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पटना: वक्फ संशोधन विधेयक पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के समर्थन से बिहार की सियासत गरमा गई है। इस फैसले से पार्टी के मुस्लिम नेताओंमें असंतोष बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते अब तक चार मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वालों में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ केप्रदेश सचिव मो. शाहनवाज मलिक, प्रदेश महासचिव मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन और पूर्वी चंपारणजिला चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रवक्ता कासिम अंसारी शामिल हैं। इन नेताओं ने जदयू पर आरोप लगाया कि उसने मुसलमानों के साथ विश्वासघात कियाहै और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव शाहनवाज मलिक ने अपने इस्तीफे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए लिखा कि हम जैसे लाखोंमुसलमानों का विश्वास था कि वे धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह यकीन टूट गया है। जदयू द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक कासमर्थन किए जाने से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह द्वारा लोकसभा में दिए गए बयान और बिल केसमर्थन से मुसलमान मर्माहत हैं। इसे संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए उन्होंने कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं कर सकते।

वहीं, जदयू ने इन नेताओं के पार्टी से जुड़े होने के दावों को खारिज कर दिया है। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि नवाज मलिक औरकासिम अंसारी का पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वे किसी भी पद पर नहीं थे। इसके बावजूद, इस्तीफा देने वाले नेता पार्टी के फैसले पर आक्रोशव्यक्त कर रहे हैं और इसे समर्थकों के साथ विश्वासघात बता रहे हैं। प्रदेश महासचिव मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग ने कहा कि जिस मुस्लिम समाज ने19 वर्षों तक जदयू का समर्थन किया, उसके खिलाफ जाकर पार्टी ने वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। इसका असर आगामी बिहारविधानसभा चुनाव 2025 में देखने को मिलेगा।

बिहार में मुस्लिम वोट बैंक हमेशा जदयू के लिए महत्वपूर्ण रहा है। लेकिन वक्फ संशोधन विधेयक पर समर्थन के बाद पार्टी के खिलाफ मुस्लिमसमुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। यह नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में जदयू के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

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