दिल्ली में भारत-अमेरिका रक्षा वार्ता सैन्य खरीद और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा, ‘युद्ध अभ्यास’ और 2+2 बैठक की तैयारी तेज

भारत और अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर रक्षा खरीद से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की दोनों देशों ने आपसी रक्षासाझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई. ये मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंपर की हालिया टैरिफ नीति केकारण दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी दिख रही है. रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी रक्षा विभाग केडिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी (दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया) डॉ. एंड्रयू बायर्स ने भारत के संयुक्त सचिव (समुद्री एवं सिस्टम अधिग्रहण) दिनेश कुमार सेमुलाकात की. संस्करण किया जाएगा आयोजितबैठक में रक्षा खरीद के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई और सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी दोनों देशों के द्विपक्षीयरिश्तों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. उन्होंने बताया कि यह सहयोग कई क्षेत्रों में मजबूत हुआ है और अगस्त के अंत तक 2+2 अंतर-सत्रीय बैठक भी होनेकी संभावना है. इसके अलावा इस माह अलास्का में भारत-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ का 21वां संस्करण आयोजित कियाजाएगा. संस्करण की तैयारी जोर परबता दें कि पिछले महीने भी ऑस्ट्रेलिया में हुए ‘एक्सरसाइज टैलिस्मन सेबर 2025’ के दौरान दोनों देशों के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने द्विपक्षीय वार्ताकी थी. इसमें रणनीतिक सैन्य सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने को लेकर कई अहम विषयों पर सहमति बनी थी. दिल्ली में भारत-अमेरिका रक्षा अधिकारियों की बैठक में सैन्य खरीद और रणनीतिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों देशों ने रक्षा साझेदारी कोऔर मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई जल्द ही 2+2 बैठक और ‘युद्ध अभ्यास’ के 21वें संस्करण की तैयारी भी जोर पर है.
गवाहों की सुरक्षा के लिए धामी कैबिनेट ने दी उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना-2025 को मंजूरी, पुराना कानून रद्द

मुकदमों के गवाहों की सुरक्षा के लिए धामी कैबिनेट ने बुधवार को उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना-2025 को मंजूरी दे दी है. इस योजना से न्यायव्यवस्था को सशक्त और निष्पक्ष बनाने में मदद मिलेगी इसके लिए राज्य साक्षी संरक्षण समिति का भी गठन किया गया है इसकी व्यवस्था भारतीयनागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में की गई है. इससे पहले उत्तराखंड में साक्षी संरक्षण अधिनियम 2020 लागू था. पिछले साल एक जुलाई सेपूरे देश में सीआरपीसी के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 (बीएनएसएस) लागू हो चुकी है. बीएनएसएस की धारा 398 में गवाहोंकी सुरक्षा के लिए साक्षी संरक्षण योजना लागू करने का प्रावधान है. की गई भौतिक सुरक्षा व्यवस्थाइस धारा में गवाहों की सुरक्षा को परिभाषित किया गया है इसके तहत सभी प्रदेशों को साक्षी संरक्षण योजना लागू करने के लिए कहा गया था इसीक्रम में पिछली कैबिनेट में नई योजना लागू होने से पहले साक्षी संरक्षण अधिनियम 2020 को रद्द करने के लिए मंजूरी दी गई थी. इसके बाद अबप्रदेश में उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना 2025 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. योजना के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर पहचान गोपनीयता, स्थान परिवर्तन, संपर्क विवरण में बदलाव, भौतिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. कानून का रद्द करने पर बनी थी सहमतियही नहीं आवश्यकतानुसार वित्तीय सहायता जैसी सुरक्षा उपायों का भी प्रावधान इस योजना में किया गया है सभी निर्णयों में गोपनीयता को सर्वोच्चप्राथमिकता दी गई है. इसके लिए गठित हुई साक्षी संरक्षण समिति में न्यायपालिका, पुलिस और जनपद स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कियागया है यह समिति साक्षियों (गवाहों) की सुरक्षा आवश्यकता का आकलन कर समयबद्ध रूप से उपयुक्त संरक्षण उपाय सुनिश्चित करेगी.मुकदमों के गवाहों की सुरक्षा के लिए साक्षी संरक्षण योजना को धामी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। पिछली कैबिनेट में पहले से चले आ रहे कानून कोरद्द करने पर सहमति बनी थी.
