महाराष्ट्र राजनीति में उठे नए सियासी सुराग, फडणवीस-उद्धव की मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की संभावनाएं

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है. बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कोअप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधारी पक्ष में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था इसके बाद दोनों नेता एक-दूसरे से मिलते नजर आए थे. वहीं ठीक एक दिन बादगुरुवार को दोनों नेताओं की मुलाकात विधान परिषद के सभापति राम शिंदे के कार्यालय में हुई. यह बैठक करीब 20 मिनट तक चली. इस बैठक मेंआदित्य ठाकरे भी मौजूद थे. इन दो मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है. इस मुलाकात पर शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि आज हमने मुख्यमंत्री को एक संकलन दिया है. जिसमें लिखा है कि पहली कक्षा से तीन-भाषा नीति क्यों नहीं होनीचाहिए. बता दें कि बुधवार को विधानसभा में फडणवीस ने साफ कहा था कि भारतीय जनता पार्टी 2029 तक विपक्ष में जाने वाली नहीं है. दोनों में आ गई दरारउन्होंने उद्धव ठाकरे को इशारों में संदेश दिया था कि वह चाहें तो किसी अलग रास्ते से सत्तापक्ष में आ सकते हैं. उनका यह बयान ऐसे समय आया हैजब उद्धव ठाकरे लगातार गठबंधन सरकार की तीन-भाषा नीति को लेकर आलोचना कर रहे हैं. शिवसेना और भाजपा ने 25 साल तक साथ मिलकरमहाराष्ट्र में राजनीति की। लेकिन 2014 में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों में दरार आ गई. 2019 में उद्धव ठाकरे ने भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेसऔर एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद सरकार गिर गई और फडणवीस ने शिंदे के साथमिलकर सत्ता संभाली. हाल के दिनों में उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे के बीच भी नजदीकियां बढ़ी हैं. 5 जुलाई को दोनों ने पहली बारदो दशक बाद एक मंच साझा किया। यह मौका था महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा बनाने वाले दो आदेशों को वापस लेने केजश्न का. मुलाकातों को लेकर अटकलें हुई फिर से तेजइससे पहले अप्रैल में राज ठाकरे ने कहा था कि दोनों भाइयों के बीच पुरानी बातें तुच्छ थीं और मराठी मानूस के लिए एक होना जरूरी है. फडणवीसऔर उद्धव की मुलाकातों को लेकर अब यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या दोनों पुराने साथी एक बार फिर साथ आ सकते हैं. खास बात यह है किफडणवीस का बयान और फिर उनकी मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उद्धव ठाकरे फडणवीस सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं और एमएनएस के साथतालमेल की चर्चा चल रही है. राज और उद्धव के बीच बढ़ती नजदीकियों ने भाजपा को सोचने पर मजबूर किया है. अगर मराठी वोट बैंक को लेकरठाकरे बंधु एक हो जाते हैं तो भाजपा को 2029 की राजनीति में नुकसान हो सकता है। इसलिए फडणवीस की कोशिश यही मानी जा रही है किकिसी भी हालत में उद्धव को अपने पाले में वापस लाया जाए. महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई. जब पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरेऔर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बुधवार को करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई। यह मुलाकात विधान परिषद के सभापति के कार्यालय में हुई. एक दिन पहले विधानसभा सत्र के दौरान फडणवीस ने उद्धव को साथ आने का प्रस्ताव भी दिया था.
