उपराष्ट्रपति चुनाव में बढ़ी हलचल सीपी राधाकृष्णन का नामांकन 20 अगस्त को, विपक्ष जल्द करेगा प्रत्याशी घोषित

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन 20 अगस्त को नामांकन करेंगे. उम्मीद है कि शाम तक विपक्ष के साझा उम्मीदवार का नामसामने आ जाएगा। तिरुचि सिवा के मुताबिक, विपक्ष में उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर कोई भ्रम नहीं है. कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्रीकहते हैं कि बस दो दिन की बात है थोड़ा इंतजार कर लीजिए यह चुनाव बहुत रोचक होने जा रहा है. अभी विपक्ष को अपने उम्मीदवार की घोषणाकरनी है दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने प्रचार भी शुरू कर दिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुहिम को आगे बढ़ाते हुए डीएमके के नेता और तमिलनाडु केमुख्यमंत्री एमके स्टालिन से फोन पर समर्थन के बाबत चर्चा की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी चुनाव की सफल रणनीति बनाने में जुट गए हैं. इसके बाबत उन्होंने दोपहर डेढ़ बजे के करीब संसद भवन स्थित अपने कक्ष में भाजपा अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल, धमेंद्र प्रधान समेत अन्य के साथ रणनीतिक चर्चा की. केवल समझिए इशाराकुल मिलाकर सत्ता पक्ष कमर कसकर तैयार है और उसका इरादा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से अधिक वोट पाकर सीपी राधाकृष्णन को चुनावजितवाना है. जगदंबिका पाल भाजपा के सांसद हैं। पहले कांग्रेसी थे वह तपाक से कहते हैं कि सीपी राधाकृष्णन को अधिक वोट मिलना तय है. बंपरमतो से जीत होगी. सवाल दक्षिण के राधाकृष्णन का है। हालांकि, जगदंबिका पाल एक बात को सहसा मान लेते हैं. उन्हें पता है कि विपक्ष की भीएक राजनीतिक मजबूरी है. इसलिए संभव है कि उपचुनाव में सर्वसम्मति की स्थिति न बन पाए और विपक्ष उम्मीदवार उतारे? पाल कहते हैं कि लेकिनइससे फर्क नहीं पड़ता. अगला उपराष्ट्रपति हमारा ही होगा. जब जगदंबिका पाल यह आत्मविश्वास दिखा रहे थे तो थोड़ी दूर पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री उन्हेंसुन रहे थे. पाल के जाते ही उन्होंने कहा कि बस दो दिन रुक जाइए. सूत्र का कहना है कि उम्मीदवार घोषित न होने के कारण अभी बोलना ठीक नहींहै. बस केवल एक इशारा समझ लीजिए. दोनों प्रत्याशी थे भाजपा केकांस्टीट्यूशन क्लब के सचिव का चुनाव हाल में संपन्न हुआ है इसमें गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष भी वोसंसद के गलियारे में आज मीडिया भी तीनखबरें ढूंढ रही थी. इसमें पहली जानकारी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर थी. दूसरी नजर भाजपा के संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामपर टिकी थी। तीसरी सूचना में लोग जानना चाहते थे कि उ.प्र. के भाजपा अध्यक्ष कौन होंगे? इस खबर को टटोलने के लिए उ.प्र. से भी कई नेतासक्रिय थे. हालांकि, सबको पता है कि नई भाजपा में सही जानकारी समय से पहले मिल पाना बहुत मुश्किल है इन तीन सूचनाओं के लिए खोजबीनकरने वाले लोगों की निगाह में बिहार का चुनाव और राहुल गांधी की बिहार में चल रही यात्रा काफी महत्वपूर्ण रहा. डालने गए थे हालांकि, दोनों हीप्रत्याशी भाजपा के थे, लेकिन इसके आगे मुझे कुछ नहीं कहना है.
