Eid Mubarak Wishes Shared Amid Renewed Focus on BrahMos Missile Programme

As people across the country exchanged Eid Mubarak greetings, senior Congress leader Jairam Ramesh brought attention to India’s long-standing defence collaboration with Russia, highlighting the BrahMos missile system as a symbol of continuity in national security policy. BrahMos: A Symbol of Indo-Russian CollaborationThe BrahMos missile, named after the Brahmaputra and Moskva rivers, stands as a testament to India-Russia defence cooperation. Jairam Ramesh noted that the missile programme is often in the spotlight and serves as a strong example of policy continuity that transcends political regimes.Genesis of the ProgrammeIndia’s journey toward missile self-reliance began with the Integrated Guided Missile Development Programme launched in 1983. By the mid-1990s, then-Defence Research and Development Organisation (DRDO) chief Dr. APJ Abdul Kalam and Dr. A. Sivathanu Pillai envisioned a collaborative effort with Russia to develop supersonic cruise missiles.Key Milestones and Political LeadershipAn inter-governmental agreement on BrahMos was signed on February 12, 1998, when I.K. Gujral served as Prime Minister. The first contract followed on July 9, 1999, under Prime Minister Atal Bihari Vajpayee. The maiden successful test of the missile was conducted on June 12, 2001. In a major diplomatic gesture, Russian President Vladimir Putin inaugurated the BrahMos headquarters in New Delhi on December 4, 2004.Progress Under UPA GovernmentsThe missile was inducted into the Indian Navy in 2005 and the Indian Army in 2007. The air-launched version debuted in 2012, during the tenure of Prime Minister Dr. Manmohan Singh. His government also played a pivotal role in further institutionalising the programme by establishing the BrahMos Integration Complex in Hyderabad and BrahMos Aerospace in Thiruvananthapuram. Dr. Singh’s leadership was also instrumental in finalising the Indo-US nuclear deal in 2005, which laid the groundwork for India’s entry into the Missile Technology Control Regime (MTCR) in 2016.
BJP Betrays Delhi with Power Cuts and Costlier Electricity: Kuldeep Kumar

In a scathing attack on the BJP-led government, Aam Aadmi Party (AAP) senior leader and MLA Kuldeep Kumar on Monday accused the ruling party of betraying the people of Delhi by first imposing widespread power outages and now moving to increase electricity tariffs by 7%. Kejriwal Govt Ensured 24×7 Power, BJP Failing to Delivering on PromisesSpeaking at a press conference at the AAP headquarters, Kuldeep Kumar reminded Delhiites of the contrast in governance. “For 10 years, the Arvind Kejriwal government gave Delhi uninterrupted electricity supply, 200 units absolutely free, and 200–400 units at subsidised rates. This made Delhi the city with the cheapest electricity in the country,” he stated. In contrast, he said, the BJP—despite its campaign promises of 300 free units—has failed to deliver even basic electricity services. “Now Delhi is facing daily power cuts of 6–7 hours in peak summer, forcing citizens to reinstall inverters they had removed under the AAP regime,” he added. Power Hike to Benefit Private Firms, Burden CitizensKuldeep Kumar warned that the proposed 7% tariff hike in May and June would hit household budgets hard. “Instead of fulfilling its promise of free electricity, the BJP is now enabling private companies to earn profits by hiking rates and burdening the common man,” he said. He called the move a continuation of the BJP’s trend of aiding private interests at the public’s cost. “Be it fee hikes in private schools or electricity charges, BJP’s governance is proving to be anti-people and pro-corporate,” he alleged.AAP Vows Protest, Demands Immediate RollbackCalling the move unjust and insensitive, Kuldeep Kumar demanded an immediate reversal of the tariff hike and urged the BJP to honor its electoral promise of 300 units of free electricity. “If the BJP goes ahead with this anti-people decision, AAP will resist it on every platform. Delhi cannot be made to suffer for BJP’s failure to govern responsibly,” he said.
