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दिल्ली में 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना का पंजीकरण शुरू, भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दीमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बधाई

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को केंद्र सरकार की आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत मुफ्त इलाज कीसुविधा देने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनकेमंत्रिमंडल को शुभकामनाएं दीं। हर विधानसभा में लगेंगे कैम्प, 70 मोबाइल वैन पहुंचेंगी बुजुर्गों के द्वारश्री सचदेवा ने जानकारी दी कि योजना के तहत दिल्ली की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में पंजीकरण किया जाएगा। इस काम को सुगम बनाने के लिए70 मोबाइल वैन तैनात की जाएंगी, जो घर-घर जाकर वरिष्ठ नागरिकों का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें योजना के तहत कार्ड वितरित करेंगी। भाजपा विधायक और कार्यकर्ता अभियान को जन-जन तक पहुंचाएंगेदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा के सभी 48 विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में कैम्प आयोजित करेंगे ताकि अधिक से अधिक बुजुर्ग इसयोजना से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन के स्तर पर बाकी 22 विधानसभाओं में भी शिविर लगाकर पंजीकरण सुनिश्चितकिया जाएगा। केंद्र की योजनाओं को अब दिल्ली में भी मिलेगा पूरा लाभश्री सचदेवा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित इस योजना से पूरे देश में बुजुर्गों को लाभ मिल रहा है, और अब दिल्ली भी इस अभियान काहिस्सा बन गया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में राजनीतिक कारणों से दिल्ली केनागरिकों को कई केंद्र योजनाओं से वंचित रखा गया। भाजपा सरकार कर रही है दिल्ली के बुजुर्गों की चिंतादिल्ली भाजपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य है कि राजधानी के हर बुजुर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दी जाए। आयुष्मान वय वंदनायोजना इसी संकल्प का हिस्सा है, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक चिंता के बिना इलाज मिल सकेगा।

संजौली मस्जिद पर शिमला नगर निगम अदालत का बड़ा फैसला, पूरा निर्माण अवैध घोषित, ध्वस्तीकरण के आदेश

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में स्थित मस्जिद को लेकर नगर निगम की अदालत ने बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने मस्जिदके पूरे ढांचे को अवैध करार देते हुए उसे पूरी तरह से गिराने के आदेश जारी किए हैं। इससे पहले 5 अक्टूबर 2024 को मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलेंगिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन उस पर समय रहते अमल नहीं हो पाया। स्वामित्व और स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज नहीं हुए पेशनगर निगम आयुक्त भूपिंदर अत्री की अध्यक्षता वाली अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए पाया कि मस्जिद के निर्माण से संबंधित कोई वैधमानचित्र या नगर निगम की अनुमति प्रस्तुत नहीं की गई। वक्फ बोर्ड भी भूमि स्वामित्व को लेकर कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससेअदालत ने पूरे निर्माण को अवैध ठहराया। अदालत का सख्त रुखशनिवार को हुई सुनवाई में अदालत ने मस्जिद की बची हुई दो मंजिलों को भी अवैध माना और उन्हें ढहाने का निर्देश दिया। वक्फ बोर्ड के वकील कीओर से यह तर्क दिया गया कि यह मस्जिद 1947 से पूर्व अस्तित्व में थी और वर्तमान निर्माण कार्य सिर्फ पुनर्निर्माण है। इस पर अदालत ने सवालकिया कि यदि यह पहले से मौजूद थी, तो नए निर्माण के लिए नगर निगम की स्वीकृति क्यों नहीं ली गई? समय-सीमा में नहीं हुआ कार्यान्वयनपिछले आदेश के तहत मस्जिद की ऊपरी मंजिलों को दो महीने के भीतर हटाया जाना था, लेकिन मस्जिद कमेटी समय पर यह कार्य नहीं कर पाई।इसके बाद दो बार और समय मांगा गया, परंतु अब तक एक मंजिल और स्तंभों का कार्य अधूरा है। पूर्व झड़प के बाद हुआ मामला उजागरयह विवाद उस समय चर्चा में आया जब 29 अगस्त 2024 को शिमला के मल्याणा क्षेत्र में दो समुदायों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें एक व्यक्तिघायल हुआ था। इसके बाद 1 सितंबर को संजौली मस्जिद के बाहर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और अवैध निर्माण का मुद्दा सामने आया। प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई11 सितंबर 2024 को हिंदू संगठनों ने मस्जिद के निर्माण का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर मस्जिद की ओर मार्चकिया, जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसी के बाद नगर निगमअदालत ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और अब अंतिम फैसला सुनाया गया है।

