केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने गर्भपात को किया वीटो, बोले डाल सकता है गर्भवती महिलाओं को खतरे में

केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने रिपब्लिकन पार्टी द्वारा लाए गए गर्भपात विधेयक के खिलाफ वीटो कर दिया है. एंडी बेशियर का कहना है कि आपातस्थिति में यह विधेयक गर्भवती महिलाओं के जीवन को खतरे में डालेगा और डॉक्टर्स के निर्णय को भी कमजोर करेगा.वर्जीनिया के रिपब्लिकन गवर्नरग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है. यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरल असेंबली नेआलोचना की. यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया और करीब 600 पर हस्ताक्षर किए. बेशियर एक गर्भपात अधिकार समर्थक हैं जिन्हें साल2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है. हालांकि केंटकी में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है.ऐसे मेंगवर्नर का वीटो का फैसला सीनेट में पलटा जा सकता है.बिल समर्थकों का कहना है कि इससे डॉक्टर्स के मन में स्पष्टता आएगी, जो अभी केंटकी केकानून को तोड़ने से डरते हैं. केंटकी में वैसे तो गर्भपात प्रतिबंधित है लेकिन कानून में प्रावधान है कि अगर महिला की जान को खतरा है तो उसकागर्भपात किया जा सकता है. नए विधेयक में आपात स्थितियों की सूची दी गई है. जिसमें मां की जान बचाने के लिए गर्भपात किया जा सकता है. उलट सकता है पासाहालांकि केंटकी गवर्नर का मानना है कि इस विधेयक को लेकर पासा उलट भी सकता है और अब उन्हें कानून में खामियां भी लगती हैं.वर्जीनिया केरिपब्लिकन गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है.यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरलअसेंबली ने आलोचना की यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया है. और करीब 600 पर हस्ताक्षर कर दिए है. वहीं करीब 160 विधेयकों मेंसंशोधन किया गया है. गवर्नर ने बजट विधेयक में भी 205 संशोधन पेश किए गवर्नर यंगकिन ने जिन विधेयकों को खारिज कर दिया गया. उनसेवर्जीनिया में न्यूनतम प्रतिघंटा मजदूरी 12 डॉलर से बढ़कर 13.50 डॉलर हो जाएगी और एक साल बाद बढ़कर 15 डॉलर हो जाएगी. साथ ही अन्यविधेयक से वर्जीनिया में सेमी ऑटोमैटिक हथियारों की बिक्री पर भी रोक लग जाती हालांकि ये विधेयक गर्वनर की आपत्ति के बाद अटक गए हैं.अबडेमोक्रेट पार्टी के बहुमत वाली वर्जीनिया की जनरल असेंबली की बैठक 2 अप्रैल को रिचमंड में फिर से होगी. जिसमें गवर्नर के वीटो पर चर्चा होसकती है. इसको लेकर आगे की प्रक्रिया जारी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डेनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, संघीय जज ने लिया फैसला”कोलंबियाई प्रदर्शनकारी छात्रा को नहीं लिया जाएगा हिरासतमें”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है जिसमें संघीय जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा युनसियोचुंग को फलस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण आव्रजन हिरासत में नहीं लिया जा सकता है. संघीय जज का यह आदेश चुंग कोसंभावित निर्वासन से बचाने में एक अस्थायी राहत प्रदान करता है हालांकि चुंग सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थीं. अब इस मामले में अगली सुनवाई20 मई को होगी.संघीय जज के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उन प्रयासों को भी झटका लगा है जिनमें वह कैंपस विरोध प्रदर्शनों में भाग लेनेवाले गैर-नागरिकों को देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार इन प्रदर्शनों को यहूदी विरोधी और उग्रवादी समूह हमास के प्रतिसहानुभूतिपूर्ण मानती है वहीं छात्रों का कहना है कि सरकार उन्हें फलस्तीनी अधिकारों के लिए बोलने के कारण निशाना बना रही है.चुंग के वकीलरामजी कासेम ने आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) का हवाला दिया. उन्होंने कहा अब युनसियो चुंग को ICE के डर में रहने की जरूरत नहीं हैक्योंकि अब वह रात में उनके दरवाजे पर नहीं आएंगे.मैनहट्टन के संघीय न्यायाधीश नाओमी रीस बुचवाल्ड ने मंगलवार को चुंग के मामले की सुनवाईकी उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों ने चुंग को हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त तथ्य पेश नहीं किए हैं जबकि उसका मामला अभी चल रहा है इसकेअलावा, सिरैक्यूज के एक अन्य संघीय न्यायविद ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्र मोमोदो ताल के मामले पर विचार किया. जो विरोध प्रदर्शनमें शामिल होने के बाद संभावित निर्वासन का सामना कर रहा है.बता दें कि चुंग 7 साल की उम्र में अमेरिका आई थीं अब वह 21 वर्ष की हो चुकी हैंऔर उन्हें कानूनी स्थायी निवास प्राप्त है जिसे आम बोलचाल की भाषा में ग्रीन कार्ड कहा जाता है. होमलैंड ने जारी किया बयानवहीं होमलैंड सुरक्षा विभाग ने सोमवार को एक बयान जारी किया.जिसमें कहा गया है कि चुंग ने ‘चिंताजनक आचरण’ किया है.जिसमें एक विरोधप्रदर्शन में गिरफ्तार होना शामिल है. वहीं संघीय न्यायाधीश बुचवाल्ड ने कहा कि सरकार ने ऐसा कुछ भी तथ्य पेश नहीं किया है कि वह खतरनाक हैंया आतंकवादियों से जुड़ी हैं. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि चुंग के कारण कोई गंभीर विदेश नीति की समस्या हो सकती है. फैसले के बाद ट्रंपप्रशासन के खिलाफ कई मानवाधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने भी अपना समर्थन जताया. उनका कहना था कि इस फैसले से यह स्पष्ट हो गयाहै कि अमेरिका में नागरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और न्यायपालिका के पास हमेशा ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति है. आगे की कानूनी प्रक्रिया अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ कोई अपील करता है या नहीं. इस मामले के फैसले ने सरकारऔर न्यायपालिका के बीच संतुलन को स्पष्ट किया है और यह उदाहरण पेश किया है कि कैसे संविधान का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों कोचुनौती दी जा सकती है. इस फैसले ने अमेरिकी समाज में नागरिक अधिकारों के संरक्षण को फिर से रेखांकित किया और यह दिखाया कि किसी भीसरकार को अपनी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्तियों को दबाने का अधिकार नहीं है.
अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को बनाया एनआईएच का निदेशक, सीनेट ने नियुक्ति पर लगाई मुहर

अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) का निदेशक बनाने को अपनी मंजूरी दे दी है. मंगलवार को इसे लेकरसीनेट में मतदान हुआ और जय भट्टाचार्य 53-47 वोटों से जीत गए. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने जो उनकी एनआईएच पद पर नियुक्ति की थी उसपर भी अंतिम मुहर लग गई अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी ने भी जय भट्टाचार्य के नाम को मंजूरी मिलने पर खुशी जताई.जय भट्टाचार्यस्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं साथ ही वे नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूटऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवर इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्डसेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्व करते हैं.जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं. इसमेंजय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गए लॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भी छप चुके हैं.जय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंनेकोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने, मास्क पहनने और कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. बहुत सी आलोचनाओं का किया था सामनाजय भट्टाचार्य कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं कासामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं डॉक्टर कॉलिंस उसी एनआईएच के पूर्व निदेशक हैं. जिसके लिएभट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार के मुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछलोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडन प्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 कोलेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं. साथ ही वे नेशनल ब्यूरोऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवरइंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड सेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्वकरते हैं. जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं.इसमें जय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गएलॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भीछप चुके हैं. कोरोना के दौरान आया था चर्चा में नामजय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने मास्क पहनने और कोरोनावैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. उनका कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं. डॉक्टर कॉलिंस उसीएनआईएच के पूर्व निदेशक हैं जिसके लिए भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार केमुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडनप्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 को लेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.
शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शौचालय के बाहर लगाई कुणाल कामरा की तस्वीर, जमकर किया विरोध प्रदर्शन

Kunal kamara Case: कुणाल कामरा की कॉमेडी से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है कुणाल द्वारा महाराष्ट्र के राजनेता पर निशानासाधते हुए बनाए गए पैरोडी गीत ने देश भर में कई लोगों के बीच गुस्से को जन्म दे दिया जिसके कारण शिवसेना की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं नेमंगलवार को इंदौर में एक सार्वजनिक शौचालय के बाहर कामरा की तस्वीर लगा दी.शिवसेना नेता ने कुणाल कामरा को धमकी देते हुए कहा कि अगरवह मध्य प्रदेश आए तो उनका चेहरा काला कर दिया जाएगा और उन्हें सड़कों पर घुमाया जाएगा.यह विरोध प्रदर्शन बंगाली स्क्वायर स्थित एकसार्वजनिक शौचालय के बाहर किया गया जहां शिवसेना कार्यकर्ताओं ने 36 वर्षीय कॉमेडियन के खिलाफ नारे लगाए.जिन्होंने विवाद के बाद भीअपनी बात पर अड़े रहे और माफी मांगने से इनकार कर दिया.शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अनुराग सोनार नेकहा, ‘कामरा कॉमेडी के नाम पर लोगों को गंदगी परोसते हैं.उनकी गंदी मानसिकता के खिलाफ विरोध जताने के लिए हमने उनकी तस्वीर लगाई है. अगर वह कभी मध्य प्रदेश आए तो शिवसेना कार्यकर्ता उनका मुंह काला कर देंगे और सड़कों पर परेड कराएंगे. राजनीतिक करियर पर किया कटाक्षकॉमेडियन ने अपने शो में एक लोकप्रिय हिंदी फिल्म के गाने के बोल में बदलाव करके राजनेता के राजनीतिक करियर पर कटाक्ष करके बड़ाराजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा किसी के सामने झुकेंगेनहीं.संजय राउत ने कहा कि मैं कामरा को जानता हूं हमारा डीएनए एक जैसा है. वह लड़ाकू है वह माफी नहीं मांगेंगे अगर आपको उनके खिलाफकार्रवाई करनी है तो आपको कानूनी कदम उठाने होंगे.कुणाल कामरा ने कहा है कि वह राजनेता के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिएमाफी नहीं मांगेंगे और उन्होंने मुंबई में उस स्थान पर तोड़फोड़ की आलोचना की जहां कॉमेडी शो की रिकॉर्डिंग की गई थी.फिलहाल महाराष्ट्र पुलिसनेने बताया कि कॉमेडियन कुणाल कामरा के वकील ने उनसे 7 दिन का समय मांगा है. आज कुणाल को बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस ने बुलायाथा लेकिन वे नहीं आए पुलिस अब कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेगी.खार इलाके में यूनिकॉन्टिनेंटल होटल में हैबिटेट कॉमेडी क्लब मेंअपने प्रदर्शन के दौरान कामरा ने शिवसेना के नेता को गद्दार कहा था और उनकी पैरोडी भी गाई थी. शिवसेना कार्यकर्ताओं का किया विरोधबता दें कि कामरा की इस टिप्पणी और पैरोडी गाने के कारण शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप रविवार को स्टूडियो में तोड़फोड़ की. मुंबई पुलिसने इस मामले में कामरा के खिलाफ शिवसेना विधायक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने केलिए नोटिस जारी किया. साथ ही पुलिस ने खार इलाके में हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में 40 शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ भीमामला दर्ज किया. सोमवार को 12 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया जिन्हें बाद में स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी.दरअसल इससे पहले मई2020 में कुणाल कामरा ने एक एडिटेड वीडियो शेयर किया था. इसमें पीएम मोदी के जर्मनी दौरे के वक्त एक सात साल के बच्चे के गाने के वीडियोसे छेड़छाड़ की गई थी. इसके बाद राष्ट्रीय बालअधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कॉमेडियन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तुरंतवीडियो हटाने के लिए कहा गया था.हालांकि कुणाल कामरा ने अपने बचाव में कहा कि यह वीडियो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है. अपने पोस्ट मेंउन्होंने कहा कि एनसीपीसीआर ने उन पर एक मीम पोस्ट करने के लिए कार्रवाई की मांग की है.
