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अरुणाचल की बेटी का चीनी एयरपोर्ट पर अपमान, CM खांडू भड़कें, 18 घंटे की हिरासत पर कड़ा विरोध

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को चीनी आव्रजन अधिकारियों की निंदा की। खांडू ने राज्य की एक महिला के साथ किए गएव्यवहार को अस्वीकार्य और भयावह बताया। महिला को शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर करीब 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया, क्योंकि अधिकारियों नेकथित तौर पर उसका भारतीय पासपोर्ट पहचानने से इनकार कर दिया था। सीएम खांडू ने कहा कि वह ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय नागरिक पेमावांगजोम थोंगडोक के साथ हुई घटना से सदमे में हैं। उन्होंने दावा किया कि चीनी अधिकारियों का आचरण ‘अपमानजनक और नस्लीय उपहास’ केजैसा है। कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहतीमुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘वैध भारतीय पासपोर्ट होने के बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार करना भयावह है।’ उन्होंने कहा, ‘अरुणाचलप्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। इसके विपरीत कोई भी आरोप निराधार और आपत्तिजनक है।’ इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों काउल्लंघन और भारतीय नागरिकों की गरिमा का अपमान बताते हुए खांडू ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि विदेश मंत्रालय इस मामले को तत्काल उठाएगाताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। पश्चिमी कामेंग जिले के रूपा की निवासी थोंगडोक फिलहाल ब्रिटेन में रहती हैं। 21 नवंबर को लंदन से जापान जा रही थीं, जब उनका तीन घंटे का ट्रांजिट एक लंबे और कष्टदायक टकराव में बदल गया। कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गयारविवार को एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में, उन्होंने लिखा, ‘मुझे 21 नवंबर 2025 को चीन के आव्रजन और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की ओर सेशंघाई हवाई अड्डे पर 18 घंटे से ज्यादा समय तक रोके रखा गया। उन्होंने मेरे भारतीय पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया, क्योंकि मेरा जन्मस्थानअरुणाचल प्रदेश है, जिसे उन्होंने चीनी क्षेत्र बताया।’ महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिटएरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंगफ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया। थोंगडोक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस घटना को भारत की संप्रभुताऔर अरुणाचल प्रदेश के लोगों का सीधा अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को बीजिंग के समक्ष जोरदार तरीके सेउठाए, जवाबदेही की मांग करे, इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करे तथा उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग करे।महिला ने बताया कि उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए और बिना बुनियादी सुविधाओं के ट्रांजिट एरिया में ही रोक दिया गया। कथित तौर पर उनकापासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें जापान जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया।

500 साल का इंतज़ार खत्म अयोध्या के राम मंदिर पर लहराई धर्मध्वजा, शिखर पर आस्था का इतिहास फिर हुआ जीवंत