मंगलुरु में बजरंग दल नेता सुहास शेट्टी की हत्या, कर्फ्यू और पुलिस कार्रवाई

मंगलुरु: कर्नाटक के मंगलुरु में बजरंग दल के नेता सुहास शेट्टी की बुधवार रात करीब 8:30 बजे बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड ने पूरेशहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया है। 2 मई से 6 मई तक कर्फ्यू के आदेश दिए गए हैं ताकिस्थिति पर काबू पाया जा सके। सुहास शेट्टी पर हमला और उसकी गंभीरतासुहास शेट्टी, जो पांच अन्य साथियों के साथ घूम रहे थे, पर हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया। हमलावरों ने 6 की संख्या में होते हुएतलवारों और चाकुओं से शेट्टी पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत AJ अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हेंमृत घोषित कर दिया गया। यह हमला 8:27 बजे हुआ और इसके बाद पूरे मंगलुरु में तनाव फैल गया। जांच और आरोपियों की गिरफ्तारीमंगलुरु पुलिस ने घटना के बाद से तेजी से कार्रवाई की और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी भी इन आरोपियों में शामिल है।पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने दावा कियाहै कि जल्द ही हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया जाएगा। इस मामले की जांच बाजपे पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। हिंदू कार्यकर्ताओं का गुस्सा और कर्फ्यू का आदेशसुहास शेट्टी की हत्या के बाद दक्षिण कन्नड़ जिले में भारी गुस्सा और तनाव का माहौल बन गया। हिंदू संगठनों ने इस घटना के विरोध में बंद काआह्वान किया, जिसके बाद कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। कर्फ्यू के बावजूद, हम्पनकट्टा, सूरतकल, उल्लाल और पुत्तूर जैसे क्षेत्रों मेंविरोध प्रदर्शन जारी रहे। बसों पर पथराव की घटनाएं भी हुईं, जिससे परिवहन सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसके साथ ही, पुलिस नेकई इलाकों में शराब की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। कर्नाटक में राजनीतिक और सामाजिक तनावसुहास शेट्टी की हत्या कर्नाटक में पहले से ही मौजूद राजनीतिक और सामाजिक तनाव को और बढ़ा रही है। शेट्टी का नाम कई आपराधिक मामलों मेंजुड़ा रहा है और वह हिंदुत्व संगठनों, विशेष रूप से बजरंग दल के सक्रिय सदस्य थे। 2022 में फाजिल हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में भी उनकानाम था। उनका शव मिलने के बाद से राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

कांग्रेस का हमला: मणिपुर हिंसा के दो साल पूरे होने पर मोदी और शाह को घेरा

नई दिल्ली: कांग्रेस ने मणिपुर में जारी हिंसा के दो साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोपलगाया कि मणिपुर आज भी संकट में है, लेकिन इसके समाधान की बजाय राजनीतिक खेल खेले जा रहे हैं।मणिपुर के लोग प्रधानमंत्री का इंतजार कर रहे हैंकांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मणिपुर के लोग आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य में आने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सोशलमीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि आज से ठीक दो साल पहले मणिपुर में हिंसा की शुरुआत हुई थी, जो फरवरी 2022 के विधानसभा चुनावों के बादभाजपा के शासन में बढ़ी। रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव में भाजपा को निर्णायक जनादेश मिलने के बाद भी राज्य में स्थिति बिगड़ती चली गई। हिंसा के बाद के हालात: ‘डबल इंजन’ सरकार की विफलतारमेश ने दावा किया कि 3 मई 2023 को मणिपुर में जो हुआ, वह भाजपा के ‘डबल इंजन’ सरकार के विफल होने का परिणाम था। उन्होंने कहा कितीन महीने बाद उच्चतम न्यायालय को यह कहना पड़ा कि मणिपुर में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गया है।कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव और मुख्यमंत्री का इस्तीफाकांग्रेस ने मणिपुर में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी, जिसके बाद मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को इस्तीफा देनेके लिए मजबूर किया। अंततः 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। मणिपुर में राहत शिविरों में रह रहे 60,000 विस्थापित लोगरमेश ने कहा कि मणिपुर आज भी पीड़ा में है और राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। राज्य में 60,000 से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगराहत शिविरों में भारी तनाव में रह रहे हैं, लेकिन कोई सार्थक समाधान प्रक्रिया नहीं दिखाई दे रही।प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया?रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर के संकट से लगातार बचते रहे हैं। उन्होंने न तो राज्य का दौरा किया और न ही वहां के लोगों सेमुलाकात की। रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री ने दुनिया भर का दौरा किया, लेकिन मणिपुर के संकटग्रस्त राज्य का दौरा करने के लिए न तो समय निकालाऔर न ही संवेदनशीलता दिखाई।” गृह मंत्री अमित शाह की नाकामीकांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मणिपुर का प्रबंधन गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया, लेकिन वे इस संकट को हल करने मेंपूरी तरह असफल साबित हुए हैं। रमेश ने कहा, “मणिपुर के लोग अब भी इंतजार कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री इंफाल पहुंचें और राज्य की स्थिति कोसुधारने के लिए कुछ कदम उठाएं।”

फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा,“बिना लोकल मदद के हमला मुमकिन नहीं”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले पर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने कहा कि इतना बड़ा हमला स्थानीय सहयोग के बिना संभव ही नहीं है। फारूक का मानना है कि अंदरूनी लोगों की मिलीभगत के बिनाआतंकियों का इतने अंदर तक पहुंचना मुश्किल है।“मैंने पहले ही चेतावनी दी थी मौलाना अजहर को न छोड़ें”एक इंटरव्यू में फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि मसूद अजहर को रिहा न किया जाए, क्योंकि वह बहुत चालाक और नेटवर्किंग मेंमाहिर है। उसे जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी थी। दुर्भाग्यवश, मेरी बात पर तब ध्यान नहीं दिया गया।” अब्दुल्ला ने इशाराकिया कि इस हमले में मसूद अजहर की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। LoC से 150 किमी दूर कैसे पहुंचे आतंकी?बैस रन घाटी, जहां हाल ही में आतंकी हमला हुआ, वह लाइन ऑफ कंट्रोल से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर है। सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञोंका मानना है कि इतनी दूरी तय करना बिना स्थानीय सहायता के असंभव है। एनआईए की शुरुआती जांच में भी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) केशामिल होने की आशंका जताई गई है। लॉजिस्टिक और ठिकाने की व्यवस्था में मिली मददरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकियों को इस क्षेत्र में न तो ठिकानों की जानकारी थी और न ही संसाधनों की व्यवस्था की क्षमता। इसलिए बिनाकिसी स्थानीय सहयोग के उनका यहां टिक पाना और हमला कर पाना बेहद मुश्किल है। ऐसे में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं कियाजा सकता।लश्कर कमांडर फारूक अहमद पर शक की सुईइस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर फारूक अहमद के शामिल होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि फारूक ने एक मजबूतओवरग्राउंड नेटवर्क तैयार किया है, जो आतंकियों को सीमा पार से भारत में दाखिल होने में मदद करता है।कंधार हाईजैक और मसूद अजहर की रिहाई: एक ऐतिहासिक भूल?1999 के कंधार विमान अपहरण कांड में आतंकियों ने भारत सरकार के सामने मौलाना मसूद अजहर की रिहाई की शर्त रखी थी। फारूक अब्दुल्ला, जो उस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, इस फैसले के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने तब केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि अजहर की रिहाई देश केलिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। मसूद अजहर: बाद में बना जैश-ए-मोहम्मद का सरगनामसूद अजहर, जिसे भारत ने बंधकों की जान बचाने के लिए छोड़ा था, बाद में कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक बना। इससंगठन ने कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली, जिनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है। फारूक अब्दुल्ला का दावा है कि उनकी उस समयकी चेतावनी को अगर गंभीरता से लिया गया होता, तो हालात कुछ और होते।

कर्नाटक के मंत्री का विवादित बयान,मैं आत्मघाती बम लेकर पाकिस्तान जाने को तैयार हूं

