Parliamentary Committee Urges Modi Government to Implement Reservation in Private Educational Institutions Under Article 15(5)

A 31-member bipartisan Parliamentary Standing Committee on Education, chaired by Shri Digvijaya Singh, has issued a strong recommendation urging the Government of India to pass legislation enforcing Article 15(5) of the Constitution, which allows reservations for SC, ST, and OBC students in private higher educational institutions (HEIs). Low Representation of SC, ST, and OBC in Private InstitutionsArticle 15(5), introduced via the 93rd Constitutional Amendment in 2005 during Dr. Manmohan Singh’s tenure, enables the State to provide special provisions for socially and educationally backward classes, including reservations in private educational institutions (except minority institutions). This amendment formed the legal foundation for the 27% OBC reservation in centrally funded institutions starting 2006. Though the Supreme Court upheld the constitutionality of Article 15(5) for private unaided institutions in the landmark 2014 judgment (Pramati Educational and Cultural Trust v Union of India), Parliament has yet to enact a law to operationalize these provisions in private universities. Supreme Court Verdicts Validate Article 15(5)The report highlights the abysmally low inclusion of marginalized communities in the booming private higher education sector — a sector that has expanded considerably under the Modi Government’s National Education Policy (NEP) 2020, which promotes privatization. The Indian National Congress, through its 2024 Lok Sabha election manifesto “Nyay Patra,” pledged to legislate to implement Article 15(5) reservations in private educational institutions. The party has renewed its demand, urging the Modi Government to heed the Committee’s recommendation in the upcoming Winter Session of Parliament. With the growing privatization of higher education and glaring disparities in access for SC, ST, and OBC students, the Parliamentary Committee’s report signals an urgent call to action. Implementing Article 15(5) reservations in private HEIs is no longer optional but essential to uphold constitutional equity and social justice.
दिल्ली डूबी, सरकार गुमशुदा आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने BJP पर बोला हमला, जलभराव पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने दिल्ली में जलभराव और बाढ़ के हालात को लेकर भाजपा की चार इंजनसरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग बाढ़ से परेशान हैं लेकिन उनकी सुध लेने के लिए भाजपा सरकार तैयार नहीं है. दिल्लीके कई इलाकों में बाढ़ से हालात खराब हैं, लेकिन सीएम से लेकर मंत्री तक अपने दफ्तर में आराम कर रहे, कोई सड़क पर नहीं दिख रहा है। लेकिनजब “आप” की सरकार में यमुना का पानी बढ़ता था तो सीएम से लेकर मंत्री, विधायक तक सड़कों पर होते थे. उन्होंने कहा कि अब तो दिल्ली में नीचेसे ऊपर तक भाजपा की सरकार है। पैसे और पावर की भी कमी नहीं है, फिर दिल्ली क्यों डूब रही है? सच तो ये है कि भाजपा को सरकार नहीं चलानीआती. उसे सिर्फ आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को गालियां देनी आती है.