज्य के वकील ने इस अनुरोध का विरोध किया और किसीभी तरह की अंतरिम राहत देने का कड़ा विरोध किया। इस नाइट क्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा हैं। क्लब की आधिकारिक वेबसाइटके मुताबिक, सौरभ लूथरा एक गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर हैं, जो कि बाद में आंत्रप्रेन्योर बन गए और रेस्तरां के बिजनेस से जुड़े हैं। यह भी दावा किागया है कि 2023 में सौरभ को आदर्श रेस्तरां मालिक का अवॉर्ड भी मिला और पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं।

BJP की आलोचना पर प्रियंका गांधी बोलीं, पीएम विदेश में, विपक्ष क्यों नहीं? BJP के निशाने का जवाब दिया

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को पार्टी के नेता राहुल गांधी की आगामी जर्मनी यात्रा को लेकर भाजपा की आलोचना का जवाब दिया।उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना लगभग आधा समय देश केबाहर बिताते हैं। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी में रहेंगे। इस दौरान वह भारतीय समुदाय से मिलेंगेऔर जर्मन मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। भाजपा ने राहुल गांधी की आगामी विदेश यात्रा पर तंज कसा और कहा कि ‘राहुल तो विपक्ष के नेता नहीं, बल्कि पर्यटन के नेता हैं। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर लिखा कि संसद 19 दिसंबर तक चल रही है। लेकिन राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार चुनाव के दौरान भी राहुल विदेश में थे और बाद में जंगल सफारी पर चले गए थे। राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी में रहेंगेप्रियंका गांधी ने भाजपा के हमले पर पलटवार करते हुए कहा, मोदी जी अपने काम का आधा समय विदेश में बिताते हैं… फिर विपक्ष के नेता केविदेश जाने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के जर्मनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने बताया कि राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी दौरे पर रहेंगे और उनके साथ सैम पित्रोदा भी होंगे।कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सांसद राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा पर भाजपा की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि जब पीएम मोदी आधा समयविदेश में बिताते हैं तो विपक्ष के नेता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी में रहेंगे और भारतीय समुदाय वजर्मन मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।

शशि थरूर ने वीर सावरकर पुरस्कार लेने से किया इनकार, कांग्रेस ने भी किया समर्थन

वीर सावरकर पुरस्कार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वीर सावरकर पुरस्कार लेने सेइनकार कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि उन्होंने यह पुरस्कार कल ही (मंगलवार) के दिन सुनाऔर वे पुरस्कार समारोह में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में कल ही सुना। मैं वहां नहीं जा रहा हूं। शशि थरूर ने साफ किया कि वहवी.डी. सावरकर के नाम पर दिया जाने वाला कोई भी पुरस्कार स्वीकार नहीं करेंगे और न ही इससे जुड़े किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे। तिरुवनंतपुरमसे सांसद थरूर ने यह भी कहा कि मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना आयोजकों की ओर से गैरजिम्मेदाराना हरकत थी। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दियाथरूर के बयान के बाद पुरस्कार देने वाली हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (एचआरडीएस) इंडिया के सचिव अजी कृष्णन ने एक टीवी चैनल कोबताया कि कांग्रेस सांसद को इस मामले की जानकारी काफी पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि एचआरडीएस इंडिया के प्रतिनिधियों औरपुरस्कार जूरी के अध्यक्ष ने थरूर को आमंत्रित करने के लिए उनके आवास पर उनसे मुलाकात की थी और सांसद ने पुरस्कार के अन्य प्राप्तकर्ताओं कीसूची मांगी थी। उन्होंने दावा करते हुए कहा, ‘हमने उन्हें सूची दे दी थी। उन्होंने अभी तक हमें सूचित नहीं किया है कि वे कार्यक्रम में नहीं आएंगे।शायद वे डरे हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दिया है। सामने झुकाव दिखायासोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘पुरस्कार की प्रकृति, इसे प्रदान करने वाले संगठन या किसी अन्य प्रासंगिकविवरण के बारे में स्पष्टीकरण के अभाव में, आज कार्यक्रम में मेरी उपस्थिति या पुरस्कार स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।’ उन्होंने आगे कहा किउन्हें मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि मंगलवार को स्थानीय निकाय चुनावों में वोट डालने के लिए केरल जाने पर उन्हें इस पुरस्कार के लिए नामांकितकिया गया था। दूसरी ओर कांग्रेस नेता के मुरलीधरन ने बुधवार को इस मामले में कहा कि किसी भी कांग्रेस सदस्य को चाहे वह सांसद शशि थरूर हीक्यों न हों वीर सावरकर के नाम का कोई भी पुरस्कार नहीं लेना चाहिए। मुरलीधरन ने इसका कारण बताया कि सावरकर ने ब्रिटिशों के सामने झुकावदिखाया था। मुरलीधरन ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि शशि थरूर यह पुरस्कार स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसा करना कांग्रेस पार्टी के लिए अपमानऔर शर्मिंदगी का कारण बन सकता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026, हुमायूं कबीर ने बनाई नई पार्टी और कहा, ‘बिना हमारी पार्टी के कोई सरकार नहीं बनेगी’

