गोरखपुर में उत्तर प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय हुआ लोकार्पित, सीएम योगी ने की नई घोषणाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय — का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं। यह विश्वविद्यालय 268 करोड़रुपये की लागत से तैयार किया गया है।सीएम योगी ने हर मंडल में आयुष कॉलेज खोलने की घोषणा कीइस ऐतिहासिक मौके पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन मंडलों में अभी तक आयुषचिकित्सा पद्धति से संबंधित कोई कॉलेज नहीं है, वहां जल्द ही एक-एक महाविद्यालय स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक जिले मेंएक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी बनाया जाएगा, जिसमें न्यूनतम 100 बेड की सुविधा होगी। पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना, पीएम मोदी को दिया श्रेययोगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों की पूर्व सरकारों पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहलेआयुर्वेद, यूनानी, योग और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई थी। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत की प्राचीन चिकित्सा विधाएं आज वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त कर रही हैं। विश्वविद्यालय बनेगा अनुसंधान और रोजगार का केंद्रमुख्यमंत्री ने बताया कि यह नया आयुष विश्वविद्यालय परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करेगा। विश्वविद्यालयआयुर्वेद, योग, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में न केवल उपचार की सुविधाएं देगा, बल्कि शोध और रोजगार के नए अवसर भी प्रदानकरेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान युवाओं के करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रपति और राज्यपाल को दी बधाईसीएम योगी ने राष्ट्रपति और राज्यपाल का आभार जताते हुए कहा कि गोरखपुर और पूरे प्रदेश के लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि राष्ट्रपति मुर्मू नेएम्स गोरखपुर के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लिया और अब आयुष विश्वविद्यालय का उद्घाटन करके राज्यवासियों को मार्गदर्शन दे रही हैं।
ओडिशा: वरिष्ठ नौकरशाह की पिटाई पर बवाल, BJP ने की कार्रवाई, कांग्रेस और OAS संघ का विरोध तेज,भुवनेश्वर में जनसुनवाई के दौरान हुई मारपीट

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां भुवनेश्वर नगर निगम (BMC) के एडिशनल कमिश्नर रत्नाकर साहू केसाथ कुछ लोगों ने मारपीट की। यह घटना उस समय हुई जब साहू जनसुनवाई कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसकेबाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। हमलावरों में BJP नेता भी शामिल, पार्टी ने 5 नेताओं को किया निलंबितहमले के वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर सख्त कार्रवाईकी मांग की। दबाव बढ़ने पर बीजेपी ने त्वरित कदम उठाते हुए पांच नेताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया। इनमें पार्षद जीवन राउत भी शामिल हैं, जिन पर साहू के साथ मारपीट में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने तीन हमलावरों को किया गिरफ्तारपुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए वीडियो की जांच के आधार पर तीन आरोपियों जीवन राउत, रश्मि महापात्रा और देबाशीष प्रधान को गिरफ्तारकर लिया है। जांच जारी है और बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। रत्नाकर साहू का बयानहमले के बाद मीडिया से बातचीत में रत्नाकर साहू ने कहा कि हमलावर उन्हें नहीं जानते थे और उन्होंने किसी के साथ कोई बदसलूकी नहीं की थी।उनके अनुसार, पार्षद जीवन राउत ने कथित तौर पर यह पूछने के बाद कि क्या उन्होंने ‘जगा भाई’ से बदतमीजी की है, अचानक हमला कर दिया। BMC कर्मचारियों का धरना और कार्य बहिष्कारघटना के विरोध में BMC के कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में दिनभर का कार्य बहिष्कार किया और धरना दिया। उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर अधिकारियों को कार्यालय में सुरक्षा नहीं मिलती, तो वे कैसेकाम करेंगे। नवीन पटनायक का सरकार पर हमलापूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घटना की तीखी आलोचना करते हुए इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) परलिखा, “अगर रत्नाकर साहू जैसे वरिष्ठ अधिकारी कार्यालय में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक क्या उम्मीद करें?” उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन मांझी सेतत्काल और उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई की मांग की। प्रशासनिक सेवा संघ ने दी सामूहिक अवकाश की चेतावनीओडिशा प्रशासनिक सेवा (OAS) संघ ने इस हमले के विरोध में मंगलवार से सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की है। संघ के अध्यक्ष ज्योतिरंजन मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