महाराष्ट्र विधानसभा में ‘राइट टू रिप्लाई’ विवाद, भास्कर जाधव ने अध्यक्ष पर पक्षपात का लगाया आरोप

महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।पूरा मामला ‘राइट टू रिप्लाई’ यानी जवाबदेने के अधिकार को लेकर था. जिस पर शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर पक्षपात का गंभीरआरोप लगाया। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा नियम 293 के तहत चल रही बहस का जवाब दिया. इसनियम के तहत सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। जैसे ही शिंदे ने अपना जवाब पूरा किया. शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्करजाधव खड़े हो गए और जवाब का जवाब देने की मांग की. भास्कर जाधव ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि उन्हें भी शिंदे के जवाब पर प्रतिक्रिया देने काअधिकार मिलना चाहिए. लेकिन विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि यह अधिकार केवल उसी सदस्य को होता है जिसने बहस की शुरुआतकी हो. चूंकि आदित्य ठाकरे उस समय सदन में मौजूद नहीं थे. इसलिए जाधव को बोलने की अनुमति नहीं दी गई. भास्कर जाधव ने जताई नाराजगीइस पर भास्कर जाधव ने नाराजगी जताई. जिससे सत्ता पक्ष की शिवसेना के सदस्य विरोध में खड़े हो गए. हंगामे की स्थिति बनने पर अध्यक्ष ने सदनकी कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन दोबारा शुरू होने पर मंत्री शंभुराज देसाई ने जाधव और ठाकरे पर ‘कुर्सी’ और सत्ता पक्ष की ओरइशारे करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. उपमुख्यमंत्री शिंदे ने भी कहा कि भास्कर जाधव ने खुद कोनिलंबित करने की चुनौती दी थी. जो सदन की गरिमा के खिलाफ है वहीं विपक्ष के नेता अजॉय चौधरी ने कहा कि बहस शुरू करने वाले सदस्य कुछसमय के लिए बाहर गए थे. ऐसे में दूसरे सदस्य को बोलने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सरकार की प्रतिक्रिया पर जवाबदेने का अधिकार है. विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि सदन की प्रक्रिया का अपमान करना, पूरी विधानसभा का अपमान है. उन्होंने कहाकि वह आदित्य ठाकरे को जवाब देने का अधिकार देने को तैयार हैं. बशर्ते वे सदन में उपस्थित हों। इसके बाद भास्कर जाधव ने मीडिया से बातचीत मेंकहा कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया और उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष विपक्ष के अधिकारोंकी रक्षा नहीं कर रहे हैं और वे सरकार का हिस्सा बनकर व्यवहार कर रहे हैं. राज्य से जुड़े मुद्दों पर देना था जवाबजाधव ने कहा कि उपमुख्यमंत्री को पूरे राज्य से जुड़े मुद्दों का जवाब देना था. लेकिन उन्होंने केवल मुंबई से जुड़ी बातों पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंनेकहा कि ठाणे, परभणी, शिक्षा, आंगनवाड़ी, पानी और स्वच्छता जैसे कई अहम मुद्दों को शिंदे ने नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने शिंदे के भाषण कोनझूठऔर भ्रामकनबताते हुए कहा कि सरकार की जबावदेही तय करने के लिए विपक्ष का बोलना जरूरी होता है। लेकिन जब उन्हें बोलने नहीं दिया गया. तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जाधव ने आरोप लगाया कि स्पीकर अब खुद को सदन के तटस्थ संरक्षक की बजाय सरकार का हिस्सासमझते हैं. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्षता की होनी चाहिए. लेकिन वे विपक्ष को बोलने का समान अवसर नहीं दे रहे हैं. विधानसभा मेंयह घटनाक्रम दिखाता है कि सत्ता और विपक्ष के बीच अब सिर्फ विचारों का मतभेद नहीं, बल्कि प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा टकराव बनता जा रहा है।महाराष्ट्र विधानसभा में ‘राइट टू रिप्लाई’ को लेकर जोरदार हंगामा हुआ. शिवसेना (यूबीटी) विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा अध्यक्ष राहुलनार्वेकर पर पक्षपात का आरोप लगाया. उपमुख्यमंत्री शिंदे के जवाब पर विपक्ष बोलना चाहता था लेकिन अनुमति न मिलने पर सदन स्थगित हो गया.