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है। इससे पहले राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी रण में अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने केलिए तैयारी तेज कर दी है। हालांकि इन सबके बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उसके निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के बीच विवादबढ़ता ही जा रहा है। जहां एक बार फिर हुमायूं कबीर ने अपनी एक नई पार्टी बनाने की बात पर जोर देते हुए दावा किया कि 2026 के विधानसभाचुनावों के बाद वह ‘किंगमेकर’ बनेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी बनाई जाने वाली नई राजनीतिक पार्टी के बिना कोई भी सरकार नहीं बन सकती।हालांकि दूसरी ओर टीएमसी ने भी हुमायूं कबीर के बयान पर पलटवार किया है। पार्टी के राज्य महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि वह केवल सपनादेख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर दिन-दहाड़े सपना देख रहे हैं। पहले अपनी सुरक्षा जमा बचाने की कोशिश करें, फिर सरकार बनाने की बातकरें। ऐसे बेतुके दावे सिर्फ उनकी राजनीतिक हताशा दिखाते हैं। विधायकों का समर्थन लेना पड़ेगाकबीर ने पश्चिम बंगाल में अपनी-अपनी दावेदारी प्रबल बताने वाली भाजपा और टीएमसी दोनों पार्टियों को आड़ेहाथ लेते हुए कहा कि न तो टीएमसीऔर न ही भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटका बहुमत पार नहीं कर पाएगी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुमायूं कबीर ने कहा कि मैं चुनावों के बाद किंगमेकर बनूंगा। कोई भी मेरी पार्टी कासमर्थन लिए बिना सरकार नहीं बना सकता। कबीर ने यह भी बताया कि उनकी नई पार्टी की औपचारिक घोषणा 22 दिसंबर को होगी। उन्होंने कहाकि वे 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और उनकी पार्टी इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा, उसे उनकी पार्टी के विधायकों कासमर्थन लेना पड़ेगा। विधानसभा में बने रहेंगेइसके साथ ही जब उनसे पूछा गया कि उनकी पार्टी का नाम ‘नेशनल कंजरवेटिव पार्टी’ होगा या नहीं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सबकुछ 22 दिसंबर के बाद पता चल जाएगा। कबीर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी 22 दिसंबर को बड़े जनसभा में लॉन्च की जाएगी, जिसमें लगभग एक लाखलोग शामिल होंगे। कार्यक्रम बेरहामपुर टेक्सटाइल मोर में आयोजित होगा। बता दें कि टीएमसी के निलंबित विधायक कबीर और टीएमसी के बीचखाई तब और बढ़ गई जब कबीर ने छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद के मॉडल पर नई मस्जिद का नींव डाली किया। यह तारीखयूपी के अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की बरसी थी। ऐसे में टीएमसी ने पिछले सप्ताह उन्हें पार्टी नियमों की अवहेलना और उनके विवादितबयानों के कारण निलंबित कर दिया, जिसके बाद पहले कबीर ने संकेत दिया था कि वे विधायक पद से इस्तीफा देंगे, लेकिन सोमवार को उन्होंनेअचानक रुख बदलते हुए कहा कि वे विधानसभा में बने रहेंगे।

