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विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के राजदूत शुई फ़ीहॉन्ग ने संयुक्त रूप से केक काटकर भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वींवर्षगांठ मनाई.जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने-अपने चीनी समकक्ष, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग केसाथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया. लेकिन असली बात यह है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है मोदी सरकार ने “डिसएंगेजमेंट” के नाम परलद्दाख में 2,000 वर्ग किमी से अधिक भूमि का समर्पण करके दशकों में भारतीय क्षेत्र के सबसे बड़े नुकसान को स्वीकार करने का फैसला किया है. दरअसल चीन के प्रति प्रधानमंत्री के कायराना रवैये में एक निरंतरता बनी हुई है इसकी शुरुआत उनके द्वारा चीन को दी गई कुख्यात सार्वजनिक क्लीनचिट से हुई. प्रधानमंत्री ने 15 जून 2020 को गलवान में हमारे 20 बहादुर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के केवल चार दिन बाद लाइव टेलीविजन परघोषणा की.”ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है न ही कोई घुसा हुआ है. यह सिलसिला आज भी जारी है. जब मोदी सरकार चीन के साथ सामान्यसंबंध बनाने के प्रयास में हमारी संप्रभुता की रक्षा करने में विफल हो रही है. 21 अक्टूबर 2024 को हुए ‘डिसएंगेजमेंट’ समझौते पर हस्ताक्षर के चारमहीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, भारतीय सरकार अब तक व्यापक चिंताओं को दूर करने में असफल रही है और चिंता यही है किसमझौता भारत की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हित के लिए एक बड़ा झटका है.मोदी सरकार ने गश्त के मूल विचार को ही कमजोर कर दिया है जोक्षेत्रीय अधिकार जताने का एक महत्वपूर्ण संकेत होता है.

डेमचोक में है चीन की सहमति की जरुरत
आज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डेपसांग मैदानी क्षेत्र में भारतीय गश्ती दलों को पांच स्थानों चीन की अनुमति की आवश्यकता होती है. इसकेअलावा कथित तौर पर भारतीय गश्त दलों को डेपसांग के अलावा डेमचोक और चुमार में भी चीन की सहमति की जरूरत होती है. गलवान में जिस”बफर ज़ोन” में भारतीय सैनिकों को प्रवेश करने से रोका जाता है वह भारतीय दावा रेखा से 1 किलोमीटर अंदर स्थापित किया गया है इसका मतलबयह है कि चीनी सैनिक हमारी दावा रेखा के करीब तैनात हैं जबकि भारतीय सैनिक 2.4 किलोमीटर से अधिक दूर हैं.हॉट स्प्रिंग में बफर ज़ोन प्रभावीरूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा को भारतीय दावा रेखा के भीतर 1-3 किलोमीटर अंदर खिसका चुका है.पैंगोंग त्सो में “बफ़र ज़ोन” हमारे सैनिकों कोफिंगर 3 से आगे जाने से रोकता है जबकि पहले वे 10 किलोमीटर आगे फिंगर 8 तक जा सकते थे.यह अप्रैल 2020 से पहले मौजूद यथास्थिति केकहीं करीब नहीं है जिसकी मांग हमारी सशस्त्र सेनाओं और रक्षा प्रतिष्ठान द्वारा लगातार मांग की जाती रही है.

भारत के महत्वपूर्ण स्थान को है दर्शाता
इसके बजाय यह अप्रैल 2020 से पहले की हमारी स्थिति की तुलना में भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के नुकसान को दर्शाता है.हमारी संप्रभुता पर चीनी घुसपैठ के बावजूद चीन पर हमारी आर्थिक निर्भरता लगातार बढ़ रही है. चीनी आयात $100 अरब को पार कर चुका है और अभी भी तेजी से बढ़ रहा है. जबकि चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जिन चीनी कंपनियों ने प्रधानमंत्री के करीबी दोस्तों केसाथ साझेदारी करने पर सहमति जताई है उन्हें भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है. जबकि भारत में रोजगार सृजित करनेवाले सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम चीनी आयात के हमले से तबाह हो रहे है.हम अपनी मांग दोहराते हैं कि प्रधानमंत्री इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्देपर देश की जनता को विश्वास में लें और स्पष्ट करें कि जब हमारी क्षेत्री अखंडता गंभीर रूप से खतरे में है तब हम चीन के साथ संबंधों को सामान्य क्योंबना रहे हैं और चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को और बढ़ा क्यों रहे हैं.

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