शुक्रवार को अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा सरकार ने चार महीने पहले कहा था कि पीडब्ल्यूडी की 82 फीसदी नाले साफ हो चुके हैं. अब तो इन्होंने100 फीसदी से भी ज्यादा साफ कर देने का दावा कर दिया. एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में भाजपा ने आंकड़े पेश किए कि सारी नालियांऔर नाले पूरी तरह साफ हो चुके हैं. अगर एमसीडी के नाले 100 फीसदी साफ हो चुके थे और पीडब्ल्यूडी के 82 फीसदी नाले साफ हो चुके थे, तोफिर दिल्ली में जलभराव कैसे हो गया? नहीं उठाया कोई ठोस कदमअंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली में सिर्फ कागजों पर काम हो रहा है भाजपा का काम बस कागजों पर या फिर फोटो खिंचवाने तक सीमित है. मुख्यमंत्रीरेखा गुप्ता, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा, एलजी साहब और उनके सारे अधिकारी एक नाले के पास जाकर खड़े हो जाते हैं. वहां फोटो खिंचवाते हैं औरदिखाते हैं कि हम नाले साफ कर रहे हैं. लेकिन जैसे ही बारिश आती है, पीडब्ल्यूडी की बड़ी-बड़ी सड़कें चार-चार फीट पानी में डूब जाती हैं एमसीडीकी गलियां भी पानी में डूबी नजर आती हैं। हर जगह पानी ही पानी है. इन्होंने बारिश में दिल्ली को बाढ़ में डुबो दिया. अंकुश नारंग ने कहा किपटपड़गंज के भाजपा विधायक पहले नाव चलाते दिखते थे, अब वेस्ट विनोद नगर में चार-चार फीट पानी भरा होने के बावजूद कहीं नजर नहीं आ रहे हैंवे सड़कों पर नहीं दिख रहे, न ही रील बना रहे हैं. भाजपा रील बनाने में कम और जमीन पर काम करने में ज्यादा विश्वास रखें। 2023 में यमुना कोलेकर जो हालात थे, उसके लिए भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर कई आरोप लगाए थे। लेकिन आज दिल्ली की स्थिति उससे भी बदतर है। भाजपाने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन व्यवस्था के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए. भाजपा को आते दो ही कामअंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा को दो ही काम आते हैं पहला, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को गाली देना और दूसरा, सिर्फ आश्वासनदेना। भाजपा ने कहा था कि हर महिला के खाते में 2500 रुपये आएंगे, लेकिन वो वादा पूरा नहीं हुआ. ये तो मोदी जी की गारंटी थी, वो भी पूरी नहींहुई कहा था कि होली-दिवाली पर मुफ्त सिलेंडर मिलेगा, लेकिन होली निकल गई, दिवाली आने वाली है, कोई सिलेंडर नहीं आया. हर महीने 500 रुपये का सिलेंडर देने का वादा था, वो भी पूरा नहीं हुआ। कहा था कि दिल्ली में जलभराव नहीं होगा, लेकिन जलभराव हो रहा है। कहा था किसड़कों पर कूड़ा नहीं होगा, लेकिन कूड़ा बिखरा पड़ा है कहा था कि दिल्ली में बाढ़ नहीं आएगी, लेकिन बाढ़ आ रही है. अंकुश नारंग ने कहा किगुरुग्राम से लेकर दिल्ली तक, यातायात को बेहतर करने की बात थी, लेकिन 8-10 घंटे का जाम लग रहा है। बारिश में यातायात ठप हो जाता है. यमुना के पास के इलाकों में पानी लोगों के घरों में घुस चुका है लेकिन वहां प्रशासन के लोग नजर नहीं आ रहे हैं. दिल्ली की मुख्यमंत्री, मंत्री, मेयरराजा इकबाल सिंह अपने दफ्तर से बाहर नहीं निकल रहे हैं और ना तो बाढ़ प्रभावित इलाकों में जा रहे हैं. ये तो भगवान श्रीराम के भक्त हैं इन्होंने सबकुछ भगवान श्रीराम पर छोड़ दिया है। बारिश, जलभराव भगवान श्रीराम करवा रहे हैं भगवान श्रीराम के नाम पर कुछ दिन में पानी भी निकल जाएगा.