लोकसभा में कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, “पीएम मोदी EVM नहीं, लोगों के दिल हैक करते हैं”

लोकसभा में चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद का पूरा साल विपक्ष केहंगामे में बीता और नए सांसद होने के नाते यह अनुभव उनके लिए परेशान करने वाला रहा। कंगना ने विवादों, नारेबाजी और सदन की कार्यवाही रोकनेके विपक्ष के तरीकों को लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया। इस दौरान विपक्ष के ईवीएम हैक करने वाले आरोपों पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदीईवीएम हैक नहीं करते बल्कि लोगों को दिलों को हैक करते हैं। कंगना ने अपने भाषण की शुरुआत विपक्ष के एसआईआर नारे और विपक्ष द्वारा किएगए हंगामे को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार कोई काम आगे बढ़ाती, विपक्ष उसका विरोध करने के लिए नियमों को तोड़ता।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास न तो ठोस तथ्य हैं और न ही कोई स्पष्ट रणनीति। कंगना ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलनेउठे तो उनसे उम्मीद थी कि कोई बड़ा खुलासा होगा, पर उनका भाषण बिना तथ्यों और गंभीरता के था। चुनावी धांधली में एक प्रधानमंत्री तक दोषी पाई गईकंगना ने विपक्ष द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय मूल की महिला की तस्वीर उठाने को गंभीर अपमान बताया। उन्होंने कहा कि उस महिला ने खुद सोशल मीडियापर कहा था कि उसका भारत से कोई संबंध नहीं है और वह भारत कभी नहीं आई। इसके बावजूद विपक्ष ने उसकी तस्वीर का दुरुपयोग किया। कंगनाने सदन की ओर से उस महिला से माफी भी मांगी और इसे महिलाओं के सम्मान पर चोट बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार-बार महिलाओं केअपमान में शामिल होती रही है, जबकि प्रधानमंत्री ने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कंगना ने ईवीएम परविपक्ष के आरोपों को आधारहीन कहा। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव में गड़बड़ी की असल घटनाएं कांग्रेस शासन के दौरान बैलेट पेपर के समय हुईथीं। उन्होंने इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण केस का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनावी धांधली में एक प्रधानमंत्री तक दोषी पाई गई थीं। यह उत्सव एकसाथ होना चाहिएकंगना ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कांग्रेस ईवीएम पर सवाल उठाती है, जबकि वास्तविक धांधलियां उसके शासन में होती थीं। उन्होंनेप्रियंका गांधी के बयान “पुरानी बातें न करें” पर भी तंज कसते हुए कहा कि सोनिया गांधी बिना पूरी नागरिकता के भी वोट डालती रही थीं। कंगना नेकहा कि बिहार में एसआईआर लागू होने के बाद 60 लाख से ज्यादा गैर-वैध वोटर आईडी रद्द किए गए। इनमें घुसपैठियों के अलावा ऐसे लोग भीशामिल थे जो इस दुनिया में नहीं रहे या कहीं और स्थानांतरित हो चुके थे। उन्होंने कहा कि अगर ये वोटर असली होते तो कोई न कोई विरोध में सामनेआता। कंगना ने बताया कि इन सुधारों के बाद ही बिहार में 67% की रिकॉर्ड मतदान हुआ, जो लोगों के विश्वास की बड़ी मिसाल है।कंगना ने वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने की जोरदार मांग की और कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश को भारी आर्थिक नुकसान होता है।10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बोझ बार-बार चुनावों में खर्च होता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों, प्रशासन और पूरे सिस्टम पर इसकी भारी मारपड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों को लोकतंत्र का उत्सव कहा है और यह उत्सव एकसाथ होना चाहिए। कंगना ने अपने भाषणका अंत जय हिंद के नारे के साथ किया।

सीईसी चयन पैनल से CJI को हटाने पर लोकसभा में तीखी बहस, कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने

लोकसभा में बुधवार को चुनाव सुधारों पर उस समय जोरदार बहस छिड़ गई जब कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त(सीईसी) और चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को हटाए जाने पर अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों दलों नेइस मुद्दे पर अपनी ठोस राय सामने रखकर सदन का माहौल गरम कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से पूछा कि आखिर वहसुप्रीम कोर्ट की उस व्यवस्था से पीछे क्यों हट गई, जिसमें चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सीजेआई को शामिल करने का निर्देश दियागया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अंतिम बिल में सीजेआई को बाहर क्यों रखा गया। इसके तुरंत बाद भाजपा केवरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर पलटवार किया और सरकार के फैसले का बचाव किया। हर कार्य में न्यायपालिका को शामिल करने की मांग तर्कसंगतकांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश के. एम. जोसेफ कर रहे थे, ने स्पष्ट किया था किजब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर कोई व्यापक कानून नहीं बन जाता, तब तक चयन समिति में प्रधानमंत्री, सीजेआई और लोकसभा में विपक्षके नेता को शामिल किया जाए। लेकिन जब सरकार बिल लेकर आई, तो उसने सीजेआई को पूरी तरह बाहर कर दिया और उसकी जगह प्रधानमंत्रीद्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया। उन्होंने मांग की कि कानून मंत्री इस फैसले पर स्पष्ट जवाब दें। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने इसआरोप को खारिज करते हुए कहा कि जब देश की जनता प्रधानमंत्री को परमाणु बटन तक संभालने का भरोसा देती है, तो वही प्रधानमंत्री और उनकेनेतृत्व वाली सरकार एक ईमानदार और सक्षम चुनाव आयुक्त क्यों नहीं चुन सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुईसरकार को निर्णय लेने का अधिकार है, और हर कार्य में न्यायपालिका को शामिल करने की मांग तर्कसंगत नहीं है। कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करेगारविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि स्वयं वेणुगोपाल भी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का यह प्रावधान सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था थी, स्थायी समाधान नहीं।उन्होंने कहा कि संसद ने व्यापक विचार के बाद नया कानून पारित किया है और इसके बाद भी सीजेआई को पैनल में शामिल रखने की मांग राजनीतिसे प्रेरित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस चयन प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर जरूरी सुधारों को बाधित करना चाहती है। सरकार द्वारापेश किए गए बिल को संसद पहले ही मंजूरी दे चुकी है, जिसके तहत प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा केविपक्ष के नेता शामिल होंगे। लेकिन सीजेआई को शामिल न किए जाने से विपक्ष को तीखा विरोध करने का मौका मिला है। कांग्रेस का कहना है कियह कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, जबकि भाजपा दावा करती है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लियागया है।

इंडिगो संकट गहराया DGCA ने CEO को तलब किया, उड़ान रद्द होने का सिलसिला जारी

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। इस बीच नागर विमानन महानिदेशालय(डीजीसीए) ने इंडिगो के सीईओ को गुरुवार को दोपहर 3 बजे हालिया परिचालन बाधाओं से जुड़ा व्यापक डेटा और अपडेट पेश करने का निर्देश दियाहै। इंडिगो संकट के 9वें दिन बुधवार को भी बंगलूरू एयरपोर्ट से 61 उड़ानें रद्द कर दी गईं, इसमें 35 आगमन और 26 प्रस्थान वाली उड़ानें थी। यहखबर तब सामने आई जब इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने कल यानी नौ दिसंबर को दावा किया था कि एयरलाइन की स्थिति अब सामान्य हो गईहै। सिलसिला थम नहीं रहाडीजीसीए ने कहा कि सीईओ को सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। नियामक केआदेश के अनुसार, एयरलाइन को उड़ानें बहाल करने, पायलटों और चालक दल की भर्ती योजना, पायलट और केबिन क्रू की संख्या, रद्द की गईउड़ानों की संख्या और अब तक जारी किए गए रिफंड आदि के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। रोजाना लगभग 2300 फ्लाइट्सऑपरेट करने वाली और घरेलू एविएशन मार्केट में 60% से भी अधिक हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप मौजूदा संकट के बादकरीब 21,000 करोड़ रुपये तक घट चुका है। ऐसे में एयरलाइन की स्थिति समान्य होने के दावों के बीच भी उड़ानें रद्द होने का सिलसिला थम नहींरहा है। उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा किबता दें कि देशभर में बीते नौ दिनों से जारी इंडिगो संकट का मुख्य कारण है कि बीते 1 दिसंबर से इंडिगो देशभर में हजारों उड़ानें रद्द कर चुकी है।एयरलाइन नए सुरक्षा नियमों के अनुसार अपनी योजना समय पर नहीं बना पाई, जिसके कारण उसके संचालन में भारी अव्यवस्था फैल गई। इससेयात्रियों को परेशानी, टिकटों के दाम बढ़ना और एयरपोर्ट पर भीड़ जैसी स्थिति बन गई। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि कई उड़ानें बिना बताए, याउनकी मंजूरी के बिना रिशेड्यूल या बहुत अधिक देरी से चलाई गईं। लगातार जारी गड़बड़ी के बीच अब बीते दिनों से सरकार भी सख्त होती नजर आरही है। इसके तहत पहले तो डीजीसीए ने इंडिगो के सीईओ और सीओओ को शो-कॉज नोटिस भेजा। उसके बाद एयरलाइंस के किराए पर कैपलगाया गया ताकि टिकट महंगे न हों। इसी क्रम में मंगलवार को सरकार ने इंडिगो की विंटर फ्लाइट शेड्यूल में 10% कटौती का आदेश दिया। इससेरोज लगभग 220 उड़ानें कम होंगी। मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि इंडिगो कासंचालन स्थिर हो सके और रद्द उड़ानों की संख्या कम हो।

रोहिंग्या मामले पर CJI की टिप्पणी को लेकर प्रेरित अभियान, सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के 44 पूर्व जजों का बयान

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 44 पूर्व जजों ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि रोहिंग्या प्रवासियों के मामले में चीफ जस्टिस(सीजेआई) सूर्यकांत की ओर से की गई टिप्पणियों के खिलाफ ‘प्रेरित अभियान’ चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीजेआई ने तो केवल एकसाधारण कानूनी सवाल पूछा था, लेकिन कुछ लोगों ने उसे गलत तरीके से पेश करके ऐसा दिखाया जैसे उन्होंने पक्षपात या भेदभाव वाली बात कहीहो। पूर्व जजों ने कहा कि नियमित न्यायिक सवालों को गलत तरीके से ‘पक्षपाती टिप्पणी’ बताना न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचाने औरसांविधानिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश है। शरणार्थी दर्जे में नहीं बदल सकतेबयान में आगे कहा गया कि कोर्ट के फैसले और कोर्ट में हुई बहस की निष्पक्ष आलोचना की जा सकती है, लेकिन मौजूदा विवाद उस सीमा को पारकर चुका है। इसमें कहा गया, न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्ष, तर्कपूर्ण आलोचना हो सकती है और होनी भी चाहिए। लेकिन जो हम देख रहे हैं, वहकोई सिद्धांत आधारित असहमति नहीं बल्कि न्यायपालिका को बदनाम करने का प्रयास है। चीफ जस्टिस पर इस बुनियादी सवाल को लेकर हमलाकिया जा रहा है कि कानून के तहत वह दर्जा किसने दिया है जिसकी मांग कोर्ट में की जा रही है? अधिकारों पर कोई भी फैसला तब तक नहीं होसकता जब तक इस बुनियादी सवाल का जवाब न मिल जाए। पूर्व जजों ने कहा कि अवैध रूप से आने वाले लोग खुद को किसी औपचारिकशरणार्थी दर्जे में नहीं बदल सकते। बयान में कहा गया, भारत की जिम्मेदारियां उसके संविधान, विदेशी कानून, आप्रवासन नियमों और सामान्यमानवाधिकार सिद्धांतों से पैदा होती हैं। किसी वैधानिक शरणार्थी तंत्र के माध्यम से नहीं आएउन्होंने आगे कहा कि आलोचकों ने अदालत के उस स्पष्ट संदेश को नजरअंदाज किया, जिसमें कहा गया था कि भारत की जमीन पर कोई भी व्यक्ति नतो यातना का शिकार हो सकता है, न गायब किया जा सकता है और न ही उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा सकता है, चाहे वह देश कानागरिक हो या विदेशी। बयान में कहा गया, इस संदेश को छिपाकर टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर कोर्ट पर ‘अमानवीयता’ का आरोप लगाया जा रहा है।’ भारत में रोहिंग्या समुदाय को किसी भी आधिकारिक (कानूनी) शरणार्थी सुरक्षा व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है, क्योंकि भारत न तो 1951 केसंयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन का सदस्य है और न ही 1967 के उसके प्रोटोकॉल का। बयान में कहा गया, रोहिंग्या भारतीय कानून के तहत शरणार्थीनहीं हैं। वे किसी वैधानिक शरणार्थी तंत्र के माध्यम से नहीं आए। अधिकांश मामलों में उनका प्रवेश अवैध है और वे केवल दावा करके खुद कोकानूनी तौर पर ‘शरणार्थी’ घोषित नहीं कर सकते।