PM मोदी के मोतिहारी दौरे के दौरान यूट्यूब लाइव पर धमकी भरे कमेंट, सुरक्षा एजेंसियां हुई सतर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार और पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं दौरे के बीच उनके ही पेज पर चल रहे लाइव में एक शख्स ने धमकी भरे कमेंट किएहैं. मोतिहारी में उनकी सभा के लिए जो लिंक जेनरेट किया गया है. उस पर समर्थन-विरोध के संदेशों के बीच एक यूजर ने कई बार ऐसी बातें लिखी हैंजो जांच का विषय हैं।28.5 मिलियन सब्सक्राइबर वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब पेज पर मोतिहारी के कार्यक्रम का लिंक लाइव होने के बादएक यूजर आदित्य सिन्हा के नाम से कई बार चेतावनी भरे संदेश दिए गए. ये सभी मैसेज रोमन में लिखे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार कोदोपहर होने के पहले मोतिहारी पहुंचे. यहां पीएम मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा के साथ रोड शोकरते हुए सभा के मंच तक पहुंचे. मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ केंद्रीय मंत्रियों की कतार भी मौजूद है. बिहार में कार्यक्रम के बादप्रधानमंत्री बंगाल भी जाएंगे. गठबंधन के चेहरे के रुप में आए थे पीएम बिहार2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री पद पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के चेहरे के रूप में नरेंद्र मोदी बिहार आए थे. इस दौरान पटना केगांधी मैदान में बम धमाकों के बीच उन्होंने सभा की थी उन धमाकों के दोषी पकड़े जा चुके हैं. प्रधानमंत्री के 28.5 मिलियन सब्सक्राइबर वालेआधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मोतिहारी कार्यक्रम का लाइव लिंक उपलब्ध कराया गया था. इस लाइव स्ट्रीम पर ‘आदित्य सिन्हा’ नामक यूजर द्वाराकई बार धमकी भरे और चेतावनी वाले संदेश पोस्ट किए गए. जो प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बने हैं. ये संदेश रोमन लिपिमें लिखे गए थे और उनके कंटेंट की जांच की जा रही है ताकि कोई भी सुरक्षा जोखिम को तुरंत टाला जा सके. प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में भी गुजरातके मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार का दौरा किया था. उस दौरान पटना के गांधी मैदान में हुई बम धमाकों के बावजूद उन्होंने सभा को जारी रखा था. आजके दौर में भी सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हैं. खासकर जब प्रधानमंत्री बड़े जनसभा कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. मोतिहारी में इस बार सुरक्षा के व्यापकइंतजाम किए गए थे. ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके मोतिहारी के बाद प्रधानमंत्री मोदी का अगला पड़ाव पश्चिम बंगाल है. जनता से करेंगें सीधे संवादयहां वे आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जनता से सीधे संवाद करेंगे. पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तीव्र हैं और मोदी का यह दौराबीजेपी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरे के दौरान मोदी कई जनसभाओं और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिससे उनकी पार्टी को चुनावी बढ़तमिलने की उम्मीद है। बिहार में पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जो बिहारमें एनडीए गठबंधन की ताकत का परिचय देता है. मंच से प्रधानमंत्री ने विकास, रोजगार, और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के मुद्दों पर जोर दिया औरप्रदेशवासियों को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार और पश्चिम बंगाल दौरा राजनीतिकसक्रियता के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील है. यूट्यूब लाइव पर मिली धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है. इसकेबावजूद मोदी की सभाओं में भारी जनसमर्थन और राजनीतिक संगठनों की एकजुटता साफ नजर आ रही है। इस दौरे से आगामी चुनावों की दिशा परभी प्रभाव पड़ेगा.