उर्स-ए-रजवी के मंच से बोले मुफ्ती सलमान अजहरी अमन की बात जरूरी, लेकिन गलतियों को सही करना भी फर्ज

हेट स्पीच के आरोप में गुजरात की जेल में आठ माह बिताने वाले कर्नाटक के अल अमान फाउंडेशन के संस्थापक मुफ्ती सलमान अजहरी ने बरेली मेंउर्स-ए-रजवी के मंच से कहा कि 56 इंच का सीना होने से कोई ताकतवर नहीं होता. आला हजरत दुबले-पतले थे, लेकिन जब वह कलम उठाते थे तोगुस्ताख कांपते थे. अमन और इस्लाम की बात जरूरी है, लेकिन खराबी को सही करना भी जरूरी है एक साथ गलतियां बता दो तो लोग खिलाफ होजाते हैं. उन्होंने कहा कि इसमें तकलीफें और मुसीबतें आएंगी मैं जब जेल में था तो आला हजरत का एक शेर मेरा वजीफा था. उन्होंने शेर पढ़ते हुएकहा कि ‘उनके निसार कोई कैसे ही रंज में हो, जब याद आ गए हैं सब रंज भुला दिए हैं’. बीते साल उर्स के दौरान उनकी रिहाई को लेकर नौजवानों नेमांग उठाई थी. तब मंच पर मौजूद उलमा ने उनको खामोश करा दिया था. इस साल नौजवान सलमान अजहरी से मिलने के लिए बेताब दिखे. मुसलमानों के लिए की दुआउर्स-ए-रजवी व उर्स-ए-अमीन-ए-शरीअत के आखिरी दिन ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी (आरएसी) के मुख्यालय बैतुर्रजा पर कुल की रस्म अदा कीगई. सदारत कर रहे आरएसी के अध्यक्ष मौलाना अदनान रजा कादरी ने रसूल की शान में गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांगउठाई. सुबह दस बजे मौलाना नसीम आसी ने कुरान की तिलावत की। मुफ्ती उमर रजा, मौलाना अबरार रजा, मौलाना शरीफ रजा, मौलाना सय्यदसफदर रजा ने जलसे को खिताब किया. अली रजा मियां समेत मुफ्ती आमिर जफर व अन्य लोगों ने नातो-मनकबत का नजराना पेश किया. इस मौकेपर आरएसी के तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे. कुल शरीफ के बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने हिंदुस्तान में अमन ओ सुकून के साथ मिल्लतऔर फलस्तीन के मुसलमानों के लिए खुसूसी दुआ की. लोगों को किया था मुरीदइसके बाद दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां ने लोगों को मुरीद किया. मुफ्ती अहसन मियां और सैयद आसिफ मियां ने पुलिस, प्रशासन, मीडियासहित सभी लंगर कमेटियों और उर्स में शिरकत करने वाले रजाकारों का शुक्रिया अदा किया.तौसीफ रजा खां ने उर्स के मंच से कहा कि जिंदगी कोसंवारने के लिए शिक्षा, सामाजिक एकता, आपसी सहयोग, सौहार्द, खुला संवाद और नेतृत्व क्षमता जरूरी है पढ़ने-पढ़ाने और देश को मजबूत बनानेपर जोर दिया. पांच वक्त की नमाज की ताकीद की. मसले कोर्ट-कचहरी में ले जाने के बजाय शरीयत की रोशनी में हल करने की बात कही. बरेली मेंउर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन कर्नाटक के अल अमान फाउंडेशन के संस्थापक मुफ्ती सलमान अजहरी ने भी तकरीर दी. उन्होंने कहा कि अमन औरइस्लाम की बात जरूरी है, लेकिन खराबी को सही करना भी जरूरी है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला लोकतंत्र और महिला नेतृत्व पर सीधा वार, देशभर में निंदा लोकतंत्र को डराने की नाकाम कोशिश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी पर हुआ हमला अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है.यह हमला लोकतांत्रिक मूल्यों, जनता के विश्वास और महिलाओं की अस्मिता पर हमला है.हम सभी लोकतंत्र-प्रेमी नागरिक इसकी कड़ी निंदा करते हैं. यह स्पष्ट करता है कि जब नारी नेतृत्व दृढ़ता से आगे बढ़ती है, तो अराजक औरअसामाजिक ताकतें घबराकर हिंसा पर उतर आती हैं.रेखा गुप्ता जी का संकल्प अटूट है, उनका साहस अडिग है. दिल्ली की जनता उनके साथ खड़ी है, और ऐसे कायराना हमले कभी भी उनकी सेवा भावनाऔर विकास यात्रा को रोक नहीं सकते. 