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अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों से प्रभावित अंतराष्ट्रीय छात्र, ACLU ने ट्रंप के फैसले को दी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के फैसलों से प्रभावित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की मदद के लिए शुक्रवार को एक बड़ा मुकदमा दायर किया गयाहै. इस मुकदमे में अदालत से अनुरोध किया गया है कि इन छात्रों की कानूनी स्थिति फिर से बहाल की जाए. इस फैसले से करीब 1100 से ज्यादाविदेशी छात्र प्रभावित हुए हैं. जिन्हें अमेरिका से निकाले जाने का डर सता रहा है बता दें कि यह मुकदमा अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन(एसीएलयू) और उससे जुड़े कई संगठनों ने मिलकर दायर किया है. ये न्यू इंग्लैंड और प्यूर्टो रिको के 100 से अधिक छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहेहैं.मामले में एसीएलयू न्यू हैम्पशायर के कानूनी निदेशक गिल्स बिस्नोनेट ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय छात्र हमारे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का एक अहमहिस्सा हैं. किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वो छात्रों की स्थिति अचानक खत्म कर दे और उन्हें उनकी पढ़ाई पूरी किए बिना देश सेनिकालने की कोशिश करे.मार्च के अंत से अब तक 170 से ज़्यादा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 1,100 छात्रों के वीज़ा या कानूनी स्थितिको खत्म कर दिया गया. ट्रैफिक उल्लंघन को बनाया गया बहानादरअसल ये सब बिना किसी उचित सूचना के हुआ अभी और भी छात्रों के ट्रंप के इस फैसले से प्रभावित होने की संभावना है. वहीं छात्रों का कहना हैकि उन्हें न तो कोई चेतावनी दी गई न ही सफाई का मौका मिला. कुछ मामलों में तो बहुत पुराने और मामूली ट्रैफिक उल्लंघन को भी बहाना बनालिया गया.ट्रंप के इस फैसले से भारत और चीन के भी कई छात्र प्रभावित हुए है. इसमें भारत के मणिकांत पासुला, जो न्यू हैम्पशायर के रिवियरयूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स कर रहे थे. अब अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने और नौकरी की संभावना खो चुके हैं. वहीं चीन के हंगरुई झांग, जोमैसाचुसेट्स में वॉर्सेस्टर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में पीएचडी कर रहे थे. अब अपना रिसर्च असिस्टेंट का काम नहीं कर पा रहे जो उनकी कमाई काएकमात्र जरिया था.गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की कुछ हालिया कार्रवाइयों की वजह से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे 1,000 से ज्यादा विदेशी छात्रोंका वीजा या कानूनी दर्जा खत्म कर दिया गया है. इसके चलते अब ये छात्र न सिर्फ पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं बल्कि उन्हें देश से निकाले जाने काडर भी सता रहा है. वहीं एसीएलयू का कहना है कि सरकार ने छात्रों की कानूनी स्थिति को बिना किसी चेतावनी या उचित प्रक्रिया के खत्म कर दियाजो कि न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.

गोरखपुर में बोले योगी आदित्यनाथ, कहा भीमराव अंबेडकर ने अभाव अपमान में अपना रास्ता बनाकर सामाजित बंधनों को तोड़ते हुए दिलायासम्मान

