ASAP छात्र संगठन का शुभारंभ: वैकल्पिक राजनीति को मिलेगा नया मंच

आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP (Aam Aadmi Party Student Action Platform) का भव्य शुभारंभ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिएकिया गया। इस मौके पर ASAP के नेताओं ने संगठन की सोच और आगामी योजनाओं को साझा किया। यश फोगट ने कहा कि ASAP एक वैकल्पिक राजनीति की बात करता है, जहां आम छात्रों को छात्र राजनीति में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।संगठन का उद्देश्य ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना है जिसमें बाहुबल की आवश्यकता न हो और छात्र अपनी समस्याओं को मजबूती से उठा सकें। दीपक बंसल ने बताया कि ASAP की शुरुआत इसलिए की गई क्योंकि आज के छात्र अलग-अलग संगठनों में बंट कर भटक रहे हैं। आने वाले समयमें ASAP दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) का चुनाव भी पूरी मजबूती से लड़ेगा। उन्होंने बताया कि DU के 52 कॉलेजों में ASAP कीइकाइयां बन चुकी हैं, जिनकी घोषणा जल्द की जाएगी। संगठन ने घोषणा की कि वह जल्द ही एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा ताकि अधिक से अधिक छात्र संगठन से जुड़ सकें। जहां चुनाव नहीं होते, वहांASAP सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के ज़रिए छात्रों को सक्रिय करेगा। ASAP की अगली योजना दिल्ली के सभी जिलों में कक्षा 12वीं के टॉपर्स को सम्मानित करने की है। इसके साथ ही जामिया मिलिया इस्लामिया मेंभी संगठन अपनी इकाई गठित करेगा। अंत में ASAP नेताओं ने देशभर के छात्र नेताओं से आह्वान किया कि वे इस नए मंच से जुड़ें और शिक्षा तथा राजनीति में सकारात्मक बदलाव लानेका कार्य करें।
भारतीय कार्रवाई के बाद भी जश्न में डूबा पाकिस्तान, असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया

ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना के हाथों भारी नुकसान उठाने के बावजूद पाकिस्तान अपनी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल कीउपाधि देकर जश्न मना रहा है। इस फैसले को पाक सरकार द्वारा सेना का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मिली पदोन्नतिप्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनरल मुनीर को फील्ड मार्शल बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ। पाकिस्तान केइतिहास में वे अयूब खान के बाद दूसरे अधिकारी हैं जिन्हें यह सर्वोच्च सैन्य रैंक दी गई है। फील्ड मार्शल: एक मानद और प्रतिष्ठित पदपाकिस्तानी सेना में फील्ड मार्शल का पद एक पांच सितारा रैंक होता है जो थल सेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुखों से भी ऊपर माना जाता है।हालांकि यह एक मानद पद है, जिसका कार्यक्षेत्र या वेतन में कोई बदलाव नहीं होता। यह रैंक उन्हीं अफसरों को मिलती है जिन्होंने युद्ध में असाधारणनेतृत्व दिखाया हो। वायुसेना प्रमुख का कार्यकाल भी बढ़ाया गयापाक सरकार ने वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू का कार्यकाल भी बढ़ा दिया है। भारतीय हमलों में पाकिस्तान की वायुसेनाको भारी क्षति उठानी पड़ी थी, खासकर उन 11 एयरबेस पर जहां भारत ने सटीक हमले किए। इसके बावजूद सेवा विस्तार ने कई सवाल खड़े किए हैं। पूर्व ISI प्रमुख रह चुके हैं मुनीरजनरल मुनीर 2018 में ISI प्रमुख बने थे लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान से मतभेद के चलते 2019 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया।इमरान की पत्नी बुशरा बीबी पर कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर दोनों के बीच तनातनी हुई थी। राजनीतिक संदेश या सेना का सम्मान?विश्लेषकों का मानना है कि यह पदोन्नति एक तरह से जनता का ध्यान वास्तविक हालातों से भटकाने की कोशिश है। पाकिस्तान सरकार अपनेहालिया सैन्य नुकसान को ‘विजय’ के रूप में दिखाकर सेना की छवि सुधारने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस का आरोप,सरकार पत्रकारों को निशाना बना रही है, आतंकियों को नहीं

कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पत्रकारों को डराने की सोजिश है। पार्टी नेताजिग्नेश मेवानी ने कहा कि ‘गुजरात समाचार’ के सह-मालिक बाहुबली शाह को ईडी ने 16 मई को गिरफ्तार किया, जबकि असल सवाल यह है किसरकार अब तक पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों को क्यों नहीं पकड़ पाई। पहलगाम हमले पर सरकार मौन क्यों?मेवानी ने कहा, “पूरा देश जानना चाहता है कि पहलगाम में हमला करने वाले आतंकवादी कहां गए? क्या वे पाकिस्तान लौट गए या भारत में ही छिपेहैं?” उन्होंने पूछा कि सरकार के पास इस सवाल का जवाब क्यों नहीं है और क्या यह उसकी प्राथमिकता नहीं है। पत्रकारों को चुप कराने की कोशिशकांग्रेस सेवा दल के प्रमुख लालजी देसाई ने कहा कि भाजपा सरकार जो पहले आतंकवादियों को पकड़ने की बात करती थी, अब वही पत्रकारों कोनिशाना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में 365 दिन धारा 144 लागू रहती है ताकि कोई जनआंदोलन न हो सके। पत्रकारों पर कार्रवाई, आतंकी आज़ाद क्यों?मेवानी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की प्राथमिकता आतंकियों को पकड़ना है या उन पत्रकारों पर कार्रवाई करना जो सत्ता से सवाल पूछते हैं।उन्होंने कहा कि शाह को निशाना बनाकर यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि अगर कोई सरकार से सवाल करेगा, तो उसे दबा दिया जाएगा। स्वास्थ्य आधार पर मिली जमानतईडी की छापेमारी के बाद शाह को अहमदाबाद की सत्र अदालत ने स्वास्थ्य कारणों से 15 दिन की अंतरिम जमानत दे दी थी। इसके बावजूद, कांग्रेसका कहना है कि यह कार्रवाई मीडिया को डराने के लिए की गई है।
यूजर्स सरचार्ज पर मचा घमासान, दिल्ली महापौर ने वसूली की प्रक्रिया की स्थगित, हाउस टैक्स सेटलमेंट योजना का ऐलान

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा की उपस्थिति में आज दिल्ली के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने दिल्ली के विभिन्न नागरिक संगठनों सेआम आदमी पार्टी के शासन काल में प्रस्तुत एवं पारित दिल्ली नगर निगम के बजट 2025-26 में दिल्ली वालों पर कूड़ा निस्तारण को लेकर लागूकिए गए “यूजर्स सरचार्ज” पर चर्चा की। यूजर्स सरचार्ज पर विवादवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने बिना चर्चा लगाए इस सरचार्ज को लागू किया, जो इसके विरोध की सबसे बड़ी वजह है। सचदेवा नेमहापौर से निवेदन किया कि यूजर्स सरचार्ज वसूली को आज से ही स्थगित करें और इस पर दिल्ली के नागरिक एवं व्यापारिक संगठनों से बात करकेनिर्णय हो। महापौर का फैसलामहापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने वीरेन्द्र सचदेवा के निवेदन पर यूजर्स सरचार्ज की वसूली फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की। महापौर ने कहाकि आज की RWA की मीटिंग और प्रदेश अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा की सलाह पर इस वर्ष 2025-26 में अब कोई अतिरिक्त “यूजर्स चार्ज” नहींलिया जाएगा। सेटलमेंट योजना की घोषणामहापौर ने हाउस टैक्स ऐम्नेस्टिक स्कीम की भी घोषणा की, जिसमें सिर्फ पिछले 5 सालों के बिल जमा करने हैं और कोई ब्याज अथवा जुर्माना नहींदेना होगा। यह जमा कर करदाता को एनओसी मिलेगा। आगे की कार्रवाईमहापौर ने कहा कि आर.डब्लू.ए. ने आज जो सलाह सुझाव दिए हैं वह भी हमने नोट कर लिए हैं और हम शीघ्र नगर निगम में क्षेत्रीय स्तर पर बैठकेंबुलाएंगे। कल दिल्ली नगर निगम बैठक में इसके लिए एक प्राइवेट मेंबर प्रस्ताव लेकर आएंगे ताकि अब आगे से कोई चार्ज नहीं लगे।
अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई को ‘ASAP’ नाम से किया री-लॉन्च, बोले – युवा राजनीति की बदलेगी परिभाषा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने छात्र संगठन को एक नए नाम और दृष्टिकोण के साथ री-लॉन्च किया है। मंगलवार को दिल्ली स्थित कांस्टिट्यूशनक्लब में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (ASAP) का उद्घाटन किया। ASAP: वैकल्पिक राजनीति की नई राहकेजरीवाल ने कहा कि ASAP छात्र राजनीति में बदलाव लाने वाला एक मंच बनेगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस पहल के ज़रिए देश केलिए सकारात्मक राजनीति का हिस्सा बनें। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि युवा केवल राजनीति को देखें नहीं, बल्कि उसमें भाग लेंऔर उसे नया रूप दें। मुख्यधारा की राजनीति को बताया समस्याओं की जड़केजरीवाल ने दावा किया कि भारत की मौजूदा समस्याओं की जड़ पिछले 75 वर्षों से चल रही मुख्यधारा की राजनीति (Mainstream Politics) है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राजनीति ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को बर्बाद किया है। वैकल्पिक राजनीति का उदाहरण: AAP का मॉडलउन्होंने दिल्ली और पंजाब में AAP सरकार के कार्यों को वैकल्पिक राजनीति का उदाहरण बताया। केजरीवाल ने कहा कि AAP की राजनीति सरकारीस्कूलों को सुधारने, शिक्षा माफिया पर लगाम लगाने और 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने पर केंद्रित रही है। शिक्षा क्षेत्र में बदलाव बनाम शिक्षा माफियाकेजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा की दिल्ली सरकार के आने के बाद शिक्षा माफिया फिर से सक्रिय हो गया है। फीस न भर पाने पर छात्रों कोस्कूल से बाहर किया जा रहा है और निजी स्कूलों ने बाउंसर तक लगा दिए हैं। वहीं, AAP सरकार ने 10 साल तक फीस वृद्धि रोकी और शिक्षा कोहर वर्ग के लिए सुलभ बनाया। बिजली संकट और राजनीति का संबंधउन्होंने कहा कि AAP के शासनकाल में दिल्ली में 24 घंटे बिजली उपलब्ध थी, लेकिन वर्तमान में बार-बार पावर कट हो रहे हैं। उन्होंने इसे मुख्यधाराकी राजनीति का नतीजा बताया। युवाओं को भटकाने का आरोपकेजरीवाल ने कटाक्ष किया कि जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रही है, तब भारत में युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाया जा रहाहै। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहे हैं, जबकि आम लोगों के बच्चों को नफरत की राजनीति में झोंका जा रहा है। भ्रष्टाचार बनाम पारदर्शिताउन्होंने केंद्र सरकार और विपक्षी पार्टियों पर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।इसके उलट, AAP की सरकार को उन्होंने ईमानदारी और जनकल्याण के लिए समर्पित बताया।
वक्फ संशोधन अधिनियम, सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई,न्यायपालिका की भूमिका पर मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने एकमहत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा पारित कानूनों को तब तक संवैधानिक माना जाता है जब तक उनमें कोई स्पष्ट और गंभीरसंवैधानिक त्रुटि न हो। केंद्र सरकार की दलील और वरिष्ठ वकीलों का विरोधसरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि वक्फ अधिनियम की वैधता पर विचार करते समय सुनवाई को कुछ विशिष्ट बिंदुओं तक सीमित रखा जाए।हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि किसी महत्वपूर्ण कानून की समीक्षाको कुछ हिस्सों तक सीमित नहीं किया जा सकता। कानून के उद्देश्य पर सवालकपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से लाया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संसदद्वारा पारित कानूनों में संवैधानिकता की संभावना होती है और न्यायपालिका को बिना ठोस आधार के हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। धार्मिक स्थलों और चढ़ावे पर चर्चाबातचीत के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने विभिन्न धार्मिक स्थलों में चढ़ावे की तुलना की। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक स्थलों में चढ़ावा आता है, लेकिन सिब्बल ने स्पष्ट किया कि मस्जिदों में चढ़ावे की परंपरा अलग होती है। पंजीकरण और एएसआई संरक्षित संपत्तियों पर बहसमुख्य न्यायाधीश ने पुराने कानूनों में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की अनिवार्यता के बारे में पूछा। सिब्बल ने बताया कि 1954 के बाद के संशोधनोंमें पंजीकरण अनिवार्य किया गया था। इसके अलावा, एएसआई संरक्षित संपत्तियों के बारे में चर्चा हुई कि क्या वे वक्फ मानी जाएंगी या नहीं। धार्मिक अधिकारों पर प्रभावअदालत ने यह भी विचार किया कि क्या यह कानून व्यक्ति के धार्मिक पालन के अधिकार को प्रभावित करता है। सिब्बल ने तर्क दिया कि यदि कोईसंपत्ति वक्फ से बाहर हो जाती है, तो वह धार्मिक स्थान नहीं मानी जाएगी, जो धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।