चुनाव का चौकीदार चोरी देखता रहा, वोट चोरी पर राहुल गांधी का धमाका, CEC पर सीधा हमला

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एकबार फिर से चुनाव आयोग पर निशाना साधा है राहुल गांधी ने चुनावआयोग का नाम लिए बिना कहा कि चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा. उनकी यह टिप्पणी वोट चोरी के मुद्दे पर अपने हमले को तेजकरने के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर “लोकतंत्र को नष्ट करने वालों” को रक्षा करने का आरोप लगायाथासुबह 4 बजे उठो,36 सेकंड में 2 वोटर मिटाओ,फिर सो जाओ – ऐसे भी हुई वोट चोरी!चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा, चोरों को बचाता रहा. राहुल गांधी ने कल की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस का 36 सेकेंड का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि सुबह 4 बजे उठो, 36 सेकंड में 2 वोटर मिटाओ, फिर सो जाओ – ऐसे भी हुई वोट चोरी! चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा, चोरों को बचाता रहा गांधी 36 सेकंड के वीडियो में कथित”वोट चोरी” की कार्यप्रणाली के बारे में बता रहे हैं., इससे पहले गुरुवार शाम को एक पोस्ट में राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था कि देश के युवा, देशके छात्र, देश की जेन जी, संविधान की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी रोकेंगे मैं हमेशा उनके साथ खड़ा हूजय हिंद!” सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में इन्हें गलत बतायाप्रेस वार्ता के बाद राहुल गांधी ने देर शाम सोशल मीडिया पर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बहाने बनाना बंद करके सबूत कर्नाटकसीआईडी को तुरंत देने चाहिए राहुल ने कहा कि जब कांग्रेस के अलंद के उम्मीदवार ने धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया, तो स्थानीय चुनाव आयोग केअधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन सीआईडी जांच को सीईसी ने रोक दिया. कर्नाटक सीआईडी ने 18 महीनों में 18 पत्र लिखकर सभी सबूतमांगे, लेकिन सीईसी ने उन्हें रोक दिया. कर्नाटक चुनाव आयोग ने जांच के लिए ईसीआई से कई बार अनुरोध किया, लेकिन सीईसी ने उसे भी रोकदिया।नाम डिलीट करने वाले डेस्टिनेशन आईपी, डिवाइस पोर्ट और ओटीपी के विवरण को छिपाया गया है सीईसी ने इसे रोक दिया. अगर यह वोटचोरी पकड़ी नहीं जाती और 6,018 वोट डिलीट हो जाते, तो कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव हार सकता था. राहुल गांधी की वोट चोरी फैक्टरी प्रेस वार्ताके 30 मिनट के भीतर की चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा सोशल मीडिया पर जारी पोस्टमें इन्हें गलत बताया और इन आरोपों का खंडन किया था चुनाव आयोग ने कहा था कि जैसा भ्रम प्रचारित किया जा रहा है. मतदाताओं को मत काटने का भी आरोप लगायाकिसी भी आम आदमी के मत को ऑनलाइन हटाया नहीं जा सकता है इसके लिए बकायदा प्रक्रिया है, जिसका पालन किया जाना आवश्यक हैजिसका भी वोट कटेगा उसे अपनी बात कहने का मौका दिया जाता है बिना सुनवाई के विलोपन संभव ही नहीं है. चुनाव आयोग ने कहा था कि उनकेसंज्ञान का मामला है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक के अलंद में कुछ मतों को हटाने के असफल प्रयास किए गए थे इस मामले में जांचके लिए चुनाव आयोग ने ही प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग ने कहा कि अलंद विधानसभी सीट पर 2018 में भाजपा के सुभाष गुट्टेदार कीजीत हुई जबकि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बीआर पाटिल की जीत हुई. आयोग के सूत्रों ने कहा यह मामला 2023 का था, उस परआयोग पहले ही कार्रवाई कर चुका है, ऐसे में उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त की छवि को खराब करने के लिए लगाए गएकुत्सित प्रयास हैं राहुल गांधी ने कहा था कि फर्जी आईडी बनाकर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से डिलीट किए गए उन्होंने आरोप लगाया था किमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वोट चोरों की रक्षा कर रहे हैं उन्हें बचा रहे हैं। उन्होंने लक्षित करके महिलाओं, दलितों, ओबीसी और आदिवासीमतदाताओं को मत काटने का भी आरोप लगाया.
