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दिल्ली विधानसभा चुनाव: पीएम मोदी ने “मेरा बूथ सबसे मजबूत” कार्यक्रम को किया संबोधित, बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा- हार के डर से आपदावाले घोषणाएं कर रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के “मेरा बूथ सबसे मजबूत” कार्यक्रम में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संवादकिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बीजेपी के कार्यकर्ताओं को नई दिशा और उनके कर्तव्यों की याद दिलाना था। पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं सेअपेक्षाएँ जताई, जिसमें स्थानीय प्रशासन की नाकामियों को उजागर करने के लिए वे सक्रिय रूप से कदम उठाएं। कार्यकर्ताओं से प्रशासन की लापरवाही को उजागर करने की अपीलप्रधानमंत्री मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने बूथ क्षेत्रों में कूड़े के ढेर, टूटी नालियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओंको उजागर करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके तस्वीरें और वीडियो लेकर सोशल मीडिया पर साझाकरनी चाहिए। यह कदम प्रशासन पर दबाव डालने और सुधार की दिशा में कदम उठाने के लिए आवश्यक था। ईमानदारी से काम करने की सलाहप्रधानमंत्री मोदी ने कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाया कि वे भारतीय जनता पार्टी के प्रचारक ही नहीं, बल्कि समाज के जिम्मेदार नागरिक भी हैं। उन्होंनेउन्हें ईमानदारी से स्थानीय समस्याओं को उजागर करने की सलाह दी, ताकि आम जनता को यह समझ में आए कि उनकी समस्याओं को सरकारगंभीरता से ले रही है और उनकी आवाज़ सुनी जा रही है। कार्यकर्ताओं की शक्ति और एकता पर बलपीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे बूथ स्तर पर एकजुट होकर काम करें और पार्टी की ताकत को पहचानें। उन्होंने इसे पार्टी की सफलता केलिए जरूरी बताया और कार्यकर्ताओं को हमेशा पार्टी के मिशन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा दी। पार्टी के प्रति विश्वास और समर्थन बढ़ाने की दिशा में कदमप्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के दौरान बताया कि जब बीजेपी कार्यकर्ता स्थानीय समस्याओं को उजागर करेंगे, तो इसका सीधा असर पार्टी की छवि परपड़ेगा। यह कदम पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास और समर्थन बढ़ाने में मदद करेगा। जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करने की प्रेरणाप्रधानमंत्री मोदी ने कार्यकर्ताओं से यह भी अपील की कि वे हमेशा जनसमस्याओं के समाधान के लिए काम करें। बीजेपी, उन्होंने कहा, हमेशा जनहितके मुद्दों पर काम करने वाली पार्टी है और इसका उद्देश्य सिर्फ समस्याओं का समाधान करना है।बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की आवश्यकताकार्यक्रम के अंत में, पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि “आपका बूथ सबसे मजबूत होगा, तभी पार्टी सबसे मजबूत होगी।” उनका यह संदेश कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने के लिए था और यह सुनिश्चित करने के लिए था कि वे पार्टी के काम में सक्रिय रूप से शामिल हों। आगामी चुनावों के लिए रणनीतिक रूप से मजबूत पार्टीप्रधानमंत्री ने अंत में यह विश्वास व्यक्त किया कि यदि पार्टी के कार्यकर्ता अपनी मेहनत और निष्ठा से बूथ स्तर की संरचना को और मजबूत करेंगे, तोबीजेपी अगले चुनावों में एक शानदार जीत हासिल कर सकेगी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव:  दिल्ली में मोदी की 3 ओर योगी की 14 जनसभाएं, कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी की भी ताबड़तोड़ रैलियों