शिक्षक दिवस पर शिक्षक महाकुंभ – शिक्षकों को मिला सम्मान

आयोजन का महत्वशिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली सरकार ने एक बहुत ही भव्य और यादगार कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम रखा गया – ‘शिक्षक महाकुंभ’। इस अवसर पर दिल्ली सरकार ने उन शिक्षकों को सम्मानित किया, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। इस समारोहमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद सहित कई विधायक और अधिकारीमौजूद रहे। बच्चों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में सुंदर नृत्य और गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा माहौल भावनाओं और उत्साह से भर गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेशकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है और सही नेतृत्व के हाथों में है। उन्होंने कहा कि भारत मेंगुरु-शिष्य परंपरा बहुत पुरानी और गौरवशाली रही है। शिक्षक केवल किताब का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों को संस्कार और जीवन जीने की राह भीदिखाते हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षकों की भूमिका हमेशासे ही समाज और राष्ट्र को मजबूत करने वाली रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकारी स्कूलों में सुधारऔर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की दिशा में काम सराहनीय है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संबोधनमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि शिक्षक जो काम कर रहे हैं वह केवल नौकरी नहीं, बल्कि ईश्वर का कार्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को पढ़ानेके साथ-साथ उनका चरित्र गढ़ते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने माना कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाना एक कठिन काम है, क्योंकि वहांकई बार संसाधनों और सुविधाओं की कमी होती है। इसके बावजूद शिक्षक बच्चों को पूरे मन और समर्पण से पढ़ाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्लीसरकार का सपना है कि सरकारी स्कूल इतने अच्छे बनाए जाएं कि वे निजी स्कूलों से भी बेहतर हों। रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने शिक्षा सामग्री पर जीएसटी हटा कर बहुत बड़ा कदम उठाया है। इससे शिक्षा और भी सस्ती और सुलभ बनेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद कियाऔर कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चा, चाहे उसके माता-पिता अमीर हों या गरीब, अच्छी शिक्षा पाए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बने उसकानून का भी उल्लेख किया, जिसके तहत निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम अभिभावकों के लिए बड़ीराहत लेकर आया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के विचारशिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है। उन्होंने कहा किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अक्सर कहते हैं कि मां जन्म देती है, लेकिन शिक्षक जीवन को गढ़ता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा कोएक नई पहचान दी है। इसमें बच्चों को कई तरह की पढ़ाई के अवसर दिए जा रहे हैं – जैसे कि अलग-अलग विषयों का मिश्रण, व्यावसायिकप्रशिक्षण, प्रयोग आधारित शिक्षा और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल। आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अगले तीन वर्षों में हर स्कूल औरहर बच्चे को ‘निपुण संकल्प मिशन’ से जोड़ेगी। इसके अलावा आने वाले चार वर्षों में कक्षा 9 से 12 तक हर कक्षा को स्मार्ट कक्षा में बदला जाएगा।उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बच्चों की पढ़ाई को व्यक्तिगत बनाया जाएगा और यह देखा जाएगा कि हर बच्चा कैसा प्रदर्शन कर रहाहै। इस बार का शिक्षक दिवस दिल्ली के लिए खास रहा। ‘शिक्षक महाकुंभ’ में शिक्षकों को सम्मान देकर यह संदेश दिया गया कि शिक्षा सबसे बड़ाराष्ट्र निर्माण का काम है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री – सभी ने यह भरोसा दिलाया कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को और भीमजबूत किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि यह एक वादा भी था कि आने वाले समय में दिल्ली के सरकारीस्कूल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सबसे बड़ा आधार बनेंगे।
