अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल ने रचा धर्मांतरण का जाल, सैकड़ों को बनाया निशाना “30 साल बाद सामने आई साजिश” जानें क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में पुलिस ने बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट का बड़ा पर्दाफास किया है.दरअसल बताया जा रहा है कि इस गैंग में अब तक सैंकडोंलोगों का धर्मांतरण करवा चुका है इस गैंग का मुख्य सरगना अब्दुल रहमान कुरैशी समेत करीब दर्जन भर आरोपियों को गिरफ्तार किया गयाहै.दरअसल जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि इस गैंग ने सैंकड़ों लोगों का धर्मांतरण करवाया है.इसके तार सिर्फ आगरा या सिर्फ उत्तर प्रदेश तकही नहीं बल्कि कई राज्यों तक फैले हुए है.जब पुलिस प्रशासन को पता चला तो अब्दुल रहमान जो खुद ही एक कन्वर्टेड मुस्लिम है. दरअसलधर्मांतरण गैंग का सरगना अब्दुल रहमान कुरैशी पहले हिंदू धर्म के बखूबी के साथ फॅालो करता था वह मूल रुप से फिरोजाबाद का निवासी बताया जारहा है.इससे पहले वह महेंद्र पाल उर्फ पप्पू के नाम से जाना जाता था. लेकिन इससे पहले भी ये धर्मांतरण कर चुका है इससे पहले ये 1990 में ईसाईबन गया था.इसके कुछ साल पहले भी इस्लाम स्वीकार कर लिया था. खेल में हुआ था बखूबी के साथ शामिलदरअसल फिर भी इसने धर्मांतरण के काले खेल में बखूबी के साथ शामिल हो गया था. लेकिन इसके बाद बताया ये भी जा रहा है कि अब्दुल रहमानकी पत्नी और दोनों बेटों की पत्नियां भी कन्वर्टेड मुस्लिम है दरअसल ये भी पहले हिंदू ही थी. आपकों बता दें कि बीते दिनों अब्दुल रहमान उर्म महेंद्रको दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था अब्दुल रहमान के धर्मांतरण से जुड़े लोग रहमान चाचा ने बताया कि वह एक यूट्यूब चैनल को चलाता था औरअपने पॅाडकास्ट से जरिए इस्लामी कट्टरपंथ और हिंदू के खिलाफ नफरत भरा प्रोपेगेंडा फैलाता था इसके साथ ही यह हिंदु लड़कियों को इस्लाम मेंकन्वर्ट भी करता था इसके लिए ये अपनी गैंग के लोगों को ट्रेनिंग देता था .उसके लोगों गैंग के लोगों द्धारा सोशल मीडिया के जरिए हिंदू धार्मिकप्रतीकों का अपमान भी किया जाता था और उनका सोशण कर बुदपरस्त बताकर मानसिक रुप से कमजोर किया जाता था. पिता ने बताया मुंबई में करता है बेटा नौकरीदरअसल आपको बता दें कि अब्दुल रहमान फिरोजाबाद के थाना रजावली गांव रामगढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है इसके अलावा ये भी बतायाजा रहा है कि ये लगभग 30 वर्ष पहले गांव से गायब हो गया था दरअसल प्रेमपाल के पिता गांव वालों के पूछे जाने पर बताते है कि बेटा मुंबई मेंनौकरी करता है .दरअसल गांव के लोगों ने बताया कि महेंद्र गांव से जाने के बाद सिर्फ एक बार ही गांव वापस आया.उसने अपने हिस्से की गांव मेंजगह जमीन सब बेच दी है. गांव वालों ने अब्दुल रहमान व उसके परिवार की जानकारी दी उसमें उन्होनें बताया कि पुलिस एक बार किसी शख्स कोएक बार गांव में मुंह बांध कर तो लेकर आई थी लेकिन बता नहीं चला कि इसमें कौन है दरअसल उसके अन्दर महेंद्र ही था.