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपनी प्रचार रणनीति को तेज़ कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों के माध्यम से पार्टी मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी कितनी जनसभाएं करेंगे?दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री ने खुद कमान संभाली है। आम आदमी पार्टी का सामना करने के लिए पीएम मोदी 29 जनवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना खादर क्षेत्र में रैली करेंगे। उसके बाद 31 जनवरी को पश्चिमी दिल्ली के द्वारका में सेक्टर-14 के पास स्थित वेगास मॉल केनिकट। वहीं 2 फरवरी को पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करेंगे। इन रैलियों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को दिल्लीवासियों के बीच प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियांयोगी आदित्यनाथ 23 जनवरी से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में कुल 14 रैलियां करेंगे। इन रैलियों में प्रमुख क्षेत्रों जैसे किराड़ी, बाहरी दिल्ली, केशवपुरम, उत्तर-पश्चिम दिल्ली, शाहदरा, करोल बाग, नजफगढ़, महरौली, दक्षिण दिल्ली और मयूर विहार शामिल हैं। इन रैलियों में योगी आदित्यनाथविशेष रूप से पूर्वांचली मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास करेंगे, जो दिल्ली में एक महत्वपूर्ण जनसंख्या बनाते हैं। अन्य प्रमुख नेताओं की रैलियांइसके अतिरिक्त, भाजपा के वरिष्ठ नेता जैसे गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, हरदीप पुरी और धर्मेंद्र प्रधान भी दिल्ली में रैलियों और रोड शो के माध्यम से प्रचार करेंगे। इन नेताओं की रैलियों का विवरण पार्टी द्वारा समय-समयपर साझा किया जाएगा। पूर्वांचली मतदाताओं पर विशेष ध्यानबीजेपी ने दिल्ली में लगभग 50% पूर्वांचली मतदाताओं को अपनी प्राथमिकता में रखा है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने भोजपुरीअभिनेता और सांसद मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ, स्मृति चौधरी और गिरिराज सिंह जैसे पूर्वांचली चेहरों को अपने प्रचार अभियान में शामिलकिया है। पार्टी विशेष रूप से बाइक रैलियों और छोटी बैठकों का आयोजन कर इन मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। चुनाव प्रचार की रणनीतिभा.ज.पा. ने चुनाव प्रचार के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। गणतंत्र दिवस के बाद पार्टी रैलियों की संख्या बढ़ाएगी और अधिकनेताओं को प्रचार में शामिल करेगी, जिससे मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस का प्रचार अभियानकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपनी पहली रैली 13 जनवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर क्षेत्र मेंआयोजित की थी। इसके बाद, वह 22 से 24 जनवरी तक दिल्ली में लगातार तीन रैलियां करेंगे। 22 जनवरी को सदर बाजार विधानसभा क्षेत्र केइंद्रलोक मेट्रो स्टेशन के पास शाम 5 बजे रैली करेंगे। साथ ही 23जनवरी को मुस्तफाबाद विधानसभा में साथ ही, 24 जनवरी को मादीपुर विधानसभाक्षेत्र में जनता को संबोधित करेंगे। इन रैलियों में राहुल गांधी कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे, और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी इन रैलियों में शामिल होंगे। वहींदिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने प्रचार अभियानों को तीव्र कर रहे हैं। भाजपा विशेष रूप से पूर्वांचलीमतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार में राहुल गांधी के नेतृत्व को प्रमुखता दे रही है। यह देखना दिलचस्प होगाकि दोनों पार्टियों की रणनीतियां आगामी चुनाव परिणामों पर क्या असर डालती हैं।

महाराष्ट्र के जलगांव में बड़ा रेल हादसा: परांडा स्टेशन के पास 8 यात्रियों की मौत

हादसे की शुरुआतमहाराष्ट्र के जलगांव जिले में परांडा रेलवे स्टेशन के नजदीक एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। पुष्पक एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह के कारणयात्री घबरा गए। इस अफवाह के चलते कई यात्रियों ने ट्रेन से छलांग लगा दी। कर्नाटक एक्सप्रेस से हुई टक्करदुर्भाग्यवश, उसी समय विपरीत दिशा से आ रही कर्नाटक एक्सप्रेस ने इन यात्रियों को कुचल दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में छहसे आठ लोगों की मौत हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों का बयानप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुष्पक एक्सप्रेस के ब्रेक लगाने के दौरान चिंगारियां उठीं, जिससे डिब्बों में आग लगने की अफवाह फैल गई। घबराएयात्रियों ने चलती ट्रेन से कूदने का प्रयास किया। इस दौरान कई यात्री सामने से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गए। रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रियाहादसे के बाद रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि घायलों को नजदीकी अस्पताल मेंइलाज के लिए भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि हादसे की जांच की जा रही है। भविष्य के लिए सबकयह घटना रेलवे सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की खामियों को उजागर करती है। यात्रियों को आपात स्थिति में सही व्यवहार के लिए जागरूककरना बेहद जरूरी है। रेलवे प्रशासन को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस हादसे ने न केवल मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल पैदा किया है, बल्कि यह रेलवे प्रबंधन के लिए चेतावनी भी है कि यात्रियों की सुरक्षाप्राथमिकता होनी चाहिए।

