छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी, बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमा क्षेत्र गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कार्रवाई में चार हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया है। गढ़चिरौली में मुठभेड़, हथियार और सामान बरामदमुठभेड़ कवांडे और नेलगुंडा इलाके में हुई, जहां नक्सलियों ने जवानों पर अचानक गोलियां बरसाईं। जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए करीब दो घंटेतक चलने वाली गोलीबारी में चार नक्सलियों को ढेर कर दिया। इस दौरान जवानों ने चारों के शव के साथ एक सेल्फ लोडिंग राइफल, एक 303 राइफल, भरमार बंदूक, वॉकी-टॉकी और नक्सली साहित्य भी जब्त किया है। सर्च ऑपरेशन जारीयह ऑपरेशन डीआईजी अंकित गोयल द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद भी जारी है। इलाके में जवानों द्वारा व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा हैताकि अन्य नक्सलियों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके और क्षेत्र को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने POCSO दोषी को दी राहत, अनुच्छेद 142 का किया प्रयोग

देश की शीर्ष अदालत ने POCSO एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए एक युवक को उसकी सजा से राहत दी है। यह फैसला तब आया जब यह पायागया कि पीड़िता, जो अब वयस्क है, दोषी से विवाह कर चुकी है और उनके एक संतान भी है। ‘यह मामला आंखें खोलने वाला है’ – सुप्रीम कोर्टजस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फैसलासुनाया कि दोषी को अब किसी सजा का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि यह मामला हमारी विधिक प्रणाली की कमियों को उजागर करताहै और पीड़िता को समाज, कानून और अपने परिवार की विफलताओं का सामना करना पड़ा। कोर्ट की टिप्पणी: ‘समाज, कानून और परिवार – तीनों ने विफल किया’अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता को उस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ा, जिसे वह स्वयं अपराध नहीं मानती थी। कोर्ट के अनुसार, पीड़िता को सूचित विकल्प नहीं मिल पाया क्योंकि परिवार और समाज ने उसे छोड़ दिया। अब वह अपने पति और बच्चे के साथ भावनात्मक रूप सेजुड़ चुकी है और एक छोटे परिवार के रूप में जीवन व्यतीत कर रही है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट बनी फैसले का आधारसुप्रीम कोर्ट ने पहले पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि वह मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री और बाल कल्याण अधिकारी की एक समितिगठित करे, जो पीड़िता के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे मेंन्यायालय को सौंपी गई, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया। कानूनी दृष्टिकोण: दोषसिद्धि कायम, लेकिन सजा से छूट20 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए आरोपी की दोषसिद्धि को POCSO की धारा 6 और IPC की धारा376(3) और 376(2)(n) के अंतर्गत बहाल कर दिया, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सजा नहीं देने का फैसला लिया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोटिस, राज्यों को दिशानिर्देशकोर्ट ने अपने निर्णय में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी निर्देशित किया है कि वह अमिकस क्यूरी द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विचार करे। साथही, सभी राज्यों को POCSO एक्ट और JJ एक्ट की धाराओं के सख्त अनुपालन के लिए निर्देश भेजे गए हैं। पीड़िता के पुनर्वास हेतु निर्देश24 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता के बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए। 3 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कहा किपीड़िता को व्यावसायिक प्रशिक्षण या अंशकालिक रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।
डिफेंस एयरपोर्ट्स पर टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान फ्लाइट विंडो शेड्स बंद रखने के निर्देश, DGCA का नया आदेश

देश के प्रमुख डिफेंस एयरपोर्ट्स जैसे लेह, श्रीनगर, चंडीगढ़, पुणे, जामनगर और बागडोगरा से उड़ान भरने और लैंड करने वाले विमानों के लिए नागरिकउड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। इस निर्देश के तहत इन हवाई अड्डों पर टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान यात्रियोंको सीट विंडोज के शेड्स बंद रखने होंगे, सिवाय आपातकालीन खिड़कियों के। यह कदम रक्षा मंत्रालय की सिफारिश पर उठाया गया है और इसकाउद्देश्य सुरक्षा को मजबूत करना है। टेक ऑफ के दौरान 10,000 फीट तक और लैंडिंग के बाद पार्किंग तक शेड्स रहेंगे बंदनए नियमों के अनुसार, टेक ऑफ के समय जब तक विमान 10,000 फीट की ऊंचाई तक नहीं पहुंच जाता और लैंडिंग के बाद जब तक विमानसिविल टर्मिनल पर पार्क नहीं हो जाता, तब तक सभी खिड़की के पर्दे बंद रखने होंगे। DGCA ने स्पष्ट किया है कि इसका उल्लंघन करने पर यात्रियोंके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक, SOP तैयार करने के निर्देश20 मई को जारी इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि रक्षा ठिकानों पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है। एयरलाइंस कंपनियोंको यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्रू के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर आधारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करें ताकि सुरक्षा संबंधीजोखिमों को कम किया जा सके। पायलटों ने जताई चिंता, DGCA ने दी सफाईकुछ पायलटों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान विंडो शेड्स खुले रखना जरूरी होता है क्योंकि इससे बाहर कीस्थिति को देखा जा सकता है और किसी संभावित खतरे को तुरंत पहचाना जा सकता है, जैसे पक्षी के टकराने या इंजन में आग लगने जैसी घटनाएं।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आपातकालीन खिड़कियों को खुला रखने की अनुमति इन्हीं परिस्थितियों कोध्यान में रखकर दी गई है। जल्द की जाएगी आदेश की समीक्षाDGCA ने कहा है कि यह आदेश फिलहाल लागू रहेगा और एक सप्ताह के भीतर इसकी समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के बाद अगर आवश्यक हुआतो संशोधन भी किया जा सकता है।
NEET छात्र सुसाइड केस, सुप्रीम कोर्ट ने कोटा पुलिस और राजस्थान सरकार को लगाई फटकार

राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) के एक छात्र की आत्महत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने इस गंभीर घटनाको लेकर राजस्थान सरकार और कोटा पुलिस पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने पूछा, “राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर क्या कदम उठा रही है? सिर्फ कोटा में ही छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं क्यों हो रही हैं?” FIR दर्ज न होने पर जताई नाराज़गीसुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस विशेष मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। अदालत ने कहा कि यह उसके पूर्व के आदेशों की अवमाननाहै। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर छात्र की आत्महत्या होती है, तो पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। इस मामले में लापरवाही पर कोटाके एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को 14 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार से पूछा गया सवालपीठ ने राजस्थान सरकार से पूछा, “क्या आपने एक राज्य के रूप में इन घटनाओं पर गंभीर विचार किया है? इस मामले की जांच के लिए बनाई गईएसआईटी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?” अदालत ने चिंता जताई कि छात्रों की लगातार हो रही आत्महत्याएं एक गंभीर सामाजिक समस्या बनतीजा रही हैं। IIT छात्र की मौत का मामला भी आया सामनेसुप्रीम कोर्ट ने इसी दौरान आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र की आत्महत्या के मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई चार दिन की देरी पर भी सवालखड़े किए। अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पहले दिए फैसले का हवालाअदालत ने इस वर्ष की शुरुआत में दिए गए उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि छात्र की आत्महत्या के मामले में एफआईआर तुरंतदर्ज की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह इस विषय पर सख्त रुख अपना सकता है, लेकिन फिलहाल अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से बचरहा है।
भारत का कड़ा रुख, पाकिस्तान को दोबारा FATF ग्रे लिस्ट में डालने की कोशिश

भारत आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार फाइनेंशियल एक्शनटास्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को पुनः ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग कर रही है। यह प्रयास उस आरोप के तहत हो रहा है कि पाकिस्तानआतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में असफल रहा है। 2018 में ग्रे लिस्ट और 2022 में बाहरपाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था क्योंकि उस पर आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर काबू पाने में नाकामी काआरोप था। इसके चलते उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2022 में उसने FATF की 34-सूत्रीय कार्य योजना कोपूरा करने के बाद यह सूची छोड़ दी, जिससे IMF, विश्व बैंक और अन्य संस्थानों से आर्थिक सहायता प्राप्त करना आसान हो गया। भारत के आरोप और रणनीतिनई दिल्ली का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में हो रहा है। भारत ने FATF में पाकिस्तानको दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने के लिए मजबूत अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही, भारत विश्व बैंक से पाकिस्तान को दी जाने वाली संभावित सहायताका भी विरोध कर रहा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाया है और अन्य सदस्य देशों का समर्थन जुटानेके लिए सबूत एकत्र कर रहा है। ग्रे लिस्ट में वापसी के संभावित प्रभावअगर पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। इससे विदेशी निवेश में गिरावट आसकती है और कर्ज प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक जर्जर हो सकती है। IMF की नई शर्तें और भारत का दबाववर्तमान में पाकिस्तान IMF से राहत पैकेज की अगली किस्त पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसके लिए उसे 11 नई कड़ी शर्तों का सामना करनापड़ रहा है। इनमें 17,600 अरब रुपये का नया बजट पास कराना, बिजली बिलों पर अधिभार बढ़ाना और तीन साल से पुरानी कारों के आयात परप्रतिबंध हटाना शामिल हैं। IMF ने यह भी चेताया है कि भारत के साथ तनाव से पाकिस्तान की आर्थिक योजनाओं पर खतरा बढ़ सकता है।
राहुल गांधी का ऑपरेशन सिंदूर पर हमला, भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी के तीखे सवालकांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाया, “विदेश मंत्री बताएं कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्यों जोड़ा गया? कोई भी देश पाकिस्तान की आलोचना मेंहमारे साथ क्यों नहीं आया? डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाक के बीच मध्यस्थता का सुझाव किसने दिया?” राहुल ने कहा कि सरकार की विदेश नीति पूरीतरह विफल हो चुकी है। जयशंकर की सफाई15 मई को दिल्ली में होंडुरास के दूतावास के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया था कि भारत ने ‘ऑपरेशनसिंदूर’ के दौरान केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “हमने अपने लक्ष्यों को हासिल कर लिया था और पाकिस्तान को स्पष्टसंदेश दिया कि हमला आतंकी ढांचे पर है, सेना पर नहीं। सेना चाहती तो हस्तक्षेप कर सकती थी, लेकिन हमने उन्हें विकल्प दिया कि वे तटस्थ रहें।” विदेश मंत्रालय का खंडनराहुल गांधी के आरोपों को विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि राहुल का बयान तथ्यों की गलत व्याख्या है। मंत्रालय केअनुसार, पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के बाद, आरंभिक चरण में चेतावनी दी गई थी, न कि पहले से। भाजपा का तीखा पलटवारभाजपा ने राहुल गांधी पर सशस्त्र बलों के मनोबल को गिराने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कीटिप्पणियां राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को तय करना होगा कि वे भारत के विपक्ष के नेता हैं या पाकिस्तान के एजेंडेके प्रवक्ता। उन्हें सेना की वीरता को कम आंकना बंद करना चाहिए और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से बचना चाहिए।” ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ की उपमागौरव भाटिया ने राहुल गांधी को ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ कहकर तंज कसा और आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों का इस्तेमाल पाकिस्तानअंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम करने में कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल बचकाना व्यवहार नहीं बल्कि देशविरोधी प्रवृत्ति है, जोशत्रुतापूर्ण देशों के हितों को बढ़ावा देती है।