ईडी के जरिए कांग्रेस पर मंथली अटैक? मोदी-शाह पर के सी वेणुगोपाल का बड़ा आरोप, बघेल के बेटे की गिरफ्तारी से सियासत गरम

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बार फिर मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हर महीने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और उनके परिवार पर कार्रवाई करने का काम सौंप दियाहै. आगे उन्होंने लिखा कि रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की नई कार्रवाई सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिशोध है और डराने-धमकाने का एक निरर्थक प्रयासहै. शुक्रवार को सुबह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे के ठिकानों पर भी छापा मारा गया. प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छत्तीसगढ़ केपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के निवास पर छापामारी की। यह कार्रवाई राज्य में चल रहे करोड़ों के कथित शराब घोटाले की जांचके तहत की गई. एक्स पर लिखा गया ईडी आ गईईडी का कहना है कि इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमीशन के जरिए मोटी रकम इकट्ठा की गई. भूपेश बघेल के कार्यालय की ओर से एक्सपर लिखा गया कि ईडी आ गई है. आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है तमनार में अडानी के लिए पेड़ काटे जाने का मुद्दा उठाया जाना था. लेकिन‘साहब’ ने ईडी को भेज दिया. बघेल का आरोप है कि यह सब सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश है। ईडी ने इसी साल मार्च में बघेल औरउनके बेटे के निवास से 30 लाख रुपये जब्त किए थे। वह कार्रवाई भी इसी शराब घोटाले से जुड़ी थी. तब राज्य के अलग-अलग 14 स्थानों परछापेमारी की गई थी. ईडी का कहना है कि इस मामले में कई बिचौलियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है. रॉबर्ट वाड्रा से ईडी कीपूछताछ के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मोदी-शाह ने ईडी को कांग्रेस नेताओं पर हर महीने कार्रवाईका टारगेट दिया है. भूपेश बघेल के घर हुई छापेमारीहालांकि इसके बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे के घर भी छापेमारी हुई. इसको लेकर भी पूर्व सीएम ने भाजपा पर हमला बोला है. कांग्रेस इस गिरोह की कार्रवाई को “विधानसभा में निष्पक्ष आवाज दबाने की कोशिश” मान रही है. क्योंकि छापे समय की Assembly सत्र से कईमुद्दों (जैसे अडानी के लिए गड़बड़ी) से ध्यान हटाने के लिए किए गए लग रहे हैं. भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई पूरी तरहकानूनी आधार पर आधारित है और इसमें कोई सियासी मिलीभगत नहीं है। के.सी. वेणुगोपाल उस ट्रेंड को रेखांकित कर रहे हैं. जिसमें वे कहते हैं किप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सीधे तौर पर केंद्र में बैठकर ईडी को कांग्रेस पर नियमित हमले का एजेंडा दे रहे हैं. हालिया वाड्रा मामले और बघेल के बेटे कीगिरफ्तारी को वे इस रणनीति की कड़ी मान रहे हैं इस मामले पर बड़ा राजनीतिक हल्ला मचा चुका है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रदर्शन और भाजपा–कांग्रेस के बीच तीखी बहस तूल पकड़ चुकी है.
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, कार्यवाही पर रोक से इनकार

जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू यादव को करारा झटका दिया है. अदालत ने लालू प्रसाद यादव केखिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने कानिर्देश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही में पेशी से छूट देते हुए लालू यादव को थोड़ी राहत जरूर दी है. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट से सीबीआईकी प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया. बता दें कि आरजेडी सुप्रीमो बीते दिन ही राहत की मांग लिएसुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. इससे पहले लालू यादव की इस मांग को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था. सीबीआई को किया था नोटिस जारीदिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है. उच्च न्यायालय ने सीबीआई को नोटिस जारी किया थाऔर सुनवाई 12 अगस्त के लिए स्थगित कर दी थी. अपनी याचिका में लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की एफआईआर और 2022, 2023 और2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और संज्ञान आदेशों को रद्द करने की मांग की. उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट 14 साल की देरी से 2022 में दर्ज की गई. जबकि सीबीआई ने प्रारंभिक पूछताछ और जांच सक्षम अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद बंद कर दी गई थी. उन्होंने कहा है किपिछली जांच और उसकी क्लोजर रिपोर्ट को छुपाकर नई जांच शुरू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. उन्होंने तर्क दिया है कि उनको अवैधजांच से कष्ट सहना पड़ रहा है. जो निष्पक्ष जांच के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. वर्तमान जांच और पूछताछ दोनों ही गैर-कानूनी हैं. क्योंकिदोनों ही अनिवार्य अनुमोदन के बिना शुरू की गई हैं। इस तरह की मंजूरी के बिना की गई कोई भी जांच शुरू से ही अमान्य होगी। अधिकारियों नेबताया कि यह मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी की नियुक्तियों से संबंधित है. यह नियुक्ति 2004 से 2009 के बीच लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थी. उपहार में दिए या किए हस्तांतरितइन नियुक्तियों के बदले में लोगों ने राजद सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े उपहार में दिए या हस्तांतरित किए. 18 मई2022 को लालू और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इससे पहले कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 मई को दिल्ली की एक अदालत को बताया था किराष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर मुकदमा चलाने के मंजूरी मिल गई है. यह घोटाला उस समय हुआ था जब लालू प्रसाद केंद्रीयरेल मंत्री थे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी. राष्ट्रपति ने सीआरपीसी की धारा197(1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218) के तहत अनुमति प्रदान की थी। जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसादयादव को दिल्ली हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने कीउनकी मांग खारिज कर दी है.