सीएम योगी बोले देश की जनता को गुमराह कर रहा विपक्ष,मस्जिदों पर कब्जा करके क्या करेंगें भाजपा

UP Latest News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार की नीतियों के बारे में गलतसूचना फैलाने पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने विपक्ष के इरादों पर सवाल खड़ा किया पूछा कि वे वक्फ के नाम पर कितनी जमीन लेने कीयोजना बना रहे हैं. विपक्ष लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहा कि क्या कभी विपक्ष ने वक़्फ के नाम परकोई अच्छा काम किया. उन्होंने उस संपत्ति का अपने निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग किया है. एक संपत्ति को कई लोगों को बेच दिया गया अब इसकीवजह से विवाद हो रहे हैं.मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य वक़्फ संपत्तियों को अतिक्रमण और दुरुपयोग से मुक्त कराना है. साथ ही उस समुदायके कल्याण के लिए उनका उपयोग सुनिश्चित करना है. सरकार वक़्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जोर दे रही हैजो मुस्लिम समुदाय की सेवा के लिए है. उन्होंने वक़्फ संशोधन विधेयक को अपना समर्थन दिया कहा कि यह देश और मुस्लिम समुदाय के लाभ केलिए आवश्यक है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेपीसी ने अनुरोध किया है कि वक्फ संशोधन को आज की जरूरत बनाया जाए.समयबद्ध तरीके से बढ़ाया जाए आगेइसे समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए मुझे लगता है कि यह देश के हित में होगा. मुसलमानों के भी हित में होगा संशोधन के लागू होने से उन लोगोंको जरूर परेशानी हो सकती है जो वक्फ संपत्तियों पर बसे हैं या फिर उनमें पैसा लगाया है। इससे उनका पैसा डूब सकता है.मुख्यमंत्री ने वक्फ बोर्ड केभूमि अधिग्रहण के अधिकार पर सवाल खड़ा किया कहा कि उन्होंने सरकारों को ब्लैकमेल करने के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है. बिनाकिसी औचित्य के संपत्तियों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किया गया है. वे लोग संपत्ति की तलाश करते थे फिर सरकारों को ब्लैकमेल करते थेवक्फ के नाम पर कई गलत निर्णय लिए गए हैं. खासकर वक्फ जो कहता है कि यह जमीन उनकी है. वक्फ के नाम पर आप कितनी जमीन लेंगे? उन्होंने वक्फ के नाम पर कोई कल्याणकारी काम किया है.उन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिए उस संपत्ति का दुरुपयोग किया है.इसे किसी भी कीमत परबेचा गया है. आज स्थिति क्या से क्या हो गई है. संपत्ति के बेचने को लेकर हो रहा विवादउन्होंने एक संपत्ति कई लोगों को बेच दी है अब इसकी वजह से विवाद हो रहा है.उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा का लक्ष्य वक्फ संपत्तियोंको अतिक्रमण और दुरुपयोग से मुक्त कराना और समुदाय के कल्याण के लिए उनका उपयोग सुनिश्चित करना है. पार्टी वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन मेंअधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जोर दे रही है जो मुस्लिम समुदाय की सेवा के लिए हैं.योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेपीसी ने अनुरोधकिया है कि वक्फ संशोधन को आज की जरूरत बनाया जाए इसे समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए मुझे लगता है कि यह देश के हित में होगामुसलमानों के भी हित में होगा संशोधन के लागू होने से उन लोगों को जरूर परेशानी हो सकती है.जो वक्फ संपत्तियों पर बसे हैं या फिर उनमें पैसालगाया है इससे उनका पैसा डूब सकता है.