मोदी ने जो कहा वो किया, भारत ना डरता है और ना झुकता है -भारतीय सेना ने की पाक की किरकिरी

भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है। पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई और 17 लोग गंभीररूप से घायल हुए। यह हमला उस वक्त हुआ जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारतकी यात्रा पर थे। इस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने जो प्रतिक्रिया दी, वह “ऑपरेशन सिंदूर” के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई। आतंकवादी हमला: एक कायरता पूर्ण कृत्य इस हमले का निशाना बने अधिकांश लोग पर्यटक थे जो ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले बायसरन की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताने आए थे।हमला इतने सुनियोजित और बर्बर तरीके से किया गया था कि इसकी तुलना 2019 के पुलवामा हमले से की जाने लगी। हमलावरों का उद्देश्य सिर्फजान-माल का नुकसान करना ही नहीं था, बल्कि भारत की सुरक्षा, अखंडता और वैश्विक छवि को भी चोट पहुँचाना था। ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन भारत सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने मिलकर उच्चस्तरीयसुरक्षा बैठकें कीं। 6 और 7 मई की दरम्यानी रात को भारतीय सशस्त्र बलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तानअधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को लक्षित किया गया। भारतीय वायुसेना और सेना के विशेष बलों ने एक संयुक्त अभियान मेंसिर्फ 25 मिनट के अंदर नौ अलग-अलग ठिकानों पर 24 सटीक हमले किए। ये हमले जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीनजैसे संगठनों के शिविरों पर केंद्रित थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने यह कार्रवाई “सटीकता, एहतियात और करुणा” के साथ की, ताकि केवल आतंकवादी संरचनाओं को हीनुकसान पहुँचे और निर्दोष नागरिकों को कोई हानि न हो। उन्होंने इसे भारत के “जवाब देने के अधिकार” के तहत उचित ठहराया। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का प्रत्युत्तर ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के जम्मू, पठानकोट और उधमपुर स्थित सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने कीकोशिश की। हालांकि, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली, विशेषकर S-400, ने इन हमलों को नाकाम कर दिया और कई पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनको मार गिराया। इसके तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के वायु रक्षा ठिकानों पर जवाबी हमला किया। खासकर लाहौर में स्थित वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय कियागया। इस प्रतिक्रिया के बाद ही दोनों देशों ने 10 मई को “सभी फायरिंग और सैन्य कार्रवाई” को रोकने पर सहमति जताई। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 सदस्य राज्यों को आत्म-रक्षा का अधिकार देता है, यदि उन पर सशस्त्र हमला होता है। जबकि यू.एन. चार्टर विशेषरूप से यह नहीं कहता कि “सशस्त्र हमला” क्या है, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने इसे “बल के उपयोग का सबसे गंभीर रूप” कहा है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अनुच्छेद 51 के अंतर्गत सही ठहराया, भले ही विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। उन्होंने इनहमलों को “मापदंडित और गैर-उत्तेजक” करार दिया। 8 मई को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 15 में से 13 सदस्य देशों के राजदूतोंको हमलों की जानकारी दी। पाकिस्तान के राजदूत को आमंत्रित नहीं किया गया था। गैर–राज्य अभिनेताओं के खिलाफ आत्म–रक्षा का अधिकार यू.एन. चार्टर की राज्य-केंद्रित प्रकृति के कारण गैर-राज्य अभिनेताओं जैसे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करना जटिल हो जाता है। हालांकि, 9/11 केबाद, अमेरिका जैसे देशों ने यह तर्क दिया कि आत्म-रक्षा का अधिकार आतंकवादी संगठनों पर भी लागू होता है। ICJ की राय अधिक प्रतिबंधात्मक रही है, जो कहती है कि जब तक किसी राज्य को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, तब तक अनुच्छेद51 का प्रयोग नहीं किया जा सकता। भारत ने अपने बयानों में पाकिस्तान की मिलीभगत और आतंकियों को समर्थन देने के ठोस प्रमाण दिए, जिससेयह हमला एक राज्य-प्रायोजित आतंकवाद का उदाहरण बन गया। सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की गोलाबारी के चलते जम्मू, राजौरी, पुंछ, बारामुल्ला और कुपवाड़ा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में