20 अगस्त 2025 को दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर सीधा हमला हुआ जब वे अपनी साप्ताहिक जनसुनवाई(“जनसुनवाई”) के दौरान अपनी कैंप कार्यालय (सिविल लाइन्स) में जनता से मिल रही थीं. इस दौरान एक व्यक्ति—पहचान हुई राजेश भाई खिमजीभाई सक्रिया (राजकोट, गुजरात) उनके पास आया और अचानक हाथ पकड़कर उन्हें खींचने लगा. हमले की निंदाकुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया कि उन्होंने उन्हें थप्पड़ भी मारा, बाल खींचे, और गाली-गलौज भी की गई. हालांकि दिल्ली भाजपा ने स्पष्ट किया किमुख्यमंत्री डिलीवर नहीं हुईं, केवल झटके में थी. उन्हें चिकित्सीय रूप से जांच के बाद स्वास्थ्य रूप से सुरक्षित पाया गया।पुलिस ने इस पूरे कृत्य को”हत्या का प्रयास” माना और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) के तहत मामला दर्ज किया गया. आरोपी को गिरफ्तार कर 5 दिन कीपुलिस रिमांड पर भेजा गया है. दिल्ली सरकार के अनुसार, CCTV फुटेज में आरोपी को मुख्यमंत्री के आवास का पिछले 24 घंटे से सर्वे (recce) करते हुए दिखाया गया है. शालीमार बाग आवास समेत उनका स्थिरता स्थल था। यह घटना पूर्व-योजित साजिश की तरफ इशारा करती है. राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है—एक ओर भाजपा ने विपक्ष पर साजिश रचने का आरोप लगाया है, वहीं AAP के कुछ नेताओं ने इस घटना को“ड्रामा” तक कहा, हालांकि कई ने इस हमले की निंदा की.
सिर्फ मंत्री नहीं, झूठे केस में फंसाने वालों को भी हो सजा, सिसोदिया का कानून पर तीखा प्रहार “जानें क्या है पूरा मामला”

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार द्वारा अपराधिक मामले में लगातार 30 दिन जेल में रहने वालेमुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने को लेकर लाए जा रहे कानून का स्वागत करते हुए कई अहम सुझाव दिए हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसीमुख्यमंत्री या मंत्री को झूठे केस में जेल भेजा जाता है तो उसे जेल भेजने वाले अधिकारी, एजेंसी और सरकार के मुखिया को भी जेल भेजने का कानूनमें प्रावधान होना चाहिए. अफसर-मुखिया को उतने ही साल तक जेल में रखा जाना चाहिए, जितने साल की सजा का प्रावधान उस आरोप में है. यहकानून आम आदमी को झूठे केस में जेल भेजने पर भी लागू होना चाहिए, तभी निरंकुश सत्ता के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लगेगी. यह कानून अभीअधूरा है, जिसका ईडी-सीबीआई की तरह दुरुपयोग होने की पूरी संभावनाएं हैं. गुरुवार को मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान में एकनया संशोधन ला रही है, जिसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी राज्य या केंद्र सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप मेंगिरफ्तारी होती है, तो उन्हें एक महीने के भीतर अपना पद छोड़ना होगा या उन्हें हटा दिया जाएगा. यह प्रस्ताव स्वागत योग्य है लेकिन बहुत संभावनाएंहैं कि जिस तरह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का दुरुपयोग हुआ है, उसी तरह इस कानून का भी दुरुपयोग होगा, कानून है अभी अधूरायह कानून अच्छा है भ्रष्ट नेताओं में हमेशा यह डर बना रहना चाहिए कि भ्रष्टाचार करने पर उनकी कुर्सी जा सकती है आम आदमी पार्टी तो कट्टरईमानदार लोगों की पार्टी है इसलिए वह इस तरह के किसी भी कदम का अच्छा ही मानेगी लेकिन यह कानून अभी अधूरा है. मनीष सिसोदिया ने कहाकि यह कानून केंद्र या राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी को अत्यधिक शक्ति देता है इसलिए, मेरा सुझाव है कि इस कानून में यह अतिरिक्त प्रावधान