
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न की कहानी है। वहीं, कांग्रेस ने कहा किकानून ने शोर से ज्यादा जोर से बात की है। बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में धनशोधन के आरोपों सेजुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ये लोग ईडी, सीबीआईजैसी एजेंसियों का उपयोग करके हमारे लोगों को बदनाम कर रहे हैं। खासकर गांधी परिवार को सताने के लिए उन्होंने ये केस डाला है। नहीं तो उसमेंकुछ नहीं है। कोई एफआईआर नहीं है। कोई व्यक्ति शिकायत डालता है और ये उस पर कार्रवाई करते हैं। जिस चीज में कोई दम नहीं है, उसमें दमभरने की कोशिश करके हमारे लोगों का उत्पीड़न करते हैं। हमारी कांग्रेस पार्टी के बहुत से नेता, 50 बड़े नेता जो उनसे सहानुभूति नहीं रखते हैं, उनकेखिलाफ ईडी का केस डालकर उन्हें सता रहे हैं। उन्होंने धनशोधन का मुकदमा डालकर कई लोगों को अपनी ओर किया है। कई सांसदों को अपनी ओरकिया है और कई जगह सरकारें बनाई हैं।
साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकती
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को मंगलवार को बड़ी राहत मिली, जब कोर्ट ने दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ सेदोनों के खिलाफ दायर किए गए आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। ईडी ने दोनों नेताओं को धनशोधन मामले में आरोपी बनाया है।आरोपपत्र में सोनिया और राहुल पर एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अंतर्गत आने वाली 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने का आरोपथा। इसके साथ ही कोर्ट ने ईडी को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी और स्पष्ट किया कि आगे की जांच के लिए उसे स्वतंत्रता है। साथ ही कहाहै कि ईडी का मामला सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी प्राथमिकीपर। हालांकि, एजेंसी इस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकती है।
काटजू के पिता के नाम पर एजेएल में शेयर
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल का गठन किया था। इसका उद्देश्यअलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब एजेएल के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड,भले ही एजेएल के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्टकर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक एजेएल पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादाका कर्ज चढ़ गया। तब एजेएल ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बादएजेएल प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी। बता दें कि शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर एजेएल में शेयर थे।