પત્રકાર સામે ખોટા કેસ થશે તો DGની જવાબદારી: SC

દેશની સર્વોચ્ચ અદાલત સ્પષ્ટ કર્યું છે કે મોટા ભાગના કેસોમાં પત્રકારો સામેના કેસો ખોટી ફરિયાદો પર આધારિત હોય છે, જો કોઈપત્રકાર વિરુદ્ધ ખોટી ફરિયાદના આધારે ખોટો કેસ દાખલ કરવામાં આવશે તો તેના માટે રાજ્યોના DGP જવાબદાર રહેશે., જેના માટેસુપ્રીમ કોર્ટે તમામ સ્પષ્ટ નિર્દેશો રાજ્યોના પોલીસ મહાનિર્દેશકને આપવામાં આવ્યા છે. નોંધનીય છે કે ફેડરેશન ફોર કોમ્યુનિટી ઓફડિજિટલ ન્યૂઝ, ડિજિટલ મીડિયાના સ્વ-નિયમનકારી બોર્ડે સમગ્ર દેશમાં કોરોના સમયગાળા દરમિયાન નોંધાયેલા કેસોની ગંભીર નોંધલીધી છે. આ સંદર્ભમાં,ડિજિટલ મીડિયાના સ્વ-નિયમનકારી બોર્ડ, ફેડરેશન ફોર કમ્યુનિટી ઑફ ડિજિટલ ન્યૂઝએ પણ ગૃહ પ્રધાન અમિત શાહનેપત્ર લખીને તેને સમાજના ચોથા સ્તંભની નિષ્પક્ષતા પર હુમલો ગણાવ્યો છે. સુપ્રીમ કોર્ટમાં આ મામલે સુનાવણી દરમિયાન સુપ્રીમ કોર્ટનાવરિષ્ઠ વકીલ એપી સિંહે પત્રકારોની તરફેણમાં કોર્ટને આ અંગે સંજ્ઞાન લેવાની વિનંતી કરી હતી, જેના પર સુપ્રીમ કોર્ટે પોલીસમહાનિર્દેશકને આ સ્પષ્ટ સૂચના આપી હતી.
NCC અભિયાન ટીમ, જેમાં સરેરાશ 19 વર્ષની ઉંમર ધરાવતા સૌથી નાના પર્વતારોહકો નો સમાવેશ થાય છે, તેમણે માઉન્ટ એવરેસ્ટ સફળતા પૂર્વક સર કર્યું

નેશનલ કેડેટ કોર્પ્સ (NCC) એ 18 મે, 2025 ના રોજ માઉન્ટ એવરેસ્ટ (8,848 મીટર) સફળતાપૂર્વક સર કરીને એક મહત્વપૂર્ણસીમાચિહ્ન હાંસલ કર્યું છે. ટીમમાં 10 NCC કેડેટ (પાંચ છોકરાઓ અને પાંચ છોકરીઓ) ઉપરાંત ચાર અધિકારીઓ, બે જુનિયર કમિશન્ડઓફિસર, એક છોકરી કેડેટ ઇન્સ્ટ્રક્ટર અને 10 નોન-કમિશન્ડ ઓફિસરનો સમાવેશ થતો હતો. પસંદ કરાયેલા કેડેટ્સ દેશભરમાંથી શિખાઉ હતા. તેઓએ કડક પસંદગી અને તાલીમ પ્રક્રિયામાંથી પસાર થયા. તેમની તૈયારીના ભાગરૂપે, તેઓએ માઉન્ટ અબી ગામિન ખાતે એવરેસ્ટ પહેલાનો અભિયાન ચલાવ્યો. ત્યારબાદ 15 કેડેટ્સની અંતિમ ટીમને સિયાચીન બેઝકેમ્પ સ્થિત આર્મી માઉન્ટેનિયરિંગ ઇન્સ્ટિટ્યૂટ ખાતે શિયાળુ અને ટેકનિકલ તાલીમ લેવા માટે પસંદ કરવામાં આવી. મહિનાઓની તાલીમપછી, માઉન્ટ એવરેસ્ટ અભિયાન માટે દસ કેડેટ્સની પસંદગી કરવામાં આવી. 19 વર્ષની સરેરાશ ઉંમર ધરાવતા સૌથી નાના પર્વતારોહકોની ટીમ આકર્ષણનું કેન્દ્ર બની અને ચઢાણના વિવિધ તબક્કામાં વાતાવરણનેઅનુકૂલન તાલીમ દરમિયાન તેમની ફિટનેસ અને શિસ્ત માટે જાણીતી બની. નેપાળના શેરપાઓએ NCC ટીમની તેમની શારીરિક તૈયારીઅને મનોબળ માટે પ્રશંસા કરી.
ત્રાલમાં સેના એ કર્યો આતંકવાદીઓનો અંત

