मनोज श्रीवास्तव ने की देव भूमि सम्भल की यात्रा, प्राचीन मंदिरों का किया दर्शन

संभल: भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत तिब्बत सहयोग मंच के क्षेत्र संयोजक, मनोज श्रीवास्तव ने 16 अप्रैल को देव भूमिसम्भल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के प्राचीन मंदिरों का दर्शन किया और धार्मिक स्थलों की पुनर्निर्माण गतिविधियों का अवलोकन किया। प्राचीन हनुमान मंदिर और हरियर मंदिर की परिक्रमामनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सम्भल में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की हाल ही में पुनः प्राण प्रतिष्ठा की गई है, जिसका उन्होंने दर्शन किया। इसकेअलावा, उन्होंने सम्भल के प्रसिद्ध हरियर मंदिर (जिसे वर्तमान में सम्भल जमा मस्जिद के नाम से जाना जाता है) की परिक्रमा भी की। श्रीवास्तव ने इसेएक ऐतिहासिक घटना बताया, यह दावा करते हुए कि वह और उनके सहयोगी संभवतः पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 500 वर्षों के बाद इस मंदिर कीपरिक्रमा की। पुलिस चौकी का निरीक्षण और परिवारिक मित्र के साथ जलपानसम्भल यात्रा के दौरान श्रीवास्तव ने जमा मस्जिद के सामने स्थित नई पुलिस चौकी का भी निरीक्षण किया, जो अच्छे रूप से तैयार हुई है। इस यात्रा केदौरान उनके साथ वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह तोमर भी थे। बाद में, श्रीवास्तव और उनके सहयोगी सम्भल में अपने परिवारिक मित्र रूपसिंह राणा के यहां जलपान करने पहुंचे। नगीना में स्वागत और आगामी यात्रा की योजनाइसके अतिरिक्त, नगीना में कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत का आयोजन किया गया। श्रीवास्तव ने यह भी साझा किया कि यह यात्रा उनकी व्यक्तिगत यात्राथी और वह जल्द ही लखनऊ से वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सम्भल का दौरा करेंगे। देव भूमि सम्भल का महत्वमनोज श्रीवास्तव ने सभी मित्रों से निवेदन किया कि जब भी वे सम्भल का उल्लेख करें, तो उसे “देव नगरी सम्भल” के रूप में ही लिखें या बोलें। उन्होंनेइस क्षेत्र को तीर्थों का तीर्थ बताया, जहां भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का प्रवास हुआ था और कई अन्य पवित्र स्थान स्थित हैं। श्रीवास्तव ने अपनी यात्रा का समापन “जय कल्कि भगवान की” और “जय पवित्र स्थल देव भूमि सम्भल की” के उद्घोष के साथ किया।सम्भल की यात्रा से जुड़ी आगामी योजनाएंमनोज श्रीवास्तव ने बताया कि भविष्य में, वह और उनके वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही सम्भल का दो दिवसीय दौरा करेंगे, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिकमहत्व के स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा।
पूनम ढिल्लों बनी थी 15 साल में मिस इंडिया, यश चोपड़ा के सामने रखी थी शर्तें “जानें कौन है पूनम ढिल्लों”

अगर 80 के दशक की चुनिंदा अभिनेत्रियों का जिक्र हो तो पूनम ढिल्लों की गिनती उसमें टॉप की अभिनेत्रियों में होती है. सिर्फ 16 साल की उम्र मेंअपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली अभिनेत्री पूनम ढिल्लों फेमिना मिस इंडिया का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं. पूनम ढिल्लों ने बॉलीवुड सेलेकर टीवी सीरियल तक में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है. आज अभिनेत्री अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं इस मौके पर जानते हैं. उनसे जुड़ेकुछ रोचक किस्से और कैसे पूनम ढिल्लों को मिली उनकी पहली फिल्म.18 अप्रैल 1962 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मीं पूनम