भाजपा सांसद रवि किशन के साथ दिखे तेज प्रताप, सुरक्षा बढ़ने से बढ़ी राजनीतिक अटकलें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीति गर्माती नजर आ रही है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव केबड़े बेटे और आरजेडी के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि “मेरी सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि मुझे खतरा है। येलोग मुझे मरवा भी देंगे। सब दुश्मन लगे हुए हैं। तेजस्वी का जन्मदिन है। जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं, उज्ज्वल भविष्य हो, आशीर्वाद है।” चुनावीसरगर्मी के बीच केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने तेज प्रताप यादव को ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत अब वेCRPF जवानों के घेरे में रहेंगे। खुलकर समर्थन कियातेज प्रताप यादव को यह सुरक्षा प्रोटेक्शन लिस्ट के तहत दी गई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि तेज प्रताप को दी गई सुरक्षा उनकेभाजपा के प्रति बढ़ते झुकाव से जुड़ी हो सकती है। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा दिए जाने की पुष्टि की है, लेकिन इस राजनीतिक अटकल पर अब तककिसी भी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही तेज प्रताप यादव ने भाजपा सांसद रवि किशन का खुलकरसमर्थन किया था। उन्होंने कहा था, “जो रोजगार देगा, मैं उसके साथ रहूंगा। सियासी गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दियापटना एयरपोर्ट पर तेज प्रताप यादव और भाजपा सांसद रवि किशन को साथ देखा गया था। इस दौरान रवि किशन ने तेज प्रताप की खुलकर तारीफकरते हुए कहा, “इनके हृदय को सब लोग बहुत प्रेम कर रहे हैं। ये दिल वाले इंसान हैं, भोलेनाथ के भक्त हैं। भाजपा हमेशा उनके लिए सीना खोलकरखड़ी रहती है जिनका लक्ष्य सेवा है। इनकी छवि भी अब उसी रूप में सामने आ रही है।” इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की चुनावी सियासत में नईहलचल मचा दी है। तेज प्रताप यादव के सुरक्षाकवच बढ़ने और भाजपा नेताओं से नजदीकी ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दियाहै।
सरकारी जमीन सौदे पर सियासत गरमाई, अजित पवार बोले, हर चुनाव से पहले लगाए जाते हैं आरोप

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को कहा कि पुणे में उनके बेटे की कंपनी से जुड़ी कथित सरकारी जमीन की बिक्री के मामले में जांचशुरू हो गई है और सच्चाई जल्द ही जनता के सामने आ जाएगी। पुणे जिले के बारामती में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकेरिश्तेदार या करीबी लोग उनका नाम लेकर किसी तरह का गलत बयान देते हैं या नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो प्रशासन को उन पर कार्रवाई करनीचाहिए। यह मामला पुणे के मुंधवा इलाके की करीब 40 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़ा है, जिसे लगभग 300 करोड़ रुपये में एक कंपनी, अमाडियाएंटरप्राइजेज, को बेचा गया था। इस कंपनी में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार साझेदार हैं। हालांकि, इस मामले में दर्ज दो एफआईआर में पार्थ पवारका नाम नहीं है। वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा था कि जमीन सौदे की जांच कानून के मुताबिक की जा रही है औरकिसी को बख्शा नहीं जाएगा।प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिएजब अजित पवार से इस सौदे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘मैंने बीते कुछ दिनों में इस पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। जांच शुरू हो चुकीहै और सच्चाई जल्द सामने आएगी। मुझे अब तक यह समझ नहीं आया कि एक रुपये का लेन-देन हुए बिना रजिस्ट्री कैसे हो गई? एक महीने में सबसाफ हो जाएगा कि रजिस्ट्री करने वाले ने ऐसा क्यों किया।’ वहीं, अजित पवार ने बताया कि उनके बेटे पार्थ की कंपनी की तरफ से की गई बिक्री रद्दकर दी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में जांच समिति गठित कर दी है। उन्होंने कहा, ‘पहले भी मुझ पर 70000 करोड़ रुपये कीअनियमितता के आरोप लगे थे, अब 15-16 साल हो चुके हैं। हर चुनाव से पहले हमारे खिलाफ ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। हम पारदर्शी तरीके सेकाम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जैसे ही कोई चुनाव आता है, लोग पुरानी जमीनें खोदने लगते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके किसीकरीबी या रिश्तेदार ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है, तो प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। बेटे पार्थ को इस बात की जानकारी नहींबता दें कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के चुनाव 2 दिसंबर को होने वाले हैं। इस जमीन सौदे पर सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि विपक्ष का कहना हैकि सरकारी जमीन को बिना मंजूरी के बेचना गैरकानूनी है, और इसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब 1800 करोड़ रुपये है। अधिकारियों केमुताबिक, कंपनी को अब रजिस्ट्री रद्द कराने के लिए दोगुना स्टांप ड्यूटी, करीब 42 करोड़ रुपये, जमा करनी होगी। यह मामला तब दर्ज हुआ जबइंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रार ऑफिस की शिकायत पर पिंपरी चिंचवड़ पुलिस ने दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी (जो 272 ‘मालिकों’ की ओरसे पॉवर ऑफ अटॉर्नी लेकर आए थे) और सब-रजिस्ट्रार आरबी तारू के खिलाफ धोखाधड़ी और गड़बड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की। अजितपवार ने कहा है कि उनके बेटे पार्थ को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस जमीन को उनकी कंपनी ने खरीदा, वह सरकारी जमीन है।
शीतकालीन सत्र से पहले गरमाई सियासत, कांग्रेस नेता जयराम रमेश बोले बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था पर जवाब दे सरकार

संसद सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा किआगामी शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर), चीन से अनसुलझे रिश्ते और आर्थिक सुस्तीजैसे मुद्दे विपक्ष के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर प्रधानमंत्री की कोई प्रतिक्रियानहीं आई है, जबकि देश में बेरोजगारी और विकास दर की स्थिति लगातार खराब हो रही है। जयराम रमेश ने शनिवार को कहा, ‘इस बार संसद में कईअहम मुद्दे उठेंगे। सबसे पहले तो एसआईआर का मामला, फिर प्रधानमंत्री की ट्रंप के बयानों पर चुप्पी। चीन के साथ हमारे संबंध अब भी सामान्य नहींहुए हैं। पुरानी स्थिति बहाल नहीं हुई है, बल्कि बातचीत अब उस नए सामान्य पर हो रही है, जो चीन ने तय किया है।’ आर्थिक विकास की दर घट रहीकेंद्र सरकार ने शनिवार को घोषणा की थी कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयरामरमेश ने कहा कि सत्र ‘असामान्य रूप से देर से और छोटा’ है। उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर शीतकालीन सत्र 20 से 23 नवंबर के बीच शुरू होकर 24 दिसंबर तक चलता है। लेकिन इस बार यह 1 दिसंबर से शुरू होकर केवल 15 दिन चलेगा। सरकार आखिर किस बात से डर रही है?’ कांग्रेस नेता नेकहा कि देश की अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है। उन्होंने कहा, ‘आर्थिक विकास की दर घट रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है। हम बार-बार नोटिस देतेहैं, लेकिन सरकार कोई कदम नहीं उठाती। सरकार वही करती है जो उसे सही लगता है।’ चर्चा महत्वपूर्ण हैकेंद्र सरकार पर तंज कसते हुए जयराम रमेश ने पूछा, ‘क्या सत्र इसलिए छोटा किया गया है क्योंकि दिल्ली में प्रदूषण है? क्या कोई विधेयक या बहसके मुद्दे नहीं बचे? या फिर लोकसभा चुनाव नजदीक हैं?’ इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया कि कांग्रेस को संसद केकामकाज में रुकावट नहीं डालनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर लिखा, ‘लगता है कांग्रेस नेताओं को संसद चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैंबार-बार अपील करूंगा कि कांग्रेस बहस और चर्चा में हिस्सा ले, और ईमानदार सांसदों के काम में बाधा न डाले। संसद को चलने दें।’ संसद केशीतकालीन सत्र को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस ने करारा हमला किया है। जयराम रमेश ने कहा कि ट्रंप के बयान पर पीएम मोदी की चुप्पी, चीन सेअनसुले रिश्ते अहम मुद्दे हैं जिस पर चर्चा महत्वपूर्ण है। वहीं उन्होंने संसद सत्र के समय और कम सीमा के लेकर भी सवाल पूछा है।