जीएसटी सुधार मोदी सरकार का जनता को बड़ा तोहफ़ा – पीयूष गोयल

भाजपा मुख्यालय से बड़ी जानकारीभारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत की और जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर में किए गए सुधारोंके बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ टैक्स का सुधार नहीं है, बल्कि पूरे देश की आर्थिक व्यवस्था को मज़बूत करने का बड़ाकदम है। इस फैसले से किसानों से लेकर मजदूर, छोटे व्यापारी से लेकर बड़े उद्योगपति और आम गृहणी तक – हर किसी को फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोचपीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा देशहित को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने जनता की ज़रूरतों और भविष्य की चुनौतियों कोध्यान में रखकर यह बड़ा फैसला लिया। यह सुधार केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मज़बूत नींव है। यही कारणहै कि मोदी सरकार को जनता की सरकार कहा जाता है। कांग्रेस शासनकाल की कमजोरियांउन्होंने कांग्रेस के शासन की तुलना करते हुए कहा कि उस समय टैक्स व्यवस्था बेहद उलझी हुई थी। हर राज्य के अपने-अपने नियम थे, अलग-अलगटैक्स चुकाना पड़ता था। व्यापारी वर्ग को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता था और आम जनता को ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ती थी। कांग्रेस सरकारमें विकास की जगह घोटाले और भ्रष्टाचार की ही चर्चा होती थी। इसलिए जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। जीएसटी से आया बदलावमोदी सरकार ने जब जीएसटी लागू किया तो पूरा देश एक देश, एक टैक्स की व्यवस्था से जुड़ गया। अब देशभर में व्यापार करना आसान हो गया है।किसी व्यापारी को अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स नहीं देना पड़ता। इससे कारोबारियों को राहत मिली और उपभोक्ताओं को सामान सस्ते दामों परमिलने लगा। आम जनता को सीधा लाभपीयूष गोयल ने बताया कि जीएसटी सुधारों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। पहले जहां टैक्स की जटिलता और भ्रष्टाचार की वजह सेसामान महंगा हो जाता था, वहीं अब वही सामान किफ़ायती दामों पर उपलब्ध है। इससे आम लोगों की बचत बढ़ी है और यही बचत आगे चलकरनिवेश का रूप ले सकती है। व्यापारियों और उद्योगपतियों को राहतजीएसटी सुधारों से कारोबारियों के लिए कामकाज आसान हुआ है। अब उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न हीभ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। कारोबार आसान होने से निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग खुलेंगे और युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। Ease of Doing Business में सुधारआज भारत दुनिया के उन देशों में गिना जा रहा है, जहाँ व्यापार करना पहले से कहीं आसान हो गया है। यह जीएसटी और अन्य आर्थिक सुधारों कीवजह से संभव हुआ है। जब कारोबार आसान होता है तो विदेशी निवेश भी बढ़ता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था और मज़बूत होती है। स्वदेशी से विकसित भारत की ओरपीयूष गोयल ने कहा कि मोदी सरकार का सपना है कि भारत आत्मनिर्भर बने और आगे चलकर विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंचे। जीएसटी सुधार इसदिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे देश के छोटे-छोटे उद्योग भी आगे बढ़ेंगे और मेक इन इंडिया को मज़बूती मिलेगी। कांग्रेस पर सीधा हमलाउन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के पास जनता के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी। उनका ध्यान सिर्फ ऊँचे टैक्स लगाने औरभ्रष्टाचार करने पर रहता था। वहीं, मोदी सरकार ने जनता का बोझ कम किया और विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए। जनता को सस्ता सामान, देश को मजबूत अर्थव्यवस्थाअंत में पीयूष गोयल ने कहा कि यह सुधार केवल टैक्स सुधार नहीं है, बल्कि यह जनता के जीवन में बदलाव लाने वाला फैसला है। अब सामान सस्ताहोगा, बचत बढ़ेगी, निवेश और रोज़गार के अवसर मिलेंगे। यह कदम भारत को एक मज़बूत, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिकानिभाएगा।
