सेना ने अखनूर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की, एक जेसीओ शहीद

जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में पाकिस्तान से घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को सेना ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) शहीद हो गए, हालांकि भारतीय सेना के बहादुर जवानों नेआतंकवादियों को एलओसी पार करने से रोक लिया। किश्तवाड़ में आतंकवादियों से मुठभेड़, तीन आतंकी मारे गएइससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सेना ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। सेना की जारी ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के एकशीर्ष कमांडर सैफुल्ला समेत अन्य आतंकवादी मारे गए। इन आतंकवादियों ने पिछले एक साल से चेनाब घाटी क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों कोअंजाम दिया था। मुठभेड़ में एक जेसीओ घायल हुए, और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई है और तलाश अभियान जारी है। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और फ्लैग मीटिंगयह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा प्रबंधन के मुद्दों पर चर्चा के लिए हुई फ्लैग मीटिंग के दो दिन बाद सामने आई। दोनों देशों के ब्रिगेडकमांडर स्तर की बैठक में सीमा पार से हो रही आतंकवादी गतिविधियों और संघर्ष विराम उल्लंघन पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। बैठक के बादभी आतंकवादियों ने घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन सेना ने उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया।
बेंगलुरु में मॉरल पुलिसिंग का मामला, मुस्लिम युवती और हिंदू युवक से की गई बदसलूकी, 4 गिरफ्तार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक मुस्लिम युवती और हिंदू युवक के साथ पार्क में बैठने को लेकर बदसलूकी और हिंसा का मामला सामने आयाहै। यह घटना शहर के चंद्रा लेआउट इलाके की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पार्क में बैठना बना अपराध, मारपीट तक पहुँची बातजानकारी के अनुसार, बुधवार 9 अप्रैल 2025 को एक बुर्का पहने युवती अपने हिंदू मित्र के साथ स्कूटी पर बैठी थी। तभी मुस्लिम समुदाय के कुछयुवकों ने उन्हें घेर लिया और सवाल-जवाब करने लगे। युवती से पूछा गया कि वह किसके साथ और क्यों बैठी है, वहीं युवक से पूछा गया कि वहदूसरे धर्म की लड़की के साथ क्यों है। इसके बाद युवक को धमकाते हुए पास ले जाकर लकड़ी के डंडे से पीटा गया। घटना का वीडियो वायरल, पुलिस ने लिए एक्शन मेंघटना का वीडियो सामने आने के बाद बेंगलुरु पुलिस हरकत में आई और शुक्रवार तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें एक नाबालिगभी शामिल है। डीसीपी वेस्ट एस गिरिश ने बताया कि पीड़ित लड़की की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्टकिया कि फिलहाल गंभीर हिंसा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है। प्रियांक खड़गे का विवादित बयान, सोशल मीडिया पर रोषइस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “यह उत्तर प्रदेश, बिहार या मध्य प्रदेश नहीं है। कर्नाटक में ऐसीहरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएँगी।” उनके इस बयान पर सोशल मीडिया में नाराजगी जताई जा रही है, और कई लोगों ने इसे क्षेत्रीय राजनीति से प्रेरितऔर भड़काऊ बताया है। युवती ने दिखाई बहादुरी, लड़कों को दिया जवाबघटना के दौरान युवती ने घबराने के बजाय आरोपियों का डटकर सामना किया। वायरल वीडियो में उसे बेरुखी और धमकियों का विरोध करते हुएसाफ देखा जा सकता है। वह स्पष्ट रूप से कहती है कि उसे किसी के साथ बैठने या दोस्ती करने का अधिकार है। पुलिस की सतर्कता और आगे की कार्रवाईबेंगलुरु पुलिस इस घटना की गंभीरता से जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसीघटनाओं को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और अपराधियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी।
दिल्ली एयरपोर्ट पर धूल भरी आंधी से मची अफरा-तफरी, 50 से अधिक फ्लाइटें प्रभावित

आंधी से उड़ा एयरपोर्ट का संचालनशनिवार शाम दिल्ली में आई तेज धूल भरी आंधी ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर संचालन व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावितकिया। मौसम की खराबी के चलते 50 से अधिक घरेलू उड़ानों में देरी हुई, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों को 12 घंटे तकएयरपोर्ट पर रहना पड़ा। टर्मिनल-3 पर भारी भीड़, यात्रियों को परेशानीफ्लाइट्स में देरी के कारण टर्मिनल-3 पर भारी भीड़ जमा हो गई। यात्रियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अव्यवस्था और बदइंतजामी की शिकायतकी। भीड़भाड़ के हालात को देखते हुए टर्मिनल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। फ्लाइट्स लेट, रद्द और डायवर्टसूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह तक 50 से ज्यादा उड़ानें देरी से चलीं। करीब 25 विमानों को दूसरे रूट पर डायवर्ट करना पड़ा और 7 उड़ानों को रद्दकर दिया गया। यात्रियों ने एयरलाइंस के खराब प्रबंधन को इस संकट का जिम्मेदार बताया। सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सायात्रियों ने ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भीड़भाड़ और अव्यवस्था के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। एक यूजर ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरइंडिया को टैग करते हुए लिखा, “यह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं, बस स्टैंड से भी बदतर है।” एयर इंडिया का जवाबएयर इंडिया ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी कि मौसम की खराबी के कारण उड़ानों में बाधा आई है और उनकी टीम यात्रियों की मदद के लिएकाम कर रही है। इंडिगो फ्लाइट को छह बार किया गया रिशेड्यूलइंडिगो एयरलाइंस को भी यात्रियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने शिकायत की कि उड़ानों को बार-बार रिशेड्यूल किया गया। एक यूजरने लिखा कि कोलकाता से दिल्ली आने वाली फ्लाइट 6E 2198 को छह बार बदला गया, लेकिन यात्रियों को कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। यात्रियों की मांग – पैसा वापस करेंबार-बार उड़ान टालने से परेशान यात्रियों ने कंपनियों से रिफंड की मांग की और कहा कि यात्रियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राष्ट्रपति को विधेयकों पर निर्णय के लिए तीन महीने की सीमा