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे गहरी राजनीतिक साजिश? कांग्रेस ने उठाए सवाल स्वास्थ्य नहीं, “सत्ता का दबाव है वजह’

कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के पीछे कहीं ज्यादा गंभीर कारण हैं. यह उनकी ओर सेबताए गए स्वास्थ्य कारणों से कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं. पार्टी ने कहा कि उनका इस्तीफा उनके बारे में तो अच्छी बातें कहता है. लेकिन उन लोगोंको पर्दाफाश भी करता है जिन्होंने उन्हें इस पद के लिए चुना. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर हिंदी में लिखा, ‘कलदोपहर 12:30 बजे जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की अध्यक्षता की. इस बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा औरसंसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत ज्यादातर सदस्य मौजूद थे. थोड़ी देर की चर्चा के बाद तय हुआ कि समिति की अगली बैठक शाम 4:30 बजेफिर से होगी. शाम 4:30 बजे धनखड़ की अध्यक्षता में समिति के सदस्य दोबारा बैठक के लिए इकट्ठा हुए. अपने पद से दिया इस्तीफासभी नड्डा और रिजिजू का इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए.उन्होंने आगे लिखा’सबसे हैरानी की बात यह थी कि धनखड़ को व्यक्तिगत रूप से यहनहीं बताया गया कि दोनों मंत्री बैठक में नहीं आएंगे। स्वाभाविक रूप से उन्हें इस बात का बुरा लगा और उन्होंने BAC की अगली बैठक आज दोपहर1 बजे के लिए टाल दी. जयराम ने लिखा’इससे साफ है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई है. जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया. अब एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुएजगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इसकी वजह अपनी सेहत को बताया है हमें इसका मान रखना चाहिए. लेकिन सच्चाई यहभी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं. उन्होंने आगे कहा कि धनखड़ ने हमेशा 2014 के बाद के भारत की तारीफ की, लेकिन साथ ही किसानोंके हितों के लिए खुलकर आवाज उठाई. उन्होंने सार्वजनिक जीवन में बढ़ते अहंकार की आलोचना की और न्यायपालिका की जवाबदेही व संयम कीजरूरत पर जोर दिया. मौजूदा ‘G2’ सरकार के दौर में भी उन्होंने जहां तक संभव हो सका विपक्ष को जगह देने की कोशिश की. प्रक्रियाओं और मर्यादाओं थे पक्केअंत में जयराम रमेश ने कहा कि वह नियमों, प्रक्रियाओं और मर्यादाओं के पक्के थे. उन्हें लगता था कि उनकी भूमिका में लगातार इन बातों कीअनदेखी हो रही है. जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है. साथ ही यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था. भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार देर शाम अपने पद से इस्तीफे का एलान कर दिया. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी गई चिट्ठी में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कहा कि अपनी देखभाल को प्राथमिकता देने के लिए वे भारत केउपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं.जयराम रमेश ने कहा कि दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ ऐसा हुआ जो इनदोनों मंत्रियों के रवैये का कारण बना. उन्होंने 2014 के बाद के भारत की प्रशंसा की, पर साथ ही किसानों के हितों, न्यायपालिका की जवाबदेही, औरसरकारी अहंकार के खिलाफ भी आवाज उठाई.
दाखिल-खारिज में देरी पर DM और कमिश्नर होंगे जिम्मेदार, हाईकोर्ट की फटकार के बाद शासन सख्त

जमीनों के दाखिल खारिज में देरी होने पर अब डीएम और कमिश्नर भी जिम्मेदार होंगे. राजस्व संहिता में दी गई व्यवस्था के आधार पर गैर विवादितमामलों में 45 दिन नामांतरण करना होगा. विवादित मामलों में 90 दिनों में फैसला देना होगा. दाखिल खारिज मामले में देरी होने पर हाईकोर्ट ने सख्तनाराजगी जताई है इस पर प्रमुख सचिव राजस्व पी गुरुप्रसाद ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश भेजे हैं. इसमेंकहा गया है कि राजस्व संहिता-2006 की धारा 34/35 के तहत अंतरण मामलों में अविवादित नामांतरण का वाद 45 दिनों और विवादित होने पर90 दिनों में निस्तारित किया जाएगा. शासन द्वारा इस संबंध में समय-समय पर शासनादेश भी जारी किया जाता रहा है शासन की जानकारी में आया हैकि कई जिलों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है. हाईकोर्ट ने जताई नाराजगीनामांतरण वादों का समय से निस्तारण नहीं किया जा रहा है इसके चलते हाईकोर्ट में रिट याचिकाएं दाखिल हो रही हैं. हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगीजताई है. इसलिए धारा-34 के तहत प्राप्त, लेकिन पंजीकरण के लिए लटके मामलों का आरसीसीएमएस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरणकराया जाएगा.जानबूझकर प्रार्थना पत्रों को लटकाए रखने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. नामांतरण वादों के समय व गुणवत्तापूर्णनिस्तारण तय समय के अंतर्गत निस्तारण किया जाएगा. दाखिल खारिज संबंधित गैर विवादित मामलों में 45 दिनों से अधिक का समय न लगायाजाए. हाईकोर्ट की ओर से वादों को निस्तारण करने संबंधी दिए गए आदेशों वाले मामलों की सुनवाई तिथि नियत कर प्रतिदिन सुनी जाएगी।