ढिल्लों एक ऐसेपरिवार से आती हैं जहां फिल्में ज्यादा नहीं देखी जाती हैं. पूनम ढिल्लों ने साल 1977 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया और सिर्फ16 साल की उम्र में ही बॉलीवुड में एंट्री मार दी. वो भी यश चोपड़ा जैसे निर्देशक की फिल्म से पूनम ढिल्लों ने अपने करियर में तकरीबन 90 फिल्मेंकी हैं. इस दौरान उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ कई फिल्मों में नजर आई. पूनम ढिल्लों को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली इसके पीछे भी एकबड़ा ही रोचक किस्सा है. मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद पूनम ढिल्लों सुर्खियों में आ गईं. जब वह स्कूल में ही थीं तभी बॉलीवुड के दिग्गजनिर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा पूनम ढिल्लों के पास फिल्म ‘त्रिशूल’ का ऑफर लेकर पहुंच गए थे. हालांकि पूनम और उनका परिवार इसके लिए राजीनहीं था. यश चोपड़ा के साथ रखी थी शर्तइसलिए खुद यश चोपड़ा पूनम के परिवार से बात करने और उनके पिता को समझाने उनके घर गए थे. लेकिन पूनम ढिल्लों ने यश चोपड़ा के सामनेएक शर्त रख दी थी उन्होंने यश चोपड़ा जैसे निर्देशक के सामने शर्त रखी कि वो फिल्म की शूटिंग सिर्फ स्कूल की छुट्टियों में ही करेंगी. यश चोपड़ा नेपूनम की ये शर्त मानी और कुछ इस तरह हुई पूनम ढिल्लों की फिल्मों में एंट्री.पूनम ढिल्लों को अपनी पहली ही फिल्म ‘त्रिशूल’ में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, संजीव कुमार और हेमा मालिनी जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने का मौका मिला. इस फिल्म से जुड़ा भी एक किस्सा काफी चर्चित हैफिल्म के एक सीन में शशि कपूर को पूनम ढिल्लों को थप्पड़ मारना था. लेकिन निर्देशक यश चोपड़ा चाहते थे कि सीन ज्यादा रियल लगे इसलिएउन्होंने इस सीन के बारे में पूनम ढिल्लों को नहीं बताया. जब सीन शूट हुआ तो शशि कपूर ने पूनम ढिल्लों को सच में एकदम से तेज थप्पड़ मार दिया. पूनम ढिल्लों इससे पूरी तरह से अनजान थीं इसलिए वो अवाक रह गईं हालांकि बाद में शशि कपूर ने पूनम ढिल्लों से माफी भी मांगी थी.18 अप्रैल1962 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मीं पूनम ढिल्लों एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां फिल्में ज्यादा नहीं देखी जाती हैं. पूनम ढिल्लों ने 1977 में खिताब किया था नामपूनम ढिल्लों ने साल 1977 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया और सिर्फ 16 साल की उम्र में ही बॉलीवुड में एंट्री मार दी. वो भीयश चोपड़ा जैसे निर्देशक की फिल्म से पूनम ढिल्लों ने अपने करियर में तकरीबन 90 फिल्में की हैं. इस दौरान उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ कईफिल्मों में नजर आई.पूनम ढिल्लों को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली इसके पीछे भी एक बड़ा ही रोचक किस्सा है. मिस इंडिया का खिताब जीतने केबाद पूनम ढिल्लों सुर्खियों में आ गईं. जब वह स्कूल में ही थीं तभी बॉलीवुड के दिग्गज निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा पूनम ढिल्लों के पास फिल्म‘त्रिशूल’ का ऑफर लेकर पहुंच गए थे. हालांकि पूनम और उनका परिवार इसके लिए राजी नहीं था. इसलिए खुद यश चोपड़ा पूनम के परिवार से बातकरने और उनके पिता को समझाने उनके घर गए थे. लेकिन पूनम ढिल्लों ने यश चोपड़ा के सामने एक शर्त रख दी थी उन्होंने यश चोपड़ा जैसे निर्देशकके सामने शर्त रखी कि वो फिल्म की शूटिंग सिर्फ स्कूल की छुट्टियों में ही करेंगी. यश चोपड़ा ने पूनम की ये शर्त मानी और कुछ इस तरह हुई पूनमढिल्लों की फिल्मों में एंट्री.