500 वर्षों से एक तरह का विरह झेल रही अयोध्यानगरी का राम मंदिर आज तब संपूर्ण हो गया, जब भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर आस्था कीध्वजा लहराई। वही ध्वज, जो केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का साक्षात प्रतीक है। यह ध्वज आस्था के धागों से तैयार हुआ। इस क्षण कासाक्षी बनने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे। साथ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुखमोहन भागवत भी मौजूद थे। आइए जानते हैं कि मंगलवार को आखिर अयोध्या में हुआ क्या…अयोध्या में राम मंदिर को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था। इसके बाद 5 अगस्त2020 को अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ। कोरोना काल में हजारों श्रमिकों की अथक मेहनत के बाद राम मंदिर का पारंपरिकनागर शैली में निर्माण पूरा हुआ। इसकी लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फिट है। यह कुल 392 खंभों और 44 दरवाजों सेयुक्त है। चार महीने तक अध्ययन किया गयादरअसल, 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम बालक राम के रूप में स्थापित किए गए थे। 5 जून 2025 को दूसरी प्राण प्रतिष्ठा में भगवान रामराजा के रूप में स्थापित किए गए। इसके बाद अंतिम कार्य ध्वज ध्वजा स्थापित करने का था। सनातन परंपरा में शिखर पर लहराते ध्वज को मंदिर कारक्षक, ऊर्जा का वाहक और पूर्णता तथा ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। ध्वजा से ही मंदिर को पूर्णता प्राप्त होती है। ध्वजा आरोहण केलिए 25 नवंबर 2025 को सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच का मुहूर्त निकाला गया। मंगल-स्वस्ति गान के बीच ध्वजा आरोहणहुआ। 32 मिनट का यह शुभ योग भगवान श्रीराम के जन्म नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त से मेल खाता है। दिन भी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी काचुना गया, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह हुआ था। यह 22 गुणा 11 फीटकी है। रंग चमकदार केसरिया है। इसे पैराशूट ग्रेड के तीन परत वाले कपड़े से बनाया गया है और आस्था के रेशमी धागों में पिरोया गया है। यहअहमदाबाद में बनकर तैयार हुआ। इसे 161 फीट ऊंचे शिखर पर 42 फीट ऊंचे एक दंड के माध्यम से स्थापित किया गया है। दंड पर 21 किलोसोना मढ़ा गया है। ध्वजा चार किमी दूर से भी दिखाई देगी। धर्म ध्वजा भयानक तूफान में भी सुरक्षित रहेगी। ध्वजा दंड पर बॉल बियरिंग लगे हैं।इससे ध्वजा हवा बदलने पर बिना उलझे पलट जाएगी। ध्वजा पर प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का चिह्न और ओंकार बना हुआ है। साथ ही कोविदार वृक्षका भी चिह्न है। इन चिह्नों के लिए चार महीने तक अध्ययन किया गया था। इन चिह्नों को ध्वज पर हाथ से बुना गया है। अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुकेअयोध्या का राज ध्वज और उस पर अंकित कोविदार वृक्ष सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि रही है। इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में है। इसके अनुसार चित्रकूट में वनवास के दौरान भगवान राम ने लक्ष्मण को अश्व और रथों से आती सेना के बारे में पता लगाने को कहा था। इसेदेखकर लक्ष्मण ने कहा था कि निश्चय ही भरत स्वयं सेना लेकर आया है। कोविदार युक्त विशाल ध्वज उसी के रथ पर फहरा रहा है। इसी प्रसंग सेजाहिर है कि कोविदार वृक्ष युक्त ध्वज अयोध्या की पहचान और प्राचीन धरोहर रही है। हरिवंश पुराण में उल्लेख है कि महर्षि कश्यप ने पारिजात केपौधे में मंदार के गुण मिलाकर इसे तैयार किया था। इस बारे में अयोध्या के महंत विवेक आचारी दिलचस्प वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि इसकी धर्मध्वजा की लंबाई-चौड़ाई यूं ही नहीं तय हुई है। अंक ज्योतिष की गणना में इसके मायने समझ में आते हैं। ध्वज का आकार 22 गुणा 11 फीट है। इसेगुणा करने पर 242 का अंक आता है, जिसका गुणांक आठ है। आठ को न्याय के देवता शनि का अंक माना जाता है। यह कहा जा सकता है कि राममंदिर के शिखर यानी अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुके हैं। जो मर्यादा में रहेगा, सुखी रहेगा। जो मर्यादा विहीनआचरण करेगा, उसका रावण जैसा हश्र होगा।

कर्नाटक में सत्ता संग्राम तेज: सिद्धारमैया, DK शिवकुमार खेमों की हलचल, सीएम बदलने का फैसला हाई कमान पर