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भीमराव अंबेडकर ने अभाव अपमान में अपना रास्ता बनाकर सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुएसम्मान दिलाया. विपक्ष के लोग एक्पोज न हो इसके लिए जाति के नाम पर फिर से लड़ाना चाहते हैं इसके लिए महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल कररहे हैं. भारत ने संविधान निर्माण के साथ ही 1952 में अनुसूचित जाति जनजाति अति पिछड़ी जाति और महिलाओं को मत देने का अधिकार दिया. यह बाबा साहेब के कारण ही हो पाया। सीएम डॉ. भीमराव अंबेडकर सम्मान अभियान के तहत आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कररहे थे. उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता का संदेश देने वाला भारत का संविधान बाबा साहेब ने दिया. यह प्रत्येक नागरिक को सम्मान देता है. सीएमने कहा आखिर वो कौन से कारण थे जिनके कारण बाबा साहेब पीड़ित थे. बाबा साहेब ने संविधान तैयार किया,लेकिन कांग्रेस ने उसमें संशोधनकिए.इससे बाबा साहेब परेशान हुए कांग्रेस उनको संविधान सभा में नहीं भेजना चाहती थी. लेकिन उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें शामिल कियागया और ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बने. लेकिन बाबा साहेब ने ऐसा संविधान दिया जो भारत को दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापितकरता है.समाजवादी पार्टी ने गठन के बाद किए षडयंत्रसमाजवादी पार्टी ने अपने गठन के बाद षडयंत्र किए जिसके कारण समाज में अराजकता पैदा हो. कांग्रेस ने तो 1952 के पहले आम चुनाव में बाबासाहेब को हरवाया था. उनके 78 हजार वोट को रद्द करवा दिया. 1954 के उपचुनाव में कांग्रेस ने बाबा साहेब के सचिव को तोड़कर चुनाव लड़वादिया इसमें भी वह हार गए. आज कांग्रेस के नेतृत्व करने वाले राहुल गांधी को संविधान की प्रति लेकर घूमता देखता हु तो लगता है यही कांग्रेस थीजो उनका विरोध करती थी. अपने 65 वर्षों में बाबा साहेब ने जो कर दिया वो और कोई नहीं कर पाया. कांग्रेस ने ज्यादातर समय यूपी और देश मेंशासन किया लेकिन एक भी स्मारक नहीं बनाया.इंग्लैंड के जिस भवन में रहकर बाबा साहेब ने डिग्री ली थी उसे वहां की सरकार बेच रही थी. मोदीसरकार ने उसे लेकर स्मारक बनाया. बाबा साहेब के पांच तीर्थ बनने में सपा, कांग्रेस या आरजेडी किसी का योगदान नहीं है. 26 नवंबर को संविधानदिवस के नाम से मनाया जाता है.बाबा साहेब के नाम पर भाषण देने वाले अनेक आएंगे लेकिन उनके आदर्शों पर चलने वाली केवल भाजपा है। उन्होंनेकहा था अपने अनुयायियों से की शिक्षित बनो, अन्याय के खिलाफ संगठित रहो. हैदराबाद में हिंदुओं को प्रताड़ित किया जा रहा था लेकिन बाबासाहेब ने पत्र लिख कहा था कि निजाम के सामने झुकना नहीं किसी भी हाल में इस्लाम को न स्वीकारना.

आर्थशास्र के प्रोफेसर से लेकर सीएम की कुर्सी तक, कैसे बदली झंझारपुर ने जगन्नाथ मिश्र की किस्मत “क्या है पूरी कहानी जानिए”

बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं. इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार कीराजनीति, उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज के जरिए बता रहा है. इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की पांचवींकड़ी में आज हम आपको झंझारपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे. इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र हैं. उनके बेटे नीतीशमिश्र झंझारपुर के मौजूदा विधायक और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री हैं.ये पहला चुनाव था बज कांग्रेस को झंझारपुर सीट पर हार का सामना करनापड़ा. इस बार जीत हासिल हुई संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के रामफल चौधरी को। राम फल चौधरी ने भारतीय जन संघ के राजेंद्र झा को 8665 वोट सेहरा दिया था.1972 में एक बार फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर अपना परचम लहराया. इस बार जगन्नाथ मिश्र ने यहां से जीत दर्ज की मजेदार बात यहहै कि जगन्नाथ मिश्र एक समय मुजफ्फरपुर में स्थित बिहार यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे थे.बचपन से ही थी राजनीति में रुचि- जगन्नाथ मिश्रहालांकि नियति का चक्र ऐसा घूमा कि उनके बड़े भाई और तब कांग्रेस के कद्दावर नेता ललित नारायण मिश्र ने उन्हें राजनीति में उतार दिया. एलएनमिश्र कितने बड़े राजनीतिज्ञ थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने छोटे भाई जगन्नाथ को मुख्यमंत्री बनाने में उनकी सबसे बड़ीभूमिका थी. खुद जगन्नाथ मिश्र भी बचपन से ही राजनीति में रुचि रखते थे. सो उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ी और उतर गए राजनीति में जगन्नाथमिश्र के तीन बार बिहार के सीएम के तौर पर राज्य की कमान संभालने की शुरुआत यहीं से हुई. हालांकि मिश्र एक बार भी मुख्यमंत्री के तौर पर पांचसाल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके 1972 से 1995 तक जगन्नाथ मिश्र झंझारपुर के विधायक रहे.झंझारपुर से जगन्नाथ मिश्र ने कुल पांच बारचुनाव जीता था 1972 में जगन्नाथ मिश्रा ने मौजूदा विधायक सोशलिस्ट पार्टी के राम फल चौधरी को 36,542 वोट से हरा दिया था.1090 में जगन्नाथ मिश्र ने ही दर्ज की थी जीतदरअसल इसके बाद 1977, 1980, 1985, 1990 में भी इस सीट से जगन्नाथ मिश्र ने ही जीत दर्ज की. 1994 में कांग्रेस के टिकट पर जगन्नाथमिश्र को राज्यसभा भेज दिया गया. इसके बाद उन्होंने इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा. 1995 में जनता दल को सीट पर जीत मिली जनता दल केरामअवतार चौधरी ने कांग्रेस के देव चंद्र झा को 23,029 वोट से हरा दिया.2000 में हुए चुनाव में राजद के जगदीश नारायण चौधरी ने भारतीय जनकांग्रेस (राष्ट्रीय) और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र को 10,049 से हरा दिया था. जगन्नाथ मिश्रा के बाद इस सीट से कांग्रेस को कभीभी झंझारपुर सीट से जीत नहीं मिल पाई. हालांकि उनके बेटे नीतीश मिश्र दो बार जनता दल यूनाइटेड और फिर भारतीय जनता पार्टी के टिकट परयहां सेज जीत दर्ज कर रहे हैं. 2005 में पहली बार नीतीश मिश्र को इस सीट पर जीत मिली.