हिमाचल के निगमों- बोर्डों के करीब 7 हजार कर्मिंयों को बड़ा झटका, सु्प्रीम कोर्ट ने कहा राज्य सरकार 1999 की पेंशन योजना को निरस्तकरने में है सक्षम

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक फैसला किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार कर्मचारी पेंशन, पारिवारिक पेंशन, पेंशन औरग्रेच्युटी योजना को निरस्त करने में सक्षम है. शीर्ष अदालत के इस फैसले से हिमाचल के निगमों-बोर्डों के करीब 7 हजार कर्मियों को बड़ा झटका लगाहै. शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच ने बीते दिन एक याचिका खारिज कर दी जिसमें राज्य सरकार पर 11,500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीयअसर पड़ने की बात कही गई थी.चिकाकर्ताओं ने हिमाचल स्टेट फॉरेस्ट, सिविल सप्लाई, एचपीटीडीसी, एचपीएमसी और अन्य उपक्रमों के कर्मियोंके लिए अप्रैल 1999 में शुरू की गई पेंशन योजना के तहत उन्हें लाभ देने से इन्कार किए जाने वाली अधिसूचना को चुनौती दी थी. सरकार ने वित्तीयहालत की वजह से इस योजना को वर्ष 2004 में बंद कर दिया था इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्तिउज्ज्वल भुयान ने की. सरकार इस योजना को वापस लेने के लिए है सक्षमदरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इस योजना को वापस लेने के लिए सक्षम है और याचिका को गलत बताते हुए खारिज किया.हिमाचल प्रदेशराज्य वन विकास निगम लिमिटेड के सेवानिवृत्त कर्मियों ने यह याचिका दायर की थी. पीठ ने कहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों कीपीठ ने माना था कि सरकार ने पूर्ववर्ती पेंशन योजना के तहत पेंशन पाने के अधिकार में कटौती नहीं की है. लेकिन उन्हें इस योजना के तहत अतिरिक्तलाभ नहीं मिलेंगे. पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत लिए निर्णय को अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है. यह भीकहा कि शिकायत के लिए उचित रास्ता समीक्षा या उपचारात्मक याचिका है.पेंशनर्स संघ के सदस्य गोविंद चितरांटा ने कहा कि सरकार जब1,36,000 कर्मियों को ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ दे सकती है तो कॉर्पोरेशन से सेवानिवृत्त करीब 7 हजार कर्मचारी क्यों गले की हड्डी बने हैं. सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले पर अभी पेंशनर यूनियन कानूनी सलाह ले रही है उसके बाद ही आगे की रणनीति तय होगी.
60 साल की उम्र में शादी के बंधन में बंधेंगे भाजपा नेता दिलीप घोष, बोले मेरी मां चाहती थी कि मेरी भी शादी हो “मां का सपना कर रहा हूं पूरा”

पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष 60 साल की उम्र में शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं वे अपनी भाजपा की सहयोगी रिंकू मजूमदारसे शादी करने जा रहे हैं. शादी आज यानी 18 अप्रैल को कोलकाता में उनके आवास पर होने की खबर है. 60 वर्षीय भाजपा नेता अब तकअविवाहित हैं .सूत्रों के मुताबिक कुणाल घोष और देबांगशु भट्टाचार्य सहित कई तृणमूल नेताओं ने इस अवसर पर भाजपा नेता को बधाई दी.दिलीपघोष के करीबी लोगों के ने बताया कि दोनों की मुलाकात सुबह की सैर के दौरान हुई और समय के साथ उनका रिश्ता मजबूत होता गया. न्यू टाउन मेंएक निजी समारोह में दोनों की शादी होगी. जिसमें करीबी रिश्तेदार भी शामिल होंगे. कहा यह भी जा रहा है कि शादी का प्रस्ताव दुल्हन पक्ष की ओरसे दिया गया थ.पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार समेत वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने सुबह घोष के न्यू टाउन स्थित आवास पर जाकर उन्हेंशुभकामनाएं दीं. मेरी मां चाहती थी कि मैं कर लूं शादी- दिलीप घोषदरअसल उनके करीबी एक भाजपा नेता ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में आईपीएल मैच के दौरान दिलीप घोष और उनकी होने वाली पत्नीशामिल हुए थे. अब उन्होंने शादी करने का फैसला किया.