‘केसरी चैप्टर 2’ के असली हीरो की कहानी: अक्षय कुमार का किरदार सर सी शंकरन नायर

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार अपनी आगामी फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग’ में एक निडर और साहसी वकीलकी भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे, जिसका नाम है सर सी शंकरन नायर। इस फिल्म का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसमें अक्षय कुमार कोएक ब्रिटिश जज को कोर्ट में गाली देते हुए दिखाया गया। इस दृश्य ने दर्शकों के बीच उत्सुकता और सवालों को जन्म दिया कि आखिर यह किरदारकौन है जो अंग्रेजों से बेfearless तरीके से बात कर रहा है। टीजर को देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आया कि क्या यह किरदारकाल्पनिक है या फिर यह एक असली हीरो पर आधारित है। अक्षय कुमार जिस किरदार में नजर आ रहे हैं, वह वास्तविक जीवन के एक नायक, सर चेट्टूर शंकरन नायर पर आधारित है। सर शंकरन नायर भारतीयस्वतंत्रता संग्राम के एक महान नेता और वकील थे, जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। यह फिल्मजलियांवाला बाग नरसंहार के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए उनके ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित है। सर सी शंकरन नायर का परिचयसर चेट्टूर शंकरन नायर का जन्म 11 जुलाई 1857 को पालघाट जिले में हुआ था। नायर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास (अब चेन्नई) से प्राप्त कीऔर फिर कानून की डिग्री हासिल करने के लिए मद्रास विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वे एक प्रतिष्ठित वकील बने और बहुत जल्दी कानून के क्षेत्रमें अपने कड़े संघर्ष और संघर्षशील व्यक्तित्व के कारण पहचान बनाने में सफल रहे। नायर की कार्यशैली ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। 1908 में उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बादउन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल होकर भारतीय शिक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। नायर भारतीय राजनीति और कानून में एकबहुत बड़ा नाम बन चुके थे। ब्रिटिश साम्राज्य से सम्मान, लेकिन निडर रुखहालांकि नायर ब्रिटिश साम्राज्य के साथ जुड़े थे और उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्य किया था, लेकिन उनका दिल हमेशा भारतीयस्वतंत्रता संग्राम के पक्ष में था। वे एक प्रगतिशील विचारक थे और उनके विचारों ने उन्हें ब्रिटिश सरकार के भीतर भी सम्मान दिलाया। 1912 में, ब्रिटिश साम्राज्य ने उन्हें नाइट की उपाधि दी थी। इसके बाद, 1915 में वे वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल हुए। नायर का दृष्टिकोण औरउनका साहस उन्हें ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों द्वारा भी सराहा जाता था। लेकिन जब नायर ने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के खिलाफ दमनात्मक नीतियां लागू कर रही थी, तो उन्होंने विरोध जताना शुरू करदिया। खासकर जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद नायर ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अपना स्वर बुलंद किया और ब्रिटिश साम्राज्य की कईनीतियों की खुलकर आलोचना की। जलियांवाला बाग हत्याकांड पर संघर्षजलियांवाला बाग हत्याकांड, जो 13 अप्रैल 1919 को हुआ था, भारत के इतिहास का सबसे काला दिन था। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्रामको एक नई दिशा दी। इस नरसंहार में जनरल डायर के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलाईं, जिससे सैकड़ों लोगों की जानचली गई। सर शंकरन नायर ने इस कांड के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और ब्रिटिश अधिकारियों की गलत नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध किया। उन्होंनेअपनी पुस्तक ‘गांधी एंड एनार्की’ में माइकल ओ’डायर को उसकी अज्ञानता और अहंकार के लिए चुनौती दी। नायर ने इस घटना की सच्चाई को सामनेलाने के लिए कई कानूनी लड़ाइयां लड़ीं और जलियांवाला बाग नरसंहार के अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। अंग्रेजों से इस्तीफा और संघर्ष की शुरुआतजब नायर ने देखा कि ब्रिटिश साम्राज्य अपनी गलतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था, तो उन्होंने उस समय के सबसे बड़े सरकारी पदों में सेएक से इस्तीफा देने का फैसला किया। जुलाई 1919 में उन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम ने भारतीयस्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। नायर के इस्तीफे के बाद प्रेस सेंसरशिप को हटाने और पंजाब में मार्शल लॉ को समाप्त करने में मदद मिली। नायर की राष्ट्रवादी भूमिकानायर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ भी जुड़े हुए थे। 1897 में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन की अध्यक्षता की थी और भारतीय राजनीतिमें अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई थी। वे भारतीय समाज के लिए सुधारक थे और उन्होंने जातिवाद, बाल विवाह और लैंगिक असमानता केखिलाफ आवाज उठाई। वे न केवल एक महान वकील थे, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रवादी भी थे, जिन्होंने अपने विचारों को स्वतंत्रता संग्राम के दौरानबेझिजक तरीके से व्यक्त किया। फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ में अक्षय कुमार का किरदारअक्षय कुमार इस फिल्म में सर शंकरन नायर का किरदार निभा रहे हैं, और उनका यह किरदार ब्रिटिश साम्राज्य से बिना डर के न्याय की बात करता है।फिल्म का टीजर यह साफ दिखाता है कि अक्षय का किरदार न्याय के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। नायर का यह संघर्ष और साहस ही उन्हेंइतिहास में एक नायक बनाता है, और अक्षय कुमार ने इस किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया है।
IPL 2025: लखनऊ की हार की क्या रही वजह? कप्तान पंत और कोच क्लूजनर की राय जुदा

लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की टीम नए कप्तान ऋषभ पंत की अगुवाई में IPL 2025 का आगाज जीत से करने में नाकाम रही। लखनऊ कोदिल्ली कैपिटल्स (DC) के हाथों हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 209 रनों का स्कोरखड़ा किया। इसके जवाब में दिल्ली ने 1 विकेट शेष रहते 210 रनों का टारगेट हासिल कर लिया। IPL इतिहास में 5वीं बार ऐसा हुआ जब कोई टीमएक विकेट से मैच जीतने में सफल रही। दिल्ली की जीत में आशुतोष शर्मा का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ा। पंत ने स्कोर को बताया पर्याप्तलखनऊ की पहले मैच में हार के बाद कप्तान ऋषभ पंत ने कहा कि टीम ने अच्छा स्कोर खड़ा किया था। हालांकि 13 से 17 ओवर के बीच में हमनेमोमेंटम खोया लेकिन स्कोर काफी अच्छा था। हम इस हार से सीखेंगे और सुधार करने का प्रयास करेंगे। यह कहना आसान है कि कहां गलती हुईलेकिन विकेट बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी। ट्रिस्टन स्टब्स, आशुतोष ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और विपराज निगम ने मिलकर मैच दिल्ली के पक्षमें कर दिया। कप्तान ने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि हमारे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने वास्तव में अच्छा खेला और उन्हें लगता है कि इस विकेट परयह काफी अच्छा स्कोर था। एक टीम के तौर पर हम हर मैच से सकारात्मकता लेना चाहते हैं और सीखना चाहते हैं। असिस्टेंट कोच की राय जुदाहालांकि, मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में LSG के असिस्टेंट कोच लांस क्लूजनर की राय अपने कप्तान से जुदा नजर आई। क्लूजनर ने कहा कि मिचेलमार्श और निकोलस पूरन से मिली अच्छी शुरुआत के बाद वे लगभग 20-30 रन पीछे रह गए। उन्होंने कहा कि शायद यही वजह थी कि हम गेंदबाजीके दौरान दबाव में आ गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली कैपिटल्स ने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हम इस स्थिति में इसलिए हैं क्योंकि हमनेपर्याप्त रन नहीं बनाए, जो हमें बनाने चाहिए थे। जब गेंदबाजों ने सही गेंदबाजी की, तो थोड़ी स्पिन हुई, इसलिए उन्हें लगा कि यह बहुत अच्छा विकेटथा। सभी के लिए थोड़ा बहुत कुछ था।
AAP ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए, बजट और शराब नीति पर उठाए सवाल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में आमआदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता करते हुए बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार केहालिया बजट और उत्तर प्रदेश में चल रही शराब नीति के खिलाफ आम आदमी पार्टी कई सवाल उठा रही है। सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी की नीतियोंपर निशाना साधते हुए यह दावा किया कि बीजेपी के बजट का कोई स्पष्ट सिद्धांत नहीं है और सरकार गंभीर नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने यूपीसरकार की शराब नीति को लेकर भी कई सवाल उठाए, जो वर्तमान में बीजेपी शासित राज्य में विवाद का कारण बन चुकी है। दिल्ली के बजट पर सवालसौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के बजट को लेकर बीजेपी सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “AAP सरकार ने जब National Small Saving Funds (NSSF) से 10,000 करोड़ रुपये निकालने का प्रस्ताव रखा था, तो वित्त सचिव ने इसे मंजूरी नहीं दी। लेकिन अब वही वित्तसचिव 15,000 करोड़ रुपये NSSF से निकालने की बात कर रहे हैं।” इस पर AAP ने आरोप लगाया कि यह बीजेपी सरकार के बजट में कोईस्पष्टता या सिद्धांत नहीं है और यह दिखाता है कि सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। भारद्वाज ने कहा कि इस पूरी स्थिति से यह जाहिर होता हैकि भाजपा सरकार के पास कोई ठोस वित्तीय नीति नहीं है और वह केवल तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “दिल्ली की बीजेपी सरकार ने हाल ही में जो बजट पेशकिया, उससे यह साबित हो गया है कि रेखा गुप्ता झूठ बोल रही हैं। उन्होंने महिलाओं को ₹2500 देने के सवाल पर कहा था कि सरकार का खजानाखाली है। लेकिन कल जब बजट का ऐलान हुआ, तो बीजेपी ने यह खुलासा किया कि AAP सरकार ने ₹2,965 करोड़ का फंड नई सरकार के लिएछोड़कर गया था।” इससे यह सवाल उठता है कि अगर सरकार के पास खजाना खाली था तो यह पैसा कहां से आया? यूपी की शराब नीति पर AAP का हमलाAAP ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और बीजेपी पर भी सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यूपी में शराब की दुकानोंपर अनियमितताएं हो रही हैं और योगी सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने पूछा, “योगी सरकार इन शराब की दुकानों पर कब एक्शनलेगी? क्या योगी जी की सरकार की 1+1 शराब बोतल की योजना बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी से चलवायी जा रही है?” 1+1 शराब बोतल योजना, जिसके तहत एक बोतल शराब के साथ एक बोतल मुफ्त दी जा रही है, को लेकर भी AAP ने गंभीर सवाल उठाए हैं।भारद्वाज ने कहा, “अगर यह योजना केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी नहीं ली गई है, तो इसे तुरंत क्यों नहीं रोका जा रहा?