मंडलायुक्त और जिलाधिकारी अपने स्तर से कार्ययोजना बनाकर नामांतरण के लिए लंबित मामलों को देखेंगे. वादों के समय से निस्तारित कराने केलिए समीक्षा की जाएगी. मंडलायुक्त व जिलाधिकारी तहसीलों के अधीनस्थ पीठासीन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश देंगे. इस निर्देश कीअवहेलना करने वाले पीठासीन अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने संबंधी प्रस्ताव शासन के साथ राजस्व परिषद को उपलब्ध कराया जाएगा. राजस्व परिषद को जाएगा भेजाजब जमीन की बिक्री या दान के चलते स्वामित्व परिवर्तित होता है तो राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन किया जाता है. इस प्रक्रिया को दाखिल खारिजकिए जाना कहा जाता है. दरअसल इसमें राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण होता है उत्तराधिकार के नियमों के तहत भी यह नामांतरण होता है जमीनों कीरजिस्ट्री के बाद विवाद न होने की दशा में उस जमीन का दाखिला खारिज 45 दिनों के अंदर करना होगा. विवादित मामलों में 60 दिन में फैसलाकरना होता है. समय-सीमा उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ प्रस्ताव शासन के साथ राजस्व परिषद कोभेजा जाएगा.लंबित दाखिल‑खारिज कारण हाईकोर्ट में रिट याचिकाओं का सिलसिला शुरू हो गया है जिस पर अदालत सख़्त नाराज़गी जता रहीहै.प्रमुख सचिव राजस्व पी. गुरुप्रसाद ने इस मुद्दे पर सरकार की चिंता जाहिर करते हुए, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को शासनादेश जारी कियाहै.
अवामी लीग को मिटाया नहीं जा सकता, हसीना की वापसी संभव लेकिन बदलना होगा रवैया “मानष घोष”

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मानष घोष ने दावा किया है कि अवामी लीग को बांग्लादेश की धरती से कभी नहीं मिटाया जा सकता है. उन्होंने कहा किपार्टी और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भी फिर से सत्ता में लौट सकती हैं लेकिन इसके लिए हसीना को अपने तौर-तरीके बदलने होंगे. घोष अपनीनई किताब मुजीब की गलतियां उनकी हत्या के पीछे की शक्ति और साजिश’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि यह किताब लिखतेसमय उनका उद्देश्य था कि वे मुजीबुर रहमान को एक ‘पवित्र और गलती न करने वाले’ नेता की तरह न दिखाएं. बल्कि उनकी कमजोरियां भी सामनेलाएं घोष ने कहा कि बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि ‘इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है. आवामी लीग की गिरी सरकार2024 में बांग्लादेश में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे 5 अगस्त को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई. यह आंदोलन ‘स्टूडेंट्स अगेंस्टडिस्क्रिमिनेशन’ नाम के एक छात्र समूह ने शुरू किया था, जो सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे. आंदोलन हिंसक हो गयाऔर अंत में हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वह भारत आ गईं. वर्तमान में बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार कार्यरत है. बातचीत के दौरान लेखक घोष से पूछा गया कि क्या हसीना और अवामी लीग की वापसी संभव है. इस सवाल के जवाब में घोष ने कहा, ‘मुझे लगताहै कि अवामी लीग को मिटाया नहीं जा सकता. शेख हसीना पहले भी मुश्किल हालात से निकली हैं और यह वक्त भी ज्यादा दूर नहीं जब लोग खुदकहेंगे कि वह लौटें और देश की बागडोर संभालें. हसीना ने किया था गलत व्यवहारघोष का मानना है कि अगर आज निष्पक्ष चुनाव हों तो अवामी लीग को बड़ी जीत मिल सकती है. यहां तक की वो लोग भी उनका समर्थन कर सकतेहैं जिनके साथ पहले हसीना ने गलत व्यवहार किया था.यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद या मंत्रिमंडल ने मई में आतंकवाद-रोधी कानून के तहत साइबरस्पेस समेत अवामी लीगकी सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके अलावा, बांग्लादेश में एक विशेष अदालत ने 10 जुलाई को शेख हसीना पर मानवता केखिलाफ अपराध का आरोप लगाया, जो पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा से जुड़ा है. बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण(ICT-BD) ने मुकदमे की तारीख तीन अगस्त तय की है.लेखन मानष घोष का कहना है कि शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक वापसी संभव है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वे अपनेपुराने रवैये और नीतियों को छोड़कर खुद में बदलाव लाएं। घोष ने ये बात अपनी किताब के विमोचन अवसर पर कही. घोष का कहना है कि इतिहासखुद को दोहरा रहा है जैसे मुजीब के खिलाफ साजिशें रची गईं वैसे ही 2024 में हसीना के खिलाफ भी वातावरण बना. बांग्लादेश की अदालत नेशेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप भी तय किया है.