दिल्ली विधानसभा चुनाव: केजरीवाल की मिडिल क्लास के लिए की केंद्र से मांगे- जानिए पूरी मामला

दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, और आम आदमी पार्टी (AAP) भी चुनावी तैयारियों में जुटी है।पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मिडिल क्लास के मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा और इस वर्गके लिए सात प्रमुख मांगें पेश की। केजरीवाल ने कहा कि चुनावी वक्त में अक्सर धर्म और जाति के नाम पर वादे किए जाते हैं, लेकिन मिडिल क्लासको कभी भी मुख्य एजेंडा नहीं बनाया जाता। उनका आरोप है कि यह वर्ग टैक्स टेररिज्म का शिकार हो चुका है, और उसे सरकार की नीतियों से कोईठोस लाभ नहीं मिल रहा। मिडिल क्लास के लिए टैक्स राहत की मांगअरविंद केजरीवाल ने मिडिल क्लास के लिए टैक्स राहत की मांग की। उनका कहना है कि यह वर्ग टैक्स टेररिज्म का शिकार हो रहा है और उसेकराधान के मामले में बहुत अधिक बोझ झेलना पड़ रहा है। इस वर्ग के लिए टैक्स में राहत देने की आवश्यकता है, ताकि वे आर्थिक रूप से अधिकमजबूत बन सकें। महंगाई पर नियंत्रणमहंगाई ने मिडिल क्लास की जिंदगी को कठिन बना दिया है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इस वर्ग का जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है। केजरीवाल ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने और कीमतों को नियंत्रित करने की अपील की है। स्वास्थ्य सेवाओं का सुधारकेजरीवाल ने मिडिल क्लास के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की। उनका कहना है कि इस वर्ग को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओंतक पहुंच नहीं है और उन्हें उच्च चिकित्सा खर्चों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने कीमांग की, ताकि मिडिल क्लास भी अच्छे इलाज का लाभ उठा सके। शिक्षा में सुधारमिडिल क्लास के बच्चों के लिए शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर भी केजरीवाल ने जोर दिया। उनका कहना है कि शिक्षा के मामले में सुधारके बिना इस वर्ग के बच्चों के भविष्य पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सरकार से ठोस कदम उठाने का अनुरोधकिया रोजगार के अवसर सृजनमिडिल क्लास के लिए रोजगार के अवसर सृजन पर भी केजरीवाल ने ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आजकल कई लोग उच्च शिक्षा प्राप्तकरने के बाद भी बेरोजगार हैं, और यह समस्या खासतौर पर मिडिल क्लास में अधिक है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार से रोजगार सृजन की योजनाओं कोबढ़ाने की मांग की, ताकि मिडिल क्लास के लोगों को स्थिर रोजगार मिल सके सस्ती आवास योजनाओं की आवश्यकतामिडिल क्लास के लिए सस्ती आवास योजनाएं आवश्यक हैं। केजरीवाल ने कहा कि आजकल घर खरीदने के लिए मिडिल क्लास के पास पर्याप्तसंसाधन नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण आवास योजनाएं बनाने की अपील की, ताकि मिडिल क्लास अपने सपनोंका घर आसानी से खरीद सके। कर्ज पर ब्याज दरों में राहत केजरीवाल ने कर्ज पर ब्याज दरों में राहत की मांग की। उनका कहना था कि घर खरीदने, शिक्षा के लिए कर्ज लेने या अन्य वित्तीय जरूरतों के लिएमिडिल क्लास को उच्च ब्याज दरों का सामना करना पड़ता है, जो उनके लिए आर्थिक बोझ बन जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ब्याज दरों में कटौतीकरने की मांग की, ताकि इस वर्ग को आर्थिक रूप से राहत मिल सके। मिडिल क्लास के मुद्दे पर AAP की चुनावी रणनीतिकेजरीवाल की इन सात मांगों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं। उनका यह कदम मिडिल क्लास के बीच AAP को समर्थन दिलानेकी रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि मिडिल क्लास का वोट बैंक चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कदम यह भी दर्शाता है किआम आदमी पार्टी सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश के मिडिल क्लास के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।विरोधी दलों की प्रतिक्रियाकेजरीवाल की इन मांगों पर विपक्षी दलों का कहना है कि यह सिर्फ एक चुनावी स्टंट है, जिसका उद्देश्य मिडिल क्लास को आकर्षित करना है।हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे AAP की स्मार्ट चुनावी रणनीति मानते हैं, जो इस वर्ग के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाकर वोट बैंक कोप्रभावित करने की कोशिश कर रही है। भविष्य की दिशाआने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल की ये मांगें दिल्ली विधानसभा चुनाव में क्या असर डालती हैं। मिडिल क्लास के लिएउनकी इन मांगों को लेकर उठाए गए कदमों से AAP को कितनी राजनीतिक समर्थन मिलती है, यह चुनाव परिणामों में स्पष्ट हो जाएगा।