भारत-चीन रिश्तों को नई राह जयशंकर-वांग यी की मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार और वैश्विक अस्थिरता पर चर्चा

गलवां घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव को पांच वर्ष बीत चुके हैं और अब दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहेहैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका ने भारत के सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. इसी कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यीभारत आए और सोमवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वार्ता की उनका यह दौरा एशिया की इन दोनों ताकतों के बीच संबंध सुधारनेकी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. दोनों देश अमेरिकी टैरिफ युद्ध से पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता का मुकाबला करना चाहते हैं. बैठक मेंजयशंकर ने कहा कि वांग यी का यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने का एक अच्छा अवसर है. विश्व व्यवस्था की कर रहे है बातउन्होंने कहा, हमारे संबंधों ने एक मुश्किल दौर देखा है, लेकिन अब हम आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से ईमानदार औररचनात्मक रुख जरूरी है. जयशंकर ने आगे कहा, हमें आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हितों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए. मतभेदों कोविवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को टकराव का रूप नहीं लेने देना चाहिए. बाद में उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत मेंआर्थिक और व्यापारिक मुद्दे, धार्मिक यात्रा, लोगों के बीच संपर्क, नदी से जुड़ा डाटा साझा करना, सीमा व्यापार, संपर्क और द्विपक्षीय आदान-प्रदानजैसे विषय शामिल होंगे. जयशंकर ने कहा, हमारे संबंधों में कोई सकारात्मक प्रगति तभी संभव है जब हम मिलकर सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखें. सीमा से सैनिकों को हटाने (डी-एस्केलेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना भी जरूरी है. विदेश मंत्री ने कहा, जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैंतो अंतरराष्ट्रीय परिदृष्य पर बात होना स्वाभाविक है। हम एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की बात करते हैं. गंभीर चुनौतियों का सामनाजिसमें एशिया भी बहुध्रुवीय हो इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है,उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कियह चर्चा एक स्थिर, सहयोगात्मक और भविष्य की ओर देखती हुई भारत-चीन साझेदारी की ओर ले जाएगी, जो दोनों देशों की हितों की सेवा करे औरउनकी चिंताओं को संबोधित करे. सूत्रों के मुताबिक, चीन ने भारत की तीन मुख्य चिंताओं (खाद, दुर्लभ खनिज और टनल बोरिंग मशीन) को दूर करनेका भरोसा दिलाया है. इन सब में दुर्लभ खनिज सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण मेंहोता है इनका अधिकांश उत्पादन चीन में होता है. बैठक के बाद चीन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वांग यी ने जयशंकर से कहा कि दुनियाइस समय ‘सदी में एक बार आने वाले बदलावों’ के दौर से गुजर रही है और वह भी बहुत तेजी से उन्होंने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, एकतरफा दबदबा और जोर-जबरदस्ती बढ़ चुकी है और मुक्त व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
भारत-चीन रिश्तों में नई गर्माहट चीन देगा उर्वरक, रेयर अर्थ और बोरिंग मशीनों की सप्लाई का भरोसा

भारत और चीन के रिश्तों में नया मोड़ आया है चीन ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनों की जरूरतों कोपूरा करने में मदद करेगा. यह आश्वासन चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को दिया। बता दें कि चीन के विदेशमंत्री सोमवार को दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दे, धार्मिक यात्राएं, लोगों केबीच संपर्क, नदियों का डाटा साझा करना, सीमा व्यापार और आपसी सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा किभारत-चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते कई पहलुओं वाले हैं. अर्थव्यवस्था में स्थिरताउन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार में रोड़े और प्रतिबंधात्मक नीतियों से बचना जरूरी है. जयशंकर ने यह भी कहा कि स्थिर और सकारात्मक रिश्ते दोनोंदेशों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होंगे.विदेश मंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि फर्क को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए. उन्होंने वांग यी कीयात्रा को रिश्तों की समीक्षा और वैश्विक हालात पर बातचीत का सही अवसर बताया. बता दें कि भारत-चीन संबंध 2020 में पूर्वी लद्दाख की एलएसीपर चीनी सेना की गतिविधियों से बिगड़ गए थे. हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों ने तनाव कम करने और गश्त को लेकर समझौता किया है. इसबीच दुनिया भर में बदलते हालात, यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी व्यापार शुल्कों के बीच जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बढ़ाने कीजरूरत है. शिखर सम्मेलन में लेंगें हिस्सावांग यी की यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के अंत में चीन के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन मेंहिस्सा लेने जा सकते हैं. वहीं भारत ने साफ किया है कि ताइवान पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है. भारत ने जोर देकर कहा कि दुनिया केबाकी देशों की तरह, भारत का भी ताइवान के साथ आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक संबंधों पर केंद्रित रिश्ता है हम इसे जारी रखने का इरादा रखतेहैं. चीन के विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक दूसरे के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की है. वहीं इस बैठक के बाद चीनने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह उर्वरक, दुर्लब खनिज और टनल बोरिंग मशीनों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा.