भय का वातावरण उत्पन्नहो गया। पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलाबारी में कम से कम 12 नागरिकों और एक सैनिक की मृत्यु हो गई, जबकि 51 अन्य घायल हुए। अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए और प्रत्येक सीमावर्ती जिले को ₹5 करोड़ की राशि जारी की। मुख्यमंत्री उमरअब्दुल्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपायुक्तों के साथ आपात बैठक कर राहत और बचाव कार्यों का निर्देश दिया। आतंकवादी संगठन और उनकी भूमिका जिन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया, उनका संबंध प्रमुख प्रतिबंधित संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से था। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): इसका मुख्यालय पाकिस्तान के बहावलपुर में है, और इसे मसूद अजहर ने 2000 में स्थापित किया था। यह संगठन संसदपर हमले से लेकर पुलवामा आत्मघाती हमले तक कई हमलों में शामिल रहा है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT): यह संगठन 2008 के मुंबई हमलों और 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के लिए जिम्मेदार रहा है। इसका मुख्यालय पाकिस्तानके लाहौर के पास मुरीदके में है। भारत की सैन्य क्षमताएं और दक्षता भारत ने इस पूरे ऑपरेशन में अपनी सैन्य रणनीति और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान द्वारा दागी गईआठ मिसाइलों और कई ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। जवाबी हमले में भारत ने पाकिस्तान के तीन फाइटर जेट्स को भी मार गिराया, जिनमें से एक F-16 और दो JF-17 थे। भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह ना तो डरता है, ना ही किसी भी प्रकार के आतंक के सामने झुकता है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा आता है तो वह चुप नहीं बैठेगा।रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रतिक्रिया पाकिस्तान के समान ही तीव्रता के साथ उसी क्षेत्र में रही है, लेकिन भारत तनाव नहीं बढ़ाना चाहता। भारत की यह नीति स्पष्ट है: वह न तो पहले हमला करता है और न ही वह किसी भी उकसावे को अनदेखा करता है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसका प्रमाणहै। यह न केवल सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि यह एक कूटनीतिक और कानूनी संदेश भी था – कि भारत अपनी रक्षा के लिए सक्षम है और इसके लिएअंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करता है। ट्रंप की ‘संधि नीति’ और भारत में आक्रोश इस सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को सोशल मीडिया पर अचानक घोषणा कर दी कि भारत और पाकिस्तान संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह अमेरिका की मध्यस्थता से संभव हो पाया है और अब दोनों देश एक निष्पक्ष स्थान परबातचीत करेंगे। भारत में इस घोषणा को लेकर व्यापक आक्रोश फैल गया। भारतीय जनता ने ट्रंप के इस कदम को पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और भारत की दृढ़रणनीतिक स्थिति को कमजोर करने वाला कदम माना। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की उस ऐतिहासिक नीति के खिलाफ है जिसमें किसीतीसरे पक्ष को भारत-पाक मुद्दों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाती। ट्रंप की धमकी और विपक्ष का आक्रामक रुख 12 मई को ट्रंप के एक और बयान ने इस विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान युद्ध नहीं रोकते, तो अमेरिकाउनके साथ व्यापार नहीं करेगा। इस धमकी जैसे बयान ने भारत में विरोधियों को प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने का मौका दे दिया। विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाया कि क्या भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को अमेरिका के व्यापारिक हितों के लिए गिरवी रखेगा? कांग्रेस, आरजेडीऔर अन्य दलों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की ताकि ट्रंप की ‘चौधराहट’ को लेकर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया जा सके। आरजेडी सांसद मनोज झा ने कड़े शब्दों में कहा कि ट्रंप को कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया? वहीं आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंकाभारती ने मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ’56 इंच की भीगी बिल्ली’ तक कह डाला। ब्रह्मा चेलानी का विश्लेषण: नीति बनाम नेतृत्व विदेश मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को भारतीय सेना की सजा से बचा लिया।उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का यह हस्तक्षेप दरअसल पाकिस्तान के उस एजेंडे को हवा देता है जो कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है। हालांकि चेलानी ने प्रधानमंत्री मोदी की उस आलोचना की सराहना की जो उन्होंने परोक्ष रूप से अपने संबोधन में ट्रंप को की थी। मोदी ने स्पष्ट करदिया कि भारत पाकिस्तान से केवल दो मुद्दों पर बात करेगा—पाक-अधिकृत कश्मीर की वापसी और आतंकवाद का खात्मा। भारतीय अमेरिकियों की नाराजगी अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने भी ट्रंप की आलोचना की। प्रमुख भारतीय अमेरिकी लेखक और टिप्पणीकार विभूति झा ने ट्रंप को संबोधित करतेहुए कहा कि आपने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को एक ही तराजू में तौलकर ‘दोस्ती’ जैसे शब्द को अपमानित किया है। उन्होंने कहा कि जो नेताअपने सैनिकों और आतंकवादियों के बीच फर्क नहीं कर पाते, वे अच्छे लीडर नहीं कहे जा सकते। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मोहन सिन्हा जैसे भारतीय अमेरिकियों ने भी ट्रंप की अज्ञानता पर तीखी प्रतिक्रिया दी और अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति कोएकतरफा और ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान समर्थक बताया। ट्रंप के रुख में बदलाव: चुनावी रणनीति या अमेरिकी नीति? एक बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान की सैन्य सहायता रोक दी थी, चीन के खिलाफ भारत का समर्थन किया था, फिर अब उन्होंने यह यू-टर्न क्यों लिया? विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप आगामी चुनावों में यह दिखाना चाहते हैं कि वे वैश्विक शांति लाने में सक्षम हैं। ट्रंप पहले ही रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास संघर्ष में कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभा पाए हैं। भारत-पाक संघर्ष उन्हें एक मौका लगा जिससे वेअपनी कूटनीतिक सक्रियता प्रदर्शित कर सकें। यह उनका घरेलू चेहरा चमकाने का प्रयास था। वहीं कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह ट्रंप का व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि अमेरिका की पारंपरिक रणनीति है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थितिऔर वहां की सैन्य संरचना अमेरिका के लिए हमेशा से रणनीतिक रूप से अहम रही है। भारतीय हमलों के प्रभाव और पाकिस्तान पर परमाणु संकट की मार 12 मई को भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई में पाकिस्तान के प्रमुख हवाई ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें रफीकी एयरबेस (शोरकोट), नूरखान एयरबेस (रावलपिंडी), मलीर छावनी (कराची), और कई रडार साइटें शामिल थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के हर रणनीतिकशहर में सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह भी दावे किए जा रहे हैं कि भारत ने एक परमाणु सुविधा केंद्र पर भी हमला किया जिससे अमेरिका को अपना परमाणु सुरक्षा सहायता विमानबी350 AMS तैनात करना पड़ा। हालांकि भारत की सेना ने इन दावों को खारिज किया, क्यूंकि इससे तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जासकता है। कूटनीति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का संतुलन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब 1999 या 2001 वाला भारत नहीं है, जो बाहरी दबाव में झुकता था। हालांकि अमेरिका कीतरह के देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना भारत के लिए आवश्यक है, लेकिन यह संबंध किसी कीमत पर संप्रभुता की हानि के साथ नहीं होसकते। डोनाल्ड ट्रंप की हालिया भूमिका ने अमेरिका-भारत संबंधों की जटिलता को उजागर कर दिया है। यह भारत की विदेश नीति के लिए एक चुनौतीपूर्णमोड़ है—जहां उसे वैश्विक कूटनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और घरेलू राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे ट्रंप जैसेअप्रत्याशित नेताओं से पार पाने के लिए अधिक सक्रिय और पारदर्शी कूटनीति अपनाएं ताकि भारत की गरिमा और सुरक्षा को कोई आंच न आए।
दिल्ली भाजपा ने किया कर्तव्य पथ से नैशनल वॉर मेमोरियल तक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन

सिटिजन फॉर नेशनल सिक्योरिटी द्वारा आयोजित एक भव्य तिरंगा यात्रा में आज हजारों दिल्लीवासियों ने देशभक्ति का संदेश दिया। कर्तव्य पथ सेइंडिया गेट स्थित नैशनल वॉर मेमोरियल तक निकली इस यात्रा में कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं सहित स्काउट, एनसीसी कैडेट, डॉक्टर, वकील, नर्सिंगस्टाफ और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भाजपा के दिग्गज नेता हुए शामिलइस राष्ट्रवादी आयोजन में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, केंद्रीय राज्य मंत्रीहर्ष मल्होत्रा, संगठन महामंत्री पवन राणा, सांसद मनोज तिवारी, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, कमलजीत सहरावत, योगेन्द्र चंदोलिया, बांसुरीस्वराज, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कपिल मिश्रा, रविन्द्र इंद्राज, एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल औरदिल्ली भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी विष्णु मित्तल सहित अनेक विधायक व पार्षदों ने भाग लिया। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरिभाजपा दिल्ली अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पहले सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रहे थे, आज भीसरकार के निर्णयों पर अविश्वास जता रहे हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर पाकिस्तान की भाषा बोलने और कट्टरपंथी वोट बैंक साधने का आरोपलगाया। दिल्ली ने दिखाई एकजुटतामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से दिल्लीवासियों ने प्रधानमंत्री मोदी के आतंकवाद विरोधी रुख को पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंनेकहा कि भारत अब आतंकी हमलों का करारा जवाब देने में संकोच नहीं करेगा और सरकार की नीति स्पष्ट है – गोलीबारी अब युद्ध की श्रेणी मेंआएगी। ऑपरेशन सिन्दूर केवल जवाब नहीं, प्रतिज्ञा हैभाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि आज का भारत सहनशील जरूर है, लेकिन अब किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि को सहननहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिन्दूर” केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि यह न्याय और राष्ट्रगौरव की एक स्पष्ट प्रतिज्ञा है। उन्होंने दोटूक कहा – “टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते, अब पाकिस्तान से बात होगी तो सिर्फ पीओके पर या आतंकवाद के खात्मे पर।” तिरंगा देश की आत्मा है श्री चुग ने अपने संबोधन में तिरंगे को केवल एक झंडा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा करार दिया और कहा कि इस आत्मा का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी कररहे हैं।
विदेश मंत्रालय का जवाब, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने ट्रंप के दावों को खारिज किया, पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्यटकराव, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, अमेरिका के साथ हुई बातचीत में व्यापार का कोई जिक्र नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावे पूरी तरह से निराधार हैं। प्रवक्ता ने कहा, “7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को संघर्षविराम की सहमति बनने तक भारत और अमेरिका के बीच सैन्य स्थितिपर बातचीत हुई थी, लेकिन किसी भी चर्चा में व्यापार या प्रतिबंध से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं उठा।” भारत की नीति साफ: परमाणु दबाव और आतंकवाद बर्दाश्त नहींरणधीर जायसवाल ने भारत की रणनीतिक नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत न तो कभी परमाणु धमकियों के आगे झुकेगा और न ही सीमा पारआतंकवाद को बर्दाश्त करेगा। उन्होंने कहा, “हमने विभिन्न देशों से बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि जो राष्ट्र ऐसे हालात में शामिल होंगे, उन्हें अपने हीक्षेत्र में गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।” पाकिस्तान को दो टूक चेतावनीपाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा कि जिस देश ने आतंकवाद को संगठित रूप से बढ़ावा दियाहै, उसे यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वह इसके दुष्परिणामों से बच सकता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान जितनी जल्दी यह समझेगा, उसके लिएउतना ही अच्छा होगा।”