NPCI ने UPI को लेकर बताया सच, क्या 1 अप्रैल से महंगा हो जाएगा भुगतान “जानें पूरी प्रक्रिया

डिजिटल लेनदेन में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान क्‍या 1 अप्रैल से महंगा होने जा रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स मेंदावा किया जा रहा है कि अगले महीने से 2000 रुपये से ज्‍यादा के यूपीआई भुगतान पर 1.1 फीसदी शुल्‍क देना होगा. हालांकि इस पर फैल रहे भ्रमको दूर करते हुए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने बाकायदा स्‍पष्‍टीकरण जारी किया है. NPCI की मानें तो यूपीआई के जरिये भुगतान आगेभी फ्री और आसान बना रहेगा. इसका ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह पहले की तरह की पूरी तरह मुफ्त रहेगा. इससे पहले कुछ मीडियारिपोर्ट्स में कहा गया था कि 1 अप्रैल से 2000 रुपये से ज्‍यादा के लेनदेन पर 1.1 फीसदी शुल्‍क देना पड़ेगा. डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हीहिस्‍सेदारी सबसे ज्‍यादा होती है. इस कदम से यूपीआई भुगतान को बड़ा झटका लगता और इसी बात को लेकर ग्राहकों में सबसे ज्‍यादा चिंता बढ़ रहीथी. हालांकि, NPCI ने अब इस बारे में स्थिति साफ कर दी है. बैंक खाते से खाते में ट्रांजेक्‍शन की कुल हिस्‍सेदारी 99 फीसदी से ज्‍यादा है.NPCI नेट्वीट कर बताया कि यूपीआई के जरिये हर महीने करीब 8 अरब ट्रांजेक्‍शन होता है. इसका फायदा खुदरा ग्राहकों को मिल रहा है. किसी तरह का नहीं लिया जाएगा शुल्कयह सुविधा आगे भी मुफ्त बनी रहेगी और खाते से खाते में लेनदेन पर किसी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाएगा. इसका मतलब हुआ कि फोनपे, पेटीएम, गूगलपे (Phonepe, Paytm, Google pay) से यूपीआई भुगतान पहले की ही तरह मुफ्त बना रहेगा.NPCI ने इंटरचेंज चार्ज तय कियाहै, लेकिन यह मर्चेंट कैटेगरी पर लगाया गया है. इसकी रेंज 0.5 फीसदी से 1.1 फीसदी तक होगा. ईंधन, एजुकेशन, एग्रीकल्‍चर और यूटिलिटी पेमेंटपर 0.5 फीसदी से 0.7 फीसदी तक इंटरचार्ज देना पड़ेगा. इसके अलावा फूड शॉप, स्‍पेशल रिटेल आउटलेट पर सबसे ज्‍यादा 1.1 फीसदी काइंटरचेंज देना पड़ेगा.पीपीआई यानी प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट एक ऐसी सुविधा है कि जिसमें 10 हजार रुपये तक का लेनदेन किया जा सकता है. इससुविधा में पहले सही रिचार्ज की तरह पैसे डाले जाते हैं और उसके जरिये सामान खरीदने या किसी को पैसे भेजने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है. NPCI ने कहा है कि इसी तरह के भुगतान पर इंटरचार्ज शुल्‍क 1 अप्रैल से लिया जाएगा. अब पीपीआई के जरिये 2000 रुपये से ज्‍यादा का भुगतानकिया गया तो 1.1 फीसदी शुल्‍क देना पड़ेगा.