છેલ્લા 48 કલાકમાં ત્રણ આતંકવાદીઓ માર્યા ગયા, 6 ઠાર માર્યા. સુરક્ષા દળોએ જૈશ-એ-મોહમ્મદના ત્રણ ખૂંખાર આતંકવાદીઓને ઠાર માર્યા છે. ત્રણેય આતંકવાદીઓની ઓળખ આસિફ અહેમદ શેખ, અમીર નઝીર વાની અને યાવર અહેમદ ભટ તરીકે થઈ છે. બધા જમ્મુ-કાશ્મીરના પુલવામા જિલ્લાના રહેવાસી છે. ૪૮ કલાકમાં આ બીજું એન્કાઉન્ટર છે અને સુરક્ષા દળોની આ મોટી કાર્યવાહીમાં, માત્ર ૪૮ કલાકમાં ૬ સ્થાનિક આતંકવાદીઓને ઠારમારવામાં આવ્યા છે.
हैदराबाद में भीषण अग्निकांड, गुलजार हाउस में लगी आग से 17 की मौत

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। चारमीनार के पास स्थित ऐतिहासिक गुलजार हाउस क्षेत्र में रविवार सुबह एकइमारत में आग लगने से कम से कम 17 लोगों की जान चली गई। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलसगए हैं। शहर के इतिहास का सबसे बड़ा अग्निकांडयह हादसा हैदराबाद के अब तक के सबसे बड़े अग्निकांडों में गिना जा रहा है। दस से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें DRDO अस्पताल, उस्मानिया जनरल अस्पताल और एक निजी चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया है। ग्राउंड फ्लोर से फैली आगदमकल विभाग के अनुसार, आग सुबह 5:30 बजे इमारत के ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई, जहां एक मोती की दुकान स्थित थी। आग इतनी तेजी से फैलीकि ऊपरी मंजिलों तक धुआं भर गया, जिससे दम घुटने के कारण अधिकांश मौतें हुईं। उस समय इमारत के निवासी सो रहे थे, जिससे बचने का समयनहीं मिल सका। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से घोषणा की गई हैकि मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारीकेंद्रीय मंत्री और तेलंगाना BJP प्रमुख जी. किशन रेड्डी ने बताया कि यह आग संभवतः शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिसदुकान में आग लगी, वह एक ही परिवार की थी, जिसका आवास दुकान के ऊपर था। उन्होंने नगर निकाय और प्रशासनिक तंत्र को सशक्त करने कीआवश्यकता पर बल दिया। दमकल विभाग ने 11 गाड़ियों से पाया काबूआग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग ने 11 फायर टेंडर और विशेष उपकरण मौके पर भेजे। इसमें ब्रोंटो स्काईलिफ्ट, बचाव टेंडर, जल टैंकर औरएक रोबोट भी शामिल था। मुगलपुरा, गौलीगुड़ा, सालारजंग म्यूजियम और अन्य स्टेशनों से ये संसाधन मंगवाए गए। राहत और बचाव कार्य अब भीजारी है। स्वास्थ्य विभाग ने बनाई विशेष मेडिकल टीमेंतेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनार सिम्हा के निर्देश पर उस्मानिया जनरल अस्पताल में विशेष चिकित्सा दल गठित किए गए हैं। इन टीमों मेंप्लास्टिक सर्जन, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और जनरल सर्जन शामिल हैं, जो 24 घंटे घायलों के इलाज के लिए उपलब्ध रहेंगे। स्वास्थ्य सचिव और वरिष्ठअधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अमित शाह ने ‘तिरंगा यात्रा’ का नेतृत्व कर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को किया सलाम

रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में आयोजित ‘तिरंगा यात्रा’ में भाग लेकर उसका नेतृत्व किया। यह यात्रा भारतीय सशस्त्र बलोंके साहस और वीरता को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जो हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आयोजितकी गई पहल का हिस्सा है। यह यात्रा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा 13 से 23 मई तक चलने वाली राष्ट्रव्यापी मुहिम का एक महत्वपूर्ण अंगहै। ऑपरेशन सिंदूर बना आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिज्ञा का प्रतीकअपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर अमित शाह ने लिखा, “देश के जांबाज सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अपनी बहादुरी सेआतंकवाद के खात्मे का प्रतीक बना दिया है।” उन्होंने गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में इस यात्रा के आयोजन को उन वीर जवानों को समर्पित बताया, जिन्होंने इस सैन्य कार्रवाई में अपनी भूमिका निभाई। यात्रा का उद्देश्य: जनता को जागरूक करना और सैनिकों का सम्मान‘तिरंगा यात्रा’ का प्रमुख उद्देश्य भारतीय सेना के पराक्रम और बलिदान को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना है। साथ ही, यह देशवासियों कोऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक और भावनात्मक महत्ता से अवगत कराने का भी माध्यम बनी। गुजरात दौरे में शिक्षा और सहकारिता पर भी रहा फोकसअमित शाह ने अहमदाबाद दौरे के दौरान मेहसाणा जिले के गोजरिया में केके पटेल और मधुबेन के पटेल नर्सिंग कॉलेज की नई बिल्डिंग का उद्घाटनकिया। इस मौके पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे विकास को देश के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। सहकारी आंदोलन पर अहम सम्मेलन को किया संबोधितइसके अलावा उन्होंने गुजरात राज्य सहकारी संघ द्वारा आयोजित सम्मेलन को भी संबोधित किया, जिसका विषय था—‘विकसित भारत के निर्माण मेंसहकारिता की भूमिका’। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र में आई मजबूती पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहकारिता अब सिर्फएक मॉडल नहीं बल्कि गरीबों, किसानों और वंचितों के लिए विकास का माध्यम बन चुकी है। ‘सहकारिता संकल्प’ पुस्तक का विमोचन और योजनाओं का उल्लेखशाह ने इस दौरान ‘सहकारिता संकल्प’ नामक पुस्तक के विमोचन की घोषणा भी की, जो सहकारिता के विभिन्न आयामों—महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण सुरक्षा, डिजिटलीकरण और आत्मनिर्भरता—पर केंद्रित है। उन्होंने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना, पैक्स (प्राथमिक कृषि साखसमितियों) को सशक्त बनाने और डेयरी सहकारी समितियों के पुनर्गठन जैसी पहलों को सहकारिता के पुनरुत्थान की दिशा में अहम कदम बताया।
भारतीय सेना का कड़ा संदेश, POK में आतंकी अड्डों पर सटीक वार

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने असाधारण साहस और रणनीतिक दक्षता का परिचयदेते हुए बड़ा सैन्य अभियान चलाया। “ऑपरेशन सिंदूर” नामक इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थितआतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। पाकिस्तानी जवाब का करारा प्रतिकारपाकिस्तान द्वारा की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई की कोशिशों को भारतीय सेना ने कठोर प्रतिशोध के साथ विफल कर दिया। रविवार को जारी किए गएवीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स और पाकिस्तानी सेना की चौकियों को बेहद सटीकहमलों में ध्वस्त कर दिया। वेस्टर्न कमांड द्वारा साझा किए गए इस फुटेज में बताया गया कि यह कार्रवाई प्रतिशोध नहीं बल्कि न्याय के सिद्धांतों परआधारित थी। सेना ने दोटूक शब्दों में कहा—“ऐसा सबक दिया गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।” राजनीतिक और कूटनीतिक सोच में बदलावकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रशंसा करते हुए इसे न केवल एक सैन्य उपलब्धि, बल्कि भारत की बदली हुई राजनीतिक औरकूटनीतिक रणनीति का प्रतीक बताया। “कश्मीर क्रॉनिकल्स” पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि जैसे फैसले उस समयपाकिस्तान को संतुष्ट करने की नीति का हिस्सा थे, लेकिन अब भारत ने अपनी सुरक्षा नीतियों में व्यापक और निर्णायक बदलाव किए हैं। प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली का असरडॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सशस्त्र बलों को समय और परिस्थिति के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करनेकी पूरी छूट दी गई है—जो पहले की सरकारों से एक बड़ा बदलाव है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसी नई सैन्य सोच और स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति कापरिणाम है, जिसने दुश्मन को ऐसी चोट दी है जिसे वह लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।