पीओके वापस लेने का मौका था, लेकिन मोदी सरकार ने पीछे हटकर देश को धोखा दिया – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर(पीओके) को वापस लेने का सुनहरा अवसर होते हुए भी सरकार पीछे हट गई और देश के साथ धोखा किया। “जान देने की बात करने वाली भाजपा ने युद्ध विराम कर दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा नेताओं, जिनमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शामिल हैं, ने वर्षों तक पीओके को भारत मेंमिलाने की कसमें खाईं। वे कहते रहे कि इसके लिए जान भी दे देंगे। लेकिन जब वाकई मौका आया, तो सरकार ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी। “प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना की जीत का मौका गवां दिया”भारद्वाज ने कहा कि हमारी सेना पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक बढ़त पर थी। भारतीय वायुसेना और थलसेना ने पाकिस्तान को पूरी तरह मात दीथी। ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया गया। सेना पीओके तक पहुँचने को तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने सीजफायर कर युद्ध रोक दिया। “78 साल से भाजपा कर रही थी जनता को गुमराह”उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों से भाजपा पीओके मुद्दे पर लोगों को झूठे वादे करके गुमराह करती रही है। अब जब उन्हें कार्रवाई का मौका मिला, तो उन्होंने अपने ही संकल्प से पीछे हटकर साबित कर दिया कि पीओके को लेकर उनकी इच्छाशक्ति सिर्फ राजनीतिक नारा थी।“तिरंगा यात्रा से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश”सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अब सरकार हताश कार्यकर्ताओं को तिरंगा यात्रा निकालने के लिए कह रही है ताकि युद्धविराम से उपजे जनाक्रोशको दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि दशकों से शाखाओं में सुबह-सुबह पीओके का पाठ पढ़ने वाले स्वयंसेवक आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। “क्या भाजपा ने पीओके को भूलने का फैसला कर लिया है?”भारद्वाज ने सीधा सवाल किया, “क्या भाजपा अब पीओके को लेकर अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति खो चुकी है? जब भारत की सेना जीत रही थी, तब युद्ध क्यों रोका गया? क्या भाजपा का पीओके लौटाने का वादा एक छलावा था?” “इतिहास ने मोदी को मौका दिया, लेकिन उन्होंने उसे खो दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इतिहास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीओके हासिल करने का सबसे बड़ा अवसर दिया था। पाकिस्तान हार रहा था औरभारत जीत रहा था, लेकिन सीजफायर कर यह अवसर गंवा दिया गया। “योगी आदित्यनाथ का वादा भी झूठा साबित हुआ”उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने चुनावी मंचों से कहा था कि मोदी तीसरी बार पीएम बनेंगेतो छह महीने में पीओके भारत का हिस्सा होगा। अब छह महीने से भी ज़्यादा हो चुके हैं, और सरकार युद्ध विराम कर सेना को वापस बुला चुकी है।
आतिशी ने पीएम मोदी से पूछा, पहलगाम हमले का बदला लिए बिना क्यों हुआ संघर्ष विराम?

पहलगाम हमले का बदला लिए बिना संघर्षविराम क्यों? — आतिशी ने पीएम मोदी से पूछे तीखे सवाल“क्या संघर्षविराम का समय था? क्या हमने अपनी बेटियों के सिंदूर का बदला ले लिया? क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया?” – आतिशी भारत की जनता को चाहिए जवाबअगर पाकिस्तान ने संघर्षविराम की गुहार लगाई, तो इसका ऐलान भारत की बजाय अमेरिका ने क्यों किया?अगर पाकिस्तान ने हार मानी, तो उसने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा क्यों नहीं की?क्या पहलगाम हमले के गुनहगार भारत को सौंपे गए?क्या अमेरिकी व्यापार का दबाव भारत की बेटियों के सम्मान से बड़ा हो गया है? दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम स्वीकार किएजाने पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय सेना आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों पर करारा वार कर रही थी, तभी अमेरिका केहस्तक्षेप पर भारत ने अचानक चुपचाप संघर्षविराम मान लिया। आतिशी ने पूछा, “क्या हमारी बेटियों के सिंदूर की कीमत अमेरिकी व्यापार से कम है? क्या यह न्याय है कि हमला भारत पर हो और समझौताअमेरिका के दबाव में हो?” पहलगाम हमला – देश की आंखों में आंसूआतिशी ने बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया गया।“उस दिन पूरे देश ने हमारी बेटियों की आंखों में आंसू देखे और न्याय की मांग की,” उन्होंने कहा। ऑपरेशन सिंदूर – सेना का जवाबआम आदमी पार्टी की नेता ने बताया कि जब 7 मई को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, तो पूरा देश एकजुट था। सभी दलों ने सरकारका समर्थन किया क्योंकि यह सवाल था भारत की अस्मिता का और हमारी बेटियों की शहादत का। अमेरिका ने किया संघर्षविराम का ऐलान, भारत ने चुपचाप मान लियाआतिशी ने सवाल उठाया कि 10 मई को संघर्षविराम की घोषणा भारत या भारतीय सेना ने नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की—वो भीसोशल मीडिया के ज़रिये। आधे घंटे बाद भारत ने बिना कुछ कहे इसे स्वीकार कर लिया। तीखे सवाल, जिनका जवाब देश मांग रहा है. अगर पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया, तो इसकी घोषणा भारत ने क्यों नहीं की?. क्या पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से हार मानी? कोई समझौताया बयान क्यों नहीं आया?