मुर्शिदाबाद हिंसा में दोनों समुदाय अब चाहते है शांति, अब है सबसे बड़ा सवाल किसने लगाई आग

पिछले करीब एक सप्ताह से हिंसा की आग में जल रहे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के धूलियान शहर में शुक्रवार को तनावपूर्ण शांति दिखी. भारीसंख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. हिंदू क्षेत्र हो या फिर मुस्लिम क्षेत्र दोनों ही जगह लोगों में भय और डर का माहौल है. दोनों समुदाय केलोग चाहते हैं शांति, भाईचारा और मिलजुल कर रहना रीना बीबी कहती हैं. पता नहीं हमारे धूलियान को किसकी नजर लग गई. घर में हम भी बंद हैं, नुकसान सभी का है. उपद्रवियों को ढूंढ़कर निकाला जाए और जो भी हो दंडित किया जाए.हिंसा के दूसरे दिन सरजू महलदार को पैर में गोली लगी।बताया कि शाम को 6 बजे की नमाज के बाद जैसे ही वह मस्जिद से निकल रहा था. इसी दौरान कहीं से गोली आई और उसके पैर में लगी. उसके पैरमें 60 टांके लगे हैं। उसका भाई हजरत देखने पहुंचो तो उसे पीठ पर किसी छर्रे जैसी किसी चीज से उसे चोट लगी. इसी तरह से इसी वार्ड के सातवर्षीय अख्तर महलदार के गर्दन में चोट लगी.धूलियान की वार्ड नंबर चार हाथीचित्रा की रीना बीबी कहती हैं पता नहीं हमारे धूलियान को किसकीनजर लग गई है. देश की ताकत है एकताहमारे देश की ताकत ही एकता में है भाईचारा हमारी सभ्यता है. धूलियान में कभी ऐसा नहीं हुआ जैसा कि पिछली शुक्रवार को हुआ. दिल दुखता हैमन भरा हुआ है. हम एक साथ मिलकर हर पर्व मनाते हैं. दीपावली में हम हिंदुओं के घर जाते हैं और ईद पर वे हमारे यहां आते हैं. उपद्रवियों कोखोजकर सजा दी जाए.आपको बाहर से शांति भले ही दिखाई दे रही हो लेकिन यह शांति सुरक्षाबलों के चलते है. पिछले शुक्रवार की घटना को यादकरते हुए वार्ड नंबर 5 की विभा अग्रवाल कहती है उस दिन की घटना याद करके जी सिहर उठता है. अगर उस वक्त घर का दरवाजा बंद नहीं होता तोहमारी लाश ही मिलती हम डर के साए में जी रहे हैं.मोहम्मद जमीरुद्दीन कहते हैं हम हिंदू और मुस्लिम हजारों सालों से एक साथ मिलकर रहते हैं. यहजो इतनी बड़ी घटना हो गई इसके लिए कौन जिम्मेदार है. अच्छे से जांच होनी चाहिए जो भी हो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. चाहे वहकिसी भी धर्म का हो हर किसी ने कुछ न कुछ खोया है. प्रशासन दें कड़ी से कड़ी सजाहम भी तो इसी धरती के हैं हम कहीं बाहर से तो नहीं आए हैं जब कोई कहता है कि मुसलमान दंगाई हैं तो दिल बहुत दुखता है. रुआंसे जमीरुद्दीनकहते हैं हमारी दुकान है. हिंदू भी हमारे कस्टमर हैं हम भी तो ईद में हिंदुओं की दुकान से सामन लाते हैं. पता नहीं क्या हो गया इसके मास्टर माइंड कोखोजे प्रशासन और कड़ी से कड़ी सजा दे. इस हिंसा ने हमारी पढ़ाई छीन ली हैजबसे हिंसा हुई है, कॉलेज बंद हैं इसलिए जा नहीं पा रही हूं. इंटरनेटबंद हैं मेरी जैसे हजारों बच्चों की पढ़ाई छीन गई है इसमें हमारा क्या दोष है अगर रास्ते में चली भी जाउं तो गोलीबारी हो रही है. सरकार से कहनाचाहती हूं कि ये सब बंद किया जाए शांति हो जाए हमको पढ़ने का मौका मिले यह सब कुछ कब तक चलेगा.