इससे पहले दिलीप घोष ने कहा है कि मेरी मां चाहती थीं कि मैं शादी कर लूं इसलिए उनकीइच्छा का सम्मान करते हुए मैं विवाह बंधन में बंध रहा हूं. मैं पहले की तरह सक्रिय राजनीति में बना रहूंगा. मेरे निजी जीवन का मेरे राजनीतिक कार्योंपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. दरअसल दुल्हन का नाम रिंकू मजूमदार है रिंकू लंबे समय से भाजपा कार्यकर्ता हैं उन्होंने पार्टी की महिला शाखा ओबीसीमोर्चा, हथकरघा प्रकोष्ठ और कई अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं की जिम्मेदारी संभाली है. मजूमदार की यह दूसरी शादी है और उनका एक बेटा भी है.आएदिन अपने बयानों की वजह से जाने जाने वाले दिलीप घोष युवावस्था से ही आरएसएस के सदस्य रहे हैं. 2015 में भाजपा में सक्रिय होने से पहलेउन्होंने देश भर में विभिन्न भूमिकाओं में इसकी सेवा की. राज्य अध्यक्ष के रूप में उन्हें पश्चिम बंगाल में माकपा की जगह भाजपा को मुख्य विपक्षी दलके रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है. खड़गपुर से थे पूर्व सांसदखड़गपुर के पूर्व सांसद दिलीप घोष से अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है.बंगाल में पार्टी केपूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता दिलीप घोष का हाल ही में दिया गया बयान चर्चा में है. जब उन्होंने कथित तौर पर हिंदू समुदाय के सदस्यों से घर परहथियार रखने का आह्वान किया था. हाल ही में वक्फ कानून को लेकर हुई हिंसा के दौरान हिंदुओं के घरों को निशाना बनाए जाने की खबरें थीं. मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी. उत्तर 24 परगना मेंएक सार्वजनिक रैली में घोष ने कथित तौर पर कहा, ‘हिंदू टेलीविजन सेट, रेफ्रिजरेटर और नए फर्नीचर खरीद रहे हैं. उनके घर में एक भी हथियार नहींहै. जब कुछ होता है तो वे पुलिस को बुलाते रहते हैं। पुलिस आपको नहीं बचाएगी.
इरफान के आभामंडल से बाहर निकलना ही उनकी असली जीत, बाबिल खान की 90 मिनट की धांसू एक्टिंग शो रील

सोशल मीडिया हम सबके जीवन को कुछ न कुछ हद तक न सिर्फ प्रभावित करने लगा है बल्कि देखा जाए तो हमारे जीवन को अपने काबू में भी करनेलगा है. कभी सिर्फ घंटी सुनकर फोन तक जाने वाला हमारा अपना हाथ अब हमारे अपने काबू में नहीं है. हमें हर मिनट दो मिनट बाद फोन चेक करनेकी खुजली लगी रहती है. कहीं कोई मैसेज तो नहीं आया कहीं कोई नोटिफिकेशन न मिस हो जाए या फिर सोशल मीडिया पर क्या कुछ चल रहा है. वो न छूट जाए हममें से अधिकतर ‘फोमो’ (फियर ऑफ मिसिंग आउट) सिंड्रोम का शिकार हो चुके हैं. सोशल मीडिया और डिजिटल लाइफ का असरअब इतना है कि हमारी मुख्यधारा के सिनेमा का ये विषय बनने लगा है.‘खो गए हम कहां’ और ‘कंट्रोल’ की श्रृंखला की ही अगली कड़ी है फिल्म‘लॉगआउट और, जैसा कि फिल्म के क्लाइमेक्स में एक यूजर का कमेंट लिखकर आता है. बेटर एक्टिंग दैन नेपो किड्स’ तो बाबिल ने इस फिल्म मेंतमाम दूसरे स्टार किड्स से कहीं बेहतर एक्टिंग वाकई की है.सोशल मीडिया से पैसे कमाना अब एक नया करियर बन चुका है. कहावतें हो रहीं है सचरंग लगे न फिटकरी रंग भी आवे चोखा जैसी कहावतें सच हो रही हैं. एक मोबाइल घर में वीडियो एडिट का एक छोटा सा सिस्टम और बन गए आपसोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अपनी रीच और अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए कोई पैंट उतारकर नाच रहा है तो कोई दूसरों की पोस्ट पर फेक अकाउंटके जरिये कमेंट्स करके अपने दिल की भड़ास निकाल रहा है. नैतिकता और अनैतिकता को भूल चुकी एक पूरी आबादी की फिल्म है ‘लॉगआउट’ बसदिक्कत इस फिल्म के साथ ये है कि इसमें जिस आबादी पर मोबाइल फोन के असर की बात की जा रही है वही फिल्म में नहीं है.फिल्म ‘लॉगआउट’ जिस एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की कहानी है उसका किरदार शुरू में ही साम, दाम, दंड, भेद से अपनी इमेज बनाने वाली की बताई जाती है. जिस उत्पाद का उसे होर्डिंग्स पर प्रचार करते दिखाया जाता है अपने निजी जीवन में वह उसका ठीक उलट करता भी दिखता है. यानी कि उसका नैतिकचरित्र शून्य है उसूलों पर जब आंच आए तो टकराना जरूरी है. तो अब वसीम बरेलवी से शाहरुख खान ने भी सीख लिया है. यहां मामला बाबिल खानका है वह किसी तरह अपने ‘बाबा’ इरफान के आभामंडल से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं और यहां फिर एक बार इसमें सफल होते भी दिख रहे हैं. बाबिल पर है दबावबाबिल पर बहुत दबाव है इरफान की विरासत को संभालने का भी और उनकी तरह न दिखने का भी बहुत संकट वाली स्थिति है.