हिमाचल के मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर NHAI अधिकारी से मारपीट का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मामला

फोरलेन निर्माण स्थल पर हुआ विवादहिमाचल प्रदेश के शिमला ग्रामीण क्षेत्र के भट्टाकुफर इलाके में फोरलेन निर्माण के दौरान एक गंभीर विवाद सामने आया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटीऑफ इंडिया (NHAI) के शिमला प्रोजेक्ट मैनेजर अचल जिंदल ने राज्य के कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर मारपीट का आरोप लगाते हुए ढली थाने मेंशिकायत दर्ज कराई है। घटना उस समय की है जब निर्माण कार्य के चलते एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी।बैठक में नहीं पहुंचे SDM, साइट पर बुलाए गए अधिकारीअचल जिंदल के अनुसार, उन्हें और साइट इंजीनियर योगेश को शिमला ग्रामीण के एसडीएम कार्यालय में 11:30 बजे बैठक के लिए बुलाया गयाथा, लेकिन एसडीएम के अनुपस्थित होने के चलते दोनों अधिकारियों को घटनास्थल पर जाने को कहा गया। वहां मंत्री अनिरुद्ध सिंह और स्थानीयलोग पहले से मौजूद थे। मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोपजिंदल ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने मंत्री को जानकारी दी कि जिस भवन का जिक्र हो रहा है, वह राष्ट्रीय राजमार्ग की अधिकार सीमा(ROW) से 30 मीटर दूर स्थित है और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। आरोप है कि यह सुनते ही मंत्री ने अपशब्द कहे और फिर उन्हें एककमरे में ले जाकर स्थानीय लोगों की उपस्थिति में उनके साथ मारपीट की गई।पानी के घड़े से हमला, अस्पताल में भर्तीशिकायत के अनुसार, मंत्री ने कथित तौर पर पानी के घड़े से अचल जिंदल के सिर पर वार किया जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा।जब साइट इंजीनियर योगेश ने उन्हें बचाने की कोशिश की, तो उसके साथ भी मारपीट की गई। दोनों अधिकारियों को आईजीएमसी अस्पताल में भर्तीकराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। मौके पर मौजूद थे सरकारी अधिकारी, किसी ने नहीं रोकाजिंदल का कहना है कि घटना के वक्त एसडीएम सहित अन्य अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। अधिकारीजान बचाकर अपनी गाड़ी से सीधे अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज किया, मंत्री की चुप्पीपुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 121(1), 352, 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।हालांकि, अब तक कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है। इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्रघटना के बाद सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस ऑफिसर एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कीहै। शिकायत की प्रतिलिपि NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय, मुख्यालय और परियोजना निदेशक को भी भेजी गई है। बढ़ सकता है विवादमंत्री पर सीधे मारपीट के आरोप लगने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ सकता है। प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में इसप्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस जांच जारी है और पीड़ित अधिकारियों की मेडिकल रिपोर्ट भी केस का अहम हिस्सा बनेगी।
कर्नाटक में सियासी घमासान, प्रियांक खरगे का आरएसएस पर प्रतिबंध का बयान बना विवाद का केंद्र