जोड़ा जाएकि यदि किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी होती है और उन्हें जेल में रहना पड़ता है, तो एक महीने के भीतर उन्हेंपद से हटा दिया जाए, यह अच्छी बात है. लेकिन, यदि बाद में वह नेता (चाहे वह मंत्री हो या मुख्यमंत्री) अगर निर्दोष साबित होता है और उसके उपरलगे आरोप सही नहीं होते हैं और उसको बरी कर दिया जाता है, तो इसका मतलब है कि उन पर लगे आरोप झूठे थे और राजनीतिक साजिश के तहतझूठे आरोप लगाए गए थे. लोगों ने लगाए थे झूठे आरोपमनीष सिसोदिया ने कहा कि ऐसे में, जिन लोगों ने ये झूठे आरोप लगाए, उनको जेल जाना चाहिए. जिस अधिकारी ने किसी मुख्यमंत्री या मंत्री कोगिरफ्तार करने का निर्णय लिया, उसको उतने साल के लिए जेल में डाला जाना चाहिए, जितने साल के झूठे आरोप उसने लगाए. साथ ही, जिसएजेंसी ने ये आरोप लगाए, उसके प्रमुख को भी उतने ही साल के लिए जेल की सजा मिलनी चाहिए, जितने साल के लिए झूठे आरोप उसने किसीमंत्री या मुख्यमंत्री पर लगाए. मनीष सिसोदिया ने कहा कि इसी तरह, यदि यह कार्रवाई किसी राज्य सरकार की एजेंसी ने की, तो उस समय केमुख्यमंत्री और यदि केंद्र सरकार की एजेंसी ने की, तो उस समय के प्रधानमंत्री को भी उतने सालों के लिए जेल में डाला जाना चाहिए, जितने समयतक उन्होंने एक चुने हुए मुख्यमंत्री या मंत्री को झूठे आरोपों में जेल में रखा और उनका पद छीना. एजेंसियों का दुरुपयोग करके चुने हुए नेताओं कोफंसाने वालों को सजा मिलनी चाहिए,
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले को लेकर भाजपा सख्त, सौरभ भारद्वाज की वीडियो पोस्ट पर आपत्ति जानें क्या है पूरा मामला

मुख्य मंत्री पर हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं, हमलावर का पूर्व में अपराधिक घटनाओं में शामिल होने से लगता है यह कोई सुनियोजित साजिश होसकती है. दिल्ली आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जिस तरह की विडिओ पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली वह निंदनीय है. दिल्लीभाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आज सुबह अपने निवास कार्यालय में जन सुनवाई कर रहीं दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले कीकड़ी निंदा की है और कहा है की जिस तरह हमलावर की एक दो दिन पहले से मुख्य मंत्री के सरकारी एवं निजी आवास की रेकी करने कीसी.सी.टी.वी. फुटेज सामने आई है उससे यह सम्भावना लगती है की यह एक सोची समझी साजिश हो सकती है. अपरोक्ष प्रोत्साहन समझ से है परेवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नही है और हमारी मुख्य मंत्री या पार्टी ऐसे हमले से भयभीत नही होने वाले. भाजपा केनेता अपना सार्वजनिक जनसंवाद पहले से अधिक सघनता से जारी रखेंगे. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की हमले का सही कारण तो पुलिस जांचपूर्ण होने पर ही सामने आयेगा पर प्रारम्भिक जानकारी अनुसार यह हमलावर पूर्व में भी दो बार अपराधिक घटनाओं में संलिप्त रह चुका है जो हमे यहशक करने का कारण देता है है की यह कोई सुनियोजित साजिश भी हो सकती है. वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है मुख्य मंत्री पर हमले के बाद दिल्ली आमआदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जिस तरह की विडिओ पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली वह निंदनीय है और कहीं ना कहीं हमलावर को नैतिकसमर्थन देने के समान है. पूर्व मे हमने देखा है की कई इस तरह की घटनाएं करने वाले आम आदमी पार्टी से जुड़े निकले हैं अतः सौरभ भारद्वाज का इसतरह का ट्वीट कर हमलावर अपरोक्ष प्रोत्साहन समझ से परे है.