अर्नब गोस्वामी और अमित मालवीय पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप, बेंगलुरु में दर्ज हुई FIR

बेंगलुरु पुलिस ने भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कीहै। यह एफआईआर इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) की लीगल सेल के प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बीएन की शिकायत पर हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में दर्जकी गई। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और 352 (जानबूझकर अपमान के जरिए शांति भंग करनेका प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है। तुर्किये की इमारत को कांग्रेस कार्यालय बताकर फैलाई गई भ्रामक खबर: आरोपशिकायतकर्ता का आरोप है कि मालवीय और गोस्वामी ने मिलकर एक झूठा और आपराधिक प्रचार अभियान चलाया, जिसमें उन्होंने तुर्किये केइस्तांबुल कांग्रेस सेंटर को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दफ्तर बताया। इस गलत जानकारी को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलाकर कांग्रेसकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। जनता को भ्रमित करने और अस्थिरता फैलाने का प्रयासश्रीकांत स्वरूप ने कहा कि इस फेक न्यूज का उद्देश्य जनता को गुमराह करना, कांग्रेस जैसी प्रमुख राजनीतिक संस्था को बदनाम करना और देश मेंसार्वजनिक अशांति को बढ़ावा देना था। उनका दावा है कि यह कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र की अखंडता पर सीधा हमला है। अर्नब गोस्वामी ने माफी मांगी, कांग्रेस ने की सख्त प्रतिक्रियाशिकायत दर्ज होते ही अर्नब गोस्वामी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश की। यह पहली बार नहीं है जब वहकिसी विवाद में फंसने के बाद माफी मांग चुके हैं। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि यह केवल एकनैतिक गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक योजना है। कांग्रेस ने की सख्त कार्रवाई की मांगकांग्रेस ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों से अपील की है कि इस मामले को गंभीरतासे लिया जाए। पार्टी का कहना है कि दोनों आरोपियों ने अपने प्रभावशाली पदों का दुरुपयोग करते हुए राष्ट्रहित, सार्वजनिक सुरक्षा और सत्य केखिलाफ काम किया है।
नेशनल हेराल्ड मामला: ईडी का दावा , गांधी परिवार ने अपराध से कमाए 142 करोड़ रुपये

ईडी ने सोनिया और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाएनेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत को बतायाकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कथित तौर पर अवैध रूप से 142 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की और उस धन का उपयोग किया। ईडी काकहना है कि गांधी परिवार ने अपराध से प्राप्त रकम को अपने पास रखा और उसे वैध बनाने का प्रयास किया, जो मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा में आताहै। यंग इंडिया के लाभकारी स्वामी गांधी परिवारईडी ने यह भी बताया कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का वास्तविक नियंत्रण और लाभकारी स्वामित्व सोनिया और राहुल गांधी के पास हीरहा। नवंबर 2023 में एजेंसी ने नेशनल हेराल्ड की लगभग 751.9 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किया था, जिसे कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग केजरिये अर्जित किया गया बताया गया। नेशनल हेराल्ड की पृष्ठभूमिनेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 20 नवंबर 1937 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसे एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड(AJL) के तहत चलाया गया, जिसमें अंग्रेज़ी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज जैसे समाचार पत्र प्रकाशित होते थे।हालांकि, AJL के मालिकाना हक पर नेहरू का कोई व्यक्तिगत नियंत्रण नहीं था, क्योंकि इसकी भागीदारी स्वतंत्रता सेनानियों के माध्यम से हुई थी, जो इसके शेयरधारक थे। AJL का आर्थिक संकट और प्रॉपर्टी बिजनेस में प्रवेश1990 के दशक में AJL को भारी घाटा होने लगा और वर्ष 2008 तक उस पर 90 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया। इसके बाद समाचार पत्रोंका प्रकाशन बंद कर दिया गया और AJL ने प्रॉपर्टी डेवलपमेंट की दिशा में कदम बढ़ाया। सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुई जांच2012 में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, पत्रकार सुमनदुबे और सैम पित्रोदा के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज कराया। उनका आरोप था कि यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) ने AJL की संपत्तियों परअनुचित तरीके से कब्जा कर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति हासिल की। 50 लाख में 90.25 करोड़ के कर्ज का अधिग्रहणस्वामी ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी ने AJL को जो 90.25 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था, YIL ने उस कर्ज की वसूली का अधिकार मात्र 50 लाखरुपये में हासिल कर लिया। उनका आरोप है कि यह राशि पार्टी के फंड से दी गई थी, जिससे यह कर्ज अवैध ठहरता है।
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को लेकर केंद्र का पक्ष,तुषार मेहता ने कहा –वक्फ इस्लामिक अवधारणा है, लेकिन अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं

21 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ के सामने दलील दी कि वक्फइस्लाम की अवधारणा जरूर है, लेकिन इसे अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता। चैरिटी सभी धर्मों में, लेकिन अनिवार्य नहींतुषार मेहता ने कहा कि दान या चैरिटी का विचार हर धर्म में पाया जाता है—चाहे वह ईसाई धर्म हो, हिंदू धर्म या सिख धर्म। लेकिन सुप्रीम कोर्ट कीपूर्वव्याख्याओं के अनुसार, यह किसी भी धर्म के लिए बाध्यकारी नहीं है। इसी प्रकार, वक्फ भी इस्लाम का हिस्सा होते हुए भी अनिवार्य धार्मिक प्रथानहीं माना जा सकता। क्या वक्फ न करने वाला मुसलमान नहीं होता?एसजी मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी मुसलमान की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वह वक्फ नहीं कर सकता, तो क्या उसे मुसलमान नहींमाना जाएगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का यह मानक तय करने का तरीका है कि कोई परंपरा आवश्यक धार्मिक प्रथा है या नहीं। वक्फ कानून से जुड़े अधिकार मौलिक नहींकेंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वक्फ से संबंधित अधिकार मौलिक अधिकार नहीं हैं। यह अधिकार कानून के तहत 1954 में मान्यताप्राप्त हुए थे और उससे पहले बंगाल एक्ट में भी वक्फ का प्रावधान था। तुषार मेहता ने कहा कि यदि कोई अधिकार केवल कानून द्वारा दिया गया है, तो राज्य उसे वापस लेने का भी अधिकार रखता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने रखी थी दलीलेंइससे एक दिन पहले, 20 मई को याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने दलील दीथी कि नया वक्फ कानून संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।