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या बीजेपीका केंद्रीय नेतृत्व यूपी में चल रही इस योजना को बंद कराएगा? शराब नीति पर AAP की चिंताAAP ने यूपी सरकार के शराब वितरण की नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि शराब की एक बोतल के साथ एक बोतल मुफ्तबांटना समाज में नशे की आदतों को बढ़ावा देने वाला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना विशेष रूप से हिंदू समाज को शराबी बनाने कीदिशा में एक खतरनाक कदम हो सकती है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि इस तरह की नीतियां समाज में शराब की लत को बढ़ावा देती हैं, जिससे युवाओं और अन्य लोगों के बीच नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जो अंततः समाज में अपराध और सामाजिक असमर्थता की वजह बन सकती है। शराब नीति पर उठते सवालAAP का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार को इस 1+1 शराब योजना पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए और इसे रोकना चाहिए। इस योजनाको लेकर आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह योजना जनता को नशे की लत में डालने के लिए बनाई गई है और इसका मुख्य उद्देश्य शराब कीबिक्री को बढ़ावा देना है। इस तरह की नीतियों से समाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और यह सामाजिक असमानता और हिंसा को बढ़ावा देसकता है। AAP ने यह भी सवाल किया कि क्या यूपी की शराब नीति पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मंजूरी दी है या नहीं। अगर नहीं, तो फिर यूपी सरकार इसयोजना को लागू करने के बावजूद क्यों चुप है और इसे क्यों नहीं बंद कर रही है? इससे यह भी संकेत मिलता है कि यूपी सरकार अपनी नीतियों में कोईबदलाव करने के लिए तैयार नहीं है और यह जनता के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
हम पर नहीं, यूपी पर ध्यान दें’, राहुल गांधी को सीएम योगी ने कहा नमूना तो भड़क गई कांग्रेस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘नमूना’ कहकर विवाद खड़ा कर दिया। इसबयान के बाद कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस के सांसद के. सुरेश ने योगी आदित्यनाथ को सलाह दी कि वह राहुल गांधी परटिप्पणी करने के बजाय उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर मुद्दों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में मारे गए लोगों के परिवारों कोमुआवजा देने का वादा तो किया गया था, लेकिन अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रितकरना चाहिए, न कि कांग्रेस और राहुल गांधी पर आरोप लगाते रहना चाहिए। के. सुरेश ने इस पर और भी प्रतिक्रिया व्यक्त की, “यह पहली बार नहीं है जब योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमले किए हैं। इस परकोई जवाब देने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को 25 लाख रुपयेमुआवजा देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यूपी की कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरा चुकी है, लेकिनइसके बावजूद मुख्यमंत्री योगी कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन पर आरोप लगा रहे हैं।” इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे एक और प्रयास माना है मुख्यमंत्री योगी द्वारा राजनीति करने का, जबकि वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने कीकोशिश की जा रही है। वे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस पर अनावश्यक आरोप लगा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के इस विवादास्पद बयान में उन्होंने कहा था, “भारत जोड़ो यात्रा वास्तव में भारत तोड़ो अभियान का हिस्सा है। राहुल गांधी भारत केबाहर भारत की आलोचना करते हैं, और देश अब उनकी नीयत और स्वभाव को समझ चुका है। भारतीय राजनीति में और भारतीय जनता पार्टी के लिएराहुल गांधी जैसे कुछ नमूने जरूरी होते हैं, ताकि रास्ता हमेशा के लिए साफ रहे।” योगी आदित्यनाथ के इस बयान से कांग्रेस के नेताओं को आक्रोशितकर दिया है, और उन्होंने इसे राजनीति का एक निम्न स्तर माना है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस हमेशा से अयोध्या विवाद को विवाद बनाए रखना चाहती थी। वे काशी कीसंकरी गली में राजनीति करते रहे हैं, लेकिन महात्मा गांधी ने 1916 में ही काशी की संकरी गली पर टिप्पणी की थी। कांग्रेस ने अपने शासन में इसकासमाधान क्यों नहीं किया? महात्मा गांधी का सपना क्यों पूरा नहीं किया? वह सपना अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया।” उनका यह बयान स्पष्टरूप से कांग्रेस के इतिहास और उसकी नीतियों पर सवाल उठाता है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को उन्होंने अयोध्या विवाद के समाधान औरअन्य मुद्दों पर सफलता का श्रेय दिया है। इसके अतिरिक्त, सीएम योगी ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस के शासन में तीनतलाक क्यों नहीं खत्म किया गया, कुंभ को विश्वस्तरीय सम्मान क्यों नहीं दिया गया, और कांग्रेस इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में क्यों असफल रही। योगीआदित्यनाथ ने इन मुद्दों को उठाकर कांग्रेस की नीतियों को असफल ठहराने की कोशिश की है। उनका कहना था कि कांग्रेस के पास देश के विकासके लिए कोई ठोस योजना नहीं थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव हुआ है। कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच यह विवाद निश्चित रूप से यूपी की राजनीति में और पूरे देश में गहरे प्रभाव डाल सकता है। जहांएक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने बयान में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस आलोचना कोएक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है ताकि जनता के सामने भाजपा की असल नीतियों और कार्यों को उजागर किया जा सके। कांग्रेस का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ राज्य की कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, और सामाजिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों सेध्यान हटा कर केवल अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ और भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा देश औरराज्य के विकास में बाधाएं डालने का काम किया है, और अब समय आ गया है जब कांग्रेस के पुराने कारनामों का खुलासा किया जाए। यह विवाद अब राजनीतिक मैदान में एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आगामी चुनावों में यहमुद्दा और भी गरमाने की संभावना है, क्योंकि हर पार्टी अपने-अपने दृष्टिकोण से जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। योगी आदित्यनाथका बयान कांग्रेस के लिए एक चुनौती बन सकता है, जबकि कांग्रेस इसे अपने पक्ष में कर सकती है यदि वे इसे सही तरीके से राजनीतिक मुद्दे के रूप मेंपेश करें।