‘Hamas’ वाले पोस्ट पर बवाल, केरल सरकार ने अमेरिका से मांगी जांच में मदद “राजीव चंद्रशेखर के पोस्ट पर बढ़ा विवाद”

केरल सरकार ने राज्य पुलिस को पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के फेसबुक अकाउंट की जांच में अमेरिका से मदद लेने की मंजूरी दे दी है यह मंजूरीअमेरिका से पारस्परिक कानूनी सहायता के तहत दी गई है केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विवादित फेसबुक पोस्ट 29 अक्टूबर 2023 कोकलामस्सेरी में हुए दोहरे बम विस्फोटों को लेकर की थी, जिसमें आठ लोग मारे गए थे इस पोस्ट को लेकर एर्नाकुलम साइबर सेल में 31 अक्तूबर2023 को पुलिस ने शिकायत दर्ज कराई गई थी. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि चंद्रशेखर के अकाउंट से कथित तौर पर किए गए फेसबुकपोस्ट में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई और कलामस्सेरी में हुए विस्फोटों में फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास का जिक्र करते हुएएक भड़काऊ टिप्पणी की गई इस पोस्ट में कांग्रेस और माकपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया गया और हैशटैग’HamasTerrorist’ और ‘KochiTerrorAttacks’ का इस्तेमाल किया गया. हमास का नाम लेकर पोस्ट करने के आरोइसमें कथित तौर पर हमास नेता खालिद मशाल की ओर इशारा किया गया था, जो विस्फोट से एक दिन पहले केरल में आयोजित फलस्तीन समर्थकविरोध प्रदर्शन में वर्चुअल रूप से शामिल हुआ था. इस पोस्ट की जांच के लिए राज्य पुलिस को अमेरिका में फेसबुक और एक्स मीडिया प्लेटफॉर्म सेजानकारी जुटाने की जरूरत है इस संबंध में पुलिस ने राज्य सरकार से जुलाई में इसकी इजाजत मांगी, जिस पर 8 सितंबर को सरकार ने इजाजत देदी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पारस्परिक कानूनी सहायता का अनुरोध सीबीआई के माध्यम से भेजा जाएगा, जो भारत की इंटरपोल नोडलएजेंसी है अमेरिका में इंटरपोल एजेंसी संबंधित सोशल मीडिया फर्मों से जानकारी एकत्र करके अनुरोध को आगे बढ़ाएगी. पुलिस ने चंद्रशेखर औरभाजपा के राष्ट्रीय सचिव अनिल एंटनी के खिलाफ हमास का नाम लेकर पोस्ट करने के आरोप में एक और मामला भी दर्ज किया था. सीबीआई के माध्यम से भेजा जाएगादोनों मामले आईपीसी की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153ए (धर्म, नस्ल, भाषा या जाति के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनीको बढ़ावा देना) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(ओ) (उपद्रव फैलाना) के तहत दर्ज किए गए थे बाद में चंद्रशेखर ने केरल उच्चन्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने पुलिस को उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया. एक पुलिस अधिकारी नेबताया कि पारस्परिक कानूनी सहायता का अनुरोध सीबीआई के माध्यम से भेजा जाएगा, जो भारत की इंटरपोल नोडल एजेंसी है अमेरिका में इंटरपोलएजेंसी संबंधित सोशल मीडिया फर्मों से जानकारी एकत्र करके अनुरोध को आगे बढ़ाएगी.
‘माझी लाडकी बहिन’ योजना में अब ई-केवाईसी अनिवार्य, दो महीने में प्रक्रिया पूरी न की तो रुकेगी सहायता

महाराष्ट्र सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है. लाभार्थियों को यह प्रक्रिया पूरीकने के लिए दो महीने का समय दिया गया है इसको लेकर गुरुवार को एक सरकार आदेश जारी किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी.मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की उम्र की उन महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की मदद की जाती है, जिनकेपरिवार की सालाना आया 2.5 लाख से अधिक नहीं होती. महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने गुरुवार को कहा, योजना के सभीलाभार्थियों के लिए ई-केवाई की सुविधा वेब पोर्टल (ladakibahin.maharashtra.gov.in) पर उपलब्ध कराई गई है आपसे अनुरोध है किअगले दो महीने के भीतर ई-केवाई की प्रक्रिया पूरी करें. लाभार्थियों को हर साल ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्यउन्होंने एक्स पर कहा, यह प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक है योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र महिलाओं को नियमित लाभ सुनिश्चितकरने के लिए सभी को इसे पूरा करना चाहिए। तटकरे ने कहा कि यह प्रक्रिया भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने में भी मददगार होगी.सरकारी आदेश के मुताबिक, महिलाओं को अपनी सत्यापन और प्रमाणीकरण प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, ताकि उनके बैंक खातों मेंमासिक सहायता जारी रहे आदेश में कहा गया, अगर आधार सत्यापन नहीं किया गाय तो लाभ रोक दिए जाएंगे. लाभार्थियों को हर साल ई-केवाईसीप्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी. ई-केवाईसी के मासिक सहायता रोक दीराज्य सरकार ने हाल ही में यह भी बताया था कि करीब 26.34 लाख अपात्र भी योजना में नामांकन कर मासिक सहायता हासिल कर रहे थे, जिनमेंपुरुष भी शामिल हैं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 2.25 करोड़ महिलाएं यह सहायता प्राप्तकर रही है यह योजना जुलाई2024 में शुरू की गई थी. महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया हैऔर इसे पूरा करने के लिए दो महीने का समय दिया है सरकारी आदेश में कहा गया, बिना ई-केवाईसी के मासिक सहायता रोक दी जाएगी.
