
दिल्ली की बैठक में गूँजी पंजाब की सच्चाई
नॉर्थ ज़ोन काउंसिल की दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब की स्थिति, संघर्ष और अधिकारों को बेहद स्पष्ट शब्दों मेंरखा। बैठक में मौजूद सभी नेताओं के सामने उन्होंने यह बात कही कि हर कोई पंजाब के संसाधनों की ओर हाथ बढ़ाता है कभी कहा जाता है किपंजाब यूनिवर्सिटी दे दो, कभी कहा जाता है कि हेडवर्क्स दे दो, तो कभी चंडीगढ़ को लेकर दावे किए जाते हैं। लेकिन जब पंजाब अपनी जरूरतों, अपने अधिकारों की बात करता है, तो किसी तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब से लेना सब चाहते हैं, पर देना किसीको मंजूर नहीं।
बाढ़ की चोट गहरी थी, पर केंद्र की मदद अब तक अधूरी
उन्होंने बाढ़ से हुई तबाही को बेहद भावुकता और गंभीरता से सामने रखा। पंजाब में आई बाढ़ ने लाखों किसानों का जीवन उलट-पुलट कर दिया।पाँच लाख एकड़ फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, खेतों की मेड़ों से लेकर पुलों-सड़कों तक सब टूट गया, गांवों में जीवन सामान्य होना मुश्किल हो गया।लेकिन इतनी भारी तबाही के बाद भी केंद्र सरकार ने पंजाब को बाढ़ राहत का 1600 करोड़ रुपये नहीं दिया। इसके विपरीत पंजाब सरकार ने अपनीजिम्मेदारी निभाते हुए खुद संसाधन जुटाए और किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा दिया। यह कदम पंजाब सरकार की प्रतिबद्धताको दिखाता है कि चाहे मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, पंजाब अपने लोगों को अकेला नहीं छोड़ता।
कठिन दौर में भी पंजाब बना देश का खाद्य प्रहरी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि इतनी परेशानियों के बाद भी पंजाब ने देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने कहा कि पंजाबइस बार भी देश को 150 लाख मीट्रिक टन चावल देगा। यह कोई साधारण बात नहीं है, क्योंकि जब राज्य खुद मुसीबतों से जूझ रहा हो, तब भी देशके लिए अनाज देना पंजाब के योगदान की विशालता को दिखाता है। पंजाब अपनी जिम्मेदारी निभाने में कभी पीछे नहीं हटता, चाहे हालात कितने भीप्रतिकूल क्यों न हों।
पानी के बिना खेती कैसे? पंजाब का दर्द सामने आया
पानी के मुद्दे पर उन्होंने बेहद सटीक और तीखा सवाल उठाया अगर पंजाब को उसका पानी ही नहीं मिलेगा, तो पंजाब की खेती कैसे चलेगी? क्याकिसान गमलों में फसलें उगाएँगे? यह सवाल केवल एक टिप्पणी नहीं था, बल्कि पंजाब की दशकों पुरानी उपेक्षा का सच था। पंजाब देश को खानाखिलाता है, लेकिन अपने हिस्से का पानी पाने के लिए उसे आज भी संघर्ष करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल अनुचित है, बल्कि राज्य के भविष्यको खतरे में डालती है।
पंजाब अपने हक़ की लड़ाई ईमानदारी से जारी रखेगा
अंत में CM भगवंत मान ने यह दोहराया कि पंजाब किसी से एहसान नहीं चाहता। पंजाब सिर्फ अपना हक़ चाहता है अपने संसाधनों का हक़, अपनेपानी का हक़, अपनी यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ पर न्याय का हक़। उन्होंने कहा कि पंजाब की यह लड़ाई अब और ज्यादा स्पष्ट, ज्यादा मजबूत औरज्यादा साहसी होगी। पंजाब की आवाज़ न दबेगी और न रुकेगी। पंजाब अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहेगा और अपना हक़ लेकर ही लौटेगा।