जहां भी तीर्थस्थल होंगे, सब ढूंढ़ेंगे’, सीएम योगी आदित्यनाथ का धमाकेदार इंटरव्यू

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अखिलेश यादव पर खुलकर निशाना साधा। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू मेंसीएम योगी ने अलग-अलग मुद्दों पर बात की। इस दौरान सीएम योगी ने कहा, ‘हमारी पार्टी तीसरी बार भी यूपी में जीत के लिए कोशिश करेगी।पीएम मोदी का विरासत के प्रति जो विजन है, उसका परिणाम अयोध्या में भी देखने को मिल रहा है। अयोध्या में करोड़ों लोग आ रहे हैं, व्यवसायफल-फूल रहा है।’ सीएम योगी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जिनके आदर्श औरंगजेब हों, उनका व्यवहार भी वैसा होगा। वोऔरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं। उनके नेताओं ने मुंबई से लेकर लखनऊ तक औरंगजेब का महिमा मंडन किया है।’अखिलेश यादव पर सीएम योगी का कटाक्षअखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने आगे कहा कि जो बाबर और औरंगजेब को अपना आदर्श मानता होगा, उसके अंदर वैसा हीगुण देखने को मिलेगा। इसी उत्तर प्रदेश में लौह परुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम के साथ जुड़ रहे थे। पूरे प्रदेशवासियों वसभी राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया था। सरदार पटेल जो भारत के एकता के आदर्श हैं, हम उनके प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त कर रहे थे। तो येलोग जिन्ना का गुणगान कर रहे थे। ये वही कैटेगरी के लोग हैं जो बाबर, औरंगजेब और जिन्ना का महिमामंडन करते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जासकता है कि ये लोग अवसरवादी हैं। इन्हें पलटी मारने में देर नहीं लगेगी। सीएम योगी ने कहा कि राणा सांगा के इतिहास को अगर इन्होंने पढ़ा होताकि वो महान योद्धा, जिनके शरीर के घाव बताते थे कि उन्होंने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कितना कुछ सहा है। यूपी में मुसलमान सबसे ज्यादा सुरक्षित: सीएम योगीसीएम योगी ने आगे कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीनतम धर्म है सनातन धर्म। उसके नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं। दुनिया की कोई जाति, मजहब, धर्म नहीं है, जिसको उसके बुरे वक्त में सनातन धर्मावलंबियों ने संरक्षण न दिया हो। लेकिन बदले में उसे मिला क्या? कहीं भी हिंदू राजाओं नेदुनिया के अंदर कहीं भी अपने बल पर, अपने वैभव के दंभ से किसी पर आधिपत्य स्थापित किया हो। सीएम योगी बोले, ‘100 मुस्लिम परिवारों केबीच क्या एक हिंदू परिवार सुरक्षित रह सकता है क्या? बांग्लादेश और अफगानिस्तान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हम तो सबको समान भाव सेदेख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अगर हिंदू सुरक्षित है तो मुसलमान भी सुरक्षित हैं। मुस्लिम तो यूपी में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं।’ सभी तीर्थस्थलों और मंदिरों को खोजकर निकालेंगे: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा, ‘जो न्याय मानते होंगे उनके लिए न्याय होता है। जो स्वयं न्याय को हाथ में लेते हैं, उन्हें कानून के दायरे में रहकर न्याय समझायाजाता है। कोई हिंसक बनकर सामने आएगा तो क्या हम गिड़गिड़ाएंगे। हमें उसे उसकी ही भाषा में समझाना होगा। जितने भी तीर्थस्थल, मंदिर होंगेसभी को ढूंढेंगे और सब निकालेंगे और दुनिया को बोलेंगे कि सब आकर देखो कि क्या हुआ था संभल में। संभल एक सच्चाई है। आपको उपासनाविधि की पूरी छूट है, लेकिन आप तो इस्लाम के मुद्दों से भटककर काम किए हैं। इस्लाम कहता है कि किसी भी हिंदू मंदिर या किसी भी हिंदू घर कोतोड़कर बनाया गया इबादत घर इस्लाम में स्वीकार नहीं है। यानी की फिर तो यह इस्लाम के विरूद्ध हुआ ना।’ ‘मथुरा में बहुत कुछ हो जाता‘: सीएम योगी आदित्यनाथमथुरा पर सीएम योगी ने कहा कि हम कानून के दायरे में रहकर सब काम करते हैं। मथुरा श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। कोर्ट के ही आदेश का पालन कररहे हैं, वरना वहां बहुत कुछ हो गया होता। सनातन हिंदू धर्म के जो महत्वपूर्ण स्थल हैं, वो सारे हमारे विरासत की ही तो देन हैं। संभल में 68 सभीतीर्थों को हम निकाल रहे हैं। 54 से अधिक निकाल चुके हैं। जिसने भी कब्जे किए होंगे, सब हम निकालेंगे। जितने भी अतिक्रमण हुए हैं, वो सारेअतिक्रमण हम हटाएंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मोहर्रम में जुलूस निकलते हैं तो क्या उनके झंडे की छाया किसी हिंदू मंदिर या घर परनहीं पड़ता है क्या? क्या उससे हिंदू का घर या मंदिर अपवित्र हो जाता है। रंग पड़ जाए तो हायतौबा क्यों?सीएम योगी बोले कि ये सख्त निर्देश है कि जिसे रंग से परहेज है उसपर मत डालना। बावजूद इसके रंग पड़ गया है तो प्रशासन उसे रंगाई पुताई करकेफिर ठीक करके दे रहा है। क्या रंग बिरंगे कपड़े नहीं पहनते। हिंदू से ज्यादा तो मुसलमान रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं। तो फिर रंग से परहेज क्यों। क्यारंग बिरंगी कपड़े पहने, लेकिन अगर रंग पड़ जाए तो हायतौबा मचाते हैं। बहुत सारे मुसलमानों ने होली खेली है। शाहजहांपुर में तो नवाब साहब कीपूरी झांकी यात्रा निकलती है। कुंभ तो सभी भारतीयों का है। जो भारतीय बनकर आएगा तो कुंभ में उसका स्वागत है। लेकिन कोई नकारात्मकमानसिकता के साथ आता है तो वह स्वीकार्य नहीं है। किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं था महाकुंभ: सीएम योगीसीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाकुंभ में हमने केवल जनसुविधाओं का ध्यान रखा। यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं था। पीएम मोदी नेयूनेस्को से 2019 में कुंभ को मानवता के मूर्त धरोहर के रूप में मान्यता दिलाई। दुनिया के देशों के प्रवासी भारतीयों को कुंभ के आयोजन के साथजोड़ने का कार्यक्रम किया। 