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद और शासन परिवर्तन को लेकर कांग्रेस में चल रहा सत्ता संघर्ष अभी भी थम नहीं पाया है। मंगलवार को एक तरफउपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यश्र मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक बार फिरपार्टी हाई कमान के फैसले का राग गाया। उन्होंने कहा कि पार्टी हाई कमान को राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे भ्रम को खत्म करना ही होगा।सिद्धारमैया ने इस दौरान फिर से इस बात को दोहराया कि वे सीएम बदलने के मामले में हाई कमान के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा किविधायक पार्टी नेतृत्व से मिलकर अपनी राय साझा कर सकते हैं। बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज तब हो गई जब राज्यकी कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार केबीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि क्या अब डीके शिवकुमार को अगले ढाई साल के लिएमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगेसिद्धारमैया ने शिवकुमार के समर्थन में दिल्ला जाने वाले विधायकों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधायक दिल्ली जाएं, उनकीस्वतंत्रता है। अंत में फैसला हाई कमान का है। हम हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो विधायक मामला सुलझाने केलिए हाई कमान से बात करना चाहते हैं, वे अपनी बात रख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 23 नवंबर को छह कांग्रेस विधायक शिवकुमार का समर्थनकरने के लिए दिल्ली गए, वहीं कुछ और विधायक भी जल्द उच्च नेतृत्व से मिल सकते हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते लगभग दस विधायक भी दिल्लीमें एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिले थे। कर्नाटक में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद और सत्ता को लेकर संघर्ष जारी है। इसी बीच सिद्धारमैया नेदो टूक अंदाज में पार्टी हाई कमान की बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद को खत्म करने का अंतिम फैसला हाई कमान का होगा।उन्होंने कहा कि सीएम बदलने के मामले में वे हाई कमान के निर्णय का पालन करेंगे।

बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद भड़का! ममता बनर्जी का 3 किमी मार्च, TMC का एसआईआर के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध मेंनॉर्थ 24 परगना जिले के बनगांव के चांदपारा से मतुआ के गढ़ ठाकुरनगर तक तीन किमी का मार्च निकाला। वहीं तृणमूल कांग्रेस के एक नेता नेबताया कि यह जुलूस, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास बनगांव शहर में एसआईआर के खिलाफ एक रैली को संबोधितकरने के बाद निकाला, ठाकुरनगर के ढाकुरिया स्कूल में खत्म होगा। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस जुलूस-प्रदर्शन की अगुवाई कर रही थीं, जिसमें शामिल लोग नीले और सफेद गुब्बारे लिए हुए थे, तृणमूल कांग्रेस के झंडे लहरा रहे थे और एसआईआर के खिलाफ नारे लगा रहे थे। चुनावआयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए एसआईआर शुरू की है।पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन एसआईआर को लेकर राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दलभाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुएविपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां हैं और इसकाउद्देश्य कुछ खास लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना है, जिससे चुनावों में लाभ पहुंचाया जा सके। हाल ही में एसआईआर से जुड़े कुछ लोगों की मौतकी खबरें भी आई हैं, हालांकि इन मौतों के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। निर्वाचन आयोग ने 27 अक्तूबर को 12 राज्यों औरकेंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की शुद्धि का अभ्यास शुरू करने का एलान किया था। आयोग ने इसे एसआईआर का फेज-दो बताया है (बिहारमें हुए एसआईआर को फेज-1 बताया गया था)। बता दें कि एसआईआर का दूसरा चरण 4 नवंबर को शुरू हुआ और 4 दिसंबर तक चलेगा।एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर का दूसरा चरण अंडमानऔर निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगालकराया जा रहा है। बंगाल में एसआईआर के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी ने पैदल मार्च किया है। जानकारी के मुताबिक, तीन किमी लंबे पैदल मार्चकी सीएम ने खुद अगुवाई की जो चांदपारा से मतुआ-हार्टलैंड ठाकुरनगर तक चला। इस दौरान भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुए।

एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत का सितारों वाला जलवा, पर ‘अमर सिंह चमकीला’ की झोली रही खाली