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन की तबियत खराब, डॉ़क्टरों ने 3 दिन आराम करने की दी सलाह

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सोमवार सुबह सैर के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई. उन्हें हल्के चक्कर आने के बाद एक निजीअस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने उन्हें तीन दिन आराम करने की सलाह दी है. उपमुख्यमंत्री और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन ने इस संबंध मेंपत्रकारों से बात की. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को तीन दिन आराम करने की सलाह दी गई है उन्होंने यह भी बताया कि सीएम स्टालिन की हालत मेंसुधार हो रहा है. उदयनिधि ने कहा, ‘इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है. पिछले दो-तीन महीनों के उनके व्यस्त कार्यक्रम ने उनपर काफी असर डाला है. जब पत्रकारों ने उदयनिधि से पूछा कि सीएम को अस्पताल से कब तक छुट्टी मिलेगी. स्टलिन हुए अस्पताल में भर्तीइसके जवाब में उन्होंने कहा कि जल्द ही उदयनिधि ने दिन में सीएम स्टालिन से अस्पताल जाकर मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीको इस बात की चिंता है कि वह आज के आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सके. अस्पताल की तरफ से जारी बयान में कहा गया किमुख्यमंत्री को तीन दिन आराम करने की सलाह दी गई है. कुछ और जांचें की जाएंगी हालांकि उम्मीद है कि वे अस्पताल में रहते हुए भी आधिकारिकतौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे. इस बीच अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने मन्नारगुडी (तिरुवरुर जिला) में एक रोड शोके दौरान स्टालिन के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. पलानीस्वामी ने कहा, ‘मैंने सुना है कि डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कोअस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है. मैं अपनी और आपकी ओर से उनके पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. सीएम स्टालिन से की मुलाकातराज्य के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने भी अस्पताल में सीएम स्टालिन से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ हैं. वह जल्द ही घर लौट आएंगे. चिकित्सा सेवा निदेशक डॉ. अनिल बी जी ने एक बयान में कहा कि स्टालिन को उनके लक्षणों की जांच के लिएअपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आवश्यक नैदानिक परीक्षण किए जा रहे हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमकेस्टालिन सोमवार सुबह सैर करने के लिए घर से निकले थे. इस दौरान उन्हें हल्के चक्कर आ गए, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करायागया। डॉक्टरों ने सीएम को तीन दिन आराम करने की सलाह दी है.इस बीच, विपक्षी दल के नेता और एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादीपलानीस्वामी ने सीएम की जल्द स्वस्थ होने की कामना की. जल संसाधन मंत्री दुरैमुरुगन ने भी अस्पताल जाकर सीएम से मुलाकात की और कहा किवह स्वस्थ हैं और जल्द घर लौटेंगे मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अनिल बी जी ने बताया कि आवश्यक जांच-पड़ताल चल रही है.
भाजपा का बुलडोजर अब रोज़गार पर, आतिशी ने मिरदर्द मार्ग पर व्यापारियों को दिया साथ का भरोसा

दिल्ली के मिरदर्द मार्ग पर स्थित दुकानों को भाजपा सरकार द्वारा तोड़ने की नोटिस देने के विरोध में सोमवार को आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता औरदिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी वहां के दुकानदारों से मिलीं और उनकी दुकानें बचाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि पूरी दिल्ली मेंभाजपा का बुलडोज़र अब सिर्फ़ गरीबों के घरों तक सीमित नहीं रहा अब ये जनता के रोज़गार पर भी चलने लगा है. मिरदर्द मार्ग पर दशकों से चल रही दुकानों को भाजपा सरकार तोड़ने की तैयारी कर रही है. भाजपा क्या चाहती है? क्या दिल्ली के लोग बेरोज़गार हो जाएं. उनके घर भी टूटें और वे सड़कों पर आ जाएं? आम आदमी पार्टी मिरदर्द मार्ग के हर दुकानदार, व्यापारी के साथ मज़बूती से खड़ी है. हर मोर्चे पर इनका साथ देंगे. बीजेपी का बुलडोज़र आने दो, हम डटकर मुकाबला करेंगे. इस दौरान आतिशी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और कहा कि भाजपा संविधान औरगरीब विरोधी पार्टी है जब से दिल्ली में भाजपा की चार इंजन की सरकार बनी है. कार्ड पर बनी