खैर, फिल्म‘लॉगआउट’ देखते समय धीरज का पहली जरूरत है. इसकी पटकथा ठीक ऊंट की पीठ जैसी हैं घुटनों पर आते इसे ज्यादा समय तो नहीं लगता. लेकिन बैठेगी ये किस करवट, ये इसे लिखने वाले बिस्वपति सरकार भी आखिर तक सोचते ही रहते हैं. बिस्वपति सरकार उस गैंग के लीडर हैं. जिसनेटीवीएफ छोड़कर पोशमपा पिक्चर्स नामक कंपनी बनाई है. इस फिल्म को बनाया है जियो का हिस्सा बन चुके वायकॉम18 स्टूडियोज ने. उनकाअपना जियो हॉटस्टार एप है. लेकिन रिलीज ये हो रही है जी5 पर न्यूटन के पास भी शायद ही इस रचनात्मक गति का कोई नियम रहा हो. लेकिनक्रिया के बदले प्रतिक्रिया का न्यूटन का सिद्धांत फिल्म में बिस्वपति सरकार ने खूब संभाला है. कहानी में कुछ खास सरप्राइजिंग एलीमेंट तो नहीं है परहां रोचकता इसमें बनी रहती है.
पंजाब में करीब 14 धमाके करने वाले मास्टरमाइंड आतंकी हरप्रीत सिंह को अमेरिका में किया गिरफ्तार,FBI की हुई बड़ी कामयाबी

अमेरिका में रहने वाले आतंकी हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया को गिरफ्तार कर लिया है एफबीआई और अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने उसे अपनेशिकंजे में ले लिया है. वह पिछले छह महीनों में पंजाब में 14 आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है आतंकी भारत के सबसे वांछित आतंकियों में से एकहै. उस पर 5 लाख रुपये का इनाम था वह अभी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इंफोर्समेंट) की हिरासत में है. सूत्रों के मुताबिक, हैप्पी पासिया नेपाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ मिलकर आतंकी हमलों को अंजाम दिया. हैप्पी पासिया ने पंजाबके पुलिस प्रतिष्ठानों पर कई आतंकी हमले किए और सोशल मीडिया पर उनकी जिम्मेदारी ली.इससे पहले 23 मार्च को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने2024 चंडीगढ़ ग्रेनेड हमला मामले में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) आतंकवादी संगठन के चार आतंकवादी गुर्गों के खिलाफ आरोप पत्र दायरकिया था. आरोप पत्र दायर करने वाले आरोपियों में पाकिस्तान स्थित नामित व्यक्तिगत आतंकवादी हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा और अमेरिका स्थितहरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया शामिल हैं. दोनों आतंकवादी हमले के पीछे मुख्य संचालक और साजिशकर्ता थे.बारुद कराया गया था मुहैयादरअसल उन्होंने ग्रेनेड हमले को अंजाम देने के लिए चंडीगढ़ में भारत स्थित जमीनी गुर्गों को रसद सहायता, आतंकी फंड, हथियार और गोला-बारूदमुहैया कराया था. सितंबर 2024 के हमले का मकसद पंजाब पुलिस के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को निशाना बनाना था.जांच से पता चला कि रिंदाने हैप्पी पासिया के साथ मिलकर ग्रेनेड हमले के जरिए कानून प्रवर्तन अधिकारियों और आम जनता के बीच आतंक फैलाने की साजिश रची थी. उसका मकसद बीकेआई के आतंकवादी एजेंडे को बढ़ावा देना था उन्होंने रोहन मसीह और विशाल मसीह नाम के स्थानीय गुर्गों की भर्ती की, जिन्हेंउनके सीधे निर्देशों के तहत हमला करने का काम सौंपा गया था. जांच में पता चला कि रिंदा और हैप्पी ने अन्य आरोपियों रोहन मसीह और विशालमसीह को ग्रेनेड फेंकने से पहले दो बार लक्ष्य की टोह लेने का निर्देश दिया था.इससे पहले पिछले साल दिसंबर में पंजाब पुलिस ने बब्बर खालसाइंटरनेशनल (बीकेआई) की ओर संचालित पाकिस्तान-आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया था.पांच सदस्यों की गिरफ्तारी थी शामिलइसमें मास्टरमाइंड अभिजोत सिंह सहित इसके पांच सदस्यों की गिरफ्तारी भी शामिल थी. सभी बटाला और गुरदासपुर में दो पुलिस प्रतिष्ठानों पर हैंडग्रेनेड फेंकने में शामिल थे.अमृतसर के गुमटाला पुलिस पोस्ट के बाहर रात करीब 8.45 बजे विस्फोट हुआ. शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया था कि एककार का रेडिएटर फट गया था लेकिन हैप्पी पासिया ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह एक फर्जी मुठभेड़ में अपने दो साथियों कीहत्या का बदला लेने के लिए किया गया था.