उत्तर भारत में ‘हर घर नंदिनी’ अभियान की शुरुआत, अब यूपी समेत कई राज्यों में मिलेगा शुद्ध दूध

नई दिल्ली, 27 मार्च 2025 – कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने अपने लोकप्रिय डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ को उत्तर भारत में विस्तार देने की दिशा में बड़ाकदम उठाया है। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा में नंदिनी ब्रांड के शुद्ध गाय के दूध और अन्य दुग्धउत्पादों की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इस पहल की शुरुआत ताजमहल नगरी आगरा से हुई, जहां ‘दूध महल’ नाम से नंदिनी का पहलाएक्सक्लूसिव मिल्क पार्लर खोला गया है। किफायती दाम पर दक्षिण भारतीय दूध की आपूर्तिनंदिनी ब्रांड के उत्तर भारत में विस्तार को लेकर दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में डिस्ट्रिब्यूटर मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मौकेपर नंदिनी नॉर्थ इंडिया के स्ट्रैटेजिक हेड अमित सिंह ने बताया कि कर्नाटक के मंड्या जिले से शुद्ध गाय का दूध उत्तर भारत लाकर उपभोक्ताओं कोसुलभ दामों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह दूध उच्च गुणवत्ता वाला है और इसकी शुद्धता को बनाए रखने के लिए कठोरमानकों का पालन किया जाता है। हाथरस और रोहतक में स्थापित हुए प्लांटउत्तर भारत में नंदिनी दूध की पैकेजिंग और वितरण के लिए उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी और हरियाणा के रोहतक में प्लांट स्थापित किए गएहैं। हाथरस प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता 1.50 लाख लीटर है, जबकि रोहतक प्लांट में प्रतिदिन 1.0 लाख लीटर दूध की पैकेजिंग की जा रही है।इन संयंत्रों के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। दूध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यानअमित सिंह ने बताया कि नंदिनी दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘मेथिलीन ब्लू रिडक्शन टेस्ट’ (MBRT) का उपयोग किया जाता है। यहपरीक्षण दूध की ताजगी और उसमें मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा का मूल्यांकन करता है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य तापमान पर यह दूध पांच सेछह घंटे तक बिना फटे रह सकता है, जिससे इसकी उच्च गुणवत्ता का प्रमाण मिलता है। वैश्विक स्तर पर नंदिनी का विस्तारनंदिनी ब्रांड केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 25 से अधिक देशों में अपने डेयरी उत्पादों का निर्यात कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनीउपस्थिति को मजबूत करने के लिए, नंदिनी ने हाल ही में स्कॉटलैंड और आयरलैंड की क्रिकेट टीमों को प्रायोजित किया था। इसके अलावा, इंडियनसुपर लीग (ISL) फुटबॉल टूर्नामेंट में भी यह प्रमुख ब्रांड भागीदार के रूप में शामिल है। उत्तर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बड़ी सौगात उत्तर भारत में नंदिनी दूध की उपलब्धता से उपभोक्ताओं को शुद्ध और किफायती दुग्ध उत्पाद मिल सकेंगे। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत, KMF का लक्ष्य है कि दक्षिण भारत के पारंपरिक और शुद्ध दूध उत्पादों को उत्तर भारत के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
दिल्ली भाजपा का केजरीवाल सरकार पर आरोप – दलितों और गरीबों को योजनाओं के नाम पर किया गुमराह

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर दलितों और गरीबों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करनेका आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई आकर्षक योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन इनके लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहींकिया गया।योजनाओं में बजट आवंटन और खर्च में बड़ा अंतरवीरेन्द्र सचदेवा ने दावा किया कि 2022-23 में ‘दलित प्रतिभा योजना’ के तहत 70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन इसयोजना पर एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। इसी तरह, 2020-21 से 2023-24 के बीच अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और गरीबों के लिए 250 करोड़ रुपयेका बजट निर्धारित किया गया, लेकिन व्यय मात्र 4.2 करोड़ रुपये ही हुआ।मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना में भी बड़ी गड़बड़ीभाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के दावों के बावजूद, ‘मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना’ के तहत 2020-21 से 2023-24 के बीच461 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इसमें से सिर्फ 32.2 करोड़ रुपये यानी महज 7% राशि ही खर्च की गई।दलित बस्तियों के विकास का दावा भी झूठा?सचदेवा ने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 2020-21 से 2023-24 तक दलित बस्तियों के सुधार के लिए 260 करोड़ रुपये की योजनाओं कीघोषणा की थी, लेकिन इस दौरान खर्च सिर्फ 120.60 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने इसे दलित समाज के साथ एक बड़ा छलावा बताया। विधानसभा में रखी जाएगी योजनाओं की हकीकतदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा जल्द ही विधानसभा में इन योजनाओं से जुड़े तथ्यों को पेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंदकेजरीवाल सरकार ने प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए बनाई गई योजनाओं पर अमलनहीं किया। भाजपा के इस खुलासे के बाद अब देखना होगा कि दिल्ली सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
दिल्ली विधानसभा में अपराध पर चर्चा नहीं होगी? नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने स्पीकर को लिखा पत्र