प्रियांक खरगे का विवादास्पद बयानकर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। इस बार कांग्रेस नेता और मंत्री प्रियांक खरगे नेराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक विवादित बयान देकर बहस को और हवा दे दी। उन्होंने कहा, “अगर केंद्र में हमारी सरकार बनती है, तोहम आरएसएस पर पाबंदी लगाएंगे।” आरएसएस पर गंभीर आरोपकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने आरएसएस को धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसकीविचारधारा समानता और आर्थिक समता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस पहले भी दो बार प्रतिबंधित किया गया था औरउस दौरान संगठन ने राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से पल्ला झाड़ते हुए माफी मांगी थी। खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा से आरएसएस की विचारधारा का विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उनके मुताबिक, कांग्रेस सत्तामें आने पर इस दिशा में कठोर कदम उठा सकती है क्योंकि उनके पास संबंधित घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। भाजपा का पलटवारभाजपा ने प्रियांक खरगे के इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि आरएसएस एक देशभक्तसंगठन है, जिसके लाखों स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने खरगे के बयान को “खाली बर्तन की आवाज” बताया और कहा किआरएसएस एक वटवृक्ष की तरह है, जिसे कोई भी राजनीतिक ताकत उखाड़ नहीं सकती। कांग्रेस के भविष्य पर भाजपा का तंजविजयेंद्र ने कांग्रेस को अपने राजनीतिक भविष्य पर ध्यान देने की सलाह दी और कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस का अस्तित्व आने वाले वर्षों मेंबचा रह पाएगा। उन्होंने कहा कि बार-बार आरएसएस को निशाना बनाना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। प्रियांक खरगे के बयान ने न केवल राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस और भाजपा केबीच यह जुबानी जंग आगे और तेज होने की संभावना है, खासकर तब, जब आरएसएस जैसे संगठन को प्रतिबंधित करने की बात खुले मंचों पर कहीजा रही हो।
UN में एस. जयशंकर का सख्त संदेश: आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो विश्व, परमाणु धमकियों से न डरे, आतंक के खिलाफ वैश्विक एकता की अपील

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने का आह्वानकिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और न ही किसी देश को आतंकियों का इस्तेमाल अपने रणनीतिक उद्देश्यों केलिए करने देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति “जीरो टॉलरेंस” पर आधारित है। पहलगाम हमले का संदर्भ और भारत की प्रतिक्रियाजयशंकर ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए बताया कि इस हमले ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को और सख्तकिया है। उन्होंने कहा कि इस हमले के दो हफ्तों के भीतर भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकीठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से इस हमले की निंदा का भी उल्लेख किया। मानवता के लिए सबसे बड़ा खतराविदेश मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवाद न केवल शांति और स्थिरता बल्कि मानवाधिकारों, कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भीखिलाफ है। जब कोई राष्ट्र अपने पड़ोसी के खिलाफ आतंक को हथियार बनाता है या जब कट्टरपंथ इसे बढ़ावा देता है, तो उसे बेनकाब करना जरूरीहो जाता है. परमाणु धमकियों से न झुके वैश्विक समुदायजयशंकर ने यह भी चेताया कि दुनिया को किसी भी देश की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के आगे झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवादऔर परमाणु हथियारों की धमकी दोनों ही वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे हैं। संयुक्त राष्ट्र में प्रदर्शनी का उद्घाटनएस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘आतंकवाद का मानवीय नुकसान’ नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो 30 जून से 3 जुलाई और 7 से 11 जुलाई तक प्रदर्शित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में 1993 मुंबई बम धमाके, 2008 के मुंबई हमलों और 2025 के पहलगामहमले जैसे आतंकवादी कृत्यों को दर्शाया गया है। इसमें आतंकवाद से प्रभावित पीड़ितों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिशकी गई है। पाकिस्तान की UNSC अध्यक्षता के बीच अहम वक्तव्यगौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। जयशंकर का यहबयान एक तरह से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को चुनौती देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।
हिमाचल में मॉनसून की मार: मंडी में बादल फटने से भारी तबाही, 800 करोड़ का नुकसान, मंडी बना तबाही का केंद्र