बहुजनों के हक़ से मोदी सरकार की बेरुख़ी – अनिल जयहिंद

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, लेकिन सरकार की चुप्पीकांग्रेस सरकार ने जब निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने के लिए कानून बनाया था, तो उसका मकसद यही था कि दलितों, पिछड़ों औरआदिवासियों को भी बराबरी का अवसर मिले। इस कानून को चुनौती दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा कि यह कानून पूरी तरह सही है औरइसे लागू होना चाहिए। इसके बावजूद मोदी सरकार ने पिछले 11 साल से इसपर कोई कदम नहीं उठाया। यानी अदालत की मुहर भी लगी औरसंविधान में संशोधन भी हुआ, लेकिन बहुजन समाज अब तक अपने अधिकार से वंचित है। मोदी जी OBC बताते हैं, लेकिन नुकसान भी OBC कोप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से बार-बार खुद को OBC बताते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि OBC समाज को फायदा मिला या नुकसान? सच्चाई यह है कि बीते 11 साल में OBC समाज को जितना नुकसान हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। लाखों छात्रों को आरक्षण और अवसर कालाभ नहीं मिल पाया। 2017 से आज तक OBC की क्रीमी लेयर को भी रिवाइज नहीं किया गया। इसका सीधा असर गरीब और मेहनती बच्चों परपड़ा है, जो हक़दार होने के बावजूद अवसर से बाहर कर दिए गए। ‘NFS’ – नई चाल, पुराना भेदभावआजकल एक और नया तरीका निकाला गया है – NFS यानी Not Found Suitable। कई बार उम्मीदवार सारे मानक पूरे कर लेते हैं, परीक्षापास कर लेते हैं, मेरिट में आते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें NFS कहकर बाहर कर दिया जाता है। यह तरीका बहुजन समाज को शिक्षा और नौकरियों सेबाहर रखने की एक और चाल है। जब सारी योग्यताएँ होने के बाद भी मौका नहीं मिलेगा तो मेहनत और सपनों का क्या होगा? जातिगत जनगणना की जरूरतअगर सच में समानता लानी है तो जातिगत जनगणना बेहद ज़रूरी है। इससे यह पता चलेगा कि किस वर्ग की असली स्थिति क्या है और किसे कितनीज़रूरत है। लेकिन मोदी सरकार इस पर कोई बात ही नहीं कर रही। न कोई योजना है, न कोई रोडमैप। उल्टा, जब भी कोई जातिगत जनगणना कीबात करता है, तो उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जाती है। कभी उन्हें अर्बन नक्सल कहा जाता है, कभी देश विरोधी कहा जाता है। असलियत यहहै कि सरकार इस सच्चाई को सामने ही नहीं आने देना चाहती। मंडल आयोग की अधूरी सिफारिशेंबहुजनों की तरक्की के लिए मंडल आयोग बनाया गया था। इसने 40 सिफारिशें दीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक सिर्फ 2 सिफारिशेंलागू हुई हैं और बाकी 38 अब भी अधूरी हैं। अगर वे लागू कर दी जातीं तो आज बहुजन समाज की स्थिति कहीं बेहतर होती। लेकिन सरकार ने उन्हेंठंडे बस्ते में डाल दिया। यह साफ़ दिखाता है कि बहुजनों के सवाल और समस्याएँ सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। शिक्षा और रोज़गार पर साजिशआज जो हालात हैं, वे किसी लापरवाही का नतीजा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। पहले सरकारी संस्थानों की संख्या कम की गई, फिरशिक्षा को निजी हाथों में सौंपा गया। निजी संस्थानों में आरक्षण लागू नहीं है, इसलिए बहुजन समाज के बच्चे बाहर रह गए। अब NFS जैसी चालेंचलकर रोज़गार से भी दूर किया जा रहा है। यह सब मिलकर बहुजनों को मुख्यधारा से बाहर करने का काम कर रहा है। हमारी मांगहमारी साफ़ मांग है कि मोदी सरकार तुरंत निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करे। OBC की क्रीमी लेयर को तुरंत रिवाइज किया जाए। NFS जैसी भेदभावपूर्ण व्यवस्था को खत्म किया जाए। जातिगत जनगणना पूरी की जाए और मंडल आयोग की बाकी सभी सिफारिशें लागू की जाएं। यहीअसली सामाजिक न्याय है। असली न्याय का रास्ताजब तक बहुजन समाज को शिक्षा और रोज़गार में बराबरी नहीं मिलेगी, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा। देश की 90% आबादी अगर हक़ से वंचितरहेगी तो भारत कैसे तरक्की करेगा? बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था कि सामाजिक समानता के लिए वोट का अधिकार और आरक्षण दोनों जरूरी हैं।आज दोनों पर हमला हो रहा है। इसलिए हमें आवाज़ उठानी होगी और बहुजनों का हक़ वापस लेना होगा। यही असली न्याय है और यही देश कोआगे बढ़ाने का रास्ता है।