कर्नाटक के येल्लापुर में बड़ा हादसा: ट्रक खाई में गिरने से 8 लोगों की मौत, 10 घायल

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर क्षेत्र में आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यह दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग 63 (NH-63) पर हुई, जब एक फलों से लदा ट्रक नियंत्रण खो बैठा और खाई में गिर गया। इस हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप सेघायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। हादसे का विवरणप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक सुबह के समय येल्लापुर से गुजर रहा था। ट्रक फलों से भरा हुआ था और उसमें कुल 18 लोग सवार थे। बताया जारहा है कि ट्रक ड्राइवर ने अचानक गाड़ी से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद ट्रक सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरा। खाई की गहराई काफी ज्यादाहोने के कारण ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ट्रक की गति काफी तेज थी, और सड़क पर अचानक आई मोड़ पर चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की। हालांकि, सड़क गीली होने के कारण ट्रक फिसल गया और यह हादसा हो गया। मौके पर राहत बचाव कार्य जारीदुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायलों को ट्रक से बाहर निकालने की कोशिश की। साथ ही, पुलिस औरएंबुलेंस को हादसे की सूचना दी गई। प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को येल्लापुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने बताया कि 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों में से अधिकतर मजदूर बताए जा रहे हैं, जो ट्रक के अंदर यात्रा कर रहे थे। 10 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। घायलों का इलाज जारीघायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए निकटतम बड़े अस्पताल में भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से कुछ को सिर, रीढ़ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घायलों के लिए सभी आवश्यक दवाओं और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पुलिस की जांच जारीहादसे के कारणों की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रक ओवरलोडेड था और सड़क पर तेज गति से चल रहा था। इसकेअलावा, सड़क की स्थिति और मौसम भी दुर्घटना का एक बड़ा कारण हो सकते हैं। पुलिस ने बताया कि ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया गयाहै, और दुर्घटना के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रियाघटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर कन्नड़ जिले के डीसी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने राहत कार्यों का जायजा लियाऔर मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। हादसे का प्रभावयह हादसा न केवल येल्लापुर बल्कि पूरे कर्नाटक में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग ट्रक मालिकों और चालकों से अपील कर रहे हैं कि वेवाहनों को अधिक गति से न चलाएं और ओवरलोडिंग से बचें। NH-63 पर बढ़ते हादसेराष्ट्रीय राजमार्ग 63, जो कर्नाटक के महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, पर अक्सर सड़क हादसे होते हैं। यह सड़क घुमावदार पहाड़ियों और संकरे रास्तों सेहोकर गुजरती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पर सुरक्षा उपायों को और बेहतर करने की आवश्यकताहै।सरकार और प्रशासन से मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि NH-63 पर सड़क सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए। उन्होंने सड़क परचेतावनी संकेत लगाने, स्पीड ब्रेकर बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी से सड़कें बंद,  हिमाचल में 6 cm बर्फ, MP के 6 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, यूपी समेत 12 राज्यों में कोहरा