गहलोत के सामने भिड़े कांग्रेस कार्यकर्ता, धारीवाल और गुंजल खेमों की तनातनी आई सामने “कोटा रेलवे स्टेशन पर हंगामा”

राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए। शनिवार रात को कोटा रेलवे स्टेशन पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केसामने ही पार्टी दो खेमों में बंटती दिखी। गहलोत जैसे ही ट्रेन से उतरे, पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के समर्थकों केबीच नारेबाजी शुरू हो गई। माहौल इतना गरमा गया कि दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और झड़प तक की नौबत आ गई। स्थिति संभालने पहुंची पुलिसको भी दोनों गुटों की नाराजगी झेलनी पड़ी। समर्थक एक-दूसरे को पीछे धकेलते हुए गहलोत के पास पहुंचने की कोशिश करते रहे। इस दौरान पूर्वमुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और स्थिति बिगड़ती देख चुपचाप गाड़ी में बैठकर बारां जिले के लिए रवाना हो गए। उपचुनाव को लेकर संगठनात्मक एकजुटता की बात हो रहीइस पूरे घटनाक्रम के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि गहलोत के स्वागत के लिए न तो शांति धारीवाल पहुंचे और न ही प्रहलादगुंजल। दोनों नेताओं की गैरहाजिरी ने कोटा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को और उजागर कर दिया। बताया जा रहा है कि गहलोत यहां अंता विधानसभाउपचुनाव के मद्देनजर आम सभा को संबोधित करने जा रहे थे, लेकिन उनकी यात्रा शुरू होने से पहले ही पार्टी की गुटबाजी सुर्खियों में आ गई। गहलोतके सामने हुए इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक ओर उपचुनाव को लेकर संगठनात्मक एकजुटता कीबात हो रही थी, वहीं दूसरी ओर नेताओं के समर्थकों का टकराव कांग्रेस की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस की एकता पर सवाल उठने लगेयह पहली बार नहीं है जब धारीवाल और गुंजल समर्थक आमने-सामने आए हों। 5 अक्तूबर को भी कांग्रेस कार्यालय में दोनों गुटों के बीच तीखीनारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप हुआ था। उस समय तेलंगाना कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष और पर्यवेक्षक जेट्टी कुसुमा कुमार भी मौजूद थे। पार्टीके भीतर की यह अंतरकलह और शक्ति प्रदर्शन की राजनीति अब सार्वजनिक रूप से बार-बार सामने आ रही है, जिससे कांग्रेस की एकता पर सवालउठने लगे हैं।
भोजपुरी स्टार पवन सिंह की चुनावी सभा में हंगामा, देर से न पहुंचने पर भीड़ हुई बेकाबू “जानें क्या है पूरा मामला”

मधुबनी जिले के बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को भोजपुरी अभिनेता और भाजपा के स्टार प्रचारक पवन सिंह की चुनावी सभा रद्द होने के बादभारी हंगामा हो गया। यह सभा कलुआही हाई स्कूल मैदान में भाजपा प्रत्याशी विनोद नारायण झा के समर्थन में आयोजित की जानी थी। जानकारी केमुताबिक, पवन सिंह के लंबे इंतजार के बाद भी मंच पर नहीं पहुंचने से आक्रोशित समर्थकों ने टेंट और कुर्सियां तोड़ दीं। चार घंटे तक इंतजार करने केबावजूद जब उनके आने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, तो माहौल बिगड़ गया। इस बीच मंच पर मौजूद भाजपा प्रत्याशी विनोद नारायण झा केचले जाने से भीड़ और भड़क उठी। गुस्साई भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी और पंडाल को क्षतिग्रस्त कर दिया। मौके पर अफरातफरी मच गई, लेकिनपुलिस ने तुरंत पहुंचकर हालात पर काबू पाया। आयोजकों ने बताया कि पवन सिंह का कार्यक्रम तकनीकी कारणों और अंतिम समय में हुए बदलावोंकी वजह से रद्द करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। समर्थक नाराज हो गए और टेंट-कुर्सियां तोड़कर हंगामा कियावहीं, समर्थकों का कहना है कि उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई और बार-बार आश्वासन के बावजूद पवन सिंह के नहीं आने से लोग खुद को ठगाहुआ महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह से सैकड़ों लोग पवन सिंह को देखने और सुनने के लिए मैदान में जमा थे। कई लोग धूप मेंघंटों इंतजार करते रहे। एलएससीडीपीओ (सदर