53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ ने भले ही अपने शानदार लुक से महफिल लूट ली। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनकी झोली खालीरह गई। एमी अवॉर्ड्स 2025 में एक्टर-सिंगर अवॉर्ड पाने से चूक गए। उन्हें इम्तियाज अली की फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ में उनकी परफॉर्मेंस केलिए नॉमिनेट किया गया था। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत दोसांझ को बायोग्राफिल ड्रामा ‘अमर सिंह चमकीला’ के लिए बेस्ट एक्टरके लिए नॉमिनेट किया गया था। वहीं, इस फिल्म को बेस्ट TV मिनी मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था। मगर, दोनों ही कैटिगरी मेंफिल्म अवॉर्ड नहीं जीत पाई। शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचेबेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिलजीत दोसांझ की बजाय ओरिओल प्ला को ‘आई, एडिक्ट’ फिल्म के लिए मिला। वहीं, बेस्ट टीवी मिनी मूवी/मिनी सीरीजकैटिगरी में ‘अमर सिंह चमकीला’ की बजाय ‘लॉस्ट बॉयज एंड फेयरीज’ ने अवॉर्ड झटका। दोनों कैटेगरी में फिल्म को नॉमिनेशन मिलने पर फैंस उम्मीदकर रहे थे कि इसे अवॉर्ड मिल सकता है, क्योंकि ‘अमर सिंह चमकीला’ को दुनियाभर में पसंद किया गया। मगर, दोनों श्रेणी में अवॉर्ड नहीं मिलने परफैंस निराश हैं। अवॉर्ड फंक्शन में दिलजीत दोसांझ और इम्तियाज अली को शानदार अंदाज में रेड कार्पेट पर देखा गया। दिलजीत ने शिमर सूट जैकेट, व्हाइट शर्ट, ब्लैक बो, ब्लैक ट्राउजर और अपनी सिग्नेचर ब्लैक पगड़ी में एक शानदार स्टाइल स्टेटमेंट दिया। बात करें फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ कीतो यह फिल्म साल 2024 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। दिलजीत के अपोजिट फिल्म में परिणीति चोपड़ा ने लीड रोल अदा किया। यह फिल्मपंजाब के मशहूर लोक गायक अमर सिंह चमकीला की कहानी पर आधारित है। 53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझअपने शानदार लुक से छा गए। ऑफ व्हाइट कलर के शिमर ब्लेजर में वे खूब जंचे। मगर, अवॉर्ड के मामले में उनके हाथ खाली रह गए।

तमिल बनाम हिंदी विवाद फिर गर्माया राज्यपाल आर.एन. रवि का बड़ा बयान, ‘तमिल राजनीति क्षेत्रवाद नहीं, तमिल विशिष्टता

तमिलनाडु के सियासी गलियारों में तमिल बनाम हिंदी का मुद्दा हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। इस बीच तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि का बड़ाबयान सामने आया है। राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति क्षेत्रवाद नहीं है, बल्कि यह अनिवार्य रूप से तमिल ‘विशिष्टता’ है, जो इस बातपर जोर देता है कि तमिल अन्य भाषाओं से अलग है।तमिलनाडु के राज्यपाल के तौर पर आर.एन. रवि का एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के साथ गतिरोध का लंबा इतिहास है।राज्यपाल ने कहा, ‘यह तमिल विशिष्टता अन्य भाषाओं के प्रति घृणा से व्यक्त होती है, यहां तक कि द्रविड़ परिवार से संबंधित तेलुगू, कन्नड़ औरमलयालम जैसी भाषाओं के प्रति भी। यह केवल हिंदी तक ही सीमित नहीं है।’ उन्होंने तमिल राजनेताओं की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि वेवास्तव में तमिल से प्रेम नहीं करते, क्योंकि उन्होंने तमिल भाषा या तमिल संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए कुछ भी नहीं किया है। कार्यक्रम में सिर्फ एक मेहमानउन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘सच्चाई यह है कि हर साल छात्र तमिल माध्यम से अंग्रेजी माध्यम की ओर जा रहे हैं। तमिल में पढ़ाई करने वाले छात्रोंकी संख्या में लगातार और तेजी से गिरावट आ रही है।’ रवि ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने तमिल भाषा और संस्कृति में अनुसंधान के लिए शून्यबजट दिया है। उन्होंने बताया, “राज्य अभिलेखागार में 11 लाख से अधिक ताड़पत्र पांडुलिपियां सड़ रही हैं। उनके संरक्षण के लिए कोई धनराशिआवंटित नहीं की गई है।” अक्टूबर 2024 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा किडीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने बिना किसी बात के हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस कार्यक्रम में सिर्फ एक मेहमान थे औरआयोजकों से गलती हुई। उन्होंने माफी भी मांगी। राज्यपाल ने कहा, ‘मैं तमिल थाई वजथु उन कई लोगों से कहीं बेहतर गा सकता हूं जो तमिलबोलते हैं।’ तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्रसरकार और राज्यपाल के बीच तनाव को उजागर करने वाली एक अन्य घटना को याद करते हुए – रवि ने जनवरी में विधानसभा के पहले सत्र में अपनापारंपरिक अभिभाषण देने के बजाय वॉकआउट कर दिया था – उन्होंने कहा कि यह एक ‘दुखद निर्णय’ था। रवि इस बात का विरोध कर रहे थे कि सत्रकी शुरुआत में राष्ट्रगान नहीं बजाया गया। उन्होंने बताया कि ऐसे समारोहों में जहां राज्यपाल या राष्ट्रपति भाग लेते हैं, वहां कार्यक्रम की शुरुआतराष्ट्रगान से होती है और समापन भी राष्ट्रगान से होता है। अक्टूबर 2024 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वजथु’ से जुड़े विवाद का जिक्रकरते हुए राज्यपाल ने कहा कि डीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने बिना किसी बात के हंगामा खड़ा कर दिया।