दिल्ली में बढ़ते अपराधों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवालों को हटाने के फैसले पर नेताप्रतिपक्ष आतिशी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर सवाल किया कि अगर दिल्ली में हत्या, लूट, बलात्कार और गोलीबारी जैसी घटनाएं होंगी, तो क्या इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं होगी? आतिशी ने इसे हैरान करने वाला फैसला बताया औरकहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल हो चुकी है, इसलिए वह इस पर चर्चा नहीं कराना चाहती। कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं होविधानसभा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के विधायकों द्वारा उठाए गए अपराध से जुड़े मुद्दों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “कानून-व्यवस्थादिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।” इस फैसले से नाराज आतिशी ने अपने पत्र में लिखा कि जब से दिल्ली विधानसभा बनी है, तबसे विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं विधानसभा में उठाते आए हैं। यह पहली बार हो रहा है कि अपराध से जुड़े मुद्दों को चर्चा से बाहर रखा जा रहाहै। दिल्ली में अपराध बढ़ रहे, लेकिन चर्चा नहीं होगी?आतिशी ने सवाल किया कि अगर दिल्ली में कोई बलात्कार होता है, महिलाओं के खिलाफ हिंसा होती है, या सड़कों पर गोलियां चलती हैं, तो क्याविधानसभा में इस पर बात नहीं होगी? उन्होंने कहा कि दिल्ली के 70 विधायक लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर वे अपने इलाके में बढ़तेअपराध पर सवाल नहीं उठा सकते, तो फिर कौन उठाएगा? भाजपा पर हमलाआतिशी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि चुनाव से पहले डबल इंजन सरकार का वादा किया गया था, जिससे दिल्ली की समस्याएं हल करनेकी बात कही गई थी। लेकिन अब चुनाव जीतने के बाद भाजपा चर्चा ही नहीं होने देना चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र सरकारअपराध रोकने में नाकाम रही है और इसी वजह से वह दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस से बच रही है। लोकतंत्र के खिलाफ फैसलानेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि दिल्ली विधानसभा में हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभामें जनता के मुद्दों पर चर्चा रोकना लोकतंत्र का अपमान होगा। आतिशी ने इस फैसले को तुरंत बदलने की मांग की, ताकि विधायकों को अपने क्षेत्रोंकी समस्याएं उठाने का अवसर मिल सके।
नया इमिग्रेशन बिल 2025, अवैध अप्रवास पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

केंद्र सरकार ने अवैध अप्रवास और घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 लोकसभा में पेश किया। यह विधेयक भारत मेंप्रवेश और विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट, वीजा, पंजीकरण और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल परविस्तार से चर्चा करते हुए इसकी आवश्यकता और प्रभाव को स्पष्ट किया। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गृह मंत्री का बयानलोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पारसी समुदाय औरइजरायल से आए यहूदी भारत में सुरक्षित हैं और यहां सम्मान के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने उन लोगों को भी सुरक्षा प्रदान की हैजो पड़ोसी देशों में प्रताड़ित होकर भारत आए हैं। भारत का वैश्विक अप्रवासी समुदायगृह मंत्री ने बताया कि भारत का प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) विश्व में सबसे बड़ा है। उन्होंने महात्मा गांधी, सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, ऋषि सुनक, कमला हैरिस और सुनीता विलियम्स का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। उन्होंने यहभी बताया कि भारत के 1.72 करोड़ एनआरआई (प्रवासी भारतीय) दुनियाभर में फैले हुए हैं, और यह विधेयक उनकी चिंताओं के समाधान की दिशामें भी एक कदम है। अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त प्रावधानगृह मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जो लोग भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन अवैध रूप सेघुसपैठ कर भारत की शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ यह कानून सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने रोहिंग्या और बांग्लादेशीघुसपैठियों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लाया गया है। विपक्ष की चिंता: कांग्रेस ने जताई आपत्तिइस विधेयक को लेकर विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि इस विधेयक मेंसंतुलन की कमी है और इसके दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि एक संतुलितऔर न्यायसंगत कानून बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशियों के प्रवेश को नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकारोंकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। चार पुराने कानून होंगे समाप्तइस विधेयक के लागू होने के बाद सरकार चार पुराने कानूनों को समाप्त कर देगी, जो अप्रवासन और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित हैं। येकानून हैं,फॉरेनर्स एक्ट 194, पासपोर्ट एक्ट 1920,रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939, इमिग्रेशन एक्ट 2000 नए विधेयक का प्रभावइमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 के तहत, सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह विदेशी नागरिकों के प्रवेश, रहने और बाहर जाने की निगरानीकर सके। साथ ही, अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इस कानून से भारत की सुरक्षा नीति को और अधिकप्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विपक्ष इस विधेयक को सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि करने वाला मान रहा है और इसे संतुलन सेरहित बता रहा है। अब यह देखना होगा कि यह विधेयक संसद में कितना समर्थन पाता है और इसके किस रूप में कानून बनने की प्रक्रिया पूरी होतीहै।
बिहार विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सीएम नीतीश कुमार की हरकत बनी चर्चा का विषय, फोटो सेशन का वीडियो वायरल