उत्तर भारत में हालिया बर्फबारी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कई इलाकों में भारी बर्फबारीके कारण यातायात और अन्य गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ा है। जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से मुश्किलें बढ़ींगुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे इलाकों में बर्फबारी के कारण सामान्य जनजीवन बाधित हो गया है। श्रीनगर-लेह हाईवे और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीयराजमार्ग को भूस्खलन और बर्फबारी के चलते बंद करना पड़ा है। फंसे हुए वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। हवाई सेवाएं प्रभावितश्रीनगर एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को कड़ाके की ठंड में लंबा इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रासे बचने की अपील की है। वहीं बर्फबारी के चलते स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। नागरिकों को घर के अंदर रहने औरसुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। हिमाचल प्रदेश में 6 सेंटीमीटर तक बर्फबारी दर्जकुल्लू, मनाली, शिमला और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। ऊंचाई वाले इलाकों में जनजीवन ठहर सा गया है। पर्यटन स्थलों पर असरबर्फबारी देखने बड़ी संख्या में पर्यटक मनाली और शिमला पहुंचे हैं, लेकिन सड़कें बंद होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने से उन्हें परेशानियों कासामना करना पड़ रहा है। किसानों की चिंताएं बढ़ींकिसानों की फसलों पर बर्फबारी कानकारात्मक असर पड़ सकता है। सेब और अन्य फसलों को ठंड से नुकसान पहुंचने की आशंका है। मध्य प्रदेश में गिरा तापमान, ठंड का प्रकोप जारीमध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। वहींघने कोहरे ने यातायात को प्रभावित किया है। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।बता दें कि शीतलहर के कारण सर्दी-जुकाम और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। उत्तर भारत के कई राज्यों में कोहरे का असरउत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान सहित 12 राज्यों में घने कोहरे ने रेल और सड़क यातायात को बाधित किया है। बता दें कि कोहरेके कारण कई ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। वहीं कोहरे के चलते सड़क हादसों की घटनाओं में वृद्धि हुई है।प्रशासन ने वाहन चालकों को फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी है। प्रशासन की चेतावनी और तैयारियांमौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बर्फबारी की चेतावनी दी है। वहीं, उत्तर भारत के अन्य हिस्सों मेंशीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। सावधानियां बरतने की अपीलबर्फबारी वाले क्षेत्रों में नागरिकों से अनावश्यक यात्रा न करने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों और हीटर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।वाहन चालकों को कोहरे में फॉग लाइट्स का उपयोग करने और बेहद सतर्कता के साथ गाड़ी चलाने की हिदायत दी गई है।

सांसद से मंत्री तक का सफर: समाज के हर वर्ग के लिए समर्पण : कमलेश पासवान

कमलेश पासवान, जो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, का राजनीतिक सफर बहुत हीप्रेरणादायक रहा है। वे पांच बार संसद सदस्य रहे और अपने क्षेत्र में हमेशा से सक्रिय रहे। संसद में रहते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरोंको बढ़ावा दिया, बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इन कार्योंसे उन्होंने समाज के हर वर्ग में विश्वास और समर्पण को मजबूत किया। 2024 में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद कदम से कदम मिलाकर बदलाव की ओर2024 में जब कमलेश पासवान ने राज्य ग्रामीण विकास मंत्री का पद संभाला, तो उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी प्राथमिकता को औरभी मजबूती से तय किया। मंत्री पद संभालने के सिर्फ छह महीने के अंदर ही वे गांवों के विकास के लिए कई अहम योजनाओं पर काम कर रहे हैं।उनका मानना है कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब गांवों का सर्वांगीण विकास होगा। उनके नेतृत्व में बनाई जा रही योजनाएं गांवों केबुनियादी ढांचे में सुधार, रोजगार सृजन और शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता जैसे अहम पहलुओं पर केंद्रित हैं। जब देश के गांव बदलेंगे, तभी देश बदलेगाकमलेश पासवान का हमेशा से यह मानना रहा है कि गांवों का विकास ही देश के समग्र विकास का आधार है। वे कहते हैं, “जब तक हमारे गांव नहींबदलेंगे, तब तक देश नहीं बदल सकता।” उनके इस दृष्टिकोण से यह साफ है कि गांवों की समस्याओं का समाधान किए बिना, पूरे देश का विकाससंभव नहीं है। इसलिए, वे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं, ताकि गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता हो और गांवके लोग अपने जीवन स्तर को सुधार सकें। प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट में युवा नेतृत्व की पहचानकमलेश पासवान, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के एक युवा मंत्री हैं, ने अपने कार्यकाल में यह साबित किया है कि युवा नेतृत्व से बड़े बदलावआ सकते हैं। वे उन नेताओं में से एक हैं, जो सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस कदम भी उठातेहैं। उनका समर्पण और मेहनत उनके नेतृत्व की ताकत है, जो गांवों के लिए सकारात्मक बदलाव ला रही है। कमलेश पासवान का ग्रामीण विकास के प्रति समर्पणकमलेश पासवान का दृष्टिकोण और उनके द्वारा उठाए गए कदम यह दर्शाते हैं कि वे केवल मंत्री नहीं, बल्कि एक सशक्त नेतृत्व हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों केविकास के लिए दृढ़ नायक की तरह कार्य कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि गांवों का विकास न केवल देश की समृद्धि के लिए आवश्यक है, बल्कि यहएक मजबूत और समावेशी समाज की नींव भी रखता है। उनके प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय गांवों में एक बड़ाबदलाव आएगा, जो देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। ‎