नीतीश सरकार का बिग विज़न 5 साल में 1 करोड़ रोजगार, बिहार बनेगा न्यू एज टेक्नोलॉजी हब

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण के बाद ही युवाओं और रोजगार को लेकर अपनी तैयारी दिखा दी थी। उन्होंने बिहार में उद्योग की संभावनाबढ़ाने की तैयारी पहले ही बता दी थी। मंगलवार को इधर कैबिनेट की बैठक में उद्योग और विकास की बात हुई तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीशकुमार ने युवाओं को अगले 5 साल में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर अपनी पूरी योजना बताई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडियाअकाउंट पर क्या लिखा. राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, यह शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है।सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।कार्ययोजना तैयार की जाएगीनई सरकार के गठन के पश्चात राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने एवं अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए हमलोगों ने तेजी सेकाम शुरू कर दिया है। बदलते बिहार के विकास की गति को बल देने हेतु बिहार में प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों की न्यू ऐज इकोनॉमी(New Age Economy) के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु इस क्षेत्र से संबंध रखने वाले बिहार के अग्रणी उद्यमियोंके सुझाव प्राप्त कर योजनाओं एवं नीतियों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही बिहार को एक ‘वैश्विक Back-end Hub’ एवं ‘ग्लोबल वर्कप्लेस’ के रूप में विकसित एवं स्थापित करने हेतु महत्वपूर्ण विभागों तथा प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों एवं विशेषज्ञों के सहयोग से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयारकी जाएगी। बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशनबिहार की जनसंख्या में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक है। इसको सार्थक दिशा देने पर बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्यबन सकता है। बिहार में बड़ी संख्या में उपलब्ध युवा मानव संसाधन को ध्यान में रखते हुए बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक्नोलॉजी हब(Technology Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए बिहार में डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबलकैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी व फिनटेक सिटी की स्थापना की जाएगी एवं उद्योगों का जाल बिछाने हेतु वृहद कार्ययोजना तैयार कर योजनाओंको क्रियान्वित किया जाएगा। राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना एवं पुरानी बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने हेतु नीति एवं कार्ययोजनाबनाई गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी प्रमुख शहरों को बेहतर एवं सुंदर बनाने की योजना पर कार्य करने हेतु तैयारी की जा रही है, तथा नईतकनीकों का उपयोग कर राज्य को अग्रणी बनाने हेतु बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की स्थापना की जाएगी।

गगनयान ही नहीं… 2040 तक चांद पर भारतीय, ISRO यात्री शुभांशु शुक्ला ने छात्रों को दी चुनौतियों भरी प्रेरणा

