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ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना के हाथों भारी नुकसान उठाने के बावजूद पाकिस्तान अपनी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल कीउपाधि देकर जश्न मना रहा है। इस फैसले को पाक सरकार द्वारा सेना का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद मिली पदोन्नति
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनरल मुनीर को फील्ड मार्शल बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ। पाकिस्तान केइतिहास में वे अयूब खान के बाद दूसरे अधिकारी हैं जिन्हें यह सर्वोच्च सैन्य रैंक दी गई है।

फील्ड मार्शल: एक मानद और प्रतिष्ठित पद
पाकिस्तानी सेना में फील्ड मार्शल का पद एक पांच सितारा रैंक होता है जो थल सेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुखों से भी ऊपर माना जाता है।हालांकि यह एक मानद पद है, जिसका कार्यक्षेत्र या वेतन में कोई बदलाव नहीं होता। यह रैंक उन्हीं अफसरों को मिलती है जिन्होंने युद्ध में असाधारणनेतृत्व दिखाया हो।

वायुसेना प्रमुख का कार्यकाल भी बढ़ाया गया
पाक सरकार ने वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू का कार्यकाल भी बढ़ा दिया है। भारतीय हमलों में पाकिस्तान की वायुसेनाको भारी क्षति उठानी पड़ी थी, खासकर उन 11 एयरबेस पर जहां भारत ने सटीक हमले किए। इसके बावजूद सेवा विस्तार ने कई सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व ISI प्रमुख रह चुके हैं मुनीर
जनरल मुनीर 2018 में ISI प्रमुख बने थे लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान से मतभेद के चलते 2019 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया।इमरान की पत्नी बुशरा बीबी पर कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर दोनों के बीच तनातनी हुई थी।

राजनीतिक संदेश या सेना का सम्मान?
विश्लेषकों का मानना है कि यह पदोन्नति एक तरह से जनता का ध्यान वास्तविक हालातों से भटकाने की कोशिश है। पाकिस्तान सरकार अपनेहालिया सैन्य नुकसान को ‘विजय’ के रूप में दिखाकर सेना की छवि सुधारने की रणनीति पर काम कर रही है।

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