देश की रक्षा सिर्फ़ सीमा पर नहीं, संकल्प और एकजुटता से होती है, बोले राजनाथ सिंह अब “आतंकवादियों को सबक सिखाना तय”

देश की सुरक्षा केवल सीमा पर लड़े गए युद्ध से तय नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश के लोगों के संकल्प और एकजुटता से तय होती है रक्षा मंत्रीराजनाथ सिंह ने 1965 के युद्ध के दिग्गजों से बातचीत में यह बात कही. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के जांबाजों के साथ बातचीत में रक्षा मंत्रीराजनाथ सिंह ने कहा, “भारत अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों के मामले में भाग्यशाली नहीं रहा है… लेकिन हमने इसे नियति नहीं माना है हमने अपनीनियति स्वयं तय की है… इसका एक उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर है” अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने देश के विकास में जवानों और किसानों कीमहत्वपूर्ण भूमिका के बारे में भी बात. रक्षा मंत्री ने कहा कि हम पहलगाम की भयावह घटनाओं को नहीं भूले हैं और जब भी हम उन्हें याद करते हैं, हमारा दिल भारी हो जाता है और मन क्रोध से भर जाता है वहां जो हुआ उसने हम सभी को झकझोर दिया। लेकिन वह घटना हमारे मनोबल को नहींतोड़ पाई. हमारे वीर जवानों के सम्मान के साथ-साथ हमारे अन्नदाताओं का गौरवराजनाथ सिंह ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री ने आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाने का संकल्प लिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी. हमने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और अपने दुश्मनों को दिखाया कि हमारा प्रतिरोध कितना मजबूत और शक्तिशाली है हमारी पूरी टीम की ओर सेदिखाए गए समन्वय और करिश्मे ने साबित कर दिया कि जीत अब कोई अपवाद नहीं है जीत एक आदत बन गई है और हमें इस आदत को हमेशाबनाए रखना चाहिए. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं, “… कोई भी युद्ध केवल युद्ध के मैदान में नहीं लड़ा जाता, बल्कि युद्ध में प्राप्त विजय पूरेराष्ट्र के सामूहिक संकल्प का परिणाम होती है. 1965 के उस कठिन समय में, जब चारों ओर अनिश्चितता और चुनौतियाँ थीं, देश ने लाल बहादुरशास्त्री के दृढ़ नेतृत्व में उन चुनौतियों का सामना किया. शास्त्री जी ने उस दौर में न केवल निर्णायक राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया, बल्कि पूरे देश कामनोबल भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया उन्होंने एक नारा दिया जो आज भी हमारे दिलों में गूंजता है, ‘जय जवान, जय किसान इस एक नारे में हमारे वीरजवानों के सम्मान के साथ-साथ हमारे अन्नदाताओं का गौरव भी समाहित था…” आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाया जाएगाउन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री ने यह संकल्प लिया है कि इस बार आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भीनहीं की होगी. पहलगाम आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इसके तहतपाकिस्तान की ओर से नियंत्रित क्षेत्रों में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया. इन हमलों के कारण चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं सिंह ने यह भी कहा कि एक राष्ट्र के रूप में भारत स्वतंत्रता के बाद से अपने पड़ोसियोंके मामले में बहुत भाग्यशाली नहीं रहा है. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के जांबाजों के साथ बातचीत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है किभारत अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों के मामले में भाग्यशाली नहीं रहा है… लेकिन हमने इसे नियति नहीं माना है। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान देश कीअर्थव्यवस्था में जवानों और किसानों की भूमिका की भी चर्चा की.
