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भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे का 70 वर्ष की उम्र में निधन, रचनात्मकता के एक युग का अंत

भारतीय विज्ञापन जगत के प्रखर व्यक्तित्व और रचनात्मक क्रांति के वाहक पीयूष पांडे का गुरुवार को 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें भारतीयविज्ञापन का आत्मा और चेहरा माना जाता था। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के बड़े दिग्गज नेताओं समेत कई लोगों नेउनके निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा किपांडे की रचनात्मकता की हमेशा प्रशंसा की जाती थी और उन्होंने विज्ञापन और संचार की दुनिया में अभूतपूर्व योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वेउनके साथ बिताए गए पलों को हमेशा याद रखेंगे। उनके निधन से वे गहरे दुखी हैं और उनके परिवार एवं प्रशंसकों के साथ अपने विचार साझा किए।ओम शांति। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर शोक व्यक्त कियापीयूष पांडे के निधन पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर शोक व्यक्त किया। उन्होंने पीयूष पांडे कोभारतीय विज्ञापन के दिग्गज और प्रेरक बताया और कहा कि उन्होंने रोजमर्रा की भाषा, सटीक हास्य और सच्ची गर्मजोशी को विज्ञापन में बखूबी पेशकिया। उन्होंने पांडे के परिवार और पूरे रचनात्मक समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी पीयूष पांडे के निधनपर शोक जताया। उन्होंने उन्हें विज्ञापन जगत का ‘फेनोमेनन’ बताया, जिन्होंने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी। गोयल ने कहा कि उनकेविचार और कहानियां अमर हैं। वे न केवल एक महान विज्ञापन विशेषज्ञ थे बल्कि सच्चे मित्र भी थे, और उनके जाने से गहरा खालीपन महसूस हो रहाहै। एक युग शांतिपूर्वक समाप्त हो गयाभाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पीयूष पांडे के जाने से रचनात्मकता और प्रतिभा का एक युग शांतिपूर्वक समाप्त हो गया है। उनके प्रयोग औरकाम आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। ठाकुर ने पांडे को भारतीय विज्ञापन के वास्तुकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्वबताया। वहीं उदय कोटक ने लिखा कि पांडे ने 2003 में कोटक महिंद्रा बैंक के लिए ‘कॉमन सेंस’ अभियान शुरू किया और हर बार अपनी रचनात्मकसोच को भारतीय संदर्भ में पिरोया। वे सरलता और विनम्रता के साथ बेहद अलग सोच रखने वाले व्यक्ति थे।

तीन दशक बाद बड़ा बदलाव, सीएम योगी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि की

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णयलिया है। कहा कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटनेसे निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिताको बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यकमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं काक्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिएवित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीयअधिकारों की सीमा अधिकतम पांच गुना तक व विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। स्वीकृति का अधिकार होगामुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार, मुख्य अभियंता को अब 2 करोड़ के स्थान पर 10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षणअभियंता को 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा।अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार 40 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटेकार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है।

पीयूष गोयल का बयान भारत जल्दबाजी या दबाव में नहीं करेगा व्यापार समझौते, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत जल्दबाजी में या बंदूक की नोक पर व्यापार समझौते नहीं करता। उन्होंने कहा किभारत यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका सहित अन्य देशों व क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। जर्मनी मेंआयोजित बर्लिन डायलॉग के दौरान बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कहा, “हम यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। हम अमेरिका सेबात कर रहे हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करते और न ही हम कोई समय सीमा तय करके या बंदूक तानकर कोई समझौता करते हैं. डॉयलॉग में भाग लेने के लिए फिलहाल बर्लिनपीयूष गोयल डॉयलॉग में भाग लेने के लिए फिलहाल बर्लिन में हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते को दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत कभी भी जल्दबाजी में या तात्कालिक आवेश में निर्णय नहीं लेता। उन्होंने कहा कि भारत जरूरत से अधिक टैरिफ से निपटने केलिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है। गोयल ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत ने कभी भी राष्ट्रीय हित के अलावा किसी अन्य आधार पर यहनिर्णय लिया है कि उसके मित्र कौन होंगे… और यदि कोई मुझसे कहता है कि आप यूरोपीय संघ के मित्र नहीं हो सकते, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगाया कोई कल मुझसे कहता है कि मैं केन्या के साथ काम नहीं कर सकता, यह स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कहा कि किसी देश से कोई विशेष उत्पादखरीदने का निर्णय पूरी दुनिया को लेना होगा। ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिका भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने कादबाव बना रहा है।