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक: 19 प्रस्तावों को मंजूरी, मुआवजा बढ़ा, छोटे अपराधों में अब जेल नहीं, केवल जुर्माना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कुल 19 प्रस्ताव आए। बिजली लाइन का मुआवजा बढ़ाया गया। केंद्र के नए निर्देश को अडॉप्ट किया गया। टावर और उसके एक मीटर परिधि के एरिया का 200% सर्किल रेट का कर दिया है। सर्किल रेट और मार्किट रेट में अंतर पर एक समिति बनाई जाएगी, जो प्रभावित भूमि मालिकों के लिए काम करेगी। सात एक्ट के बजाय जन विश्वास एक्टलाया जाएगा। 52 एक्ट चिन्हित किए गए हैं। छोटे अपराधों में सजा को लेकर बदलाव किए गए हैं। छोटे अपराध में जेल नहीं बल्कि जुर्माना होगा।जैसे किसी जैविक कृषि में अधिसूचित क्षेत्र में कोई पेस्टिसाइड का इस्तेमाल करेगा तो वहां एक लाख जुर्माना और एक साल जेल सजा थी, सजाहटाकर जुर्माना पांच लाख कर दिया गया। उत्तराखंड माल एवं सेवा कर संशोधन अध्यादेश को मंजूरीतकनीकी शिक्षा-.तकनीकी विवि में फैकल्टी की भर्ती लोक सेवा आयोग नहीं विवि स्तर से ही होगीलोनिवि-.कनिष्ठ अभियंता के 5% पद समूह-ग के कर्मचारियों से पदोन्नति से होती थी, लोग नहीं मिल पाते थे। अब 10 साल की सेवा पूरी करने परसीधे जेई बनेंगे. नैनी सैणी एयरपोर्ट…को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया संचालित करेगा। सितारगंज के कल्याणपुर में जिन्हें पट्टे पर जमीन दी हुईथी, उनके नियमितीकरण को लेकर सर्किल रेट 2004 के लिए जाएंगे। जिला स्तर का अभियोजन निदेशालय बनाया जाएगामुख्यमंत्री घसियारी कल्याण और साइलेज योजना…75% देते थे, तय हुआ कि सब्सिडी 75 के बजाय 60% मिलेगी। देहरादून में रिस्पना बिंदालएलिवेटेड के लिए जीएसटी में छूट मिलेगी। रॉयल्टी और जीएसटी विभाग जमा करेगा, जिसका रिम्बर्स किया जाएगा। सगंध पौधा के केंद्र का नामइंस्टीट्यूट ऑफ परफ्यूम होगा। जो वाहन 15 साल से पुराने हैं, उन्हें स्क्रैप करने और नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट मंजूरी. मुख्यमंत्री युवा भविष्यनिर्माण योजना मंजूर… यूपीएससी, नेट, गेट आदि की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग। लाइव क्लासेज, डाउट क्लियर करने की सुविधा होगी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अभियोजन निदेशालय देहरादून में मुख्यालय होगा। उसमें एक निदेशक होंगे। 15 वर्ष तक अधिवक्ता कोबना सकेंगे। जिले में भी जिला स्तर का अभियोजन निदेशालय बनाया जाएगा। 7 वर्ष से कम कारावास की धाराओं में अपील का फैसला जिला स्तर, इससे ऊपर पर राज्य स्तर पर निर्णय होगा।