राहुल गांधी देश में जेन-जेड के नाम पर गृहयुद्ध भड़काना चाहते, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लगाए गंभीर आरोप “जानें क्या कुछ कहा”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जेन जेड को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने तीखीप्रतिक्रिया दी है दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत में गृहयुद्ध भड़काना चाहते हैं और सोरोस फाउंडेशन के साथ मिलकर देश को बांटने कीकोशिश कर रहे हैं उन्होंने कहा कि भारत में अगर जेन-जेड उठ खड़ा हुआ, तो कांग्रेस और उसके साथी दलों को देश छोड़कर भागना पड़ेगा. निशिकांत दुबे ने कहा, जेन-जेड का मतलब अगली पीढ़ी, युवा और अपने देश के बारे में कैसे फैसला लेना चाहते हैं और सरकार बदलना चाहते हैं. जेन जेड भारत में पहले ही भारत में ऐसा कर चुका है अन्ना और अरविंद हजारे का आंदोलन जेन-जेड का ही नतीजा था निर्भया कांड के दौरान 2013 मेंएक लाख लोग सड़कों पर थे, लेकिन भाजपा ने हिंसा को न भड़काने का फैसला किया. राहुल गांधी नेपाल और बांग्लादेश में जो हुआ, राहुल गांधीउससे खुद को जोड़ना चाहते हैं. उन्होंने आगे कहा, दोनों जगहों पर जेन-जेड आंदोलन भाई-भतीजावाद और परिवारवाद के खिलाफ था। परिवारवादकहा हैं? यह दशकों से गांधी परिवार में है अगर वह जेन-जेड को भड़काना चाहते हैं, तो मैं राहुल गांधी के साथ हूं. पाली जेन–जेड एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहतापूरी कांग्रेस पार्टी को देश से फरार होना पड़ेगा नेपाल और बांग्लादेश में जेन-जेड भ्रष्टाचार के खिलाफ था यहां सभी घोटाले कांग्रेस ने किए हैं पिछले11 वर्षों में हम पर किसी घोटाले का आरोप नहीं लगा है. जेन-जेड संविधान में संशोधन की मांग कर रहा है बांग्लादेशी जेन-जेड एक इस्लामी राष्ट्रबनाना चाहता था और नेपाली जेन-जेड एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन अगर जेन-जेड हिंदू राष्ट्र की मांग करे, तोआप क्या करेंगे? सिर्फ कांग्रेस ही नहीं उनके सहयोगी दल भी वंशवादी हैं राहुल गांधी भारत में गृहयुद्ध भड़काना चाहते हैं. उन्होंने आगे आरोप लगाया, उसी गृहयुद्ध का इस्तेमाल करके राहुल गांधी के दादा (देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल) नेहरू ने देश का बंटवारा किया था वह सोरोस फाउंडेशनके साथ मिलकर देश को बांट रहे हैं भाजपा जेन-जेड के साथ खड़ी है कांग्रेस और उसके सहयोगी देश छोड़कर भागते नजर आएंगे. भाजपा सांसद नेआगे कहा, हम जेन-जेड आंदोलन के साथ हैं हम इसे रोकने की बात नहीं कर रहे हैं भाजपा में कोई भी डरता नहीं है केजरीवाल जेन-जेड आंदोलन कीवजह सत्ता में आए बाद में उन्होंने भ्रष्ट कांग्रेस, लालू प्रसाद यादव और स्टालिन के साथ समझौता किया और यूपीए के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा।निर्भया कांड के दौरान जेन-जेड आंदोलन हुआ था अगर जेन-जेड आंदोलन फिर से होता है तो भाजपा उस आंदोलन का समर्थन करेगी.चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी से भाग रहाउन्होंने कहा, इन भ्रष्ट, परिवारवादी नेताओं को 140 करोड़ लोगों में अपने परिवार के अलावा कोई नजर नहीं आता पिछले डेढ़ साल से नमो ऐप परएक पूरा अभियान चल रहा है और प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि हम पढ़े-लिखे युवाओं को राजनीति में लाना चाहते हैं. उन्हें राजनीतिक कार्यकर्ता बनानाचाहते हैं हम इस आंदोलन को और तेज करेंगे ये सब लोग राहुल गांधी, अखिलेश, स्टालिन, ममता, लालू या तेजस्वी यादव देश छोड़ते नजर आएंगे।वहीं, राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, जिस तरह से चीजें चुराई जा रही हैं और सरकार सत्ता में बने रहने केलिए सिस्टम से छेड़छाड़ कर रही है, उसे पूरा देश देख रहा है चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है क्या लोकतंत्र को बचाना केवल राहुलगांधी की जिम्मेदारी है? सबूत मांगने के बजाय चुनाव आयोग किसी तीसरे पक्ष से स्वतंत्र जांच का आदेश क्यों नहीं देता? भाजपा चुनाव आयोग कोसही ठहरा रही है। यही वजह है कि हमने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलीभगत कर रहे हैं. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा मेंविपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह जेन-जेड को भड़का कर भारत में गृहयुद्ध शुरू करना चाहते हैं और सोरोस फाउंडेशन के साथमिलकर देश को बांटने की साजिश रच रहे हैं दुबे ने कहा कि अगर जेन जेड फिर से आंदोलन करता है तो भाजपा उसका समर्थन करेगी.