निजी शिक्षा में बहुजनों का हक़ – विक्रांत भूरिया

बहुजन समाज की बड़ी आबादी, लेकिन शिक्षा में हिस्सेदारी कमहमारे देश की असली ताक़त बहुजन समाज है। दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग मिलाकर यह समाज लगभग 90% आबादी का हिस्सा है। लेकिनजब शिक्षा की बात आती है, खासकर निजी कॉलेज और विश्वविद्यालयों की, तो उनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 12% तक सीमित रह जाती है। यह स्थितिबहुत दुखद और अन्यायपूर्ण है। यह बताता है कि आज भी शिक्षा का दरवाज़ा बहुजनों के लिए पूरी तरह खुला नहीं है। संसदीय समिति की रिपोर्ट और सुझावइस विषय पर संसद की एक समिति ने गहराई से अध्ययन किया। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया कि निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में बहुजन समाज कीस्थिति बेहद खराब है। समिति ने सुझाव दिया कि आरक्षण के प्रावधान को लागू करना ज़रूरी है। समिति ने स्पष्ट सिफारिश की कि SC वर्ग को15%, ST वर्ग को 7.5% और OBC वर्ग को 27% प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो ही असली समान अवसर मिलेगा औरशिक्षा का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच पाएगा। कांग्रेस सरकार का ऐतिहासिक फैसलायूपीए सरकार के समय शिक्षा को सबके लिए सुलभ और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया। संविधान में अनुच्छेद 15(5) जोड़ा गया, जिसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों में भी SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। यह फैसला केवल एकक़ानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी। इस कानून से बहुजन समाज के बच्चों को उम्मीद मिलीकि अब उन्हें भी आगे बढ़ने का सही अवसर मिलेगा। अदालत का समर्थनजब इस फैसले का विरोध हुआ और मामला अदालत तक गया, तब भी न्यायपालिका ने साफ़ कहा कि यह प्रावधान सही और संविधान के अनुरूप है।सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया। यानी न तो कानून में और न ही न्यायपालिका में कोई अड़चन थी। लेकिन इसके बावजूद इसे पूरी तरहलागू नहीं किया गया। मोदी सरकार की 11 साल की चुप्पीयहाँ सबसे बड़ी समस्या यह है कि पिछले 11 साल से मोदी सरकार इस कानून पर कोई कदम नहीं उठा रही। न तो निजी संस्थानों में आरक्षण लागूकिया गया और न ही बहुजन समाज को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई। मोदी जी मंचों से खुद को OBC बताते हैं, लेकिन हकीकतयह है कि OBC, SC और ST वर्ग को सबसे ज़्यादा नुकसान इन्हीं 11 सालों में हुआ है। शिक्षा पर बड़ा खेल और साजिशआज जो हालात हैं, वे किसी छोटी भूल का नतीजा नहीं हैं, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश है। पहले सरकारी शिक्षण संस्थानों की संख्या घटाईगई, उन्हें धीरे-धीरे कमजोर किया गया। फिर शिक्षा को निजी हाथों में सौंपा गया। अब जब शिक्षा पूरी तरह निजी संस्थानों के भरोसे हो जाएगी औरवहाँ आरक्षण भी लागू नहीं होगा, तो सबसे बड़ा नुकसान बहुजन समाज को ही उठाना पड़ेगा। यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय दोनों के लिए बहुतखतरनाक स्थिति है। बाबा साहेब का संदेश और आज की हकीकतबाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने साफ़ कहा था कि अगर समाज में समानता लानी है तो वोट का अधिकार और आरक्षण होना ज़रूरी है। लेकिनआज की भाजपा सरकार इन दोनों पर हमला कर रही है। कभी वोट के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश होती है, तो कभी आरक्षण को कमजोरकिया जाता है। यह सब मिलकर बहुजनों को मुख्यधारा से बाहर करने की साजिश का हिस्सा है। हमारी माँग और अपीलहमारी साफ़ माँग है कि केंद्र सरकार तुरंत निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम उठाए। संसद समिति की सिफारिशोंको मानकर SC को 15%, ST को 7.5% और OBC वर्ग को 27% प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों केलिए मुफ्त कोचिंग और सहायता की व्यवस्था की जाए। असली समानता की राहजब तक शिक्षा में बराबरी नहीं होगी, तब तक समाज में समानता का सपना अधूरा रहेगा। बहुजन समाज की 90% आबादी अगर शिक्षा से वंचित रहीतो देश कैसे आगे बढ़ेगा? इसलिए ज़रूरी है कि आरक्षण को सही ढंग से लागू किया जाए और हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले। यही बाबासाहेब के सपनों का भारत होगा और यही असली सामाजिक न्याय है।
निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण क्यों ज़रूरी है? – राजेंद्र पाल गौतम

शिक्षा से ही समाज में बराबरी संभवडॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा कहा था कि अगर समाज में समानता लानी है तो शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। लेकिन शिक्षा तभी सार्थक होगी, जबहर वर्ग के बच्चों को समान अवसर मिलेगा। अगर समाज के गरीब, वंचित और पिछड़े वर्ग के बच्चे ही शिक्षा से वंचित रह जाएंगे तो समानता कासपना अधूरा ही रहेगा। बढ़ती आबादी और सरकारी संस्थानों की कमीआज देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। लाखों छात्र हर साल उच्च शिक्षा में दाख़िला लेना चाहते हैं। लेकिन सरकारी शिक्षण संस्थानों की संख्याउतनी नहीं बढ़ी, जितनी बढ़नी चाहिए थी। जगह कम पड़ गई और अधिकतर बच्चों को निजी कॉलेजों का सहारा लेना पड़ा। निजी शिक्षा और गरीब वर्ग की मुश्किलेंनिजी शिक्षण संस्थानों की फीस बहुत ज़्यादा होती है। वहां पर आरक्षण लागू नहीं होता, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र बाहर रह जाते हैं। जोबच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें मजबूरी में अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ती है। यही वजह है किSC, ST और OBC वर्ग शिक्षा की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार का ऐतिहासिक कानूनइन समस्याओं को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने ऐसा कानून बनाया, जिसमें निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण की सुविधा देने का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य यही था कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग केबच्चे भी मुख्यधारा में आ सकें और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें। अदालत का समर्थन और फैसलों की पुष्टिजब इस कानून को लागू करने की बात हुई तो कई लोगों ने इसका विरोध किया और मामला अदालत तक पहुँचा। लेकिन 2008 में अदालत ने इसेसही ठहराया। फिर 2011 और 2014 में भी उच्चतम न्यायालय ने इस कानून को पूरी तरह जायज़ और संवैधानिक माना। यानी अदालत ने भी साफ़कहा कि निजी संस्थानों में आरक्षण लागू होना चाहिए। रिपोर्ट में सामने आई सच्चाईबीते साल संसद की एक समिति ने इस विषय पर गहराई से अध्ययन किया। रिपोर्ट में सामने आया कि निजी संस्थानों में SC वर्ग के सिर्फ़ 0.89% छात्र, ST वर्ग के केवल 0.53% छात्र और OBC वर्ग के मात्र 11.16% छात्र ही पढ़ रहे हैं। ये आँकड़े साफ़ बताते हैं कि शिक्षा से वंचित वर्ग आजभी न्याय और बराबरी से दूर है। भाजपा सरकार की लापरवाही और 11 साल की चुप्पीकांग्रेस सरकार ने जो कानून बनाया था, उस पर अदालत की भी मुहर लग चुकी है। लेकिन भाजपा की सरकार ने पिछले 11 सालों में इस दिशा मेंकोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकार ने न तो इस कानून को लागू किया और न ही गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों की मदद करने के लिए कोई नईयोजना बनाई। इस लापरवाही का सीधा नुकसान दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को उठाना पड़ा है।मेरी अपील केंद्र सरकार सेमैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ कि निजी शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण जल्द से जल्द लागू किया जाए। इसकेअलावा समिति ने जो सुझाव दिए हैं, उनका पालन किया जाए। खासकर ऐसे छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, जो मेहनती हैंलेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। शिक्षा में समान अवसर ही असली न्यायअगर समाज में असली बराबरी लानी है तो शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर देना ही होगा। निजी संस्थानों में आरक्षण लागू होने से गरीब, वंचित औरपिछड़े वर्ग के बच्चे भी आगे बढ़ पाएंगे। यही बाबा साहेब के सपनों का भारत होगा, जहां सबको बराबरी का अधिकार और सम्मान मिले।