राहुल गांधी का हमला RSS‑CPM ‘जनता के लिए भाव‑विहीन’, वाड्रा मामले को बताया ‘राजनीतिक विरोध’ जानें क्या है पूरा मामला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और माकपा लोगों के बारे में नहीं सोचते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई जनताके बारे में नहीं सोचता और उनसे नहीं जुड़ पाता तो वह नेता नहीं बन सकता. शुक्रवार को राहुल गांधी केरल के कोट्टायम में राज्य के पूर्व सीएम ओमानचांडी की दूसरी पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी संघ और माकपा से वैचारिक लड़ाई है. लेकिन मेरी सबसे बड़ीशिकायत ये है कि ये लोगों के बारे में नहीं सोचते. उनके मन में जनता के लिए कोई भावना नहीं है. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी यही सबसे बड़ीशिकायत है कि अगर आप राजनीति में हैं तो लोग क्या सोचते हैं. हिम्मत और गरिमा के साथ करते रहेगे ऐसाउसे महसूस करें उनकी बात सुनें और उन तक पहुंचने की कोशिश करें. लेकिन भारतीय राजनीति की त्रासदी है कि आज बहुत कम लोग हैं जो असल मेंदूसरों की भावनाओं का ख्याल रखते हैं. हरियाणा के शिकोहपुर में एक जमीन सौदे में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन के एक मामले मेंप्रवर्तन निदेशालय ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है. इसे लेकर ही राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है. ‘एक्स’ पर साझाएक पोस्ट में उन्होंने कहा ‘मेरे बहनोई को पिछले 10 साल से यह सरकार परेशान कर रही है. यह हालिया आरोप-पत्र उसी प्रताड़ना अभियान का एकऔर हिस्सा है. मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ खड़ा हूं क्योंकि उन्हें दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित एक और हमला झेलना पड़ रहाहै. मुझे पता है कि वे सभी किसी भी तरह की मुसीबत का सामना करने के लिए पर्याप्त बहादुर हैं. वे हिम्मत और गरिमा के साथ ऐसा करते रहेंगे. सच्चाई की होगी जीतलोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, अंततः सच्चाई की जीत होगी. राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरी यही सबसे बड़ी शिकायत है कि अगर आप राजनीतिमें हैं तो लोग क्या सोचते हैं. उसे महसूस करें उनकी बात सुनें और उन तक पहुंचने की कोशिश करें. ‘राहुल गांधी ने RSS-CPM पर जनभावनाओं कीकमी का आरोप लगाते हुए चुनावी राजनीति में सच्चे नेता के लिए ‘जन-समवेदना’ को ज़रूरी बताया. वहीं, वाड्रा के समर्थन में बयान देकर उन्होंने ED की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए केंद्र पर दबाव बनाए रखने का प्रयास किया है. उन्होंने बताया कि राजनीति में जो नेता जनता के भावको समझ नहीं सकता, वह नेता नहीं बन सकता. वाड्रा के खिलाफ ED की नवीनतम कार्रवाई पर राहुल ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया.उन्होंनेयह बयान पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में दिया.रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED द्वारा दाखिल चार्जशीट को राहुल ने “10 साल से चल रहे उत्पीड़न अभियान” का हिस्सा बताया.