हुई है नरेंद्र मोदी की फोटोआम लोगों को परेशान कर रही है एक-एक कर दिल्ली की सारी झुग्गियों को तोड़ा जा रहा है. लोगों को बेघर किया जा रहा है. भाजपा के बड़े-बड़ेनेता चुनाव से पहले झुग्गियों में जाते थे वहां बच्चों के साथ खेलते थे और खाना खाते थे. लेकिन सरकार बनते हीं भाजपा ने उन सभी घरों को तोड़नाशुरू कर दिया है. आतिशी ने कहा कि भाजपा क्या क्या चाहती है? दिल्ली के लोग बेरोज़गार हो जाएं उनके घर भी टूटें और वे सड़कों पर आ जाएं? आम आदमी पार्टी मिरदर्द मार्ग के हर दुकानदार, व्यापारी के साथ मज़बूती से खड़ी है. हर मोर्चे पर इनका साथ देंगे आने दो बीजेपी का बुलडोज़र, हमडटकर मुकाबला करेंगे. आतिशी ने भाजपा के चुनावी वादे याद दिलाते हुए कहा कि चुनाव से पहले भाजपा वाले पूरी दिल्ली में घूम-घूम कर कहते थेकि जहां झुग्गी वहां मकान देंगे. लेकिन क्या हुआ हम सबने देखा, वो जहां भी गए वहां झुग्गियों को तोड़ा. जंगपुरा में मद्रासी कैंप में घरों को तोड़ागया. अगले ही दिन मैं वहां गई थी. वहां लोगों को खून के आंसू रोते देखा. उनके हाथ में भाजपा का जहां झुग्गी वहां मकान का कार्ड था कार्ड परप्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो बनी हुई थी. गरीबों से चल रहा है शहरलेकिन जब बुलडोजर आया तो उनके घरों को बचाने कोई नहीं आया. वो भाजपा वाले भी नहीं जो उनके घर खाना खाते थे. आतिशी ने कहा किभाजपा पहले घरों को तोड़ा, अब दुकानों को तोड़कर गरीबों के रोजी-रोटी को खत्म करना चाहती है। मैं करोल बाग के चुनाभट्टी जेजे कैंप में गई, दिल्ली के नंगली डेयरी में गई वहां लोग चालीस साल से पचास साल से लोग रह रहे हैं. वहां भी इसी तरह के नोटिस चस्पा किए गए हैं. भाजपा केचार इंजन की सरकार बनने के बाद चारों इंजन गरीबों को परेशान करने के लिए लगा दिया है. आतिशी ने कहा कि ये भाजपा वाले भूल गए हैं किगरीबों की कितनी ताकत है। हम गाड़ी चलाते हैं. दुकान चलाते है अभी हमारे हाथ दिल्ली चलाने में लग रहे हैं लेकिन अगर आपने गरीबों को परेशानकिया और गरीबों के हाथ शहर हो रोकने में लग गई तो शहर थम जाएगा. गरीबों की ताकत को कम मत आंको उन्होंने कहा कि आज मैं आपके बीचआई हूं, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल कल भी गरीबों के साथ थे आज भी हैं और आगे भी रहेंगे. आप इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं हमआपके साथ हैं इस लड़ाई में चाहे सड़क पर लड़ना हो, संसद में लड़ना हो या कोर्ट में लड़ना हो.
बिहार की चुनावी जंग में दलित वोट निर्णायक, NDA और महागठबंधन में शुरू हुआ सामाजिक समीकरणों का युद्ध

बिहार की चुनावी लड़ाई में इस बार दोनों गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. इस चुनावी युद्ध में जीत उस गठबंधन की हो सकती हैजो बिहार के सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ लेने में सफल होगा. इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने बिहार के दलितों को अपने पाले मेंलाने के लिए ‘दलित बस्ती संपर्क अभियान’ चला रखा है. इन संपर्क कार्यक्रमों में दलित समुदाय के पढ़े-लिखे युवाओं-विद्वानों के बीच यह विमर्शखड़ा करने की कोशिश की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की सरकार दलितों के उत्थान के लिए किस तरह कारगर साबित हुईहै. बिहार में दलितों की आबादी लगभग 19 प्रतिशत है.केंद्र सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाकर दलित समुदाय को साधने का कामकिया है. भाजपा अपने दलित बस्ती संपर्क अभियान में उन दलित लाभार्थियों को भी बुला रही है जिन्होंने केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं कालाभ लिया है. इसका उद्देश्य दलित समुदाय के बीच यह संदेश देना है कि केंद्र सरकार ने उनका जीवन स्तर बदलने का काम किया है. इसी तरहनीतीश कुमार सरकार ने भी बिहार में बेहतर काम किया है भाजपा बिहार सरकार के लाभार्थियों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रही है. वामदल भी दे रहे है सहयोगकांग्रेस-राजद का महागठबंधन जातिगत जनगणना के मुद्दे के सहारे दलितों का वोट हासिल करने की रणनीति पर चल रहा है. राज्य के वामदल भीइसमें अपना सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में महागठबंधन की दावेदारी भी कमजोर नहीं है। लेकिन इसी विमर्श की काट के तौर पर भाजपा दलितों के बीचनए पढ़े-लिखे युवाओं को अपने साथ जोड़कर यह विमर्श पैदा करने की कोशिश कर रही है कि एनडीए ने उनके लिए बेहतर कामकाज किया है. भाजपा कार्यकर्ता दलितों के बीच केवल विमर्श ही पैदा