तमिलनाडु राज्यपाल विवाद से जुड़ा मामलातमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा राज्य विधानसभा से पारित 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट नेऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्यपाल की इस कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए कहा कि राष्ट्रपति को भी विधेयकों पर निर्णय लेने केलिए सीमित समय के भीतर कार्य करना होगा। राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर करना होगा निर्णयजस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को तीनमहीने के भीतर निर्णय देना आवश्यक है। यदि इस अवधि से अधिक समय लगता है, तो इसके लिए वैध कारण दर्ज करने होंगे और राज्य सरकार कोसूचित करना होगा। पूर्ण वीटो की अवधारणा अस्वीकार्यपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति को भी राज्यपाल की तरह पूर्ण वीटो (indefinite withholding) का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी जोड़ा कि यदिराष्ट्रपति समयसीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लेते हैं, तो राज्य सरकारें उनके खिलाफ रिट याचिका दाखिल कर सकती हैं।संविधान के अनुच्छेद 201 पर टिप्पणीफैसले में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी विधेयक पर मंजूरी देने या अस्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन इसमें समय-सीमा नहीं दी गई थी। कोर्ट ने इस शून्यता को संविधान के संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया और इसे मनमानी शक्तियों कासंकेत माना। संवादहीनता से बचने पर जोरसुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर तत्परता से विचार करना चाहिए, वहीं राज्य सरकारों को केंद्र केसुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए। पारदर्शिता और संवाद केंद्र-राज्य संबंधों में विश्वास बनाए रखने में सहायक होंगे। संविधानिक सलाह और पारदर्शिता जरूरीन्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई विधेयक असंवैधानिकता के आधार पर रोका जा रहा हो, तो राष्ट्रपति को अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीमकोर्ट से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही, निर्णय के कारणों को राज्य सरकार को सूचित किया जाना अनिवार्य है ताकि वे आवश्यक संशोधन कर सकें। सरकारिया और पुंछी आयोग की सिफारिशों का हवालाफैसले में सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) की सिफारिशों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें अनुच्छेद 201 के तहत विधेयकोंपर निर्णय की समय-सीमा तय करने की आवश्यकता जताई गई थी।गृह मंत्रालय की 2016 की गाइडलाइन को कोर्ट ने माना आधारपीठ ने गृह मंत्रालय द्वारा 2016 में जारी एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि अध्यादेशों पर तीन सप्ताह और विधेयकों पर तीन महीने मेंनिर्णय लेने की सिफारिश को अब न्यायिक समर्थन प्राप्त है। संघीय ढांचे की रक्षा की दिशा में कदमइस ऐतिहासिक फैसले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की शक्तियां भीसीमित और जवाबदेह हैं। यह निर्णय केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन और संविधान की मूल भावना की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित हो सकताहै।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, सीएम ममता बनर्जी ने दी सफाई

राज्य के कई जिलों में भड़की हिंसापश्चिम बंगाल में वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ शुक्रवार को विभिन्न जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगनाऔर हुगली जिलों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षाबलों पर पथराव किया। इसके साथ ही, कई जगहों परसड़कों को अवरुद्ध कर यातायात बाधित किया गया। ममता बनर्जी ने कानून को खारिज कियामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्टकिया कि यह केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है और इस पर जवाबदेही भी केंद्र की बनती है। जनता से शांति बनाए रखने की अपीलसीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से सभी धर्मों के लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपीलकी। उन्होंने लिखा कि धर्म के नाम पर हिंसा न करें क्योंकि हर इंसान की जान अमूल्य होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति के लिए समाज मेंअशांति फैलाना गलत है। हिंसा फैलाने वालों पर होगी कार्रवाईमुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार किसी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती है और जो लोग अशांति फैला रहे हैं उनके खिलाफकानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में यह कानून लागू ही नहीं हो रहा, तो फिर हिंसा क्यों? राजनीतिक साजिश का आरोपसीएम बनर्जी ने कुछ राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि वे धर्म के नाम पर जनता को भड़काकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगोंसे अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और शांति व सद्भाव बनाए रखें। बीजेपी ने ममता बनर्जी को ठहराया जिम्मेदारइस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह राज्य में हो रही हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं और वक्फ कानून के विरोध कोराजनीतिक रूप से भुना रही हैं।