टू, खजौली) मनोज राम ने बताया कि घटना में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। कुर्सियांऔर पंडाल तोड़ने वालों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल इलाके में शांति है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। मधुबनीजिले के बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र में भोजपुरी स्टार और भाजपा प्रचारक पवन सिंह की चुनावी सभा रद्द होने के बाद माहौल बिगड़ गया। कलुआहीहाई स्कूल मैदान में आयोजित सभा में पवन सिंह के देर तक नहीं पहुंचने पर समर्थक नाराज हो गए और टेंट-कुर्सियां तोड़कर हंगामा किया।
पूर्वोत्तर में पहली बार भारतीय वायु सेना का मेगा एयर शो, गुवाहाटी में 75 से अधिक विमानों का रोमांचक प्रदर्शन

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के 93वें वर्षगांठ के अवसर पर रविवार को मेगा एयर शो का आयोजन किया गया। इस दौरान वायु सेना ने अपनीताकत का प्रदर्शन किया। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, देश के इस हिस्से में एयर शो का आयोजन करना हमारे लिए वास्तव मेंसम्मान की बात है। हम दो-तीन साल से पूर्वत्तर में आने की कोशिश कर रहे थे। इसीलिए सिर्फ इसके लिए हमने अपना समय अक्तूबर से नवंबर मेंबदला, ताकि हम यह शो कर सें। एयर चीफ मार्शल ने कहा, मैं वास्तव में इस तरह के उत्साह और प्रतिक्रिया से हैरान हूं। पूर्वोत्तर अब कोई दूरदराजकी जगह नहीं रही। प्रदर्शन करने वाली विभिन्न टीमें हमेशा से यहां आती रही हैं और यह पहली बार है कि हमने पूर्वोत्तर भारत में वायु सेना दिवस काआयोजन किया। वायु सेना की ओर से पूर्वोत्तर भारत में अभ्यास के आयोजन को लेकर उन्होंने कहा, अभ्यास नियमित रूप से होते रहते हैं। ऐसा नहीं किकिसी खास उद्देश्य के लिए कुछ हो रहा है। समय-समय पर वहां अभ्यास भी किए जातेइस अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि वायु सेना ने वार्षिक उत्सव के लिए गुवाहाटी का चयन किया और गुवाहाटी नेपहले कभी इस तरह का शानदार प्रदर्शन नहीं देखा था। मैं आभारी हूं। यह हमारे युवाओं को वायु सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा। पूर्वी वायुकमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल सूरत सिंह ने कहा, मैं देश के सभी नागरिकों और खासकर सभी वायु योद्धाओं को 93वेंभारतीय वायु सेना दिवस के अवसर पर उड़ान प्रदर्शन के सफल समापन पर हार्थिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा, हमने पूर्वोत्तर को चुना, क्योंकि इसक्षेत्र के लोग हमारी वायु सेना में बड़ी संख्या में हैं और यह भारतीय वायु सेना की ओर से पूर्वोत्तर के लोगों से जुड़ने का एक संकेत है और गुवाहाटीपूर्वोत्तर का एक प्रवेश द्वार है। उन्होंने आगे कहा, भारतीय वायु सेना पूर्वोत्तर में तैयारी और संचालन के लिए पूरी तरह से सक्षम है। हम सभी संभावितपरिस्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अरुणाचल प्रदेश में कई उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (हवाई पट्टी या हवाई अड्डे) हैं। हमारे पास आठ उन्नत लैंडिंगग्राउंड हैं, सभी ऑपरेशनल हैं और समय-समय पर वहां अभ्यास भी किए जाते हैं। मायाबिनी रातिर बुकुत’ का प्रदर्शन शामिल93वें वायु सेना दिवस के अवसर पर पूर्वी वायु कमान ने आज गुवाहाटी में पहला पूर्ण पैमाने का एयर शो आयोजित किया। ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरलाचित घाट पर इस शो में 75 से अधिक विमान और हेलीकॉप्टर्स ने 25 से अधिक फोर्मेशन के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस वर्ष वायुसेना दिवस का विषय था- अप्रतिम, अडिग और सटीक। यह भारतीय वायु सेना की संचालन क्षमता, दृढ़ता और सटीकता पर केंद्रित है। इस अवसर परअसम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा और एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह मौजूद रहे। ब्रह्मपुत्र के तट पर मौजूददर्शकों के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह पहला एयर शो रोमांचक रहा। इस शो में राफेल, सुखोई, अपाचे, मिग, आईएल-78 रिफ्यूलर, मिराज, जगुआर, सी-17 ग्लोबमास्टर, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर एमके1, सी-130 हर्क्यूलिस, एंटोनोव एएन-32 और सूर्य किरण जैसे विमानों ने भाग लिया। ये सभीसात एयर बेस गुवाहाटी, तेजपुर, जोरहाट, चाबुआ, हसिमारा, बागडोगरा और पनगढ़ से संचालित हुए। एयर शो में असम के दिवंगत लोकप्रिय गायकजुबीन गर्ग को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिसमें उनके प्रसिद्ध गीत ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ का प्रदर्शन शामिल था।