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने की घटनाओं ने जबरदस्त तबाही मचाई है। करसोग और धर्मपुर क्षेत्रों में बादल फटने से अब तक 4 लोगोंकी मौत हो चुकी है, जबकि 16 लोग अभी भी लापता हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 117 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस आपदासे राज्य को अब तक करीब 800 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। सड़कों, पुलों और घरों को नुकसानभारी बारिश और बादल फटने की वजह से कई सड़कें, पुल और पुलियाएं बह गईं। मंडी जिले में कुल 18 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, 12 गौशालाएं पूरीतरह तबाह हो गईं और लगभग 30 मवेशी पानी में बह गए। इन घटनाओं का असर दोपहर एक बजे तक के आंकड़ों में देखा गया है। गोहर और धर्मपुर में सबसे ज्यादा नुकसानमंडी के गोहर क्षेत्र में चार अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें दो घर पूरी तरह नष्ट हो गए। धर्मपुर में भी हालात गंभीरहैं, जहां 6 घर बाढ़ की चपेट में आ गए और 8 गौशालाएं बह गईं। ब्यास नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्र में और खतरा बनाहुआ है। राज्यभर में बारिश का कहरइस बार हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने सामान्य से कहीं अधिक तबाही मचाई है। जून महीने में सामान्य से 37% अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसतेज बारिश से राज्यभर में व्यापक नुकसान हुआ है, खासकर मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सोलन और शिमला जिलों में भारी बारिशरिकॉर्ड की गई है।पंडोह में 123 मिमी, मंडी में 120 मिमी, शिमला में 110 मिमी और पालमपुर में 80 मिमी वर्षा दर्ज की गई। रेड और ऑरेंज अलर्ट जारीराज्य में मौसम विभाग ने आगामी 6 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। 2 और 3 जुलाई को विशेष रूप से अधिकतर इलाकों में तेज बारिशकी संभावना है। जिला ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कुल्लू में येलो अलर्ट और कुछ स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं, मंडी, कांगड़ा और चंबा जैसे जिलों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पंडोह डैम से छोड़ा गया पानीबाढ़ की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मंडी के पंडोह डैम से करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे निचले क्षेत्रों में खतरा औरअधिक बढ़ गया है और रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, सुरजेवाला का ऐलान amid सत्ता संघर्ष

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर उठते विवाद के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। पार्टी के एआईसीसीप्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा की। उन्होंने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बगल में बैठाकर कहाकि कांग्रेस मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नहीं हटाएगी। विधायकों से मुलाकात और एकता का प्रदर्शनरणदीप सुरजेवाला सोमवार को बेंगलुरु पहुंचे और उन्होंने पार्टी विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट कियाकि नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पहले मैसूर में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार का हाथ उठाकर एकता का संदेशदिया था। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी, जैसे उन्होंने पहले भी एक बार बतौर मुख्यमंत्री किया था। ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला: हकीकत या भ्रम?कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद को लेकर “ढाई-ढाई साल” के फॉर्मूले की चर्चा लंबे समय से चल रही है। कहा जा रहा है कि यह समझौताकांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के बीच हुआ था। हालांकि, कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से इस पर कभी पुष्टि नहीं की। अबसवाल उठ रहा है कि क्या नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे होने पर डीके शिवकुमार को सत्ता सौंपी जाएगी? संगठन समीक्षा या सत्ता हस्तांतरण की तैयारी?