भारत के गगनयान मिशन की तैयारियों के बीच भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और गगनयान यात्री शुभांशु शुक्ला ने छात्रों को प्रेरक संदेश दिए।बंगलूरू में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश अब सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना नहीं देख रहा, बल्कि अपना स्पेस स्टेशन बनानेऔर चांद पर भारतीय को उतारने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। शुक्ला ने छात्रों से कहा कि यह समय भारत के लिए ऐतिहासिक है और आनेवाला समय उनके लिए अवसरों से भरा होगा। शुक्ला ने बातचीत में साफ कहा कि देश की नजर 2040 तक चांद पर भारतीय की लैंडिंग पर है औरइसके लिए जिस भी युवा को जाना होगा, उसे उनके साथ मुकाबला करना पड़ेगा। उन्होंने मजाकिया लेकिन गंभीर अंदाज में कहा कि वह अभी मौजूदहैं, इसलिए चांद पर कदम रखने की दौड़ में छात्रों को उन्हें पीछे छोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा नीति 2023 में तैयारहुई थी, जिसमें गगनयान और भविष्य के मानव मिशनों का स्पष्ट रोडमैप तय किया गया है। भारत की वैश्विक पहचान को अगले स्तर परगगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष अभियान है, जिसकी तैयारी तेज चरण में है। शुक्ला ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि देश पहलीबार अपनी भूमि से, अपने लॉन्च व्हीकल पर, अपनी ही कैप्सूल में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भारत की तकनीकीक्षमता, आत्मनिर्भरता और बढ़ते अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा का प्रमाण है। छात्रों को उन्होंने बताया कि यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि देशकी सोच को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम है। शुक्ला ने कहा कि भारत अपना खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की तैयारी में है। उन्होंनेबताया कि इस परियोजना पर चर्चा चल रही है और आने वाले वर्षों में इसका निर्माण शुरू होगा। यह स्टेशन भारत को अंतरिक्ष में दीर्घकालिकउपस्थिति देगा। उनके अनुसार, यह योजना भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला देगी जो अंतरिक्ष में स्थायी वैज्ञानिक शोध करने की क्षमता रखतेहैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विज्ञान का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को अगले स्तर पर ले जाने वाला कदम है। भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वालेछात्रों से बातचीत में शुक्ला ने उत्सुकता जताई कि चांद की सतह पर पहला भारतीय पुरुष होगा या महिला। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देशके युवा ही इसका फैसला करेंगे। उन्होंने छात्रों को चुनौती देते हुए कहा कि चांद पर उतरने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ निश्चय कीजरूरत होगी। शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी देखकर उन्हें गर्व होता है और वह हर भविष्य परियोजना में शामिल रहनेको तैयार हैं। शुक्ला ने कहा कि भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने कहा किभारत का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इसे वास्तविकता में बदलने के लिए देश के युवाओं को आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने छात्रों से कहाकि देश को 2047 में विकसित राष्ट्र बनाने का समय उनका होगा और वही भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले असली कर्ता होंगे।

कांग्रेस का RSS पर वार, ‘आंबेडकर और संविधान पर 76 साल से हमले जारी’ जयराम रमेश का बड़ा बयान