क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया? क्या अमेरिका के दबाव में लिया गया फैसला?आतिशी ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि उन्होंने भारत को व्यापार रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने पीएम मोदी से सीधासवाल पूछा—“प्रधानमंत्री जी, क्या अमेरिका से व्यापार भारत की बेटियों के सिंदूर से ज़्यादा कीमती हो गया है?” आखिरी सवाल: न्याय कब मिलेगा?“जब तक पहलगाम हमले के गुनहगार भारत के हाथ में नहीं आते, तब तक यह संघर्षविराम अधूरा और अपमानजनक है,” आतिशी ने कहा।”प्रधानमंत्री को अब चुप्पी तोड़नी होगी और देश को सच बताना होगा।”
अपनी शर्तों पर देंगे हर आतंकी हमले का जवाब..आदमपुर से पीएम मोदी की हुंकार, कहा- घर में घुसकर मारेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के आदमपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को दोहराया औरस्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपनी शर्तों पर देगा। उन्होंने कहा, “हम वो भारत नहीं हैं जो चुपचाप सह ले, हमघर में घुसकर मारते हैं और आतंक का अंत करते हैं।” पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष चेतावनीप्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत अबउस दौर से निकल चुका है जब आतंकी हमलों का जवाब सिर्फ कड़ी निंदा से दिया जाता था। अब अगर कोई भारत की तरफ आंख उठाएगा तो उसेउसी की भाषा में जवाब मिलेगा। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक का उल्लेखपीएम मोदी ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक का ज़िक्र करते हुए कहा, “हमारे वीर जवानों ने दिखा दिया किभारत अब केवल शब्दों से नहीं, कर्म से जवाब देता है।” उन्होंने कहा कि ये नए भारत की पहचान है, जो जवाब देने में देर नहीं करता और सीमा पार भीदुश्मन को सबक सिखाता है। आतंरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा पर फोकसमोदी ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने बीते वर्षों में न केवल सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा तंत्र को भी बेहतरबनाया है। उन्होंने कहा, “हमने सुरक्षाबलों को खुली छूट दी है। उन्हें आदेश नहीं, आज़ादी दी गई है कि वे जब चाहें, जैसे चाहें देश के दुश्मनों कासफाया करें।” कांग्रेस के दौर में आतंकवाद पर नरमी’ का आरोपरैली के दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के समय आतंकवादी घटनाएं बढ़ती थींऔर देश केवल सहता था। “कांग्रेस के समय में मुंबई हमले होते थे, संसद पर हमले होते थे, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया जाता था। आज भारत चुपनहीं बैठता, जवाब देता है,” उन्होंने कहा। सेना और सुरक्षा बलों की सराहनाप्रधानमंत्री ने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि हमारे जवानों ने हमेशा देश के लिए जान की बाज़ी लगाई है।“चाहे कारगिल हो, पुलवामा हो या हाल की शोपियां मुठभेड़ – हमारे सैनिक हर चुनौती से निपटने में सक्षम हैं,” उन्होंने कहा। शहीदों को श्रद्धांजलिपीएम मोदी ने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया और कहा कि उनके बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंनेकहा कि देशवासी न केवल अपने सुरक्षाबलों पर गर्व करते हैं, बल्कि उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े भी रहते हैं। युवा पीढ़ी को किया प्रेरितअपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने युवाओं से देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हमेशा सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की।उन्होंने कहा, “युवाओं को यह समझना होगा कि आजादी केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है – और आतंकवाद के खिलाफ हमारी यह लड़ाई उन्हींके सुरक्षित भविष्य के लिए है।” रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का ज़िक्रपीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया है। “आज हम न केवल अपनी सेना के लिए हथियार बना रहेहैं, बल्कि दुनिया को निर्यात भी कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