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी बजट सत्र के दौरान जमकर सियासी गहमागहमी देखने को मिली। इस सत्र के आखिरी दिन बिहारविधान परिषद में एक फोटो सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत सभी प्रमुख नेता शामिल हुए। लेकिन इस दौरानएक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नीतीश कुमार हाथ जोड़े बैठे नजर आ रहे हैं।काफी देर तक हाथ जोड़े रहने के कारण पास बैठे ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने उनके हाथों को नीचे कर दिया। पहले भी वायरल हो चुके हैं सीएम के वीडियोयह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी अजीब हरकत के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उनके कई वीडियो सोशल मीडियापर वायरल हो चुके हैं। कभी वह बीजेपी नेताओं के पैर छूने की कोशिश करते दिखे, तो कभी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अजीबोगरीबहावभाव प्रदर्शित करते नजर आए। हाल ही में पटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों को नमस्कार करना शुरू कर दियाथा। इसके बाद उन्होंने अपने पास खड़े मुख्य सचिव से इशारों में बातचीत भी की। इतना ही नहीं, राष्ट्रगान खत्म होने से पहले ही वे मंत्री विजय चौधरीके साथ स्टेडियम का राउंड लगाने निकल पड़े, जिससे राष्ट्रगान को बीच में ही रोकना पड़ा। विपक्ष ने उठाए सवालनीतीश कुमार की हालिया हरकतों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राष्ट्रगान प्रकरण को लेकर आरजेडी ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनेकी मांग की थी। हालांकि, इसके बाद विधानसभा में उन्होंने राबड़ी देवी पर पलटवार किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी देखने कोमिली। समझाने में जुटे मंत्री और डिप्टी सीएमफोटो सेशन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ जोड़ने की हरकत से पहले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव और फिर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हेंसमझाने की कोशिश की। सम्राट चौधरी ने इशारा करते हुए उन्हें सीधे देखने की सलाह दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनके हावभाव को लेकर उनकेही साथी मंत्री असहज महसूस कर रहे थे। पहले भी सुर्खियों में रहे हैं अजीबोगरीब हावभाव को लेकरयह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में अजीब व्यवहार करते दिखे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने कीकोशिश से लेकर सार्वजनिक मंच पर उनका हाथ पकड़ने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। सदन में महिलाओं से जुड़े बयान और हाल ही में रविशंकर प्रसादके पैर छूने की घटना भी काफी चर्चा में रही थी। अब इस नए वीडियो को लेकर विपक्ष किस तरह का रुख अपनाता है, यह देखने वाली बात होगी।
गुजरात में 40 छात्रों ने ब्लेड से काटा हाथ, वीडियो गेम से मिली खतरनाक प्रेरणा