पाकिस्तान पर कांग्रेस का प्रेम या रणनीति? सैम पित्रोदा के बयान पर भाजपा का बड़ा हमला

भाजपा ने शुक्रवार को कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला और आरोप लगाया कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले (26/11) के बाद भी कांग्रेस सरकार नेपाकिस्तान पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया. भाजपा ने कहा कि इसकी वजह कांग्रेस का पाकिस्तान के प्रति अनवरत प्रेम था मामला तब गरमा गयाजब कांग्रेस के ओवरसीज विभाग प्रमुख सैम पित्रोदा का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में घर जैसा महसूस हुआ.सैम पित्रोदा का यह बयान विपक्ष के लिए हथियार बन गया भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे राहुल गांधी की सोच से जोड़ते हुए कहा कि राहुलगांधी के सबसे करीबी और कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा पाकिस्तान को अपना घर बताते हैं यही वजह है कि यूपीए सरकार ने 26/11 जैसेहमले के बाद भी पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया. प्रदीप भंडारी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि पाकिस्तान का पसंदीदा और कांग्रेसका चुना हुआ! उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विदेश नीति हमेशा पाकिस्तान को खुश करने वाली रही है भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने आतंकवाद परकठोर रुख दिखाने की बजाय पाकिस्तान की स्थितियों को समझने और उनका पक्ष लेने की कोशिश की. पित्रोदा गांधी परिवार के करीबीइसको लेकर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कांग्रेस पर खूब हमला बोला इस दौरान भंडारी ने कहा कि क्या कोई देशभक्त कभी यह कह सकता है किआतंकी राज्य पाकिस्तान उसके लिए घर जैसा है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति के तहत आया है और यह 140 करोड़ भारतीयों व शहीद सैनिकों का अपमान है. भंडारी ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पित्रोदा गांधी परिवार के करीबी हैं और लंबेसमय से उनकी रणनीति तय करते हैं उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में आईएसआई एजेंट शाहिद अफरीदी ने राहुल गांधी को आइडल कहा था औरअब उनका नजदीकी पाकिस्तान को घर बता रहा है भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी कह चुके हैं कि वह भारतीय राज्य से लड़नाचाहते हैं भाजपा ने इसे देश की संप्रभुता पर हमला और कांग्रेस की राष्ट्र विरोधी सोच करार दिया. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस परजमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा पाकिस्तान को बचाने की कोशिश की. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने आतंकवादीहाफिज सईद से यासीन मलिक के जरिए बातचीत की, 26/11, समझौता, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों में पाकिस्तान को क्लीन चिटदी. अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करने का कामपूनावाला ने आगे कहा कि कांग्रेस ने हमेशा पाकिस्तान की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करने का काम किया उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेअनुच्छेद 370 पर पाकिस्तान की स्थिति को समर्थन दिया और सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को 80 प्रतिशत पानी दिया. पूनावाला ने कांग्रेसको इस्लामाबाद नेशनल कांग्रेस तक कह दिया. भाजपा ने कहा कि कांग्रेस का रवैया देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान पर चोट पहुंचाने वाला रहा हैभाजपा नेताओं का कहना है कि 26/11 जैसे बड़े हमले के बाद भी यदि सख्ती नहीं दिखाई गई तो यह कांग्रेस की मानसिकता और उसके पाकिस्तानप्रेम को दर्शाता है भाजपा ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर चुनावी राजनीति में कांग्रेस पर दबाव बनाने का इशारा भी दिया है. जहां भाजपा नेताओं केबयानों ने माहौल गरमा दिया है, वहीं कांग्रेस की तरफ से अभी तक इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है भाजपा ने साफ कर दिया है किवह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और हर मंच पर कांग्रेस के पाकिस्तान प्रेम का मुद्दा उठाएगी.
अमित मालवीय का आरोप आतंकवादी से मुलाकात पर UPA ने कहा था धन्यवाद, क्या देश की सुरक्षा से हुआ था समझौता?”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने शुक्रवार को अलगाववादी यासीन मलिक के दावे को ‘चौंकाने वाला’ बताया। मलिक ने कहा कि साल 2006 में जब उसने पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और 26/11 हमले के मास्टरइमाइंड हाफिज सईद सेमुलाकात की थी, तब मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे इसके लिए ‘धन्यवाद’ कहा था मलिक अभी तिहाड़ जेल में बंद हैऔर आंतकवादी फंडिंग के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है. यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है इसहलफनामे में उसने कहा कि पाकिस्तान में हाफिज सईद से मुलाकात के बाद उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारएमके नारायणन को इसकी जानकारी दी थी. मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दियाअमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को ‘चौंकाने वाला’ बताया और दावा किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नेएक आतंकवादी फंडिंग के दोषी को ‘धन्यवाद’ कहा। मालवीय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यूपीए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर थी.