करने की कोशिश नहीं कर रहे. बल्कि उनको साथ लेकर उन्हें सामाजिक स्तर पर सम्मान देनेका काम भी कर रहे हैं. खान-पान के कार्यक्रम रखकर उनके बीच भागीदारी बढ़ाने का काम भी चल रहा है. इसमें आरएसएस के अनुषांगिक संगठन भीजुटे हुए हैं. बिहार में पासवान दलित समुदाय की आबादी पूरे दलित समुदाय की लगभग 30.9 प्रतिशत है। दलितों के नेता के रूप में रामविलासपासवान इस समय भी सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। उनका असर है कि चिराग पासवान की न केवल अपने क्षेत्र में लोकप्रियता है. बल्कि वे पूरेराज्य के दलितों के बीच लोकप्रिय हैं. वे भाजपा के साथ एनडीए में रहते हुए इस गठबंधन के लिए बड़े उपयोगी साबित हो सकते हैं. कांग्रेस का वोट बैक बनाकर रह गए थेहम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी महादलित जातियों के बीच अच्छा असर रखते हैं इसके अलावा भी भाजपा अलग-अलग क्षेत्रों में दलितों को साधनेमें जुटी हुई है. भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. संजय निर्मल ने अमर उजाला से कहा कि दलित समुदाय के लोग आजादी केसमय से ही कांग्रेस के वोट बैंक बनकर रह गए थे. बाद में कुछ दलों ने इन जातियों के नाम पर राजनीति करने की कोशिश की. लेकिन इनके नेताओं नेइन जातियों का आर्थिक-सामाजिक उत्थान करने की बजाय अपना ही उत्थान करने का काम किया. यही कारण है कि दलितों के जीवन स्तर में कोईबड़ा व्यापक परिवर्तन नहीं हुआ. डॉ. संजय निर्मल के अनुसार, लेकिन जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में केंद्र में सरकार संभाली, उसके बादस्थिति में तेजी के साथ परिवर्तन आया है. केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और जनधन योजनाओं के सहारे दलितों केजीवन स्तर को उठाने का बड़ा काम किया है। यही कारण है कि केवल पिछले 11 वर्षों में ही दलितों के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन आया है.
अवैध कब्जे पर सख्त हिमंता असम की 29 लाख बीघा जमीन पर संदिग्ध बांग्लादेशियों का कब्जा, चरणबद्ध अभियान से हो रहा मुक्त

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को दावा किया कि राज्य की लगभग 29 लाख बीघा (10 लाख एकड़) जमीन पर ‘अवैधबांग्लादेशियों और संदिग्ध नागरिकों’ का कब्जा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 में सत्ता में आने के तुरंत बाद दरंग जिले के गोरुखुटी में इसे खालीकराने के लिए अभियान चलाया गया था. जिसके बाद उनकी सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा था कि इस तरह की कार्रवाइयों को रोका जाए लेकिनजनता इससे पीछे नहीं हटी. सरमा गोरुखुटी बहुद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. यहपरियोजना 2021 में 77,420 बीघा (25,500 एकड़) जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराकर शुरू की गई थी. उस समय अधिकतर बंगाली भाषीमुसलमानों को हटाया गया था. इस दौरान पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हुई थी जिनमें एक 12 साल का बच्चा भी था. मुख्यमंत्री ने कहा, यहां के सफल अभियान से हमें हिम्मत मिली और हम बोरसोल्ला, लुमडिंग, बुरहापहाड़, पाभा, बतद्रवा, चापर और पैकन में भी सख्त कदम उठा सके. पौधारोपण का किया जा रहा कामचार साल में हमने 1.29 लाख बीघा (लगभग 43,000 एकड़) जमीन को खाली कराया है और अब यह जमीन सार्वजनिक कार्यों में उपयोग हो रही हैउन्होंने कहा कि खाली कराई गई जमीन और वन क्षेत्रों में पौधारोपण का काम किया जा रहा है, जिससे हाथी, गैंडा और बाघ जैसे जानवर अपनेप्राकृतिक आवास में लौट रहे हैं. मुख्यमंत्री ने दोहराया, हमने संकल्प लिया है कि एक-एक इंच जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करेंगे. चाहे उस परसंदिग्ध बांग्लादेशियों का कब्जा ही क्यों न हो. अब भी 29 लाख बीघा जमीन पर अवैध बांग्लादेशियों और संदिग्ध नागरिकों का कब्जा है। उन्होंनेकहा कि अब तक थोड़ा ही क्षेत्र खाली कराया गया है. लेकिन उन्हें भरोसा है कि बाकी जमीन को भी छुड़ाया जा सकता है क्योंकि असम के लोगों नेअपनी ताकत को फिर से पहचान लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा अगर कोई सोचता है कि दो-तीन अभियानों के बाद हम डर जाएंगे. उनकी आंखों में आंखेंनहीं डालेंगे और झुक जाएंगे तो वे गलतफहमी में हैं. असम आंदोलन के शहीदों का बदला जरूर लिया जाएगा. कांग्रेस के आगे कर दिया था समर्पणउन्होंने कहा कि 1983 से 1985 के बीच असम आंदोलन के दौरान लोगों में हार की भावना आ गई थी और कई लोगों ने कांग्रेस के आगे ‘समर्पण’ करदिया था. जिससे राज्य की राजनीति की दिशा बदल गई थी. सरमा बोले, किसी समय हमने मान लिया था कि हमें साथ-साथ जीना होगा. शंकर-माधव की जगह हम शंकर-अजान कहने लगे. अजान पीर अपनी जगह पर रहेंगे. लेकिन माधव (माधवदेव) का भी अपना स्थान है. तभी हमारी ‘जाति’ बच सकती है। श्रीमंत शंकरदेव और श्री श्री माधवदेव असम के पूज्य वैष्णव संत हैं. जबकि अजान पीर एक मुस्लिम संत थे जो 17वीं सदी में इराक सेअसम आए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरुखुटी का निष्कासन अभियान बहुत अहम था और इसके बाद सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बना कि ऐसेअभियान रोके जाएं. लेकिन हमारे लोग नहीं रुके. हमने यह संघर्ष जीतना सीख लिया है. अब हालात ऐसे हैं कि जब हम कहते हैं कि असमियों कीजमीन पर कब्जा हो रहा है तो अवैध कब्जाधारी खुद ही वहां से हट जाते हैं.
उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी के मामले में नारायण राणे ने हाईकोर्ट से याचिका ली वापस, थप्पड़ बयान पर दर्ज FIR अब बेमानी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद नारायण राणे ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी उस याचिका को वापस ले लिया. जिसमें उन्होंने2021 में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. यह एफआईआर उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ की गईउनकी टिप्पणी को लेकर दर्ज की गई थी. राणे के वकील अनिकेत निकम ने न्यामूर्ति रवींद्र घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि रायगढ़ में दर्जमामले में पुलिस पहले ही एक रिपोर्ट दे चुकी है. जिसे ‘सी समरी’ कहते हैं. इसका मतलब है कि पुलिस को न तो मामला सही लगा और न ही गलत. अतिरिक्त लोक अभियोजक जेपी याज्ञनिक ने अदालत को बताया कि पुणे में दर्ज मामले में भी इसी तरह की रिपोर्ट दाखिल की जाएगी. पीठ ने इसपर संज्ञान लिया और रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से लोकसभा सांसद राणे को याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी. स्वतंत्रता का वर्ष नहीं पाए बतागौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री राणे ने कहा था कि अगर उद्धव ठाकरे अपने भाषण में कथित तौर पर भारत की स्वतंत्रता का सही साल नहीं बता पाए. तो वह उन्हें ‘एक जोरदार थप्पड़’ मारते राणे की इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया था. बाद में राणे के इसी बयान को लेकर उनके खिलाफएफआईआर दर्ज हुई थी. बीजेपी सांसद नारायण राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 2021 में दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने के लिए दायर अपनीयाचिकाएं वापस ले ली हैं. यह एफआईआर उनके उस बयान पर दर्ज हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर उद्धव ठाकरे स्वतंत्रता का वर्ष नहीं बतापाए, तो उन्हें थप्पड़ मारूंगा. राणे के वकील ने कोर्ट को बताया कि रायगढ़ पुलिस पहले ही ‘सी-समरी’ रिपोर्ट (जिसका मतलब होता है मामला न सहीहै न गलत) दाखिल कर चुकी है. आरोग्य की जानकारी अदालत को वकील अनिकेत निकम ने दी कि रायगढ़ के एक मामले में पुलिस ने ‘C Summary’ रिपोर्ट दाखिल की है. जिसका अर्थ है कि न तो सबूत पर्याप्त हैं और न ही आरोप सही ठहराए जा सकते हैं. एफआईआर के रद्दीकरण की थी मांगपुणे में भी इसी तरह की रिपोर्ट तैयार की जा रही है भाजपा सांसद नारायण राणे ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी दो petitions वापस लीं, जिनमें वे 2021 में उद्धव ठाकरे पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज एफआईआर के रद्दीकरण की मांग कर रहे थे. रायगढ़ अदालत नेअप्रैल 2023 में राणे को उनका बयान दोषपूर्ण लेकिन “अपवित्र भाषण” बताते हुए बरी किया था. उसने पाया कि यह भाषण न तो सार्वजनिकव्यवस्था भंग कर रहा था और न ही किसी अन्य समूह के खिलाफ दुष्प्रचार करता था अगस्त 2021 में राणे ने कहा था कि यदि सीएम ठाकरे स्वतंत्रतावर्ष याद नहीं कर पाए तो “मैं उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता जिसने राजनीतिक और कानूनी तूफ़ान खड़ा कर दिया था इस बयान के खिलाफ शिवसेनाके समर्थकों ने आपत्तियां दर्ज करवाईं, जिसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर प्राथमिकी दर्ज की और राणे को गिरफ्तार किया गया पर बाद में फटाफटजमानत मिली राजनीतिक रूप से यह कदम BJP को शाहीनबाग और शिवसेना जैसे पुराने सहयोगियों के प्रति राणे की स्थिति स्पष्ट रखने मेंलाभदायक साबित हो सकता है.