2019 में प्रवासी भारतीयों को जोड़ने का कार्यक्रम वाराणसी में आयोजित किया गया। जनता जनार्दन की सुविधा कासम्मान करना हम सीखे। मोदी जी ने जो विजन दिया वो धरातल पर दिखाई दे रहा है। मृत्युंजय महाकुंभ था: सीएम योगीमहाकुंभ के हादसे पर सीएम योगी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ज्यूडिशियल कमीशन अपनी जांच कर रहा है। सभी पक्षों सेबातचीत हो रही है, बयान लिए जा रहे हैं और साक्ष्य इकट्ठे किए जा रहे हैं। इसके बाद जो भी परिणाम होगा, उसपर कार्रवाई की जाएगी। ममताबनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक 50 हजार से 1 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन बंगाल से प्रयागराज आता था। इसभीड़ को देखकर पश्चिम बंगाल की सरकार खुद घबरा गई कि हर कोई प्रयागराज आने को उतावला था। लेकिन चाहे वह पश्चिम बंगाल की सरकार ने, चाहे वह कांग्रेस ने, राजद ने, समाजवादी पार्टी ने महाकुंभ के बारे में जो भी बात कही है, वो उनकी तुष्टीकरण की पराकाष्ठा का उदाहरण है। महाकुंभ नेसाबित किया है कि वह मृत्युंजय महाकुंभ था। सलार गाजी मसूद पर क्या बोले सीएम योगीसीएम योगी ने गाजी सलार मसूद के मेले को लेकर कहा कि आक्रांताओं का महिमंडन नहीं होना चाहिए। ये भी हमें मालूम होना चाहिए कि येआक्रांता विदेशी थे। इन्होंने भारत की आस्था पर प्रहार किया। भारत की बहन बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया। इसका महिमा मंडन भारत कीआस्था का, मातृ शक्ति का अपमान है और इनका महिमा मंडन करके हम देश का अपमान करते हैं। ये भारतीय स्वीकार नहीं करेगा। ये वही आक्रांताथे, जिन्होंने भारत में जबरन धर्मांतरण को बढ़ाया था। सीएम योगी ने कहा कि बहुत सारे लोगों ने डॉक्यूमेंट रखे हैं, जिनके पूर्वज कभी न कभी हिंदू थे।उस समय किन्हीं कारणों से उन आक्रांताओं की क्रूरता के कारण कई लोगों को इस्लाम स्वीकार करना पड़ा है। मुझे लगता है कि हमें यह स्वीकार हीनहीं करना चाहिए कि आक्रांताओं का कहीं महिमामंडन होना चाहिए। 1947 से पहले बांग्लादेश और पाकिस्तान थे भारत का हिस्सा: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा कि सलार मसूद गाजी वही है जिसने मोहम्मद गजनवी के साथ भगवान सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने और लूटने का काम कियाथा। वह विदेशी लुटेरा था। उसने जितना अत्याचार किया था, वही व्यवहार उसके साथ हिंदू राजाओं ने किया था। महाराज सुहलदेव के नेतृत्व में उसेजिंदा जलाया गया था। महाराजा सुहलदेव की जय-जयकार होनी चाहिए, ना कि सलार मसूज गाजी की। सीएम योगी ने आगे कहा कि मुसलमानखतरे में नहीं है। लोगों का वोट बैंक खतरे में है। भारत के मुसलमानों को याद रखना होगा कि जबतक हिंदू सुरक्षित है, तभी तक मुसलमान सुरक्षित हैं।कश्मीर, बांग्लादेश, पाकिस्तान के अंदर हिंदुओं के साथ क्या हुआ है। 1947 से पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों भारत का हिस्सा थे। हम उससच्चाई को कैसे भूल सकते हैं। क्या पाकिस्तान में हमारी हिंगलाज माता का मंदिर नहीं है क्या। माता ढाकेश्वरी का मंदिर बांग्लादेश में नहीं है क्या। कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी आदित्यनाथसीएम योगी ने कहा कि कर्नाटक सरकार द्वारा धर्म के नाम पर आरक्षण, यह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का अपमान है।जब संविधान सभा में आरक्षण की बात हुई तो उसमें धर्म के आधार पर आरक्षण का मुद्दा भी उठा था, जिसका बाबा साहब ने विरोध किया था। बाबासाहब ने कहा था कि आरक्षण सामाजिक रूप से उन लोगों को दिया जाना चाहिए, जिनके साथ सैकड़ों वर्षों से छुआछूत किया गया है। इसमें एससी, एसटी वर्ग के लोगों को जोड़ा गया। उसी समय देश 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, तो उसका विरोध और उसका साया भारतपर न पड़ने पाए। इसलिए सभी ने धर्म के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण का विरोध किया था।सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम आभारी हैं मोदी जी के जिन्होंने कश्मीर के दारा 370 को समाप्त कर इस कलंक को मिटाया है। आज जम्मूकश्मीर विकास की प्रक्रिया के साथ जुड़ा है। जनता को अपने आप को उस प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिला। लेकिन कांग्रेस ने इससे जनताको वंचित रखा था। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये तीन तलाक का समर्थन करते थे, जिसे मोदी जी ने समाप्त किया। तीन तलाकके नाम पर जब मर्जी आए, कोई किसी महिला के साथ खिलवाड़ करे ये नहीं हो सकता है। डीके शिवकुमार वही बोल रहे हैं जो कांग्रेस की विरासत मेंउन्हें मिला है, जो कांग्रेस का एजेंडा है। कॉमेडियन कुणाल कामरा पर क्या बोले सीएम योगी आदित्यनाथकॉमेडियन कुणाल कामरा के विवाद पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी कानून के दायरे में हैं। संवैधानिक मूल्यों केदायरे में होनी चाहिए और उसी दायरे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी दूसरे पर व्यक्तिगत प्रहार करने के लिए नहीं होसकता है। दुख की बात है कि कुछ लोगों ने देश का चीरहरण करना, विभाजन की खाई को और चौड़ा करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कोअपना अधिकार मान लिया है। ऐसे लोगों के साथ कानूनन उसी प्रकार व्यवहार करना चाहिए। बटेंगे तो कटेंगे के नारे पर सीएम योगी ने कहा कि यहविभाजनकारी नहीं था। दंगाइयों का उपचार है हमारे पास: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा कि जातियों को अगर जोड़ने के बारे में बात की जा रही है तो इसमें क्या गलत है। यूपी से ये मैंने ही कहा था कि ‘बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’। लाखों हिंदू कश्मीर में काटे गए, हम उसे भूल क्यों जाते हैं। इतिहास वर्तमान का दर्पण होता है। वर्तमान पीढ़ी भूल गई होगीतो उसे यह बताना पड़ेगा हमें। यह हमारा दायित्व है। दंगाईयों का हमारे पास उपचार भी है। दंगाईंयों को घुटनों के बल चलने के लिए मजबूर करते हैंऔर उन्हें ठीक भी कर देते हैं। ये हमारी शराफत का स्टाइल है।