PM मोदी की चीन यात्रा पर गरमाई सियासत ओवैसी ने उठाए सवाल, सरकार से चीन पर रुख साफ करने की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से एक सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाने वाले हैं. ऐसे में अब इस बात को लेकर भारत में सियासत तेज हो गई है पीएम मोदी की आगामी चीन यात्रा को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुलमुसलमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पीएम मोदी के इस यात्रा से पहले केंद्र सरकार से चीन कोलेकर अपना रुख साफ करने की मांग की है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से एक सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन के तियानजिन जाने वाले हैं. सहयोग के विकास का है प्रतीकचीन ने इस यात्रा का स्वागत किया है और इसे सहयोग और विकास का प्रतीक बताया है. एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार के चीन को लेकर रुख में जो यू-टर्न आया है, उस पर कई सवाल हैं. सरकार को चाहिए कि पीएम कीयात्रा से पहले देश को जवाब दे। उन्होंने कहा कि चीन ने पाकिस्तान को हथियार और फाइटर जेट दिए, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरानहमारे जवानों के खिलाफ हुआ. साथ ही चीन ने इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा भी पाकिस्तान को दिया. ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हम चीनको यह साफ क्यों नहीं कह रहे कि यह अस्वीकार्य है?ओवैसी ने आगे कहा कि जब पीएम मोदी ने दलाई लामा को 90वें जन्मदिन की बधाई दी, तब चीन ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन भारत सरकार नेइस पर कोई जवाब नहीं दिया. आंतरिक मामलों में दखल नहींउन्होंने कहा कि चीन ने भारत से कहा कि वह तिब्बत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सतर्क रहे और आंतरिक मामलों में दखल न दे. ओवैसी ने पूछा कि क्यायह हमारे राष्ट्रीय सम्मान का सवाल नहीं है? इसके साथ ही ओवैसी ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन 2020 से और बढ़ाहै, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं दिख रही. इसी बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे परहैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर से सीमा विवाद और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. इस दौरानजयशंकर ने बातचीत में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना आज की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं. हमभारत-चीन संबंधों को संतुलित और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
काशी में इतिहास रचेंगे पीएम मोदी और मॉरीशस के पीएम रामगुलाम, पहली बार काशी में होगी द्विपक्षीय बैठक

मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम 11 सितंबर को काशी पहुंचेंगे. यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहली बार द्विपक्षीय बैठक करेंगे. व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर बातचीत होगी. उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ की ओर से रात्रिभोज दिया जाएगा. इसमें केंद्र और उप्र सरकार के कुछ और मंत्री शामिल होंगे. मॉरीशस के प्रधानमंत्री की भारत में यात्रा9 सितंबर से 15 सितंबर तक रहेगी। इस यात्रा का मुख्य आयोजन काशी में होना तय हुआ है. बाबा कालभैरव का करेंगें पूजनमॉरीशस के प्रधानमंत्री का बाबतपुर एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाएगा उन्हें यहां गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा उनका यहां सांस्कृतिक स्वागत भीकिया जाएगा. इसके अलावा उप्र के सबसे बेहतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की जाएगी. वह श्रीकाशी विश्वनाथ और बाबा कालभैरव में पूजनकरेंगे. इसके साथ ही वह महत्वूपर्ण सांस्कृतिक स्थलों का दौरा भी करेंगे. वह सारनाथ और बीएचयू भारत कला भवन भी जाएंगे वह गंगा आरती भीदेखेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. यह