अमृतसर के गुमटाला पुलिस पोस्ट के बाहर रात करीब 8.45 बजे विस्फोट हुआ. शुरुआती रिपोर्टों में कहागया था कि एक कार का रेडिएटर फट गया था. लेकिन हैप्पी पासिया ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह एक फर्जी मुठभेड़ में अपनेदो साथियों की हत्या का बदला लेने के लिए किया गया था.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार से फिर उठा एक बार मुद्दा, आईजीएन अध्यक्ष तारिक अलबनई बोले भारत है सीट का प्रमुख दावेदार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में विस्तार का मुद्दा एक बार फिर उठा है. यूएनएससी में सुधारों पर इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशंस (IGN) केअध्यक्ष तारिक अलबनई ने कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार होता है तो भारत सीट का प्रमुख दावेदार होगा. उन्होंने कहा कि सुधारपरिषद का लक्ष्य प्रतिनिधित्वपूर्ण होना चाहिए. भारत आज वैश्विक मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी है संयुक्त राष्ट्र 193 देशों का सदस्य है. यह विचारसभी के लिए और संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों के लिए प्रतिनिधित्वपूर्ण है. अलबनई ने कहा कि यदि यह निर्णय लिया जाता है कि परिषद के सदस्योंकी संख्या 21 से बढ़ाकर 27 की जाएगी. तो निश्चित रूप से भारत इसमें दावेदार होगा और व्यापक सदस्यता के निर्णय के अधीन होगा. सुधार की राहजटिल है लेकिन हम आगे बढ़ने की दिशा में स्थिर और सार्थक कदम उठा रहे हैं.उन्होंने कहा कि 1965 में निर्वाचित सदस्यों की संख्या में वृद्धि केअलावा सुरक्षा परिषद का पहला दौर 80 वर्षों से अधिक समय तक चला है. सुधार के बाद परिषद जो भी रूप ले उसे अगली सदी तक टिकने के लिएडिजाइन किया जाना चाहिए. जो समावेशिता, पारदर्शिता, दक्षता, प्रभावशीलता, लोकतंत्र और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित हो.विस्तारितसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कितने सदस्य होने चाहिए. इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि अलबनई ने कहा कि इस पर अभीतक कोई निर्णय नहीं हुआ है. दिखाई गई गति से उत्साहितलेकिन जो संख्या बताई जा रही है वह 21 से 27 सदस्य देशों के बीच है उन्होंने कहा कि भारत का रुख हमेशा से ही टेक्स्ट-आधारित वार्ता की ओरजल्द से जल्द बढ़ने का रहा है.अलबनई ने कहा कि वे इस सत्र में सदस्य देशों द्वारा दिखाई गई गति से उत्साहित हैं. सुधार की भावना के लिए साहसऔर रचनात्मकता दोनों की आवश्यकता होती है. और सभी प्रतिनिधिमंडलों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है क्योंकि हम सुरक्षा परिषद सुधार केमुख्य तत्वों पर आम सहमति बनाने के लिए काम कर रहे हैं. अलबनई ने कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि यह सुधार 2030 तक होगा या किसीअन्य वर्ष में मैं इस बात को लेकर बहुत सकारात्मक हूं कि जो भी बाधाएं हैं. उन्हें तोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि लोग समझ रहे हैं कि हमें कुछ अलगकरने की जरूरत है और सदस्य देश यह समझ रहे हैं. विकास और मानवधिकारों से निपटने का एक ही सहारादरअसल शांति और सुरक्षा, विकास और मानवाधिकारों सहित सभी मुद्दों से निपटने के लिए विश्व समुदाय के पास यही सहारा है. हम सभी एक बेहतरसंयुक्त राष्ट्र बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया इसका एक अभिन्न अंग है.इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में भारत केस्थायी प्रतिनिधि, पी. हरीश ने जी-4 देशों ब्राजील, जर्मनी, जापान और भारत की ओर से एक बयान में आईजीएन की बैठक में कहा कि मौजूदासंयुक्त राष्ट्र संरचना एक अलग युग की है. जो अब अस्तित्व में नहीं है तथा वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताएं इस संरचना की समीक्षा की मांगकरती हैं. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता को वर्तमान 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने की जरूरत है. संशोधित परिषद में 11 स्थायीसदस्य और 14 या 15 अस्थायी सदस्य होने चाहिए.
