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नई दिल्ली, 7 मार्च 2026

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर कर्ज और आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पिछली सरकार राजधानी पर भारी कर्ज छोड़कर गई है, जबकि वर्तमान सरकार सीमित कर्ज लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।
वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता बिना पूरी जानकारी के बयान दे रहे हैं। उनके अनुसार सच्चाई यह है कि ग्यारह वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद पिछली सरकार दिल्ली पर बड़ा आर्थिक बोझ छोड़कर गई है।

ग्यारह वर्ष के शासन के बाद दिल्ली पर एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये का कर्ज
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्ष 2024–25 के दिल्ली सरकार के अपने ही आंकड़ों के अनुसार राजधानी पर लगभग एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। उन्होंने कहा कि यह कर्ज उसी सरकार के समय में बढ़ा जिसने खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बताने की कोशिश की थी। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि उस सरकार के कार्यकाल के बाद दिल्ली पर भारी आर्थिक बोझ रह गया।
वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि इतने बड़े कर्ज के बावजूद आज आम आदमी पार्टी के नेता नई सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जो पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी है।

राज्य सरकारों के लिए कर्ज लेना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था
अपने बयान में वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार द्वारा कर्ज लेना कोई असामान्य बात नहीं होती। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें विकास कार्यों और योजनाओं को पूरा करने के लिए समय-समय पर कर्ज लेती हैं। यह कर्ज भारत सरकार से, भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से या अन्य वित्तीय संस्थाओं और खुले बाजार से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।

रेखा गुप्ता सरकार ने विकास कार्यों के लिए सीमित कर्ज का प्रस्ताव रखा
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्तमान सरकार, जिसका नेतृत्व रेखा गुप्ता कर रही हैं, ने अपने पहले वर्ष में केवल एक हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यह कर्ज दिल्ली में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़कों, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक परियोजनाओं को मजबूत बनाना है। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि यह एक जिम्मेदार और संतुलित आर्थिक कदम है।

चुनाव से पहले दस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का आरोप
वीरेन्द्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने चुनाव से ठीक पहले बड़ी राशि का कर्ज लेने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में चुनाव से पहले उस समय की सरकार ने राष्ट्रीय लघु बचत कोष से दस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा था। उनके अनुसार यह कर्ज विकास कार्यों के लिए नहीं बल्कि चुनाव से पहले विभिन्न योजनाओं और घोषणाओं पर खर्च करने के लिए लिया जा रहा था।

अरविंद केजरीवाल सरकार के समय भी लिया गया था कर्ज
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज आम आदमी पार्टी के नेता कर्ज को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सरकार ने भी कई बार कर्ज लिया था। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2020 और 2022 में भी भारत सरकार से कर्ज मांगा था। इसके अलावा उस समय की सरकार में मंत्री रहीं आतिशी मार्लेना के कार्यकाल में भी चुनाव से पहले कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा गया था।

सौरभ भारद्वाज की टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्ति
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज द्वारा दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों को देखना बहुत जरूरी होता है। अगर सौरभ भारद्वाज पूरी जानकारी लेते तो शायद इस तरह के बयान नहीं देते।

पंजाब की आर्थिक स्थिति का भी किया उल्लेख
अपने बयान में वीरेन्द्र सचदेवा ने पंजाब का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब में अपने पहले ही वर्ष में लगभग पचास हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उन्होंने कहा कि आज पंजाब राज्य पर कुल कर्ज चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

दिल्ली के विकास के लिए प्रतिबद्ध है सरकार
अपने बयान के अंत में वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि वर्तमान सरकार दिल्ली के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजधानी में बेहतर सड़कें, बेहतर सुविधाएं और मजबूत आर्थिक व्यवस्था तैयार करना है। इसके लिए यदि योजनाबद्ध तरीके से सीमित कर्ज लिया जाता है तो यह पूरी तरह से उचित है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए ही सभी आर्थिक निर्णय लिए जा रहे हैं और सरकार विकास के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रही है।

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