अपने एक्स पोस्ट में अमित मालवीय ने लिखा कि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का आतंकवादी यासीन मलिक ने एक चौंकाने वालादावा किया है, जो फिलहाल आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में 25 अगस्त को दिए हलफनामे में मलिक नेकहा कि उसने 2006 में पाकिस्तान जाकर हाफिज सईद से मुलाकात की थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और 26/11 का मास्टरमाइंड है।मलिक के मुताबिक यह मुलाकात उसकी अपनी पहल पर नहीं, बल्कि भारत की खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर हुई थी यहमुलाकात उस समय एक बैक-चैनल का हिस्सा थी मलिक ने कहा कि इस मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे व्यक्तिगत रूपसे धन्यवाद दिया था. अपराधी पर कानून की पूरी सख्ती लागू होनी चाहिएमालवीय ने आगे लिखा कि यासीन मलिक एक कट्टर आतंकवादी है, जिसने वायुसेना के तीन कर्मियों की हत्या की थी. यह देश के खिलाफ युद्ध छेड़नेजैसा अपराध है और ऐसे अपराधी पर कानून की पूरी सख्ती लागू होनी चाहिए. अगर यासीन मलिक के ये नए दावे सच हैं, तो यह यूपीए सरकार कीराष्ट्रीय सुरक्षा नीति और गोपनीय वार्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. यासीन मलिक ने अपने हलफनामे में यह भी दावा किया कि पाकिस्तान मेंभूकंप राहत कार्य के लिए यात्रा के दौरान उसकी सईद और अन्य लोगों से मुलाकात भारत की खुफिया एजेंसी (आईबी) के अनुरोध पर हुई थी मलिकका कहना है कि वह शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा था, लेकिन बाद में इसी मुलाकात को तोड़-मरोड़ पेश किया गया और उसेआतंकवादी घोषित कर दिया गया. इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा, क्या कोई यह कह सकता है कि मनमोहन सिंह देशभक्त नहीं थे? ये सारे दावे बेबुनियाद हैं। आतंकवाद, आतंकवाद होता है और उससे कोई समझौतानहीं किया जा सकता। आज (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के साथ किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है हमारे शासन के दौरान26/11 जैसा हमला हुआ और ऐसी कई घटनाएं हुईं। लेकिन कोई भी सरकार आतंकवाद पर समझौता नहीं कर सकती लेकिन एक बात सच है- अगर26/11 के बाद मोदी सत्ता में हो
2027 की सियासी जमीन तोड़ने की कोशिश में मायावती, दलित-पिछड़ा समीकरण फिर से साधने की तैयारी

बहुजन समाज पार्टी यूपी की सियासत में एक बार फिर अपने लिए मजबूत भूमिका की तलाश में है इसके लिए पार्टी नौ अक्टूबर को लखनऊ केकांशीराम स्मारक स्थल पर बड़ी जनसभा करने की तैयारी कर रही है बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम मेंलाखों लोगों के पहुंचने की संभावना है। यूपी की राजधानी में बड़ी रैली कर मायावती अपनी वापसी के मजबूत संकेत देना चाहती हैं. इसे मायावती केद्वारा 2027 के यूपी चुनाव की शंखनाद भी माना जा रहा है बड़ा प्रश्न यह है कि मायावती की ये कोशिशें कितनी सफल होंगी? बसपा के मजबूत होनेसे भाजपा के समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा? अखिलेश यादव ने जिस पीडीए समीकरण के सहारे पिछले लोकसभा चुनाव में सफलता पाई है, उनसमीकरणों में नई परिस्थितियों में क्या परिवर्तन आ सकता है? पिछले तीन लोकसभा चुनावों और तीन यूपी विधानसभा चुनावों में बसपा लगातारकमजोर होती गई है। उसके परंपरागत वोट बैंक का एक छोटा हिस्सा ही उसके साथ रह गया है बसपा के खराब प्रदर्शन से निराश दलित और अतिपिछड़े मतदाताओं ने धीरे-धीरे भाजपा और सपा की ओर रुख कर लिया है इन समर्थकों में एक बड़ा वर्ग आज भी ऐसा है जो दिल से बसपा से जुड़ाहुआ है, लेकिन अपना वोट खराब न करने के कारण दूसरे दलों के साथ जुड़ गया है.पिछड़ों को अपने साथ वापस लाने पर काम कर रही हैयदि मायावती इस वर्ग के लोगों के बीच यह भरोसा पैदा करने में सफल हो जाती हैं कि वे पूरी मजबूती के साथ वापसी करने के लिए तैयार हैं तोपहली कोशिश में ही इस वर्ग का एक हिस्सा वापस उनके साथ जुड़ सकता है. बसपा दलित मतदाताओं के स्वाभिमान के तौर पर उभरी थी दलितमतदाता बसपा को अपनी पहचान के तौर पर देखता था वह दूसरे दलों की ओर गया है, लेकिन उसके मन में अपनी पहचान को लेकर एक छटपटाहटआज भी साफ महसूस की जा रही है यदि मायावती और आकाश आनंद इस वर्ग में अपनी पहचान का मुद्दा फिर से जीवित कर सकें तो वह उनके साथवापस आ सकता है और यह बसपा की वापसी का मजबूत आधार बन सकता है यदि बसपा अपना यह कोर वोट बैंक अपने साथ वापस लाने मेंसफल रही तो गैर यादव अति पिछड़ा ओबीसी वर्ग भी उसके साथ वापस आ सकता है. अपने आपको मजबूत करने के लिए बसपा ब्राह्मण सम्मेलनदुबारा करने की योजना बना चुकी है। इसकी शुरुआत जल्द ही सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में की जाएगी. इसके अलावा वह मुसलमानों, अति पिछड़ोंको अपने साथ वापस लाने पर काम कर रही है. मायावती इस वर्ग के बीच अपने मजबूत होने का कितना