AAP’s Saurabh Bharadwaj Accuses BJP of Planning to Privatise Delhi’s Newly Built Public Hospitals

AAP Delhi State President and former Health Minister Saurabh Bharadwaj has questioned the BJP government’s intent after it failed to operationalise the fully constructed 1,470-bed Shalimar Bagh hospital, warning that the administration appears to be preparing to hand over Delhi’s newly built public hospitals to private entities. Calling such a move a betrayal of the people of Delhi, the former Delhi Health Minister said the BJP must explain how citizens will receive free treatment if hospitals built with crores of public money and on public land are simply transferred to private hands. During a media interaction on Sunday, AAP Delhi State President and former Delhi Health Minister Saurabh Bharadwaj said, “This is not just about one hospital in Shalimar Bagh; nearly 24 hospitals were started under the Arvind Kejriwal government. Thousands of new beds were to be added to Delhi’s government hospitals. The 1,470-bed hospital in Shalimar Bagh, located right next to a private hospital, is almost complete, yet the BJP government has not started work to operationalise it.” Speaking irrelevantlyThe AAP Delhi Unit Chief said, “We have received information that the BJP government is planning to hand over these new hospitals to private hands. If you privatise a hospital built with public money, how will the people benefit? This is clearly a move to benefit private hospitals. The BJP has not given any clarification so far. Instead of giving clear answers, BJP spokespersons are speaking irrelevantly. They are saying, ‘Come to the porta cabin.’ I am ready. Let us both go and inspect together. If there is anything built inside the porta cabin, we will accept it. But these are proper hospitals with thousands of beds, how can you hand them over to private hospitals?”Responding to the BJP’s claim that the work could have been completed between 2021 and 2024, the former Delhi Health Minister said, “I agree that the hospitals were not completed within the stipulated time, but the AAP government never planned to privatise them. Whenever these hospitals are completed, they will be for the people; for free treatment, to benefit the public. But now if the BJP government wants to privatise them and hand them over to private hands, it would be a direct betrayal of the people of Delhi. How can it be justified that crores worth of public land and public funds spent by the Delhi government are simply transferred to private hospitals? This is wrong.” These government hospitals to private handsReacting to the BJP’s argument that the 2019 COVID policy involved a committee and ward plan for such hospitals, Saurabh Bharadwaj dismissed it as false. “That is completely wrong information,” he said. “For the first time, I would like the Chief Minister or Health Minister to clarify the government’s plan. A party spokesperson can say anything today and change it tomorrow, but the Chief Minister or Health Minister must state clearly whether they intend to hand over these government hospitals to private hands. If such a plan exists, they should admit it and name the hospitals.”