रणदीप सुरजेवाला इस समय कर्नाटक में डेरा डाले हुए हैं और विधायकों एवं जिला अध्यक्षों से व्यक्तिगत फीडबैक ले रहे हैं। पार्टी कह रही है कि यहप्रक्रिया सरकार के कामकाज की समीक्षा और घोषणापत्र के क्रियान्वयन के मूल्यांकन के लिए है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे सत्ताहस्तांतरण की तैयारी भी छुपी हो सकती है। खरगे का बयान और अंदरूनी खींचतानकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जब मुख्यमंत्री परिवर्तन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह फैसला आलाकमान करेगा। उन्होंनेबदलाव की संभावना से इनकार भी नहीं किया, जिससे डीके शिवकुमार के सीएम बनने की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं। पर्दे के पीछे की रणनीतिबताया जा रहा है कि सिद्धारमैया अगले बजट तक पद पर बने रहना चाहते हैं, जबकि डीके शिवकुमार समयसीमा से एक दिन भी अधिक इंतजार नहींकरना चाहते। डीके शिवकुमार ने प्रदेश अध्यक्ष पद भी नहीं छोड़ा है, जो एक तरह का दबाव बनाने का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है किडीके ने करीब 100 विधायकों से संपर्क साधा
Statement by Shri Rahul Gandhi, On 8 Years of GST, A Broken Promise to India

Eight years since its implementation, the Modi government’s Goods and Services Tax (GST) has proven to be less a reform and more a burden — especially on small businesses, the working class, and non-BJP ruled states. Shri Rahul Gandhi strongly criticized the current GST structure, calling it a tool of “economic injustice and corporate favoritism” rather than the “Good and Simple Tax” that was promised. Five Slabs, 900+ AmendmentsInstead of delivering simplicity, GST has evolved into a confusing five-slab tax regime that has been amended over 900 times. Everyday items like caramel popcorn and cream buns are ensnared in its convoluted structure. The result is a system riddled with inconsistencies and complexity. Small Businesses Struggle, Big Corporates ThriveRahul Gandhi emphasized how GST has tilted the playing field in favor of large corporations. Equipped with legal teams and accountants, big businesses maneuver through the red tape, while micro, small, and medium enterprises (MSMEs) the backbone of India’s job market are stifled by compliance hurdles and a rigid bureaucratic system. MSMEs in CrisisSince GST’s rollout, over 18 lakh small enterprises have reportedly shut down — a staggering indicator of how deeply the tax regime has affected job creators and entrepreneurs. The GST portal, instead of offering ease, has become a daily source of stress and obstacles for small traders. Tax on Essentials, Relief for CorporatesCommon citizens are now paying GST on basic necessities like tea and health insurance. In contrast, large corporations continue to enjoy tax exemptions and benefits estimated at over ₹1 lakh crore each year. This imbalance highlights a widening gap between the privileged few and the rest of the population.Exclusion of Fuel and Federal DisrespectThe deliberate decision to exclude petrol and diesel from GST has hurt sectors like agriculture and transport. Moreover, the withholding of GST compensation to non-BJP governed states has exposed the central government’s disregard for cooperative federalism. A Vision UnderminedRahul Gandhi reminded the nation that GST was initially envisioned by the UPA as a progressive step to unify markets and simplify taxation. However, that vision has been derailed by flawed implementation, centralized control, and political bias. Call for ReformHe concluded by calling for a complete overhaul of the GST structure one that is inclusive, supportive of small businesses, and respectful of state autonomy. India, he asserted, needs a tax system that empowers every citizen from farmers to shopkeepers — and ensures that all Indians share in the nation’s economic growth.
रेल किराया बढ़ोतरी पर लोकदल की कड़ी आपत्ति, फैसला बताया जनविरोधी