पश्चिम बंगाल की हिंसा पर टिप्पणी करने वाले बांग्लादेश को भारत ने सुनाई खरी खोटी, कहा ऐसी टिप्पणियों का करते है बहिस्कार

International Realtion: पश्चिम बंगाल की हिंसा पर टिप्पणी करने वाले बांग्लादेश को भारत ने खरी-खरी सुनाई है. विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेशके बयान का संज्ञान लिया और कहा कि पड़ोसी देश को अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है. बांग्लादेश की टिप्पणी से बिफरे भारत ने दो टूक लहजे में कहा हम पश्चिम बंगाल की घटनाओं के संबंध में बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियोंको अस्वीकार करते हैं. ऐसी टिप्पणी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत की चिंताओं का समाधान करने की जगह हिंसा की घटनाओं केसाथ समानता दिखाने का छिपा हुआ और धूर्त प्रयास है.भारत ने बांग्लादेश को आइना दिखाया और कहा वहां हिंसा जैसे कृत्यों में संलिप्त अपराधीखुलेआम घूमते रहते हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पड़ोसी देश को भारत के मामलों में अनुचित टिप्पणी करने और खुद को अच्छा बताने के बजायबांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. बांग्लादेश के साथ सकारात्मक संबंध बनाने की उम्मीदगौरतलब है कि एक दिन पहले ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत और बांग्लादेश संबंधों से जुड़े एक सवाल पर कहा था किभारत बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की उम्मीद करता है. हम एक लोकतांत्रिक समावेशी बांग्लादेश के पक्ष में हैं. बता देंकि तल्ख होते रिश्तों के कारण पिछले सप्ताह भारत ने बांग्लादेश को मध्य पूर्व यूरोप और अन्य देशों के लिए अपने बंदरगाहों और हवाई अड्डों केमाध्यम से दी जाने वाली ट्रांसशिपमेंट सुविधा वापस लेने की घोषणा की थी.बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया और मुख्यसलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने एक बयान में कहा था कि भारत और पश्चिम बंगाल की सरकार को अल्पसंख्यक मुस्लिमआबादी की पूर्ण सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए. आलम ने कहा कि वे मुसलमानों पर हमले की निंदा करते हैं जिससे जान-माल काबड़ा नुकसान हुआ है. विपक्ष ने किया बड़े पैमाने पर विरोधदरअसल संसद से वक्फ संशोधन बिल पारित होने के बाद विपक्ष ने बड़े पैमाने पर विरोध का एलान किया. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबादसहित कई हिस्सों में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुआ. सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को लेकर भाजपा ने बंगाल कीसत्तारूढ़ पार्टी- तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया है. भाजपा ने अनियंत्रित हालात को देखते हुए राष्ट्रपति शासन लगानेकी मांग की है.बांग्लादेश में भी पिछले साल बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी. अगस्त, 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागनापड़ा था. ढाका की सड़कों पर हुई हिंसा के दौरान देश के अल्पसंख्यकों खास तौर पर हिंदू समुदाय के लोगों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया. सरकार पर हिंसा रोकने में विफल रहने के आरोप लगे इसके बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध तल्ख हैं.