तरुण चुग का केजरीवाल पर हमला, भ्रष्टाचार और घोटालों का चेहरा बन गए हैं मुख्यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री, तरुण चुग, ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर कड़ा हमला करते हुए कहाकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि अरविंद केजरीवाल, जो खुद को ईमानदार नेता बताते थे, अब देश में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं।उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अब भ्रष्टाचार और घोटालों में लिप्त एक संगठित गिरोह के रूप में सामने आ रही है। दुर्गेश पाठक की छापेमारी: भ्रष्टाचार का पर्दाफाशतरुण चुग ने दुर्गेश पाठक के घर पर सीबीआई की छापेमारी को एक अहम कदम बताया और इसे केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार की साजिश काखुलासा बताया। उन्होंने कहा कि यह वही दुर्गेश पाठक हैं, जो गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी की राजनीतिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे, औरदिल्ली के शराब घोटाले से निकाले गए अवैध धन को ‘चंदा’ के रूप में गोवा चुनाव में खर्च किया गया था। ईमानदारी का ढोंग और विदेशी फंडिंग घोटालाचुग ने यह भी कहा कि 2016 में कनाडा में आयोजित एक संदिग्ध धन संग्रह कार्यक्रम और उसमें विदेशी नागरिकों की संलिप्तता, यह दर्शाती है कियह केवल चुनावी धांधली नहीं थी, बल्कि देश की चुनावी प्रणाली पर एक सुनियोजित हमला था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही मोबाइल नंबरऔर ईमेल से बार-बार धन भेजा गया और एक ही पहचान पत्र का बार-बार इस्तेमाल किया गया, जो कि आम आदमी पार्टी की योजनाओं का हिस्साथा। केजरीवाल का भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से भ्रष्टाचार तक का सफरतरुण चुग ने कहा कि जब जांच एजेंसियां इस प्रकार के भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई करती हैं, तो आम आदमी पार्टी हमेशा राजनीतिक प्रतिशोध काआरोप लगाकर बचाव में उतर आती है। हालांकि, अब जनता यह समझ चुकी है कि जिन नेताओं ने सबसे ज्यादा शोर मचाया था, वही असल में सबसेबड़े दोषी हैं। चुग ने यह भी कहा कि जो अरविंद केजरीवाल कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का चेहरा बनने का दावा करते थे, वे आज खुदभ्रष्टाचार के प्रतीक बन गए हैं और उनकी पार्टी अब सत्ता के लिए भूखी एक ऐसी मशीन बन चुकी है, जो न नैतिकता जानती है, न ही कानून का डर।
दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का आम आदमी पार्टी पर हमला, सचदेवा बोले- AAP अब ‘चंदाखोर पार्टी’ बन चुकी है

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब AAP सिर्फ “चंदाचोर” नहीं, बल्कि “चंदाखोर पार्टी” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने पार्टी फंड में आई रकम का दुरुपयोग किया है।शराब नीति से जुड़ा भ्रष्टाचार, गोवा चुनाव में खर्च का दावावीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की शराब नीति से जो पैसा जुटाया गया था, उसका इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया था। उस समयदुर्गेश पाठक गोवा चुनाव प्रभारी थे और उन्होंने उसी फंड से पार्टी के नाम पर मिले पैसे को हड़प लिया। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में शराब नीति कीकमाई को पार्टी फंड में दिखाया गया और वहीं से गड़बड़ी की गई। दुर्गेश पाठक पर ‘चंदा घोटाले’ का आरोपभाजपा नेता ने कहा कि दुर्गेश पाठक ने अपनी ही पार्टी के चंदे को चुराकर खुद को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार लालू यादव कीपरंपरा से भी आगे निकल चुका है। यदि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है तो उन्हें डर क्यों लग रहा है? जांच एजेंसियों पर विश्वास, रिपोर्ट से होंगे कई खुलासेवीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं और एक बार पूरी रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में अन्यनेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक सच्चाई नहीं खुलती, आम आदमी पार्टी इस तरह की झूठी बयानबाज़ी सेजनता को गुमराह करने की कोशिश करती रहेगी। AAP पर शासन के बजाय सिर्फ प्रचार का आरोपदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी पर दिल्ली और पंजाब की सरकारों में सिर्फ़ खजाने की लूट का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुएकहा, “अब इनके पास केवल एक ऐसा नेता बचा है जो स्टेज तो संभाल सकता है लेकिन राज्य नहीं।”
आम आदमी पार्टी नेता दुर्गेश पाठक का आरोप,गुजरात में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से डरकर मेरे घर भेजी गई CBI

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुजरात सह प्रभारी दुर्गेश पाठक ने CBI की छापेमारी को राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया किगुजरात में पार्टी की बढ़ती मजबूती से घबराकर उन्हें डराने के लिए उनके दिल्ली स्थित आवास पर CBI की रेड करवाई गई। प्रेस वार्ता में उन्होंने कहाकि इस कार्रवाई का उद्देश्य आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भय पैदा करना है। 3-4 घंटे तक चली जांच, कोई साक्ष्य नहीं मिलादुर्गेश पाठक ने बताया कि CBI की टीम उनके घर पहुंची और 3 से 4 घंटे तक बेड, अलमारी, किताबें और हर कोना खंगाला, लेकिन उन्हें कोईआपत्तिजनक चीज नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि CBI की टीम बिना स्पष्ट जानकारी दिए आई और केवल एक सर्च वारंट दिखाया गया। जांचके दौरान एजेंसी के अधिकारियों ने उनके घर से केवल कुछ आधार कार्ड की फोटोकॉपी साथ ले गए, जो उनके अनुसार लोगों द्वारा मदद के लिए छोड़ेगए थे। गुजरात में पार्टी के विस्तार को रोकने की साजिशदुर्गेश पाठक ने कहा कि उन्हें हाल ही में गुजरात का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है और पार्टी ने वहां काम शुरू किया है। उन्होंने आरोप लगाया किCBI की यह कार्रवाई इसी कार्य को बाधित करने और आप के अभियान को कमजोर करने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस रेड का मकसदकार्यकर्ताओं में डर का माहौल बनाना है ताकि कोई AAP के साथ खड़ा न हो। पहले भी नेताओं को बनाया गया निशानापाठक ने याद दिलाया कि पिछले गुजरात विधानसभा चुनावों में AAP को 5 सीटें और 41 लाख से अधिक वोट मिले थे, जिससे पार्टी एक मजबूतविकल्प के रूप में उभरी थी। इसके बाद पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यह रेड भी उसीकड़ी का हिस्सा है। CBI जांच में सहयोग का भरोसा, डरने से इंकारउन्होंने कहा कि वे एक जिम्मेदार नागरिक हैं और किसी भी एजेंसी की जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। जो भी दस्तावेज या जानकारी मांगी जाएगी, वह प्रदान करेंगे। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वह डरने वाले नहीं हैं। भाजपा लोकतंत्र के लिए खतरा बनती जा रही हैमीडिया से बात करते हुए दुर्गेश पाठक ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को खत्म करने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा किभाजपा विपक्षी नेताओं को जेल में डालने, उनके संसाधन खत्म करने और कार्यकर्ताओं को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दीकि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
रामपुर कांड पर राहुल गांधी का BJP पर हमला, दलित बेटियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक 11 वर्षीय दलित बच्ची के साथ हुई अमानवीय घटना पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक और हृदयविदारक करार देते हुए राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।“दलित बेटियां BJP राज में असुरक्षित” – राहुल गांधीराहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि भाजपा सरकार में दलित और विशेष रूप से बेटियां पूरीतरह असुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा की दलित और महिला विरोधी सोच का नतीजा है, जिससे अपराधियों को कानून काकोई भय नहीं रह गया है। प्रशासन से की कठोर कार्रवाई की मांगकांग्रेस नेता ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़िता व उसके परिवार को शीघ्र न्याय दिलायाजाए। उन्होंने पूछा, “आख़िर कब तक यूपी की बेटियां इस तरह की दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी?” राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचलराहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर योगीसरकार पर हमलावर है, वहीं राज्य सरकार इस मामले की जांच की प्रक्रिया में जुटी है।
भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज, जल्द हो सकता है नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठकआयोजित की गई, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक का मकसद संगठन में बदलाव और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर चर्चाकरना था। बैठक में शाह, राजनाथ और बीएल संतोष की मौजूदगीप्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बीएल संतोष ने भी हिस्सा लिया।सूत्रों के अनुसार, भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। संभावना जताई जा रही है कि अध्यक्ष पद के चुनाव कीघोषणा आगामी एक सप्ताह के भीतर हो सकती है। राज्य स्तर पर भी होंगे बदलावबैठक में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ राज्यों में संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी विचार किया गया। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों के नामों पर मंथन हुआ। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में लगभग छह राज्यों में नएअध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। चुनाव से पहले रणनीति को मजबूती देने की कोशिशइन संगठनात्मक फेरबदल को भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरपर मजबूत नेतृत्व से चुनावों में सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू की जाएगी। जनवरी में होना था अध्यक्ष पद का चुनावगौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव जनवरी में प्रस्तावित था, लेकिन यह अब तक लंबित है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, देरी काकारण एक ऐसे नेता का चयन करना है जो संगठनात्मक दृष्टिकोण से मजबूत और प्रभावशाली हो। वरिष्ठ नेताओं से चल रही लगातार बैठकेंभाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की है। मंगलवार रात को उनकेआवास पर अमित शाह, राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल समेत कई केंद्रीय मंत्री उपस्थित थे। इन बैठकों का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिनमाना जा रहा है कि ये चर्चाएं पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर हैं।नड्डा फिलहाल विस्तार पर, नए अध्यक्ष की प्रतीक्षाजेपी नड्डा, जो केंद्रीय मंत्री भी हैं, फिलहाल अपने कार्यकाल के विस्तार पर बने हुए हैं। जब तक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता, वे अपने पद पर बनेरहेंगे। वहीं, भाजपा राज्य अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता दे रही है, जो अपेक्षा से अधिक लंबी हो चुकी है।
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 9वीं से 12वीं तक के शिक्षकों को अस्थायी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने दी सीमित राहतपश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कुछ शिक्षकों को अस्थायी तौर पर कार्यरत रहने की अनुमति दीहै। कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए राहत दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है किग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। नया भर्ती विज्ञापन 31 मई तक अनिवार्यमुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार को 31 मई 2025 तक नई भर्ती केलिए विज्ञापन जारी करना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी की जानी चाहिए, अन्यथाकड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 3 अप्रैल के आदेश में 25 हजार नियुक्तियां रद्द3 अप्रैल 2025 को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हुई 25 हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्यघोषित कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि 2016 में आयोजित यह नियुक्ति प्रक्रिया धांधली और धोखाधड़ी से भरी हुई थी। राज्य सरकार की अपील पर छात्रों के लिए राहतराज्य सरकार ने छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि शिक्षकों को फिलहाल कार्य पर बने रहने दियाजाए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि केवल 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की पढ़ाई को देखते हुए शिक्षकों को अस्थायी रूप से काम करनेकी छूट दी जा रही है। 2016 की परीक्षा में भारी भागीदारी और घोटाले के आरोप2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित इस भर्ती परीक्षा में 23 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 25 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को नौकरी मिली, लेकिन बाद में यह सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था। कोर्ट की सख्त चेतावनीसुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अगर राज्य सरकार तय समयसीमा में नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं करती है तो वह सख्त कार्रवाई के लिएबाध्य होगी। साथ ही, केवल शिक्षा के नुकसान को देखते हुए यह अंतरिम राहत दी गई है, स्थायी नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा।
तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी की मुश्किलें बढ़ीं, मद्रास हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया

तमिलनाडु सरकार में मंत्री के पोनमुडी की समस्याएं बढ़ती दिख रही हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उनके द्वारा सनातन तिलक की तुलना सेक्सपोजिशन से करने के विवादित बयान पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस को आदेश दिया कि पोनमुडी के खिलाफमामला दर्ज किया जाए और रिपोर्ट सरकार को पेश की जाए। जनहित याचिका और हाईकोर्ट का आदेशमद्रास हाईकोर्ट में पोनमुडी के बयान को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में पोनमुडी को मंत्रिमंडल से अयोग्य ठहराने की मांग कीगई थी। उच्च न्यायालय ने पोनमुडी की टिप्पणियों को “अत्यंत अपमानजनक” बताते हुए कार्रवाई की आवश्यकता जताई। न्यायाधीश ने कहा कि इसतरह के बयानों के खिलाफ भी वही कार्रवाई होनी चाहिए, जैसी भ्रष्टाचार के मामलों में की जाती है। इसके बाद डीएमके ने पोनमुडी को पार्टी के उपमहासचिव पद से हटा दिया था, और उन्होंने अपने बयान पर माफी भी मांगी थी। विवाद और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियायह विवाद तब शुरू हुआ जब पोनमुडी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सनातन तिलक को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने तिलक की तुलनाशारीरिक संबंधों से जुड़ी चुटकुले सुनाते हुए की, जिससे कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं भी असहज हो गईं। बीजेपी नेताओं ने इसे लेकर मुख्यमंत्रीएम.के. स्टालिन से सवाल किए और पोनमुडी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पर डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी पोनमुडी की टिप्पणीकी आलोचना की और इसे अस्वीकार्य बताया। राज्यपाल ने भी की थी आलोचनाराज्यपाल आर एन रवि ने पोनमुडी की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “अत्यधिक अपमानजनक” और “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कियह महिलाओं के प्रति असम्मानपूर्ण भाषा का प्रयोग था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पोनमुडी ने सिर्फ महिलाओं का अपमान नहीं किया, बल्कि हिंदू धर्म के शैव और वैष्णव प्रतीकों का भी अपमान किया। कोर्ट ने पोनमुडी पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दियामद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पोनमुडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो कोर्ट अवमानना का मामला शुरू कर सकती है। जस्टिसएन आनंद वेंकटेश ने राज्य के डीजीपी से इस मामले में जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस प्रकार, पोनमुडी की टिप्पणी ने तमिलनाडु में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद पैदा कर दिया है, और अब मामले में कानून की प्रक्रियाआगे बढ़ने की संभावना है।
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, केंद्र को 7 दिन में जवाब देने का निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को उसके बादपांच दिनों में प्रत्युत्तर देने को कहा गया है। नई नियुक्तियों पर रोक और स्थिति को यथावत बनाए रखने का निर्देशसुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस अवधि में वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड में कोई नई नियुक्तिनहीं की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक पहले से पंजीकृत या अधिसूचित वक्फ को न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न हीकिसी कलेक्टर को बदला जाएगा। वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन की प्रतिक्रियावरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, जिन्होंने वक्फ बोर्ड को लेकर याचिका दायर की थी, ने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंनेकहा कि जब उन्होंने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया, तब उनसे कहा गया कि पहले हाई कोर्ट में जाएं, और उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई।लेकिन अब जब अन्य पक्ष अदालत पहुँचे हैं, तो तुरंत सुनवाई और अंतरिम आदेश पारित हो रहे हैं। “क्या सभी के लिए समान मापदंड नहीं होने चाहिए?”विष्णु शंकर जैन ने यह भी कहा कि पिछले 13 वर्षों से चार राज्यों के हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई लंबित है, लेकिन उस परकोई अंतरिम आदेश नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या न्यायिक प्रणाली में समानता नहीं होनी चाहिए? संवैधानिक पीठ के गठन की मांगसीनियर वकील ने सुझाव दिया कि वक्फ कानून से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक ही उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि सुनवाई मेंएकरूपता बनी रहे। साथ ही, उन्होंने छह महीने के भीतर एक संवैधानिक पीठ के गठन की भी मांग की ताकि इन मामलों का निष्पक्ष और शीघ्रसमाधान किया जा सके।
राष्ट्रपति को निर्देश नहीं दे सकती अदालत, उपराष्ट्रपति धनखड़ का सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय में राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयकों पर समयबद्ध निर्णय लेने की समयसीमा निर्धारित की थी।इस फैसले पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतों को राष्ट्रपति को निर्देश देने का कोई अधिकारनहीं है। अनुच्छेद 142 पर सवालधनखड़ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142, जो सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ के लिए विशेष अधिकार देता है, अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए24×7 उपलब्ध “न्यूक्लियर मिसाइल” बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है और सभी को अपनी संवैधानिकसीमाओं में रहकर कार्य करना चाहिए। न्यायपालिका की भूमिका पर उठाए सवालराज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि न्यायपालिका अब कानून बनाने, कार्यपालिका का कार्य करने और ‘सुपरसंसद’ के रूप में कार्य करने की दिशा में बढ़ रही है, जबकि इसकी कोई संवैधानिक जवाबदेही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का लोकतंत्र भारत कीकल्पना नहीं थी। राष्ट्रपति के अधिकार और गरिमा पर ज़ोरधनखड़ ने कहा कि राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और वे संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं। उन्होंने न्यायपालिका को चेताते हुए कहा कि राष्ट्रपतिको निर्देश देना संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने अनुच्छेद 145(3) का हवाला दिया, जिसके अनुसार संविधान की व्याख्या केवल पांच याअधिक न्यायाधीशों की पीठ द्वारा की जा सकती है। न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएंउपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायिक आदेशों की सीमा होनी चाहिए और न्यायपालिका को कार्यपालिका या संसद की भूमिका में नहीं आना चाहिए। उन्होंनेन्यायपालिका की भूमिका को लेकर कहा कि यदि न्यायाधीशों को कोई विशेष कार्य करना है, तो उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार पर टिप्पणीधनखड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के आवास पर कथित रूप से जले हुए नकदी मिलने के मामले पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसघटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच कार्यपालिका का कार्य है, नकि न्यायपालिका का। सुप्रीम कोर्ट का तर्कसुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए बिलों पर राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर निर्णय लेना चाहिए। कोर्टने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को पॉकेट वीटो या पूर्ण वीटो का असीमित अधिकार नहीं है और उनके फैसलों की न्यायिक समीक्षा संभव है।