पोप लियो 14वें की ट्रंप प्रशासन को कड़ी आलोचना, “यूरोप को दरकिनार कर शांति समझौता अवास्तविक”

ईसाई धर्मगुरु पोप लियो 14वें ने मंगलवार को अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की ओर से लंबे समय से चले आ रहे अमेरिका-यूरोपीय गठबंधन को तोड़नेकी कोशिश की आलोचना की। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी के सर्वोच्च धर्मगुरु की ओर से इस तरह की खुली आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप केलिए बड़ा झटका माना जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं को कमजोर होने के साथ यूक्रेन को मिलने वाले अमेरिकी समर्थन को कम करनेका भी संकेत दिया था। इस मुद्दे पर पोप लियो 14वें ने अप्रत्यक्ष रूप से जोर देकर कहा कि यूक्रेन शांति समझौते में यूरोप की भूमिका होनी चाहिए।पोप लियो का कीव दौरा यूरोपीय समर्थन जुटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात केबाद पत्रकारों से युद्धविराम की जरूरत और रूसी अधिकारियों की ओर से पकड़े गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी में मदद के लिए वेटिकन की कोशिशों परचर्चा की। खड़ा करने के बारे में तीसरा दस्तावेजईसाई धर्मगुरु से अमेरिकी शांति प्रस्ताव और इस प्रक्रिया में यूरोपीय शक्तियों को दरकिनार किए जाने के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने जोर देकरकहा कि किसी भी समझौते में यूरोप की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘यूरोप को वार्ता में शामिल किए बिना शांति समझौते की कोशिश करनाअवास्तविक है, क्योंकि युद्ध यूरोप में चल रहा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आज और भविष्य में सुरक्षा की गारंटी भी मांगी जा रही है। यूरोप को इसकाहिस्सा होना चाहिए, और दुर्भाग्य से हर कोई इसे नहीं समझता, लेकिन मुझे लगता है कि यूरोपीय नेताओं के लिए एकजुट होकर हल तलाशने का यहएक बेहतरीन मौका है।’ यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय साझेदारों के साथ शांति समझौते के तीन दस्तावेजोंपर चर्चा की जा रही है, 20 बिंदुओं का एक रूपरेखा दस्तावेज, सुरक्षा गारंटी वाला दूसरा दस्तावेज और यूक्रेन को फिर से उठ खड़ा करने के बारे मेंतीसरा दस्तावेज। व्लादिमीर पुतिन से कम से कम एक बार टेलीफोन पर बात कर चुकेबीते हफ्ते में ट्रंप प्रशासन ने अपनी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की थी, जिसमें अमेरिका-यूरोपीय गठबंधन पर सवाल उठाए गए हैं औरअमेरिका-रूस संबंधों को बेहतर बनाने की इच्छा पर जोर दिया गया है। लियो ने कहा कि उन्होंने जो पढ़ा है, वह ‘यूरोप और अमेरिका के बीच कई वर्षोंसे चले आ रहे एक सच्चे गठबंधन में एक बड़ा बदलाव लाएगा।’ इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ टिप्पणियों से ऐसा लगता हैकि ‘आज और भविष्य में जिस गठबंधन की जरूरत है, उसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है।’उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ लोग इस कोशिश से सहमत हो सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि कई अन्य लोग चीजों को अलगतरीके से देखेंगे। पोप लियो अब तक जेलेंस्की से तीन बार मिल चुके हैं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कम से कम एक बार टेलीफोन पर बातकर चुके हैं।