शोपियां मुठभेड़: सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को किया ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में मंगलवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ शुकरू केलर क्षेत्र के जंगलों में हुई, जहां आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान के दौरान आतंकियों ने गोलीबारीशुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने कार्रवाई करते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे आतंकीमारे गए आतंकियों की पहचान में दो नाम सामने आए हैं। इनमें से एक का नाम शाहिद कुट्टे पुत्र मोहम्मद यूसुफ कुट्टे है, जो शोपियां के ही चोटिपोराहीरपोरा का निवासी था। शाहिद मार्च 2023 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। वह अप्रैल 2024 में डेनिश रिसॉर्ट पर हुए हमले और मई 2024 में भाजपा सरपंच की हत्या में शामिल रहा है। इसके अलावा, फरवरी 2025 में कुलगाम में हुए टीए कर्मी की हत्या में भी उसकी संलिप्तता कीआशंका जताई जा रही है। भारतीय सेना का बयानभारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 13 मई 2025 को राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट को विशेष खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर शोकल केलर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। इस दौरान आतंकियों ने जबरदस्त गोलीबारी की, जिसका जवाब देते हुए सेना ने तीनकट्टर आतंकवादियों को ढेर कर दिया। क्षेत्र में अभी भी तनावपूर्ण माहौलमुठभेड़ के बाद क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा बल किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सतर्क हैं।
भारत और पाकिस्तान तनावपूर्ण रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देश को किया संबोधित, देश की पराक्रमी सेनाओं और भारतवासी को किया सलाम

भारत और पाकिस्तान तनावपूर्ण रिश्तों के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात ने आज देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बीते दिनों में हमने देशका सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है. मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं, सशस्त्र बलों, हमारी खुफिया एजेंसियों, हमारे वैज्ञानिकों को हरभारतवासी की तरह से सलाम करता हूं. हमारे वीर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया. मैं हमारे देशकी हर माता को देश की हर बहन को और देश की हर बेटी को यह वीरता, साहस, पराक्रम को आज समर्पित करता हूं. 22 अप्रैल को पहलगाम मेंआतंकियों ने जो बर्बरता दिखाई थी. उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था छुट्टियां मना रहे निर्दोष मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर उनकेपरिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने बेरहमी से मार डाला गया था। यह आतंक का बहुत वीभत्स चेहरा था क्रूरता थी यह देश के सद्भाव को तोड़नेकी घिनौनी कोशिश भी थी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह पीड़ा बहुत बड़ी थी. सेनाओं को दे दी गई आतंकियों को ढेर करने की पूरी छूटइस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर वर्ग, हर समाज, हर राजनीतिक दल एक स्वर में आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठखड़ा हुआ. हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जानचुका है कि हमारी बहन और बेटियों के माथों से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है. पीएम मोदी ने कहा ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ नाम नहीं है. यह देशके कोटि-कोटि लोग भावनाओं का प्रतिबिंब है. ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है 6 मई की दूर रात, 7 मई की सुबह पूरी दुनिया ने इसप्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है.भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया. आतंकियोंने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है. लेकिन जब देश एकजुट होता है नेशन फर्स्ट की भावना से भरा होता है राष्ट्रसर्वोपरि होता है तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं. परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं. जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमलाकिया भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया. बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकीठिकाने एक प्रकार से ग्लोबल टेररिज्म की यूनिवर्सिटी रहे हैं. दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं. चाहे 9/11 हो, चाहे लंदन ट्यूबबॉम्बिंग हो या भारत में दशकों से बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं. उन सभी के तार कहीं न कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं.