मुरैना में पशु क्रूरता और सड़क हादसे की दो बड़ी घटनाएं, पुलिस ने की कार्रवाई

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक महिला और उसके बेटे पर तीन पिल्लों की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने का आरोप लगा है। यह घटना मुरैना शहरके महावीरपुरा क्षेत्र की है। पुलिस ने इस मामले में सलमा नाम की महिला और उसके बेटे अरमान खान के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम केतहत केस दर्ज किया है। वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाईकोतवाली थाना क्षेत्र के उपनिरीक्षक शिवम चौहान ने बताया कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गौरक्षा समिति के सदस्योंने पुलिस से शिकायत की। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया। बुधवार सुबह आरोपी के घर के पीछे एक और पिल्ला और एक कुतिया मृत पाएगए। इन जानवरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बारात से लौटते समय दर्दनाक सड़कहादसा, एक की मौत, पांच घायलएक अन्य घटना में मुरैना जिले में बारात से लौट रहे छह युवकों की कार ट्रैक्टर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए, वहीं ट्रैक्टर के अगले दोनों पहिए टूट गए। हादसे के बाद सभी घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाकी पांच का इलाज जारी है। कार में सवार युवक भिंड जिले के रहने वालेमृतक की पहचान मनोज पुत्र राकेश राठौर के रूप में हुई है, जो अपने पांच साथियों—राघवेंद्र, प्रशांत, अमित, विकास और आकाश राठौर के साथमुरैना की राठौर कॉलोनी में एक बारात में शामिल होने आए थे। सभी युवक भिंड जिले के फूफ कस्बे के निवासी हैं। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक कोभी चोटें आई हैं। पुलिस ने ट्रैक्टर जब्त कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
बेंगलुरु में रिहैब सेंटर में मरीज के साथ क्रूरता, आरोपी गिरफ्तार

बेंगलुरु के पास एक निजी रिहैब सेंटर में एक मरीज के साथ क्रूरता की घटना सामने आई है। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है किएक व्यक्ति को एक कमरे में बंद कर दिया गया, फिर उसे घसीटते हुए और डंडे से पीटा गया। इस घटना ने आसपास के लोगों में आक्रोश पैदा करदिया, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सीसीटीवी फुटेज से खुलासासीसीटीवी फुटेज में दिखाया गया है कि एक मरीज को बेरहमी से डंडे से पीटा गया, जबकि कुछ लोग यह सब देख रहे थे। जैसे-जैसे वीडियो आगेबढ़ता है, मरीज को घसीटा जाता हुआ और फिर डंडे से पिटाई की जाती है। यह घटना बेंगलुरु से लगभग 30 किलोमीटर दूर नेलमंगला में एक निजीपुनर्वास सुविधा की है। आक्रमण में शामिल लोग गिरफ्तारपुलिस ने बताया कि यह वीडियो हाल ही में सामने आया है, लेकिन घटना पहले की है। इसमें शामिल सभी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया हैऔर पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। जन्मदिन के मौके पर खंजर से केक काटते हुए दिखे आरोपीहमले से जुड़ी अन्य फोटोज में कुछ आरोपी जन्मदिन मनाते हुए और खंजर से केक काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसघटना की जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भाषा को धर्म से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण विचलन

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के अकोला जिले की पातुर नगर परिषद के साइनबोर्ड पर उर्दू भाषा के उपयोग को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि “भाषा धर्म नहीं है और न ही यह किसी एक धर्म का प्रतिनिधित्व करतीहै।” उन्होंने इसे “विविधता में एकता” की भावना से भटकाव बताया। पूर्व पार्षद की याचिका पर सुनवाईयह याचिका नगर परिषद की पूर्व पार्षद वर्षाताई संजय बागड़े ने दायर की थी। उनका कहना था कि नगर परिषद को केवल मराठी भाषा में कार्यकरना चाहिए और सार्वजनिक साइनबोर्ड पर उर्दू का प्रयोग अनुचित है। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट और स्थानीय काउंसिल ने भी इस याचिका कोखारिज कर दिया था। संपर्क का माध्यम है भाषा, न कि धर्म का प्रतीकन्यायालय ने स्पष्ट किया कि भाषा, संचार का माध्यम होती है और इसका उद्देश्य लोगों के बीच विचारों का आदान-प्रदान है। उर्दू को केवल एक धर्मविशेष से जोड़ना ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण से गलत है। अदालत ने कहा कि उर्दू भारत में पली-बढ़ी और विकसित हुई इंडो-आर्यन भाषाहै, जो अनेक संस्कृतियों और समुदायों के मेल से उभरी है। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल है उर्दूपीठ ने उर्दू को हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बताया और कहा कि यह भाषा विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोगों कोजोड़ती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि हिंदी और उर्दू के बीच कृत्रिम विभाजन औपनिवेशिक दौर की नीतियों का परिणाम है, जिससे भाषाओं कोधर्म से जोड़ा गया। हिंदी-उर्दू का अटूट संबंधअदालत ने टिप्पणी की कि आज हम जिन शब्दों को हिंदी मानते हैं, उनमें से कई की जड़ें उर्दू में हैं। यहां तक कि ‘हिंदी’ शब्द भी फ़ारसी के ‘हिंदवी’ सेउत्पन्न हुआ है। बिना उर्दू शब्दों के हिंदी में दैनिक बातचीत की कल्पना नहीं की जा सकती। राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन नहींअदालत ने यह स्पष्ट किया कि उर्दू भाषा के उपयोग से महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण (राजभाषा) अधिनियम 2022 का कोई उल्लंघन नहीं होता, क्योंकि अधिनियम सिर्फ मराठी के उपयोग को अनिवार्य करता है, अन्य भाषाओं के प्रयोग पर रोक नहीं लगाता। पूर्वाग्रहों से उबरने की अपील न्यायालय ने अंत में कहा कि किसी भाषा के प्रति पूर्वाग्रह को दूर करना आवश्यक है और यह देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और अपनानेका समय है। “आइए हम उर्दू समेत हर भाषा से मित्रता करें, क्योंकि यही हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं।” याचिका खारिज, हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहरायासुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि याचिका कानून की गलतव्याख्या पर आधारित थी, इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता।
मुजफ्फरपुर में भीषण अग्निकांड: दलित बस्ती में आग से चार मासूमों की मौत, कई लापता

रामपुर मनी गांव की दलित बस्ती में लगी भीषण आगबिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बरियारपुर थाना क्षेत्र के रामपुर मनी गांव की एक दलित बस्ती में अचानक आग लगने से हाहाकार मच गया। इस हादसेमें लगभग दो दर्जन से अधिक घर जलकर राख हो गए। आग इतनी भयंकर थी कि चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे अबभी लापता हैं। मृतकों की पहचान अंशिका कुमारी (5 वर्ष), ब्यूटी कुमारी (8 वर्ष), सृष्टि कुमारी (6 वर्ष), और विपुल कुमार (10 वर्ष) के रूप में हुईहै। इनमें से तीन बच्चे एक ही परिवार से थे। लापता बच्चों की तलाश जारीअधिकारियों के अनुसार, लापता बच्चों की तलाश में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौकेपर पहुंची और घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। भगवानपुर में मिठाई की दुकान में सिलेंडर ब्लास्टएक अन्य घटना में भगवानपुर यादव नगर चौराहे स्थित मिठाई की दुकान में गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। दुकान में कई सिलेंडर रखे हुएथे, जिससे एक के बाद एक कई धमाके हुए। इस घटना में पांच दुकानें जलकर खाक हो गईं। स्थानीय लोगों ने बहादुरी दिखाते हुए कई सिलेंडरों कोसमय रहते बाहर निकाल दिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। चिराग पासवान का घटना पर दुख और त्वरित कार्रवाई का आग्रहलोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इस हृदयविदारक हादसे को “जीती-जागती त्रासदी” करार दिया। उन्होंने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमोंको रद्द कर मुजफ्फरपुर जाने का निर्णय लिया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया और राज्य सरकार सेपीड़ितों के लिए मुआवजा, घायलों को बेहतर इलाज और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्यचिराग पासवान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को तुरंत राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी स्थानीय स्तर पर राहत और पुनर्वास कार्योंकी निगरानी करेगी। प्रशासन की प्रतिक्रिया और मुआवजे की घोषणाजिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मौके का निरीक्षण कर घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आग लगने का कारण घरेलू गैस सिलेंडर का विस्फोटहै। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है और प्रभावितों की सहायता के लिए राहत कार्य जारी है। जांच और सहायता प्रक्रिया जारीफिलहाल स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया है और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा क्षतिका मूल्यांकन किया जा रहा है और लापता बच्चों की तलाश अब भी जारी है।
मुर्शिदाबाद हिंसा पर सियासी घमासान,योगी-ममता के बीच जुबानी जंग तेज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंनेकहा कि बंगाल में हिंसा लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। योगी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी दंगाइयों को‘शांति दूत’ कहती हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा, “दंगाइयों का इलाज सिर्फ डंडा है। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दंगाइयों को खुली छूट दी जा रही है, जो किअराजकता को बढ़ावा दे रही है।” ममता बनर्जी का पलटवार: ‘योगी सबसे बड़े भोगी’योगी के बयानों पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी ने कोलकाता में इमामों की एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथबड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन वह सबसे बड़े भोगी हैं। यूपी में महाकुंभ के दौरान कई लोगों की जान गई और मुठभेड़ों में कई लोगों की मौत हुई।”ममता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में नागरिकों को खुलकर बोलने और रैली करने की आजादी नहीं है, जबकि पश्चिम बंगाल में सभी कोलोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हैं। हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ: ममता का आरोपमुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर ममता बनर्जी ने दावा किया कि इसमें सीमा पार के तत्वों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा, “क्या अंतरराष्ट्रीय सीमाकी रक्षा बीएसएफ की जिम्मेदारी नहीं है? अगर सीमा से अराजक तत्व आ रहे हैं, तो इसके लिए केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है।”उन्होंने हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और राज्य के मुख्य सचिव को बीएसएफ कीभूमिका की जांच के निर्देश भी दिए। बीजेपी का पलटवार: “ममता दंगाइयों को संरक्षण देती हैं”ममता बनर्जी के ‘भोगी’ बयान पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। यूपी बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “योगीजी ने दंगाइयों के खिलाफबयान दिया, जो ममता बनर्जी को नागवार गुज़रा क्योंकि वह खुद दंगाइयों को संरक्षण देती हैं।” उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश कोदंगामुक्त बनाया है, और ममता को यूपी मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए। शुभेंदु अधिकारी का समर्थन, योगी को बंगाल बुलाने की मांगपश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “योगी जी ने बंगाल कीअराजकता के खिलाफ जो आवाज़ उठाई, उसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। NHRC और NCW के प्रतिनिधियों के आने से स्थिति कीगंभीरता स्पष्ट होती है। योगी जी को खुद बंगाल आकर लोगों से संवाद करना चाहिए।” सियासी टकराव तेज, केंद्र-बंगाल रिश्तों में नई तल्खीमुर्शिदाबाद हिंसा एक तरफ जहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुकी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सुरक्षा जिम्मेदारियोंको लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है।
जस्टिस बी.आर. गवई होंगे भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को संभालेंगे पदभा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में 14 मई 2025 को कार्यभार संभालेंगे। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने न्यायपालिका की परंपरा के अनुरूपअपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश की है। सीजेआई पद के लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरीमुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कानून मंत्रालय से मिले अनुरोध के बाद जस्टिस बी.आर. गवई के नाम की सिफारिश औपचारिक रूप से की, जिसेअब मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है। सीजेआई खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हो रहा है, जिसके तुरंत बाद वरिष्ठता क्रम केअनुसार जस्टिस गवई सर्वोच्च पद पर नियुक्त होंगे। जस्टिस बी.आर. गवई का न्यायिक सफरजस्टिस गवई ने अपने न्यायिक करियर की शुरुआत बॉम्बे हाईकोर्ट से की थी, जहां उन्हें 2003 में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने कईसंवेदनशील मामलों की सुनवाई करते हुए न्यायिक प्रणाली में अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त कियागया था। वे न्यायपालिका के वरिष्ठतम जजों में से एक हैं और अब उनकी वरिष्ठता के आधार पर उन्हें सीजेआई की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।दलित समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीशजस्टिस गवई देश के पहले दलित मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस के.जी. बालकृष्णन के बाद दूसरे होंगे। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सामाजिकसमरसता और न्याय प्रणाली में विविधता के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
वक्फ संशोधित कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक से इनकार, अगली सुनवाई गुरुवार को

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी.वी. संजयकुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में दाखिल करीब 70 याचिकाओं पर विचार किया। इन याचिकाओं में वक्फ संशोधनकानून की कई धाराओं को संविधान के विरुद्ध बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई है। प्रसिद्ध वकीलों की बहस, अंतरिम आदेश की संभावनासुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जैसे नामचीन वकीलों ने पक्ष रखा।शुरुआत में चीफ जस्टिस ने संकेत दिया कि कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करेगा जो “इक्विटी” को संतुलित करेगा। उन्होंने कहा कि जो संपत्तियां कोर्टद्वारा वक्फ घोषित की गई हैं, उन्हें फिलहाल गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा और कलेक्टर की कार्रवाई जारी रह सकती है। हालांकि, अंत में कोर्ट ने इसपर कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की गई। राज्य सरकारें कानून के समर्थन में उतरींवहीं दूसरी ओर, कई राज्य सरकारें इस कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। छत्तीसगढ़, असम, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा औरराजस्थान ने याचिकाकर्ताओं की मांगों का विरोध करते हुए मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी। इन राज्यों का कहना है कि वक्फ संशोधनकानून संविधान के अनुरूप है और इसे रद्द नहीं किया जाना चाहिए। CJI की सिब्बल को सलाह – मुख्य बिंदु रखेंसुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने लंबी दलीलें पेश करनी शुरू कीं, तो मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें संक्षिप्त रहने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि दाखिले की शुरुआती सुनवाई के स्तर पर समय की कमी होती है, इसलिए 1, 2, 3 के बिंदुओं में अपना पक्ष रखें। साथ ही, कोर्ट नेयह स्पष्ट किया कि उन्हें केवल दो सवालों के जवाब चाहिए – क्या इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए या इसे हाईकोर्ट भेजा जानाचाहिए, और याचिकाकर्ता किन मुद्दों पर बहस करना चाहते हैं। केंद्र सरकार का रुख – कानून को खतरा नहींकेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भरोसा जताया है कि यह कानून, जिसे संसद ने पारित किया है, उसे कोर्ट निरस्त नहीं करेगा। सरकार का मानना है किवक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पूरी तरह से संवैधानिक है और समाजिक व कानूनी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फैसला सुप्रीम कोर्ट में ही होगा सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और अगली सुनवाई गुरुवारको होगी।