स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, भारत के इतिहास में दूसरा ऐसा मामला

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा, ‘मैं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुएऔर डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं. यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार है मैं भारत की माननीय राष्ट्रपति को हार्दिक धन्यवाद देता हूं. जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मुझे लगातार सहयोग और एक शांतिपूर्णकार्य संबंध प्रदान किया. यह मेरे लिए बेहद सुखद अनुभव रहा ‘उन्होंने आगे कहा, ‘मैं माननीय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का भी आभार प्रकट करताहूं. प्रधानमंत्री का सहयोग मेरे लिए बेहद मूल्यवान रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है. धनखड़ ने कहा, मुझे माननीयसांसदों से जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला, वह मेरे लिए सदा अमूल्य रहेगा और मेरी स्मृति में अंकित रहेगा. मैं इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपतिके रूप में मिले अमूल्य अनुभवों और ज्ञान के लिए अत्यंत आभारी हूं.’ गर्व और संतोष की हो रही है बातउन्होंने आगे लिखा कि इस महत्वपूर्ण कालखंड में भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और असाधारण विकास का साक्षी बनना और उसमें सहभागीहोना मेरे लिए गर्व और संतोष की बात रही है. हमारे राष्ट्र के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करना मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है जब मैं इसप्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हूं, तो मैं भारत के वैश्विक उत्थान और उसकी अद्भुत उपलब्धियों पर गर्व से भर जाता हूं और उसके उज्ज्वल भविष्य में मेरीपूर्ण आस्था है. भारत के उपराष्ट्रपति के एक्स हैंडल से धनखड़ की तस्वीर को हटा दिया गया है. देश के इतिहास में यह दूसरा मामला है जब किसीउपराष्ट्रपति ने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले उस पद से इस्तीफा दिया है। इससे पहले वीवी गिरि ने 20 जुलाई, 1969 को स्वतंत्र उम्मीदवार केरूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. पिछले महीने उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर गए थे. कुमाऊं विश्वविद्यालयमें कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई थी. मौके पर चिकित्सकों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया था. जिसके बादवह राज्यपाल गुरमीत सिंह के साथ राजभवन को रवाना हो गए थे. सरकार का है विश्वास प्राप्तइससे पहले उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि ईश्वर की कृपा रही तो वह अगस्त, 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे. 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़का पांच साल का कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है. पेशे से वकील धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले पश्चिम बंगाल केराज्यपाल थे. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने उनके उत्तराधिकारी के लिए सत्तारूढ़ खेमे में विमर्श का दौर शुरू कर दिया है. सत्तारूढ़भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचक मंडल में बहुमत है। आने वाले दिनों में एनडीएसंभावित उम्मीदवारों पर विचार करेगा. धनखड़ पहले प. बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं. संभव है कि एनडीए किसी अन्य राज्यपाल, अनुभवीसंगठनात्मक नेता या केंद्रीय मंत्रियों में से किसी एक का चुनाव इस पद के लिए करे. धनखड़ के पूर्ववर्ती एम. वेंकैया नायडू भाजपा के पूर्व अध्यक्ष औरनरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. उन्हें 2017 में इस सांविधानिक पद के लिए चुना गया था. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जनता दल(यूनाइटेड) के सांसद हैं और 2020 से इस पद पर हैं. उनको भी संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है.