भारतीय रेलवे द्वारा 1 जुलाई 2025 से यात्री ट्रेनों के किराये में की गई बढ़ोतरी को लेकर लोकदल ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। पार्टी के राष्ट्रीयअध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने इस निर्णय को आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय मेंलिया गया है जब देश के लोग पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ट्रेन आम आदमी की जीवन रेखा हैचौधरी सुनील सिंह ने कहा कि रेलवे देश के करोड़ों लोगों, खासकर मजदूरों, छात्रों, किसानों, छोटे व्यापारियों और बुजुर्गों के लिए बेहद जरूरीसार्वजनिक सुविधा है। किराया बढ़ाना इन वर्गों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार को यह फैसला तुरंतवापस लेना चाहिए। बढ़ती कीमतें, गिरती सेवाएंलोकदल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में रेलवे सेवाओं में सुधार के नाम पर बार-बार किराये में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन सुविधाओं में कोईठोस सुधार नहीं हुआ। स्टेशन, कोच और बुनियादी सेवाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है या और खराब हुई है। जन आंदोलन की चेतावनीलोकदल ने साफ किया है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी जनहित में जनता के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरूकरेगी। चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि लोकदल सड़क से संसद तक आम जनता की आवाज़ को बुलंद करेगा और सरकार की जनविरोधी नीतियों कापुरजोर विरोध करेगा।
पुरानी गाड़ियों की जब्ती और कृत्रिम वर्षा पर आम आदमी पार्टी का बीजेपी सरकार पर हमला, सौरभ भारद्वाज बोले– फुलेरा की पंचायत चला रहे हैं

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पुराने वाहनों को जब्त करने और मानसून के बीच कृत्रिम वर्षा कराने जैसे फैसलों पर दिल्ली की बीजेपी सरकार कोकठघरे में खड़ा किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इन फैसलों को “अव्यवहारिक और विवादास्पद” बताते हुए भाजपा सरकार कीतुलना “फुलेरा की पंचायत” से कर दी। पेट्रोल पंपों पर जब्ती से होगा टकराव: आपसौरभ भारद्वाज ने पुराने वाहनों को पेट्रोल पंपों पर जब्त करने के फैसले को अव्यवहारिक और संघर्ष पैदा करने वाला करार दिया। उन्होंने चेताया किइससे कर्मचारियों और वाहन मालिकों के बीच भिड़ंत की स्थिति पैदा हो सकती है। उनका कहना था कि पेट्रोल पंपों पर लड़ाई-झगड़ा कराना सरकारचलाने का तरीका नहीं है और पेट्रोल पंप एसोसिएशन भी इस फैसले को व्यवहारिक नहीं मान रही है।मानसून में कृत्रिम वर्षा? सरकार के फैसले पर सवालबारिश के मौसम के बावजूद सरकार द्वारा कृत्रिम वर्षा का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी आपत्ति जताते हुए भारद्वाज ने पूछा कि जब दिल्ली मेंपहले से ही वर्षा हो रही है, तब कृत्रिम बारिश की क्या जरूरत है। उन्होंने इस निर्णय को “बिना सोच-विचार के लिया गया निर्णय” बताया और कहाकि “फुलेरा की पंचायत” भी इससे बेहतर फैसले ले सकती है। केजरीवाल सरकार ने कभी बहाने नहीं बनाएसौरभ भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा बीजेपी सरकार का काम बहाने बनाना और आम आदमी पार्टी को दोष देना भर है। उन्होंने कहा कि अरविंदकेजरीवाल ने कभी पिछली सरकारों पर ठीकरा नहीं फोड़ा बल्कि हर परिस्थिति में जनादेश का सम्मान करते हुए काम किया। उनके अनुसार, आने वालेपांच साल तक रेखा गुप्ता की सरकार सिर्फ “आप” को कोसती रहेगी। ओडिशा में IAS अधिकारी से मारपीट पर भाजपा और अफसरशाही पर सवालओडिशा के भुवनेश्वर में भाजपा पार्षदों द्वारा एक IAS अधिकारी के साथ की गई मारपीट पर भारद्वाज ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब दिल्लीमें एक अफसर के साथ कथित मारपीट हुई थी, तब देशभर में हंगामा मच गया था, लेकिन अब चुप्पी क्यों है? उन्होंने पूछा कि क्या IAS और IPS एसोसिएशन सिर्फ बीजेपी के इशारे पर ही प्रतिक्रिया देते हैं? आईएएस, आईपीएस संगठन क्या बीजेपी से संचालित होते है?सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि जब भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने एक आईपीएस अधिकारी का गिरेबान पकड़ लिया था, तब भी कोई कार्रवाईया विरोध नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही से जुड़े संगठन भाजपा के राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं। मीडिया की चुप्पी पर तंजउड़ीसा की घटना पर सौरभ भारद्वाज ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि बीजेपी शासित भुवनेश्वर नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के साथ जो हुआ, उस पर न तो मीडिया में कोई चर्चा हो रही है और न ही IAS एसोसिएशन कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है। उन्होंने कहा, “अब किसी का खून क्यों नहींखौल रहा?”