कर्नाटक सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और आवास मंत्री बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान एक भावनात्मक बयान देकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने कहाकि अगर केंद्र सरकार अनुमति दे, तो वे अपने कंधे पर बम बांधकर पाकिस्तान में हमला करने को तैयार हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजीसे वायरल हो रहा है।पहलगाम आतंकी हमले के बाद दिया गया बयानखान का यह बयान उस समय आया है जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देशभर में आक्रोश फैलाया हुआ है। इस हमले में कईनिर्दोष नागरिकों की जान गई, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और गहरा गया है। “मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूं”पत्रकारों से बात करते हुए खान ने कहा, “पाकिस्तान भारत का हमेशा से दुश्मन रहा है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मुझेइजाजत दें, तो मैं अपने कंधे पर आत्मघाती बम बांधकर पाकिस्तान में हमला करने को तैयार हूं।” जब इस बयान पर लोग मुस्कराने लगे, तो उन्होंनेगंभीरता से कहा, “मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूं। मैं इस बारे में पूरी तरह गंभीर हूं।” देश के लिए बलिदान को तैयारखान ने यह भी कहा कि वह देश के लिए अपनी जान देने को हमेशा तैयार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ सख्त और निर्णायककार्रवाई की अपील की। साथ ही पहलगाम हमले को अमानवीय और निंदनीय बताया। कौन हैं बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान?बी. ज़ेड. जमीर अहमद खान कर्नाटक के चामराजपेट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और कांग्रेस सरकार में मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। वे कई वर्षों सेराज्य की राजनीति में सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं। राजनीतिक सफर: जेडीएस से कांग्रेस तकखान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल सेक्युलर (JDS) के साथ की थी। 2005 में वे पहली बार विधायक बने और बाद में कांग्रेसमें शामिल हो गए। 2018 से वे कांग्रेस के साथ हैं और मौजूदा सरकार में मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। विवादों से रहा है नाताजमीर अहमद खान इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर दिए गए विवादित बयान और आय से अधिकसंपत्ति के मामले में जांच एजेंसियों की रडार पर आ चुके हैं। 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी।

भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान ने किया बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, रणनीतिक चेतावनी या डराने की कोशिश?

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान केबीच राजनयिक संबंधों में भारी गिरावट आई। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पाकिस्तान ने इसआरोप को सिरे से खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए — जिनमें व्यापारिक प्रतिबंध, डाक सेवाओंकी समाप्ति और बंदरगाहों तक पहुंच रोकने जैसे निर्णय शामिल थे। पाकिस्तान का जवाब: अब्दाली मिसाइल का परीक्षणतनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान ने ‘अब्दाली’ नामक सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। इस मिसाइल कीमारक क्षमता लगभग 450 किलोमीटर बताई जा रही है और यह उन्नत नेविगेशन प्रणाली से युक्त है। पाकिस्तान की सेना ने इसे रूटीन टेस्ट बताया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण भारत के लिए एक स्पष्ट संदेश है। रणनीतिक संदेश या डराने की कोशिश?विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का यह कदम केवल सैन्य क्षमता के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक रणनीति भी हो सकतीहै। भारत ने हाल ही में अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसकी पहुंच 5000 किलोमीटर तक है और जो कई परमाणु हथियार ले जाने मेंसक्षम है। ऐसे में पाकिस्तान का अब्दाली मिसाइल परीक्षण इस शक्ति संतुलन को दर्शाने का प्रयास माना जा सकता है। राजनयिक संबंधों में टूटनइस घटना के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। हवाई और सड़क मार्गों पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, औरव्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत बंद है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: तनाव घटाने की अपीलअमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाओं ने इस स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के नेताओं सेफोन पर बातचीत कर संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी मध्यस्थता की पेशकश करते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया मेंशांति बनाए रखना वैश्विक जिम्मेदारी है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतराभारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में किसी भी स्तर का टकराव केवल सीमित संघर्ष नहीं रह सकता। यदि बातचीत सेसमाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ेगा। आगे की राह: शांति और संवादहालात जितने तनावपूर्ण हों, समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद ही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाए।भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो, इसके लिए कूटनीतिक माध्यमों को अपनाना अनिवार्य हो गया है।