मजबूत संदेश दे भाजपा सरकारों ने गैर यादव ओबीसी जातियों और गैर जाटव दलित जातियों को साधने का काम बहुत ही प्रभावशाली तरीके से किया है। भाजपा नेइनके मन में यह भाव पैदा करने में सफलता पाई है कि समाजवादी पार्टी का पूरा लाभ यादव समाज के बीच बंट जाता है, जबकि बसपा के मजबूतहोने पर यही लाभ जाटव वर्ग ले जाता है और अति पिछड़े ओबीसी वर्ग और गैर जाटव दलितों को कुछ नहीं मिलता है. भाजपा ने बड़ी ही खूबसूरती सेइन वर्गों को अपने पार्टी संगठन से लेकर सरकारों तक में उनकी जातिगत भागीदारी सुनिश्चित की है इससे भाजपा की स्वीकार्यता हर वर्ग में बढ़ी हैभाजपा की सरकारों ने इन वर्गों तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उन्हें अपने मजबूत वोट बैंक के रूप में परिवर्तित कर लिया हैयही वर्ग केंद्र के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में बार-बार भाजपा सरकारों की वापसी का कारण बना है लेकिन राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि अतिदलित जातियों में ‘जातीय पहचान का मुद्दा’ इन सभी समीकरणों पर भारी पड़ सकता है भाजपा को मायावती के मजबूत होने से कितना नुकसान होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मायावती इस वर्ग के बीच अपने मजबूत होने का कितना मजबूत संदेश दे पाती हैं.
अमेरिकी विशेषज्ञ इयान ब्रेमर ने ट्रंप परिवार पर पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्तों और नैतिकता की कमी का लगाया आरोप , भारत की सुरक्षा के लिए जताई चिंता “मोदी की स्वतंत्र विदेश नीति की प्रशंसा”

अमेरिकी राजनीति विज्ञानी और यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने ट्रंप परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन औरउसके करीबी लोगों के पाकिस्तान से रिश्ते रणनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि व्यापारिक और पैसों के लालच से जुड़े हैं ब्रेमर ने कहा कि ट्रंप परिवार मेंनैतिकता की कमी है और उनमें चोरतंत्र की प्रवृत्ति साफ दिखती है. इयान ब्रेमर ने एएनआई से बातचीत में कहा कि ट्रंप प्रशासन से जुड़े लोगपाकिस्तान में बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहे हैं उन्होंने इसे अवसरवादी रवैया बताया और कहा कि इसका मकसद रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि पैसोंका फायदा उठाना है ब्रेमर ने साफ कहा कि अमेरिका की राजनीति इस तरह नहीं चलनी चाहिए, लेकिन जो रिपोर्टिंग सामने आई है, उससे यह सच्चाईछिप नहीं सकती. ब्रेमर ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते पर भी टिप्पणी की उन्होंने कहा कि यह कोई गुप्त सौदा नहीं था औरअमेरिकी प्रशासन को इसके बारे में पहले से जानकारी थी.भारत के लिए सुरक्षा माहौल और जटिल हो सकताब्रेमर के अनुसार, यह समझौता सऊदी अरब के लंबे समय से चले आ रहे परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें पाकिस्तान का सहयोग रहा है। उन्होंनेकहा कि यह समझौता सऊदी की सुरक्षा नीति में विविधता लाने का हिस्सा है. ब्रेमर का मानना है कि सऊदी अरब का यह कदम इस्राइल द्वारा ईरानपर किए गए हमलों और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव का परिणाम है उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस्राइल को रोकने या उसके हमलों पर कोई कार्रवाई करने सेइनकार कर दिया, जिससे सऊदी अरब नाराज हो गया इसी नाराजगी का असर पाकिस्तान-सऊदी समझौते में देखने को मिला. ब्रेमर ने चेतावनी दी कियह समझौता भारत की सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है। उनके मुताबिक, अगर भारत-पाकिस्तान में अगली बार कोई संघर्ष होता है, तो भारत कोयह सोचना पड़ेगा कि क्या सऊदी अरब पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा होगा. उन्होंने कहा कि इस वजह से भारत के लिए सुरक्षा माहौल और जटिल होसकता है. मोदी की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहनाब्रेमर ने ट्रंप की वैश्विक राजनीति की शैली पर भी सवाल उठाए उन्होंने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय नियमों और परंपराओं को नहीं मानते उनका रवैया यह हैकि वह राष्ट्रपति हैं, इसलिए सबको उनकी बात माननी होगी, वरना परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, ब्रेमर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेट्रंप के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर अमेरिका को कड़ा संदेश दिया. ब्रेमर ने कहा कि मोदी ने ट्रंप को सार्वजनिक मंच पर भारत-पाकिस्तानमसले पर झूठा करार दिया और दुनिया के सामने उनकी छवि को चुनौती दी. उनके मुताबिक, अधिकतर नेता ऐसी स्थिति में चुप रह जाते, लेकिन मोदीने अलग रास्ता चुना. अमेरिकी राजनीति विज्ञानी इयान ब्रेमर ने ट्रंप परिवार पर पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्ता रखने और नैतिकता की कमी का आरोपलगाया। उन्होंने कहा कि यह रणनीति नहीं, बल्कि पैसों का खेल है ब्रेमर ने सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते को क्षेत्रीय तनाव और इस्राइल के हमलोंका नतीजा बताया उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। साथ ही, मोदी की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की.
दिल्ली में 75 से अधिक देशों के राजदूतों ने अपनी मां के नाम पौधे लगाए, पीएम मोदी के सेवा पखवाड़े का हिस्सा बना अनोखा पौधरोपण अभियान

दिल्ली में रह रहे दुनियाभर के विभिन्न देशों के 75 राजदूतों, उच्चायुक्तों ने अपनी मां के नाम पौधे लगाए विदेशी मेहमान भारत की राजधानी में अपनीमां के नाम की ये अनोखी याद सहेजते हुए ये भावुक दिखे पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में चल रहे सेवा पखवाड़े के अंतर्गत दिल्लीसरकार ने रिज क्षेत्र में ये पौधरोपण कार्यक्रम किया. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसका नेतृत्व किया, साथ मेंदिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे रिज क्षेत्र में पीबीजी ग्राउंड के भीतर एक पेड़ मां के नाम 2.0 वैश्विक पौधरोपण अभियानआयोजित हुआ इसमें 72 से अधिक देशों के 75 से ज्यादा राजदूतों, उच्चायुक्तों और हेड्स ऑफ मिशन ने हिस्सा लिया. बहरीन, भूटान, चीन, रूस, ओमान, स्पेन, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, जमैका, फीजी, पापुआ न्यू गिनी समेत एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका और ओशिआनिया के कई देशों केराजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों ने हिस्सा लिया. हरएक विदेशी मेहमान ने अपनी मां के नाम पर पौधा लगाया हर पौधे के साथ नाम पट्टिकालगी, जिसमें राजनयिक का नाम, उनकी मां का नाम और पौधे की प्रजातियां लिखी हुई हैं. प्रेरणादायक स्थान बनाकर इसका संदेश दिल्लीवासियों तक लेकार्यक्रम के दौरान कई भावुक पल भी सामने आए कैमरून की राजदूत अपनी दिवंगत मां को याद करके रो पड़ीं और मुख्यमंत्री ने उनको गले लगाया15 दिन पहले ही उनकी मां की मृत्यु हो गई थी। इसमें खाड़ी देशों के राजनयिकों ने खास रुचि दिखाई ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अलशिबानी नेइस अभियान के लिए धन्यवाद दिया. विधानसभा परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत बृहस्पतिवार को पौधे लगाए गए। पीएम मोदी के75वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित सेवा पखवाड़े में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट व विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठअधिकारियों ने पौधे लगाए इस दौरान विधानसभा परिसर में हरित क्षेत्र 20 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की गई। दिल्ली विधानसभा को हराभरा, सुंदरऔर प्रेरणादायक स्थान बनाकर इसका संदेश दिल्लीवासियों तक ले जाएंगे. पीएम मोदी के वैश्विक नेतृत्व का सबूतकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि धरती को बचाना सबकी जिम्मेदारी है इस कार्यक्रम में पीएम मोदी की एक पेड़ मां के नाम की अपील ने सबको ये एहसासकराया कई राजनयिक अपनी मां को याद करके भावुक हो गए उन्होंने बताया कि सेवा पखवाड़े में 25 सितंबर को पूरे देश में 7.5 करोड़ पौधे लगाएजाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा, दिल्ली का ग्रीन कवर 25 फीसदी बढ़ा है, देश में सबसे ज्यादा है उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि औरवायु प्रदूषण की चुनौतियां किसी सीमा को नहीं मानतीं, इसलिए हमें वैश्विक स्तर पर साथ मिलाकर काम करना होगा. दिल्ली में ये कार्यक्रम इतिहासमें मील का पत्थर साबित होगा. पर्यावरण मंत्री ने कहा, 72 से ज्यादा देशों के राजनयिकों ने पौधे लगाए यह पीएम मोदी के वैश्विक नेतृत्व का सबूत हैऔर सभी भारतीयों के लिए गर्व का पल है.