कांग्रेस ने बाबासाहेब आंबेडकर और संविधान का नाम लेते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर हमला बोला है। पार्टी के नेता जयराम रमेश नेमंगलवार को कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने आज ही के दिन 76 साल पहले संविधान सभा में भारत के मसौदा संविधान को औपचारिक रूप सेअपनाने का प्रस्ताव रखा था, और उसी समय से उन पर और संविधान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से क्रूर हमले किए जाते रहे हैं।कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने याद दिलाते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले अपने समापन भाषण में डॉ. आंबेडकर नेसंविधान निर्माण में कांग्रेस की भूमिका की सराहना की थी। रमेश ने एक्स पर लिखा, “ठीक 76 साल पहले, डॉ. आंबेडकर ने भारत के मसौदासंविधान को स्वीकार करने का प्रस्ताव संविधान सभा में रखा था। उस अवसर पर उनका समापन भाषण निस्संदेह 20वीं सदी में कहीं भी किसी भी ओरसे दिए गए सर्वश्रेष्ठ भाषणों में से एक है।”संविधान निर्माण में कांग्रेस की भूमिका की सराहनारमेश ने आंबेडकर के भाषण को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस की अनुशासनात्मक भूमिका को संविधान मसौदा समिति के सुचारू संचालन केलिए बेहद जरूरी बताया था। आंबेडकर के मुताबिक, अगर संविधान सभा में कांग्रेस न होती तो मसौदा समिति का कार्य बेहद कठिन हो जाता औरअव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती थी। कांग्रेस की उपस्थिति ने समिति को यह सुनिश्चितता दी कि प्रत्येक अनुच्छेद और संशोधन का क्या परिणामहोगा। रमेश ने कहा, डॉ. आंबेडकर और वह संविधान, जिसे अगले दिन औपचारिक रूप से अपनाया जाना था, आरएसएस के भीषण हमलों काशिकार हुए। उन्होंने कहा कि यह हमला तब से लगातार जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2015 से संविधान दिवस 26 नवंबर को इसलिए मनायाजाता है, क्योंकि इसी दिन 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था। कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने याददिलाते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले अपने समापन भाषण में डॉ. आंबेडकर ने कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने याददिलाते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले अपने समापन भाषण में डॉ. आंबेडकर ने संविधान निर्माण में कांग्रेस की भूमिका की सराहनाकी थी।

शुभेंदु अधिकारी का चुनाव आयोग को पत्र, ‘पक्षपाती पुलिस हटाओ’ बंगाल चुनाव से पहले सियासत में उबाल

पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण से लेकर अन्य कई मुद्दों पर सियासत गर्माई हुई है।इस बीच वरिष्ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर उनसेअगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान ‘पक्षपाती’ पुलिस अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटाने का आग्रह किया है। विपक्ष के नेता शुभेंदुअधिकारी ने दावा किया कि हाल ही में दीघा में आयोजित पुलिस एसोसिएशन के सम्मेलन में कई प्रतिभागियों ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जीको चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘इन पुलिस अधिकारियों ने तटस्थता बनाएरखने के मानदंडों को खत्म कर दिया है और पक्षपातपूर्ण हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने पर इन अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर नहीं लगाया जाना चाहिए।’ स्वामित्व वाली वेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड को कर्मियों की नियुक्तिशुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजकर पक्षपातपूर्ण पुलिसकर्मियों को चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग की है।’ भाजपा नेताने कहा कि वर्दी पहनने वाले लोग इस तरह के सियासी बयान नहीं दे सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पुलिस ने राज्य मेंलोकतंत्र के अंतिम अवशेष को भी नष्ट कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश पुलिसकर्मी तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाना चाहते हैं। चुनावसे जुड़े कामों के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती के मुद्दे पर अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली वेबेल टेक्नोलॉजीलिमिटेड को कर्मियों की नियुक्ति का काम सौंपा गया है, जिन्हें टीएमसी की राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी से लिया जाएगा। जारी करने के लिए सीईओ की आलोचनाअधिकारी ने कहा, ‘डेटा एंट्री ऑपरेटरों को आदर्श रूप से पश्चिम बंगाल सरकार का स्थायी कर्मचारी होना चाहिए।’ पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचनअधिकारी ने हाल ही में जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एसआईआर या अन्य चुनाव संबंधी कार्यों के लिए संविदा पर रखे गएडाटा-एंट्री ऑपरेटरों और बांग्ला सहायता केंद्र के कर्मचारियों को नियुक्त न करें। सोमवार को सीईसी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने एक वर्ष की अवधिके लिए 1,000 डाटा एंट्री ऑपरेटरों और 50 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को नियुक्त करने के लिए प्रस्ताव हेतु अनुरोध (आरएफपी) जारी करने के लिएसीईओ की आलोचना की, और कहा कि क्षेत्रीय कार्यालयों ने हमेशा जरूरत के मुताबिक अपने खुद के संविदात्मक डाटा एंट्री कर्मियों को नियुक्तकिया है।