
केंद्र सरकार ने लोकसभा से आयकर विधेयक 2025 को वापस ले लिया है. विधेयक की जांच के लिए बनी प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद यहफैसला लिया गया. इस विधेयक को फरवरी में लोकसभा में पेश किया गया था. बताया जा रहा है कि नया विधेयक 11 अगस्त को लोकसभा में पेशकिया जाएगा.
केंद्र सरकार ने आयकर विधेयक 2025 को 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया था. विधेयक की जांच के लिए भाजपा सांसद बैजयंतपांडा की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय प्रवर समिति बनाई गई थी. समिति ने विधेयक की जांच की और 285 सुझाव दिए थे। समिति ने 21 जुलाई2025 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत कर दी. केंद्र सरकार ने प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार कर ली हैं. कुछसुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिन्हें सही विधायी अर्थ प्रदान करने के लिए शामिल करने की आवश्यकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार कोलोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि सरकार प्रवर समिति की ओर से सुझाए गए बदलावों को शामिल करने केबाद विधेयक को नए रूप में लेकर आएगी. बताया जा रहा है कि विधेयक का नया संस्करण 11 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जाएगा.
ऐसे दान पर दी जानी छूट
सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि विधेयक के विभिन्न संस्करणों के कारण भ्रम से बचने तथा सभी परिवर्तनों को शामिल करतेहुए एक स्पष्ट और नया संस्करण उपलब्ध कराने के लिए आयकर विधेयक का नया संस्करण सोमवार को सदन में विचार के लिए पेश किया जाएगा.
विधेयक की जांच कर रही 31 सदस्यों वाली संसदीय समिति ने अपने सुझाव में कहा है कि गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ), विशेष रूप से धर्मार्थऔर परमार्थ उद्देश्यों वाले संगठनों के लिए गुमनाम दान पर कर लगाने के संबंध में अस्पष्टता को दूर किया जाना चाहिए. समिति ने गैर-लाभकारीसंस्थाओं (एनपीओ) की ‘प्राप्तियों’ पर कर लगाने का विरोध किया, क्योंकि यह आयकर अधिनियम के तहत वास्तविक आय कराधान के सिद्धांत काउल्लंघन है. सुझावों में ‘आय’ शब्द को फिर से लागू करने की सिफारिश की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल एनपीओ की शुद्ध आय परही कर लगाया जाए. पंजीकृत एनपीओ को मिलने वाले ‘गुमनाम दान के संबंध में महत्वपूर्ण अंतर’ है, इसे देखते हुए समिति ने सुझाव दिया किधार्मिक और परमार्थ न्यास (ट्रस्ट), दोनों को ऐसे दान पर छूट दी जानी चाहिए.
मकसद है सरल बनाना
समिति ने कहा, ‘‘विधेयक का घोषित मकसद इसे सरल बनाना है. लेकिन समिति को लगता है कि धार्मिक व परमार्थ ट्रस्ट के संबंध में एक महत्वपूर्णचूक हुई है, जिसका भारत के एनपीओ क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर काफी प्रतिकूल असर पड़ सकता है. आयकर विधेयक, 2025 के खंड 337 में सभीपंजीकृत एनपीओ को मिलने वाले गुप्त दान पर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्थापितएनपीओ को ही सीमित छूट दी गई है. यह आयकर अधिनियम, 1961 की वर्तमान धारा 115बीबीसी से बिल्कुल अलग है। मौजूदा कानून में अधिकव्यापक छूट प्रदान की गई है। इसके मुताबिक, अगर कोई ट्रस्ट या संस्था पूरी तरह से धार्मिक और परमार्थ कार्यों के लिए बनाई गई हो, तो गुप्त दानपर कर नहीं लगाया जाता है। ऐसे संगठन आमतौर पर पारंपरिक माध्यमों (जैसे दान पेटियों) से योगदान प्राप्त करते हैं, जहां दान देने वाले की पहचानकरना असंभव है.