गुजरात के अमरेली जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक प्राथमिक विद्यालय के 40 छात्रों ने अपने हाथों पर ब्लेड से खुद कोघायल कर लिया। बताया जा रहा है कि एक छात्र ने वीडियो गेम से प्रेरित होकर अपने सहपाठियों को इस खतरनाक कार्य के लिए उकसाया और उन्हें10 रुपये का लालच दिया। खेल-खेल में बच्चों ने किया खुद को घायलघटना हत्यामोटा मुंजियासर के बड़े स्कूल की है, जहां करीब 300 छात्र पढ़ते हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने सहपाठियों से कहा कियदि वे ब्लेड से हाथ काटेंगे तो उन्हें 10 रुपये मिलेंगे, अन्यथा उन्हें 5 रुपये देने होंगे। इस लालच में आकर 40 छात्रों ने पेंसिल शार्पनर के ब्लेड सेअपने हाथों पर कट लगा लिए। स्कूल प्रशासन की लापरवाहीआरोप है कि शिक्षकों ने इस घटना को आठ दिनों तक छिपाए रखा, जिससे अभिभावकों में रोष फैल गया। जब कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों केहाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन से की। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू की गई। अभिभावकों ने पुलिस में की शिकायतघटना की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के जरिए पुलिस को सूचना दी गई। बागासरा पुलिस स्टेशन के पीएसआई को देर शाम अभिभावकोंऔर सरपंच की ओर से शिकायत सौंपी गई। इसमें स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। स्कूल प्रशासन का पक्षमोटा मुंजियासर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मकवाना ने बताया कि बच्चों ने एक खेल के दौरान अपने हाथों पर ब्लेड से कट लगा लिए। जबयह बात स्कूल प्रशासन को पता चली, तो तुरंत अभिभावकों की बैठक बुलाई गई और उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी दी गई। कैसे हुआ मामले का खुलासा?जब अभिभावकों ने अपने बच्चों के हाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने स्कूल प्रशासन से सवाल किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामपंचायत और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि यह घटना ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण नहीं, बल्कि’ट्रुथ एंड डेयर’ नामक खेल के दौरान हुई। पुलिस की जांच जारी धारी के सहायक पुलिस अधीक्षक जयवीर गढ़वी ने स्कूल का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। साथ ही बच्चों से पूछताछ कर इसघटना के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और स्कूल प्रशासन से भी पूछताछ जारी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालइस घटना ने एक बार फिर बच्चों पर वीडियो गेम और खतरनाक चैलेंज गेम्स के प्रभाव को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों कोडिजिटल कंटेंट के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है, ताकि वे इस तरह के खतरनाक कार्यों से बच सकें। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपनेबच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज न करें।
तमिलनाडु विधानसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित, भाजपा और एआईएडीएमके ने किया विरोध

तमिलनाडु विधानसभा ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव कोमुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने पेश किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। वहीं, विधानसभा में भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि विपक्षी दल एआईएडीएमके ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की कोशिश कर रही है, जिससे वक्फ बोर्ड कीशक्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को कमजोर करेगा और केंद्र सरकार को इसकी कोईपरवाह नहीं है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि भारत में सभी धर्मों के लोग सद्भाव और समानता के साथ रहते हैं। भारतीय संविधान ने हरनागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया है और सरकारों का कर्तव्य है कि वे इन धार्मिक अधिकारों की रक्षा करें। विधानसभा ने केंद्रसरकार से वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वापस लेने की मांग की, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए एआईएडीएमके के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने डीएमके सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा किडीएमके धर्म और भाषा के आधार पर एक खास नैरेटिव बनाने की जल्दी में है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस विधेयक पर पहले संयुक्त संसदीय समितिबनाई गई थी, लेकिन डीएमके और अन्य दल न्यायपालिका में इसे चुनौती क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की जल्दबाजीपर भी सवाल उठाया और इसे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे समाज में भ्रम और असंतोष पैदा होगा। केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ अधिनियम 1995 में सुधार के उद्देश्य से पेश किया है। सरकार का दावा है कि इस संशोधनसे वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहलेउचित नोटिस और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जाएगा, ताकि वक्फबोर्डों के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। तमिलनाडु सरकार के इस विरोध के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रसरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हुआ, पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों की जांच के लिए कमेटी गठितकरने और कांग्रेस विधायकों के निलंबन के खिलाफ यह प्रदर्शन किया जा रहा था। लेकिन यह जल्द ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प मेंबदल गया।पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकरावसोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर रखी कुर्सियां उठाकर पुलिस पर फेंक रहे हैं। हालात बिगड़तेदेख पुलिस को पीछे हटना पड़ा, लेकिन जल्द ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। इससे पहले, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया। कई कार्यकर्ता घायल, विधानसभा बना किलालगातार बढ़ते तनाव के कारण पुलिस को बार-बार लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर है। स्थिति कोदेखते हुए विधानसभा के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जिससे यह किसी किले जैसा नजर आ रहा है। क्या है पूरा मामला?मंगलवार को ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सरकार के आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच के लिएकमेटी बनाने की मांग की थी। जब उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो उन्होंने सदन में घंटी बजाकर, ‘राम धुन’ गाकर और सीटी-बांसुरी बजाकरविरोध जताया। इस हंगामे के चलते स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने 12 कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों का रातभर धरनासभी 12 निलंबित विधायकों ने मंगलवार रात विधानसभा में ही गुजारी, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता बाहर धरने पर बैठ गए। बुधवार को मामला औरगरमाया जब निलंबित विधायकों को बलपूर्वक विधानसभा से बाहर निकाला गया। इस दौरान दो और विधायकों को निलंबित कर दिया गया, जिससेकांग्रेस और भड़क उठी। विधानसभा घेराव का ऐलानइस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा घेरने का फैसला किया और गुरुवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों केबीच हिंसक झड़प हुई, जो अभी भी पूरी तरह शांत होती नहीं दिख रही। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।