पहली बार होगा जब मॉरीशस का कोई प्रधानमंत्री काशी में द्विपक्षीयबैठक करेगा. नोडल अधिकारी किया गया नामितइसमें महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार पर आपसी सहयोग पर मुख्य रूप से बात होगी. पर्यटन के क्षेत्र में भी बात होगी. केंद्रसरकार की ओर से जारी पत्र में मंडलायुक्त एस राज लिंगम को को नोडल अधिकारी नामित किया गया है. उन्हें अतिथियों के स्वागत और प्रोटोकॉल केहिसाब से विस्तृत कार्यक्रम तैयार करने को कहा गया है. इसके अलावा होने वाले कार्यक्रमों के स्थल चयन की भी बात कही गई है प्रशासन अब स्थलऔर कार्यक्रमों का चयन करेगा. दो साल पहले 11 सितंबर 2023 को भी मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ काशी पहुंचे थे. उन्होंनेदश्वामेध घाट पर अपने रिश्तेदार की अस्थि विसर्जित की थीं. मॉरीशस के पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम नौ सितंबर से भारत यात्रा पर रहेंगे. इस बीच, वे11 सितंबर को वाराणसी भी आएंगे. यह पहली बार होगा, जब मॉरीशस का कोई प्रधानमंत्री काशी में द्विपक्षीय बैठक करेगा.
दिल्ली में बाढ़ का खतरा टला, सीएम रेखा गुप्ता ने यमुना बाजार का किया दौरा, राहत-बचाव कार्य तेज

राजधानी दिल्ली में बाढ़ के खतरे के बीच सीएम रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली के यमुना बाज़ार क्षेत्र का दौरा कर बाढ़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियोंका निरीक्षण किया. साथ ही सीएम रेखा गुप्ता ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं. सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सुबह कुछसमय के लिए यमुना का जलस्तर 206 मीटर को छूने की संभावना थी, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. यह इलाका यमुना के फ्लड प्लेन कालो-लाइन क्षेत्र है इसलिए पानी यहां तक पहुंचा दिल्ली में बाढ़ जैसी कोई भी स्थिति नहीं है. यह जलस्तर का अधिकतम चढ़ाव था और अब पानीउतरने की दिशा में है. सीएम ने कहा कि कंट्रोल रूम से लगातार हालात की निगरानी की जा रही है. राहत और बचाव दल पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैंजिससे हर स्थिति से निपटा जा सके. झुग्गियों में चला सर्च ऑपरेशन चलायासीएम ने आगे कहा की मैं दिल्लीवासियों को आश्वस्त करना चाहती हूँ कि सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है. आपकी सुरक्षा और सुविधाहमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. सुबह आठ बजे तक यमुना का वाटर लेवल 205.79 था. वहीं हथनी कुंड बैराज से 38361 क्यूसेक, वज़ीराबाद बैराज से 68230 क्यूसेक और ओखला बैराज 91212 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की राहत बचाव टीमों ने यमुना के किनारे की झुग्गियों में सर्च ऑपरेशन चलाया. जलभराव की हो रही है निगरानीप्रशासन ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र से सभी को बाहर निकाला पूर्वी दिल्ली में गीता कॉलोनी के पास बंध रोड पर बने केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से 24 घंटेयमुना के जलस्तर की निगरानी हो रही है अधिकारियों का कहना है कि वे बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. दिल्ली बोट क्लब में करीब 24 नौकाएं, गोताखोर, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की टीमें आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. मुख्यमंत्री ने कहा किदिल्लीवासियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, उनकी सुरक्षा पहली प्राथमिकता है. इसके लिए राहत और बचाव कार्यों के लिए 14 अहम जगहोंपर नावों की तैनाती की गई है. साथ ही यमुना का पानी मुख्य सड़कों तक न पहुंचे और ट्रैफिक प्रभावित न हो, इसके लिए सिंचाई और बाढ़ नियंत्रणविभाग को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए है. साथ ही सभी रेगुलेटर्स को पूरी तरह चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं 15 वायरलेस स्टेशनस्थापित हैं जो यमुना के जलस्तर, जलभराव की निगरानी कर रहे हैं.