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लोकतंत्र की असली ताक़त आम आदमी के वोट में होती है। भारत जैसे देश में हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिला है, ताकि वह अपनी बात सरकार तक पहुँचा सके। लेकिन आज यही अधिकार खतरे में दिखाई दे रहा है। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अब सरकार की मंशा जनता के सामने साफ़ हो चुकी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी द्वारा उठाए गए साहसिक और संवैधानिक कदमों का पूरा समर्थन किया है।

SIR योजना के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
चौधरी सुनील सिंह जी ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार जिस SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) योजना की बात कर रही है, वह असल में वोट सुधार की योजना नहीं है। यह योजना उन लोगों को निशाना बनाने के लिए लाई जा रही है जो सरकार से सवाल पूछते हैं। इस योजना के ज़रिए यह कोशिश की जा रही है कि आम आदमी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाए, ताकि वह मतदान न कर सके और सरकार से जवाब न मांग सके।

आम नागरिकों को डराने और भ्रम में डालने का प्रयास
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के नाम पर जिस तरह से लोगों को डराया जा रहा है, वह बहुत ही चिंताजनक है। आम नागरिकों से बार-बार काग़ज़ मांगे जा रहे हैं। उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लोगों को यह डर दिखाया जा रहा है कि अगर उन्होंने ज़्यादा सवाल किए या ज़्यादा विरोध किया, तो उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा। चौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि यह तरीका लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ़ है।

वोट सुधार नहीं, वोट चोरी की साजिश
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि यह पूरी योजना वोट सुधार की नहीं, बल्कि वोट चोरी की साजिश है। जब सरकार जनता की समस्याओं पर बात करने से बचने लगती है, तब वह जनता की आवाज़ को ही दबाने की कोशिश करती है। वोटर लिस्ट से नाम हटाकर सरकार यह तय करना चाहती है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

ममता बनर्जी आम आदमी की आवाज़ बनकर खड़ी हैं
चौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी आज अकेली नहीं हैं। वे उस आम आदमी की आवाज़ बनकर सामने आई हैं, जिसे केंद्र सरकार चुप कराना चाहती है। ममता बनर्जी जी ने संविधान के दायरे में रहते हुए जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं, वे पूरे देश के लिए एक मिसाल हैं। लोकदल पूरी मजबूती से इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।

असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
चौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि देश आज बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों की बदहाली जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। युवा काम के लिए परेशान हैं, किसान अपनी फसल का सही दाम नहीं पा रहे हैं और आम आदमी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है। लेकिन केंद्र सरकार इन मुद्दों पर बात करने के बजाय वोटर लिस्ट और नागरिकता जैसे सवाल खड़े कर रही है, ताकि जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाया जा सके।

लोकतंत्र को तानाशाही की ओर ले जाने वाला रास्ता
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वोट देने के अधिकार के साथ इस तरह खिलवाड़ किया गया, तो देश धीरे-धीरे तानाशाही की ओर बढ़ जाएगा। लोकतंत्र में सरकार जनता से डरती है, लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि सरकार जनता को डराने का काम कर रही है। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है।

लोकतंत्र बचाने की सामूहिक लड़ाई
चौधरी सुनील सिंह जी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राज्य, एक पार्टी या एक नेता की नहीं है। यह लड़ाई देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है। लोकदल हर उस ताक़त के साथ खड़ा रहेगा जो आम आदमी के वोट और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। जनता की आवाज़ को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

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